जनजाति नेता सीताराम कंवर और रघुनाथ सिंह मंडलोई भिलाला अंग्रेज़ विरोधी क्रांति में कब शामिल हुए थे ?
- (a)1842 ई.
- (b)1857 ई.
- (c)1927 ई.
- (d)1942 ई.
सही उत्तर — (b) 1857 ई.। सीताराम कंवर और रघुनाथ सिंह मंडलोई, बड़वानी (निमाड़) क्षेत्र के भिलाला समुदाय के जनजातीय नेता, 1857 के महान विद्रोह के दौरान अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उठ खड़े हुए — वही राष्ट्रव्यापी विद्रोह जिसमें रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और कुँवर सिंह भी शामिल थे। सीताराम कंवर ने एक गुप्तचर नेटवर्क का नेतृत्व किया और कैप्टन कीटिंग के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी सेना से लड़ते हुए मारे गए, जबकि रघुनाथ सिंह मंडलोई बाद में पकड़ लिए गए।
- (a)1842 ई. — 1842 ई., 1857 के विद्रोह से पहले का है — इन दोनों नेताओं द्वारा इस पूर्ववर्ती तिथि पर किसी स्थापित अंग्रेज़ विरोधी विद्रोह का कोई प्रमाण नहीं है।
- (c)1927 ई. — 1927 ई. स्वतंत्रता आंदोलन के बाद के, कांग्रेस-नेतृत्व वाले चरण (साइमन कमीशन आंदोलन के आसपास) में आता है, न कि 1857 के विद्रोह की जनजातीय बगावतों में।
- (d)1942 ई. — 1942 ई. भारत छोड़ो आंदोलन का वर्ष है — एक कहीं बाद का, राष्ट्रव्यापी सविनय अवज्ञा चरण, जो 1857 के सशस्त्र जनजातीय प्रतिरोध से भिन्न है।
1857 का विद्रोह उत्तर भारत में केवल सिपाही विद्रोहों तक सीमित नहीं था — इसने मध्य भारत के रियासती व जनजातीय क्षेत्रों में भी समानांतर, स्थानीय नेतृत्व वाली जनजातीय बगावतों को जन्म दिया, जिसमें वर्तमान मध्य प्रदेश की निमाड़/बड़वानी पेटी भी शामिल है, जहाँ सीताराम कंवर, रघुनाथ सिंह मंडलोई और भीमा नायक जैसे भिलाला व भील नेताओं ने मुख्य सिपाही केंद्रों से स्वतंत्र रूप से हथियार उठाए।
MPPSC प्रायः यह पूछता है कि कोई नामित क्षेत्रीय नेता किस वर्ष विद्रोह में शामिल हुआ। चूँकि इस पाठ्यक्रम खंड के लगभग हर मध्य प्रदेश जनजातीय/क्षेत्रीय नेता का संबंध 1857 से है, इसलिए 1942 (भारत छोड़ो आंदोलन) या 1927 (साइमन कमीशन आंदोलन) जैसी किसी विशिष्ट बाद की तिथि के स्पष्ट संकेत के अभाव में सुरक्षित डिफ़ॉल्ट 1857 है।
- सीताराम कंवर और रघुनाथ सिंह मंडलोई — बड़वानी (निमाड़) के भिलाला जनजातीय नेता
- 1857 में, व्यापक सिपाही-नेतृत्व वाले विद्रोह के साथ अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उठ खड़े हुए
- सीताराम कंवर ने एक गुप्तचर नेटवर्क का नेतृत्व किया और अंग्रेज़ी सेना से लड़ते हुए मारे गए
- रघुनाथ सिंह मंडलोई बाद में अंग्रेज़ी सैनिकों द्वारा पकड़ लिए गए
- 1842 ई.
- 1857 ई.
- 1927 ई.
- 1942 ई.
चार तिथियों में से केवल 1857 — राष्ट्रव्यापी विद्रोह का वर्ष — इन दोनों भिलाला नेताओं के निमाड़ क्षेत्र में हुए विद्रोह से मेल खाता है।
- यह मान लेना कि मध्य प्रदेश का हर 'अंग्रेज़ विरोधी' नेता 1942 (भारत छोड़ो आंदोलन) से संबंधित है, बिना यह जाँचे कि वह 1857-युगीन जनजातीय/क्षेत्रीय नेता था या नहीं
- रघुनाथ सिंह मंडलोई (भिलाला, 1857, बड़वानी) को कुँवर रघुनाथ शाह (गोंड, मंडला, 1858 में फाँसी) से गड्डमड्ड करना — मिलता-जुलता नाम, परन्तु भिन्न व्यक्ति और स्थान
MPPSC नामित क्षेत्रीय 1857 नेताओं पर सटीक-वर्ष MCQ पूछना पसंद करता है — जब तक प्रश्न पाठ स्वयं किसी बाद के आंदोलन का संकेत न दे (साइमन कमीशन → 1927, भारत छोड़ो → 1942), प्रत्येक नाम को 1857 से जोड़ें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सीताराम कंवर, बड़वानी के एक भिलाला जनजातीय नेता, जिन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान एक गुप्तचर नेटवर्क का नेतृत्व किया, किस अंग्रेज़ अधिकारी की सेना से लड़ते हुए मारे गए ?
- (a)कैप्टन कीटिंग
- (b)जनरल नील
- (c)कर्नल डूरण्ड
- (d)मेजर हॉजसन
उत्तर(a) कैप्टन कीटिंग — सीताराम कंवर कैप्टन (बाद में मेजर) आर.एच. कीटिंग के नेतृत्व वाली सेना के विरुद्ध युद्ध में मारे गए।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से 1857 के किस विद्रोही नेता और वर्तमान मध्य प्रदेश में उसके गतिविधि-क्षेत्र की जोड़ी सही सुमेलित है ?
- (a)भीमा नायक — बड़वानी
- (b)रानी लक्ष्मीबाई — सागर
- (c)तात्या टोपे — चित्रकूट
- (d)कुँवर सिंह — मंडला
उत्तर(a) भीमा नायक — बड़वानी — इस भील नेता की गतिविधि बड़वानी (निमाड़) क्षेत्र पर केंद्रित थी; अन्य जोड़ियाँ गलत हैं।