सूर्य के व्यापक अध्ययन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा इसरो का हाल का वैज्ञानिक मिशन है :
- (a)आदित्य-एल 1
- (b)भास्कर-एल 2
- (c)सोलर मिशन-एल 1
- (d)सोलर आर्बिटर
सही उत्तर — (a) आदित्य-एल1। इसरो द्वारा 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित आदित्य-एल1, सूर्य के अध्ययन हेतु भारत का पहला समर्पित अंतरिक्ष मिशन है। यह सूर्य–पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु L1 (पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर) के चारों ओर एक हेलो कक्षा में परिक्रमा करता है, जहाँ से यह सूर्य के प्रकाशमंडल (फोटोस्फीयर), वर्णमंडल (क्रोमोस्फीयर) और सबसे बाहरी परत (कोरोना) का बिना ग्रहण-अवरोध के निरंतर अवलोकन कर सकता है।
- (b)भास्कर-एल 2 — इस नाम का इसरो का कोई सौर मिशन नहीं है — 'भास्कर' भारत के कहीं अधिक पुराने भास्कर-1 और भास्कर-2 पृथ्वी-प्रेक्षण उपग्रहों (1979, 1981) को संदर्भित करता है, जिनका सौर अध्ययन या L2 बिंदु से कोई संबंध नहीं है।
- (c)सोलर मिशन-एल 1 — मिशन का यह आधिकारिक नाम नहीं है — इसरो के सूर्य-अध्ययन यान का औपचारिक नाम आदित्य-एल1 है, न कि 'सोलर मिशन-एल1'।
- (d)सोलर आर्बिटर — सोलर आर्बिटर एक वास्तविक सूर्य-अध्ययन यान है, लेकिन यह ESA और NASA (2020 में प्रक्षेपित) का है, भारत का नहीं, और यहाँ पूछा जा रहा मिशन यह नहीं है।
आदित्य-एल1 इसरो का पूर्णतः सौर विज्ञान को समर्पित पहला मिशन है। L1 लैग्रेंज बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित, यह सूर्य के कोरोना, वर्णमंडल, सौर वायु और चुंबकीय क्षेत्र — जो अंतरिक्ष मौसम और पृथ्वी पर उपग्रह/संचार प्रणालियों को प्रभावित करते हैं — के अध्ययन हेतु कई पेलोड ले जाता है।
'हाल के मिशन' जैसे प्रश्न बुनियादी अंतरिक्ष-विज्ञान ज्ञान के ऊपर वर्तमान घटनाक्रम (करेंट अफेयर्स) की जागरूकता परखते हैं। सबसे सुरक्षित तरीका है आधिकारिक इसरो मिशन नामों (आदित्य-एल1, चंद्रयान-3, मंगलयान) को पहचानना, तथा 'भास्कर-एल2' या 'सोलर मिशन-एल1' जैसे मिलते-जुलते लेकिन गैर-आधिकारिक व प्रशंसनीय-लगने वाले नामों से सतर्क रहना।
- आदित्य-एल1 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित हुआ — इसरो का पहला समर्पित सौर मिशन
- सूर्य–पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु L1 के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित
- सूर्य के कोरोना, वर्णमंडल और सौर वायु का अध्ययन करता है
- सोलर आर्बिटर (ESA/NASA) एक अलग, गैर-भारतीय सूर्य मिशन है
- भास्कर (पुराने पृथ्वी-प्रेक्षण उपग्रह) को सौर मिशन समझ लेना
- भारत के आदित्य-एल1 को ESA/NASA के सोलर आर्बिटर या NASA के पार्कर सोलर प्रोब के साथ भ्रमित करना
सामान्यतः आदित्य-एल1 के साथ प्रशंसनीय-लगने वाले नकली या विदेशी मिशन नामों को रखा जाता है, यह परखते हुए कि क्या विद्यार्थी सही आधिकारिक भारतीय मिशन को जानता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आदित्य-एल1 किस सूर्य–पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु के चारों ओर कक्षा में स्थापित है?
- (a)L1
- (b)L2
- (c)L4
- (d)L5
उत्तर(a) L1 — पृथ्वी से सूर्य की दिशा में लगभग 15 लाख किमी दूर।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से किसमें इसरो के मिशन का उसके लक्ष्य पिंड (target body) के साथ सही मिलान है?
- (a)चंद्रयान-3 — चंद्रमा
- (b)आदित्य-एल1 — सूर्य
- (c)मंगलयान — मंगल
- (d)उपर्युक्त सभी
उत्तर(d) उपर्युक्त सभी — प्रत्येक एक वास्तविक, सही ढंग से मिलान किया गया इसरो मिशन है।