निम्नलिखित में से किसके द्वारा महाराष्ट्र में ‘गणेशोत्सव’ प्रारम्भ किया गया था ?
- (a)बिपिन चंद्र पाल
- (b)गोविन्द रानाडे
- (c)लाला लाजपत राय
- (d)बाल गंगाधर तिलक
सही उत्तर — (d) बाल गंगाधर तिलक। 1893 में, तिलक ने गणेश की निजी, घरेलू पूजा को पूना (पुणे) में एक बड़े सार्वजनिक पर्व (सार्वजनिक गणेशोत्सव) में बदल दिया। उनका लक्ष्य राजनीतिक था: औपनिवेशिक कानून बड़ी राजनीतिक सभाओं को प्रतिबंधित करता था, परन्तु एक धार्मिक पर्व को छेड़ा नहीं जा सकता था, इसलिए तिलक ने इसका उपयोग जाति की सीमाओं से परे लोगों को कानूनी रूप से एकत्रित करने व एकजुट करने तथा राष्ट्रवादी भावना निर्मित करने के लिए किया।
- (a)बिपिन चंद्र पाल — 'लाल-बाल-पाल' त्रयी के एक प्रमुख उग्रवादी (एक्सट्रीमिस्ट) नेता तथा स्वदेशी विषय पर एक शक्तिशाली वक्ता, परन्तु उन्होंने गणेशोत्सव की स्थापना नहीं की — यह महाराष्ट्र में तिलक की पहल थी।
- (b)गोविन्द रानाडे — महादेव गोविन्द रानाडे प्रार्थना समाज व पूना सार्वजनिक सभा से जुड़े एक नरमपंथी (मॉडरेट) सामाजिक सुधारक थे, न कि सार्वजनिक गणेशोत्सव के संस्थापक।
- (c)लाला लाजपत राय — 'पंजाब केसरी' तथा लाल-बाल-पाल त्रयी के तीसरे सदस्य, जो मुख्यतः पंजाब में सक्रिय थे — महाराष्ट्र के गणेशोत्सव को आरंभ करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
तिलक ने धार्मिक पर्वों को व्यापक राजनीतिक लामबंदी के साधन के रूप में प्रयोग किया। सार्वजनिक गणेशोत्सव (1893) ने एक घरेलू पूजा को जुलूसों, भाषणों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों वाले एक सामुदायिक आयोजन में बदल दिया, जिससे तिलक को उस समय आम लोगों तक पहुँचने का एक कानूनी, आवर्ती मंच मिला जब खुली राजनीतिक सभा पर प्रतिबंध था।
जाल यह है कि विद्यार्थी किसी भी जाने-पहचाने 'लाल-बाल-पाल' नाम (पाल या लाजपत राय) को डिफ़ॉल्ट रूप से चुन लेते हैं, क्योंकि तीनों ही उग्रवादी-युग के नेता के रूप में एक साथ याद किए जाते हैं। परन्तु यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र/तिलक की पहल है — इसे सामान्यतः त्रयी से नहीं, बल्कि विशेष रूप से तिलक से जोड़ें।
- तिलक ने 1893 में पूना (पुणे) में सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रारम्भ किया
- उद्देश्य: औपनिवेशिक प्रतिबंधों से बाहर एक धार्मिक मंच के माध्यम से जाति-पार एकता व राष्ट्रवादी भावना का निर्माण करना
- तिलक ने इसी सामूहिक-लामबंदी तर्क पर 1895 में सार्वजनिक शिवाजी जयंती समारोह भी प्रारम्भ किए
- दोनों पर्वों ने अंग्रेज़ी-शिक्षित अभिजात वर्ग से आगे पहुँचने के लिए लोकप्रिय हिन्दू धार्मिक/सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रयोग किया

- तीनों लाल-बाल-पाल नेताओं को गड्डमड्ड करके गणेशोत्सव को तिलक के बजाय पाल या लाजपत राय को सौंप देना
- गणेशोत्सव (1893) को शिवाजी जयंती (1895) से भ्रमित करना — दोनों तिलक की पहल हैं, परन्तु भिन्न वर्ष व भिन्न व्यक्तित्व से जुड़े
MPPSC/UPSC प्रायः उग्रवादी नेताओं में से 'किसने X पर्व/आंदोलन प्रारम्भ किया' पूछते हैं — तिलक को 1893 के गणेशोत्सव तथा 1895 की शिवाजी जयंती दोनों से जोड़ कर रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बाल गंगाधर तिलक ने पूना में सार्वजनिक गणेशोत्सव पर्व किस वर्ष प्रारम्भ किया?
- (a)1885
- (b)1893
- (c)1905
- (d)1920
उत्तर(b) 1893।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
गणेशोत्सव के अतिरिक्त, तिलक ने राष्ट्रवादी भावना निर्मित करने हेतु किस अन्य सार्वजनिक पर्व को लोकप्रिय बनाया?
- (a)दुर्गा पूजा
- (b)शिवाजी जयंती
- (c)राम नवमी
- (d)ओणम
उत्तर(b) शिवाजी जयंती, जिसे तिलक ने 1895 में प्रारम्भ किया।