आनंद सिंह श्याम एवं धनइया बाई कलाकारों का संबंध निम्नलिखित में से किस कला से है ?
- (a)ढोकरा कला
- (b)गोण्ड चित्रकला
- (c)पिथौरा चित्रकला
- (d)बाघ प्रिंटिंग
सही उत्तर — (B) गोण्ड चित्रकला। आनंद सिंह श्याम और धनइया बाई गोण्ड चित्रकला के अभ्यासरत कलाकार हैं — यह मध्य भारत के प्रधान गोण्ड समुदाय की जनजातीय कला है (जिसका केंद्र मध्य प्रदेश के डिंडौरी ज़िले का पाटनगढ़ गाँव है), जो प्रकृति, पशुओं व लोककथाओं को घने बिंदु-रेखा पैटर्न में चित्रित करने के लिए जानी जाती है।
- (a)ढोकरा कला — यह पीतल/काँसे की मूर्तियाँ बनाने वाली एक मोम-लोप ढलाई धातु-शिल्प है — यह एक चित्रकला शैली नहीं, बल्कि धातु-शिल्प परंपरा है, और इन दोनों कलाकारों से असंबंधित है।
- (c)पिथौरा चित्रकला — यह भील/राठवा समुदाय (मुख्यतः गुजरात–मध्य प्रदेश सीमा-पट्टी) की एक अनुष्ठानिक भित्ति-चित्रकला परंपरा है — एक भिन्न जनजातीय समुदाय व कला रूप।
- (d)बाघ प्रिंटिंग — यह मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाघ क़स्बे की हस्त-ब्लॉक वस्त्र-मुद्रण शिल्प है — एक वस्त्र-शिल्प, न कि इन कलाकारों द्वारा अभ्यासरत चित्रकला रूप।
गोण्ड चित्रकला मध्य भारत के प्रधान गोण्ड समुदाय की एक जनजातीय कला है, जो विशेष रूप से मध्य प्रदेश के डिंडौरी ज़िले के पाटनगढ़ गाँव से जुड़ी है। यह प्रकृति, पशुओं, देवताओं व लोककथाओं को चित्रित करने के लिए सूक्ष्म बिंदुओं व रेखाओं का उपयोग करती है, जो परंपरागत रूप से भित्ति-कला के रूप में शुरू होकर बाद में कैनवास व कागज़ पर अपनाई गई।
परीक्षा विशिष्ट अभ्यासरत कलाकारों के नाम देकर पूछती है कि वे किस कला रूप से संबंधित हैं — इस दृश्य शैली को अक्सर अन्य जनजातीय चित्रकला परंपराओं (वारली, भील, पिथौरा) से भ्रमित किया जाता है, इसलिए नामित कलाकारों को उनके सटीक समुदाय व कला रूप से जोड़ना ही मुख्य कौशल है।
- गोण्ड चित्रकला प्रधान गोण्ड समुदाय द्वारा अभ्यास की जाती है, जिसका केंद्र मध्य प्रदेश के डिंडौरी ज़िले का पाटनगढ़ गाँव है।
- इसकी समकालीन कैनवास शैली की शुरुआत 1980 के दशक से कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम ने की, जिसे कभी-कभी 'जनगढ़ कलम' कहा जाता है।
- आनंद सिंह श्याम एवं धनइया बाई इसी परंपरा के मान्यताप्राप्त समकालीन गोण्ड चित्रकार हैं।
- इन चित्रों में पशुओं, वृक्षों व जनजातीय देवताओं/लोककथाओं को चित्रित करने के लिए विशिष्ट घने बिंदु-रेखा भराव-पैटर्न का उपयोग होता है।

- गोण्ड चित्रकला (मध्य प्रदेश, प्रधान गोण्ड) को व्यापक रूप से समान बिंदु/रेखा आकृतियों के कारण वारली (महाराष्ट्र) या मधुबनी (बिहार) से भ्रमित करना
- 'श्याम' उपनाम वाले हर गोण्ड कलाकार को जनगढ़ सिंह श्याम के समान व्यक्ति मान लेना
MPPSC विशिष्ट जनजातीय कलाकारों के नाम देकर पूछता है कि वे किस कला रूप का अभ्यास करते हैं — कलाकार के नाम को कला रूप व उसके मूल समुदाय/ज़िले से जोड़ें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सूक्ष्म बिंदु-रेखा पैटर्न से युक्त गोण्ड चित्रकला की उत्पत्ति मध्य भारत के किस जनजातीय समुदाय में हुई ?
- (a)प्रधान गोण्ड
- (b)भील
- (c)बैगा
- (d)कोरकू
उत्तर(A) प्रधान गोण्ड — वह समुदाय जिससे गोण्ड चित्रकला की उत्पत्ति होती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1980 के दशक से गोण्ड चित्रकला की समकालीन कैनवास शैली की शुरुआत करने का श्रेय किस कलाकार को दिया जाता है ?
- (a)जनगढ़ सिंह श्याम
- (b)जिव्या सोमा माशे
- (c)भूरी बाई
- (d)जे. स्वामीनाथन
उत्तर(A) जनगढ़ सिंह श्याम — वह कलाकार जिनकी कैनवास शैली से 'जनगढ़ कलम' नामक शैली उत्पन्न हुई।