आनुवंशिक रूप से परिवर्तित बीटी. बैंगन को निम्नलिखित में से किसके लिए विकसित किया गया है ?
- (a)सूखा प्रतिरोध के लिए
- (b)कीट प्रतिरोध के लिए
- (c)जीवाणु प्रतिरोध के लिए
- (d)फफूँदीय प्रतिरोध के लिए
सही उत्तर — (b) कीट प्रतिरोध के लिए। बीटी बैंगन को मृदा जीवाणु बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis / Bt) के cry1Ac जीन के साथ इंजीनियर किया गया है। यह जीन पौधे में एक बीटी टॉक्सिन/क्राई प्रोटीन बनाता है, जो बैंगन प्ररोह एवं फल भेदक (Brinjal Shoot and Fruit Borer — एक लेपिडोप्टेरान कीट) के लार्वा द्वारा खाए जाने पर उसके लिए घातक होता है, परंतु स्तनधारियों के लिए सीधे विषैला नहीं होता — इस प्रकार पौधे को अंतर्निर्मित कीट प्रतिरोध मिलता है।
- (a)सूखा प्रतिरोध के लिए — cry1Ac जीन कीट कीटों को लक्षित करता है, जल-तनाव को नहीं — बीटी बैंगन सूखा-सहनशीलता के लिए इंजीनियर नहीं किया गया।
- (c)जीवाणु प्रतिरोध के लिए — प्रविष्ट जीन एक जीवाणु (बैसिलस थुरिंजिएंसिस) से आता है ताकि एक कीटनाशी प्रोटीन बनाया जा सके — यह जीवाणु-जनित रोग के विरुद्ध प्रतिरोध प्रदान नहीं करता।
- (d)फफूँदीय प्रतिरोध के लिए — बीटी टॉक्सिन कीट लार्वा के विरुद्ध कार्य करता है, फफूँद रोगजनकों के विरुद्ध नहीं — बीटी बैंगन में कोई इंजीनियर्ड फफूँदीय प्रतिरोध नहीं है।
'बीटी' फसलें (बीटी कपास, बीटी बैंगन) आनुवंशिक रूप से इस प्रकार परिवर्तित की जाती हैं कि वे बैसिलस थुरिंजिएंसिस — एक मृदा जीवाणु जो स्वाभाविक रूप से विशिष्ट कीट लार्वा के लिए विषैले क्रिस्टल (क्राई) प्रोटीन बनाता है — का एक cry जीन व्यक्त करें। जब लक्षित कीट पौधे के ऊतक को खाता है, तो क्राई प्रोटीन उसकी आंत से जुड़कर उसे मार देता है, जिससे फसल को कम रासायनिक कीटनाशक की आवश्यकता होती है। यह एक जीवाणु-विष जीन के माध्यम से कीट प्रतिरोध है — सूखा-, रोग-, या शाकनाशी-सहनशीलता जैसे अन्य माध्यमों से इंजीनियर किए गए गुणों से भिन्न एक अवधारणा।
परीक्षा का जाल यह मान लेना है कि 'आनुवंशिक रूप से परिवर्तित' का अर्थ स्वतः सूखा/जलवायु सहनशीलता है, क्योंकि समाचारों में यह एक सामान्य जीएम-फसल कथा है। यहाँ विशिष्ट जीन परिवार (cry, बैसिलस थुरिंजिएंसिस से) सदैव कीट/पीड़क प्रतिरोध का संकेत देता है, न कि अजैविक तनाव सहनशीलता का।
- बीटी बैंगन बैसिलस थुरिंजिएंसिस से cry1Ac जीन को व्यक्त करता है
- लक्षित पीड़क: बैंगन प्ररोह एवं फल भेदक (Leucinodes orbonalis), एक लेपिडोप्टेरान कीट
- उद्देश्य: कीट/पीड़क प्रतिरोध, कीटनाशक उपयोग में कमी — सूखा, जीवाणु या फफूँद प्रतिरोध नहीं
- भारत ने जैव-सुरक्षा चिंताओं के चलते 2010 में बीटी बैंगन के वाणिज्यिक विमोचन पर रोक लगाई (यह भारत में अब भी वाणिज्यिक रूप से अस्वीकृत है, बीटी कपास के विपरीत)

- किसी भी जीएम फसल को स्वतः सूखा/जलवायु सहनशीलता हेतु मान लेना
- 'बीटी' (जीवाणु-व्युत्पन्न कीटनाशी जीन) को रोग/फफूँद प्रतिरोध से भ्रमित करना
MPPSC व UPSC आमतौर पर किसी विशिष्ट जीएम फसल (बीटी बैंगन, बीटी कपास, गोल्डन राइस) के उद्देश्य या प्रविष्ट जीन के स्रोत जीव के बारे में पूछते हैं — यह श्रृंखला याद रखें: बीटी = बैसिलस थुरिंजिएंसिस = कीट प्रतिरोध।
बैंगन का एक आनुवंशिक रूप से इंजीनियर्ड रूप, जिसे बीटी-बैंगन कहा जाता है, विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य है
- (a) इसे पीड़क-प्रतिरोधी बनाना
- (b) इसके स्वाद व पोषक गुणों में सुधार करना
- (c) इसे सूखा-प्रतिरोधी बनाना
- (d) इसकी शेल्फ-लाइफ बढ़ाना
उत्तर(a) इसे पीड़क-प्रतिरोधी बनाना — बीटी (cry1Ac) जीन प्ररोह एवं फल भेदक से सुरक्षा देता है।
वही तथ्य सीधे परखा गया — बीटी बैंगन के आनुवंशिक परिवर्तन का उद्देश्य कीट/पीड़क प्रतिरोध है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बीटी फसलों जैसे बीटी कपास और बीटी बैंगन में प्रयुक्त cry1Ac जीन मूलतः किससे प्राप्त होता है?
- (a)एक मृदा फफूँद
- (b)एक मृदा जीवाणु, बैसिलस थुरिंजिएंसिस
- (c)एक विषाणु
- (d)एक समुद्री शैवाल
उत्तर(b) एक मृदा जीवाणु, बैसिलस थुरिंजिएंसिस — कीटनाशी क्राई प्रोटीन जीन का स्रोत।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की एकमात्र वाणिज्यिक रूप से उगाई जाने वाली आनुवंशिक रूप से परिवर्तित (बीटी) फसल है?
- (a)बीटी बैंगन
- (b)बीटी कपास
- (c)बीटी चावल
- (d)बीटी सरसों
उत्तर(b) बीटी कपास — भारत में वाणिज्यिक रूप से स्वीकृत व उगाई जाती है; बीटी बैंगन अब भी रोक के अधीन है।