निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक राजशेखर द्वारा नहीं लिखी गई है ?
- (a)काव्यमीमांसा
- (b)कर्पूरमंजरी
- (c)प्रबंधचिन्तामणि
- (d)विद्धशालभञ्जिका
सही उत्तर — (c) प्रबंधचिन्तामणि। यह राजशेखर की रचना बिल्कुल नहीं है: यह राजाओं व कवियों से जुड़े अर्ध-ऐतिहासिक किस्सों (प्रबंधों) का एक संस्कृत संग्रह है, जिसे जैन (श्वेतांबर) विद्वान मेरुतुंग ने 14वीं शताब्दी के प्रारंभ में — विक्रम संवत 1361, लगभग 1305 ई. — गुजरात के वर्धमान (आधुनिक वढ़वाण) में संकलित किया, यानी राजशेखर के लगभग चार सौ वर्ष बाद। राजशेखर लगभग 900 ई. के एक संस्कृत कवि, नाटककार व आलोचक थे, जो कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहार राजाओं के दरबारी कवि व गुरु थे; काव्यमीमांसा, कर्पूरमंजरी और विद्धशालभञ्जिका — ये सभी उन्हीं की रचनाएँ हैं।
- (a)काव्यमीमांसा — यह राजशेखर की अपनी रचना है — काव्यशास्त्र (कवि-शिक्षा) पर एक व्यावहारिक ग्रंथ, जो लगभग 880–920 ई. में लिखा गया, इस पर कि काव्य कैसे रचा, परखा और सिखाया जाता है।
- (b)कर्पूरमंजरी — राजशेखर का सर्वाधिक प्रसिद्ध नाटक — पूर्णतः प्राकृत में रचित एक सट्टक, जिसके बारे में परंपरागत रूप से कहा जाता है कि इसे उनकी पत्नी अवंतिसुंदरी को प्रसन्न करने के लिए लिखा गया था।
- (d)विद्धशालभञ्जिका — राजशेखर की एक नाटिका (दरबारी नाटक), जिसे बालरामायण व बालभारत के साथ उनकी रचनाओं में गिना जाता है।
राजशेखर (लगभग 9वीं–10वीं शताब्दी ई.) कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहार दरबार से जुड़े एक संस्कृत कवि-नाटककार व साहित्यिक सिद्धांतकार थे, जो स्वयं को महेंद्रपाल प्रथम का गुरु बताते थे। उनकी उपलब्ध रचनाएँ हैं काव्यमीमांसा (काव्यशास्त्र) तथा नाटक कर्पूरमंजरी, विद्धशालभञ्जिका, बालरामायण और बालभारत। प्रबंधचिन्तामणि पूरी तरह से एक अलग विधा व युग की रचना है — पश्चिमी भारत के जैन मुनियों द्वारा लिखा गया प्रबंध साहित्य, जो ऐतिहासिक राजाओं के किस्सों को जोड़ता है और सावधानी के साथ मालवा के परमारों व गुजरात के चालुक्यों के लिए एक स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है।
इस सेट में विषम (odd-one-out) को विधा से पहचाना जा सकता है, भले ही आप हर शीर्षक न रख पाएँ। तीन नाम साहित्यिक हैं — एक काव्यशास्त्र ग्रंथ और दो नाटक — जबकि 'प्रबंध-चिन्तामणि' अपने नाम से ही एक प्रबंध-संग्रह, यानी एक इतिवृत्त (chronicle) रूप घोषित करता है। कालक्रम की जाँच भी जोड़ें: राजशेखर लगभग 900 ई. के हैं, जबकि प्रबंध विधा 13वीं–14वीं शताब्दी में फलती-फूलती है। राजशेखर की रचनाओं में एक प्राकृत नाटक भी शामिल है, इसीलिए 'कर्पूरमंजरी' असामान्य लगता है, लेकिन वास्तव में यह उन्हीं की है।
- राजशेखर: कवि, नाटककार व आलोचक, कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहार राजा महेंद्रपाल प्रथम के दरबारी कवि व गुरु
- उनकी रचनाएँ: काव्यमीमांसा (काव्यशास्त्र), कर्पूरमंजरी (प्राकृत में एक सट्टक), विद्धशालभञ्जिका, बालरामायण, बालभारत
- वे अपनी पत्नी अवंतिसुंदरी, जो चाहमान वंश की थीं, का नाम अपने साहित्यिक कार्य के संदर्भ में लेते हैं — प्राचीन भारतीय कवि के लिए यह दुर्लभ बात है
- प्रबंधचिन्तामणि: जैन विद्वान मेरुतुंग द्वारा रचित संस्कृत प्रबंध-संग्रह, विक्रम संवत 1361 (लगभग 1305 ई.) में गुजरात के वर्धमान (वढ़वाण) में रचा गया; मुंज व भोज के इसके किस्से इसे मालवा के इतिहास के लिए एक मानक, यद्यपि अर्ध-पौराणिक, स्रोत बनाते हैं
लगभग 900 ई. के एक कवि की तीन रचनाएँ, और एक 14वीं शताब्दी का जैन इतिवृत्त, जो इस समूह में नहीं आता।
- कवि राजशेखर (लगभग 900 ई.) को बाद के जैन विद्वान राजशेखर सूरि से गड्डमड्ड करना, जो प्रबंधकोश (1349 ई.) के लेखक हैं — भिन्न व्यक्ति, भिन्न विधा
- यह मान लेना कि विकल्पों में हर प्रसिद्ध संस्कृत शीर्षक सबसे बड़े नाम का है; प्रबंधचिन्तामणि राजशेखर के लगभग चार शताब्दी बाद की रचना है
दोनों आयोग 'कौन-सी रचना X की नहीं है' और 'रचना को उसके लेखक से मिलाइए' प्रारूप का उपयोग करते हैं। MPPSC इसमें मध्यप्रदेश का पुट जोड़कर पूछता है कि कौन-से ग्रंथ परमार व मालवा के इतिहास पर प्रकाश डालते हैं — और यही वह जगह है जहाँ मेरुतुंग की प्रबंधचिन्तामणि ठीक-ठीक आती है।
निम्नलिखित में से कौन मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध विधिवेत्ता (jurists) थे ? I. विज्ञानेश्वर II. हेमाद्रि III. राजशेखर IV. जीमूतवाहन नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
- (a) I, II और III
- (b) II, III और IV
- (c) I, II और IV
- (d) I और IV
उत्तर(c) I, II और IV
इसी पहचान पर आधारित है — राजशेखर को इस सूची से इसलिए बाहर रखा गया है क्योंकि वे विज्ञानेश्वर व जीमूतवाहन जैसे विधिवेत्ता नहीं, बल्कि एक कवि-नाटककार थे।
निम्नलिखित में से कौन-सा स्रोत परमार वंश के इतिहास पर प्रकाश डालता है ?
- (a) पद्मगुप्त कृत नवसाहसांक चरित
- (b) मेरुतुंग कृत प्रबंधचिंतामणि
- (c) उदयपुर प्रशस्ति
- (d) उपर्युक्त सभी
उत्तर(d) उपर्युक्त सभी
MPPSC ने परमार-स्रोत वाले प्रश्न में प्रबंधचिंतामणि के वास्तविक लेखक — मेरुतुंग — का नाम पहले ही बता दिया है, और यही तथ्य इसे यहाँ विषम विकल्प बनाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्रबंधचिन्तामणि, राजाओं से जुड़े अर्ध-ऐतिहासिक किस्सों का एक संस्कृत संग्रह, किसने रचा था ?
- (a)मेरुतुंग
- (b)राजशेखर
- (c)हेमचंद्र
- (d)पद्मगुप्त
उत्तर(a) मेरुतुंग — एक श्वेतांबर जैन विद्वान, जिन्होंने इसे लगभग 1305 ई. में गुजरात में पूरा किया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजशेखर द्वारा लिखी गई कर्पूरमंजरी संस्कृत नाटक में इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि यह है :
- (a)पूर्णतः प्राकृत में रचित एक नाटक
- (b)प्राचीनतम संस्कृत व्याकरण
- (c)राजनीति-शास्त्र पर एक ग्रंथ
- (d)बौद्ध जातक कथाओं का संग्रह
उत्तर(a) पूर्णतः प्राकृत में रचित एक नाटक — सट्टक विधा का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण।