भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अधिकतम कितने वर्षों के लिए अपना पद धारण कर सकते हैं ?
- (a)4 वर्ष
- (b)5 वर्ष
- (c)6 वर्ष
- (d)7 वर्ष
सही उत्तर — (c) 6 वर्ष। संविधान का अनुच्छेद 148 यह प्रावधान करता है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अपने पद ग्रहण की तिथि से छह वर्ष तक, अथवा 65 वर्ष की आयु तक — जो भी पहले हो — पद धारण करते हैं। अतः अधिकतम औपचारिक कार्यकाल 6 वर्ष है, लेकिन यदि नियुक्ति के समय कोई व्यक्ति पहले से 65 वर्ष की आयु के निकट है, तो वह इस आयु-सीमा तक पहुँचते ही पहले पद छोड़ देता है।
- (a)4 वर्ष — अनुच्छेद 148 द्वारा निर्धारित कार्यकाल को कम करके बताता है, जो छह वर्ष है (65 वर्ष की आयु-सीमा के अधीन)।
- (b)5 वर्ष — कार्यकाल को कम करके बताता है — यह अन्य निकायों (जैसे वित्त आयोग चक्र) के कार्यकाल के साथ एक सामान्य भ्रम है, लेकिन अनुच्छेद 148 CAG के लिए छह वर्ष निर्धारित करता है।
- (d)7 वर्ष — कार्यकाल को बढ़ाकर बताता है — अनुच्छेद 148 अधिकतम छह वर्ष निर्धारित करता है (65 वर्ष की आयु-सीमा के अधीन), सात वर्ष नहीं।
CAG का कार्यकाल एक निश्चित अवधि और आयु-सीमा दोनों को जोड़ता है — पद ग्रहण से छह वर्ष, या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो। इनकी पदच्युति की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी है (अनुच्छेद 148(1)): इन्हें केवल उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (सिद्ध कदाचार या असमर्थता), राष्ट्रपति के आदेश द्वारा, संसद के प्रत्येक सदन द्वारा विशेष बहुमत से समर्थित संबोधन के पश्चात। यह प्रक्रियात्मक सुरक्षा इसलिए है क्योंकि CAG उसी कार्यपालिका के खातों का लेखा-परीक्षण करता है जो उसे नियुक्त करती है, इसलिए उसकी स्वतंत्रता को संवैधानिक रूप से संरक्षित करना आवश्यक है।
एक सामान्य जाल केवल 'छह वर्ष' याद रखना और 'या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो' वाली शर्त को छोड़ देना है — कई अन्य उच्च संवैधानिक पद (जैसे निर्वाचन आयुक्त) भी यही '6 वर्ष या 65' का सूत्र साझा करते हैं, इसलिए यह सटीकता महत्वपूर्ण है कि कौन-सा पद किन संख्याओं का उपयोग करता है।
- अनुच्छेद 148: CAG का कार्यकाल पद ग्रहण से छह वर्ष, या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
- पदच्युति: केवल उसी प्रकार व उन्हीं आधारों पर जैसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (अनुच्छेद 148(1))।
- CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और पद छोड़ने के बाद वे भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार के अधीन आगे कोई पद धारण करने के पात्र नहीं होते (अनुच्छेद 148(4))।
- CAG का वेतन व सेवा-शर्तें, एक बार निर्धारित होने के बाद, उनके कार्यकाल के दौरान उनके अहित में परिवर्तित नहीं की जा सकतीं।
अनुच्छेद 148: CAG 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद धारण करते हैं।
- केवल 'छह वर्ष' याद रखना और 'या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो' वाली शर्त भूल जाना
- CAG की पदच्युति प्रक्रिया (उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी) को एक सरल, प्रत्यक्ष कार्यपालिका-आदेश द्वारा पदच्युति से भ्रमित करना
MPPSC/UPSC प्रायः संवैधानिक पदों (CAG, निर्वाचन आयुक्त, UPSC अध्यक्ष/सदस्य) के लिए सटीक 'X वर्ष या Y आयु, जो भी पहले हो' सूत्र का परीक्षण करते हैं — प्रत्येक पद की विशिष्ट संख्याएँ जानें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निश्चित कार्यकाल पूरा करने के अतिरिक्त, अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक किस आयु तक पहुँचने पर पद छोड़ देते हैं?
- (a)60 वर्ष
- (b)62 वर्ष
- (c)65 वर्ष
- (d)70 वर्ष
उत्तर(c) 65 वर्ष — CAG का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को केवल उसी प्रकार व उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जैसे:
- (a)उच्च न्यायालय का न्यायाधीश
- (b)उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश
- (c)मुख्य निर्वाचन आयुक्त
- (d)UPSC का सदस्य
उत्तर(b) उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश — अनुच्छेद 148(1) CAG की पदच्युति प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की प्रक्रिया से जोड़ता है, ताकि उसकी स्वतंत्रता सुरक्षित रहे।