निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक केशवदास द्वारा नहीं लिखी गई है ?
- (a)रामचन्द्रिका
- (b)कविप्रिया
- (c)रतन बावनी
- (d)राम रसायन
सही उत्तर — (d) राम रसायन। केशवदास मिश्र (लगभग 1555–1617), ओरछा के दरबारी कवि, की एक सुनिश्चित रचना-सूची है: रतन बावनी (उनकी सबसे पहली रचना, लगभग 1581), रसिकप्रिया (1591), कविप्रिया, रामचन्द्रिका, छन्दमाला, वीरसिंहदेव चरित, विज्ञान गीता और जहाँगीर जस चन्द्रिका। 'राम रसायन' इस सूची में कहीं भी नहीं आता — यह शीर्षक बाद के काल के अन्य लेखकों द्वारा रचित राम-भक्ति साहित्य के एक अलग वर्ग का है। यह प्रश्न 'कौन-सी उनकी नहीं है' पैटर्न का है, और वही शीर्षक बेमेल है जो कभी केशवदास की रचनाओं में सूचीबद्ध नहीं मिलता।
- (a)रामचन्द्रिका — यह केशवदास की ही रचना है — रामकथा का उनका ब्रजभाषा पुनर्कथन, और उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक। एमपीपीएससी ने स्वयं 2023 में पूछा था 'रामचन्द्रिका किसकी प्रसिद्ध रचना है?' जिसका उत्तर केशवदास था।
- (b)कविप्रिया — यह केशवदास की ही रचना है — एक लक्षण-ग्रंथ (काव्य-अलंकारों को उदाहरण सहित परिभाषित करने वाला ग्रंथ), जो ओरछा दरबार में उनकी अन्य काव्यशास्त्र-संबंधी रचनाओं के साथ रचा गया।
- (c)रतन बावनी — यह केशवदास की ही रचना है — इसे उनकी सबसे पहली रचना (लगभग 1581) माना जाता है, जो ओरछा के एक बुंदेला वीर की प्रशस्ति में रचित 'बावनी' (52-छंदों की रचना) है।
केशवदास हिन्दी के भक्ति-काल और रीति-काल के बीच की कड़ी हैं। उन्होंने ओरछा के बुंदेला शासकों — मधुकर शाह और उनके पुत्र इन्द्रजीत सिंह — की सेवा की और ब्रजभाषा में लिखा। उनकी रसिकप्रिया (1591) एक लक्षण-ग्रंथ है: काव्यशास्त्र, नायक-नायिका भेद और रस का व्यवस्थित मैनुअल, जिसे उन्होंने अपने ही छंदों से उदाहृत किया। चूँकि उन्होंने काव्य को नियमों में बाँध दिया, इसलिए उन्हें रीति-काल का जनक कहा जाता है — वह 'औपचारिक' चरण जिसमें भक्ति-भाव के बजाय शिल्प और परंपरा को प्राथमिकता मिली।
'X द्वारा नहीं लिखी गई कौन-सी है' प्रकार के प्रश्न रचना-सूची जानकर हल होते हैं, न कि किसी एक बेमेल शीर्षक के अनुमान से। इन चार शीर्षकों में से तीन — रामचन्द्रिका, कविप्रिया, रतन बावनी — केशवदास की रचनाओं की हर मानक सूची में मिलते हैं, और एमपीपीएससी स्वयं इनमें से दो को पहले परीक्षा में पूछ चुका है। चौथा शीर्षक ही वह एकमात्र है जो उन सूचियों में कभी नहीं मिलता, और यही कारण है कि इसे उत्तर के रूप में चुना गया।
- केशवदास मिश्र (लगभग 1555–1617) ओरछा (मध्यप्रदेश) के बुंदेला शासकों मधुकर शाह और इन्द्रजीत सिंह के अधीन दरबारी कवि थे।
- रसिकप्रिया (1591) उनका मूल लक्षण-ग्रंथ है; इसीलिए केशवदास को हिन्दी साहित्य के रीति-काल का जनक कहा जाता है।
- उनकी स्वीकृत रचनाओं में रतन बावनी (लगभग 1581), रसिकप्रिया, कविप्रिया, रामचन्द्रिका, छन्दमाला, वीरसिंहदेव चरित, विज्ञान गीता और जहाँगीर जस चन्द्रिका शामिल हैं।
- रसिकप्रिया के शृंगार-विषय राजपूत व बुंदेलखंडी लघुचित्रकला में सबसे अधिक चित्रित विषयों में से एक बन गए।

- यह मान लेना कि 'राम' नाम वाली हर पुस्तक किसी प्रसिद्ध राम-कवि की ही होगी — रामचन्द्रिका केशवदास की है, पर 'राम रसायन' नहीं।
- केशवदास (ओरछा के रीति-काल कवि) को केशब चन्द्र सेन (ब्रह्म समाज सुधारक) से गड्डमड्ड करना, जिनके बारे में एमपीपीएससी ने 2024 में प्रश्न पूछा था।
एमपीपीएससी इस तथ्य को दोनों सिरों से पूछता है — 'रामचन्द्रिका किसकी प्रसिद्ध रचना है' (2023) और 'कौन-सी पुस्तक केशवदास की नहीं है' (2025) — इसलिए एक शीर्षक नहीं, पूरी सूची याद रखें।
निम्नलिखित में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? I. मृच्छकटिकम् — शूद्रक II. बुद्धचरित — वसुबन्धु III. मुद्राराक्षस — विशाखदत्त IV. हर्षचरित — बाणभट्ट नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- (a) I, II, III और IV
- (b) I, III और IV
- (c) I और IV
- (d) II और III
उत्तर(b) I, III और IV — केवल बुद्धचरित बेमेल है (यह अश्वघोष की रचना है)
वही पुस्तक-से-रचयिता की परीक्षा, और वही 'एक गलत आरोपण खोजें' तर्क जो Q62 में प्रयुक्त है।
'रामचंद्रिका' किसकी प्रसिद्ध रचना है ?
- (a) पद्माकर
- (b) भूषण
- (c) केशवदास
- (d) भवभूति
उत्तर(c) केशवदास
ठीक वही तथ्य दो वर्ष पहले विपरीत दिशा से पूछा गया — 2023 ने रचना दी और कवि पूछा, 2025 कवि देता है और पूछता है कि कौन-सी रचना उसकी नहीं है।
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है ?
- (a) हरिशंकर परसाई – "हँसते हैं रोते हैं", "रानी नागफनी की कहानी"
- (b) भवानी प्रसाद – "गीत फ़रोश", "सतपुड़ा के घने जंगल", "हिमतरंगिणी"
- (c) गजानन माधव मुक्तिबोध – "चाँद का मुँह टेढ़ा है", "काठ का सपना"
- (d) केशवदास – "रसिकप्रिया", "कविप्रिया"
उत्तर(b) भवानी प्रसाद – यही गलत युग्म है (हिमतरंगिणी माखनलाल चतुर्वेदी की रचना है)
वही लेखक-से-रचना मिलान, और उस पेपर का विकल्प (d) स्वयं केशवदास की मूल रचनाएँ हैं — रसिकप्रिया और कविप्रिया, एक सही युग्म के रूप में सूचीबद्ध।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रसिकप्रिया, हिन्दी साहित्य के रीति-काल का मूल लक्षण-ग्रंथ, किसने लिखा था?
- (a)केशवदास
- (b)बिहारी
- (c)भूषण
- (d)पद्माकर
उत्तर(a) केशवदास — रसिकप्रिया (1591) के कारण ही उन्हें रीति-काल का जनक कहा जाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
केशवदास वर्तमान मध्यप्रदेश की किस रियासत के दरबारी कवि थे?
- (a)ओरछा
- (b)रीवा
- (c)पन्ना
- (d)दतिया
उत्तर(a) ओरछा — मधुकर शाह और उनके पुत्र इन्द्रजीत सिंह का बुंदेला दरबार।