किसकी प्रशासनीय प्रणाली की अद्वितीय विशेषता ग्राम स्वायत्तता का विकास थी ?
- (a)चेर
- (b)चोल
- (c)पाण्ड्य
- (d)पल्लव
सही उत्तर — (b) चोल। चोलों ने प्रारंभिक मध्यकालीन दक्षिण भारत में स्थानीय स्वशासन की सबसे विस्तृत प्रणाली विकसित की: गाँव अपनी सभाओं — उर (सामान्य ग्राम सभा) और सभा/महासभा (ब्रह्मदेय/अग्रहार गाँव की सभा) — के माध्यम से अपने मामले स्वयं संचालित करते थे, जो विशेष समितियों (वारियम) के ज़रिए सिंचाई तालाबों, मंदिर बंदोबस्तों एवं स्थानीय न्याय का प्रबंधन करती थीं। परांतक प्रथम के शासनकाल के उत्तरमेरूर अभिलेख इन समिति सदस्यों के चुनाव की विस्तृत प्रक्रिया दर्ज करते हैं।
- (a)चेर — चेर प्रशासनिक प्रणाली इस प्रकार के विस्तृत, अभिलिखित ग्राम स्वशासन के लिए तुलनात्मक रूप से कम प्रलेखित है।
- (c)पाण्ड्य — एक समकालीन तमिल राजवंश जिसकी अपनी स्थानीय सभाएँ थीं, किन्तु ग्राम स्वायत्तता का प्रशंसित, समृद्ध रूप से अभिलिखित मॉडल चोलों का है, पाण्ड्यों का नहीं।
- (d)पल्लव — पल्लव तमिल क्षेत्र में चोलों से पूर्ववर्ती थे और उन्होंने प्रारंभिक ब्रह्मदेय भूमि-अनुदानों की शुरुआत की, किन्तु पूर्ण रूप से विकसित ग्राम स्वशासन प्रणाली चोल-युग की विशेषता मानी जाती है।
चोल ग्राम प्रशासन कई स्तरों पर संचालित होता था — उर (सामान्य गाँव की सभा), सभा (ब्रह्मदेय/अग्रहार गाँव की सभा), और नगरम (व्यापार नगर की व्यापारियों की सभा) — जिनमें से प्रत्येक निर्वाचित समितियों (वारियम) के माध्यम से स्थानीय मामलों (सिंचाई, मंदिर प्रबंधन, कराधान, न्याय) का संचालन करती थी।
इसे परीक्षाओं में 'प्राचीन/मध्यकालीन स्थानीय स्वशासन' के अंतर्गत रखा जाता है, सामान्यतः उत्तरमेरूर अभिलेखों एवं समिति सदस्यों के चयन की कुडवोलई (घट-पर्ची) प्रणाली का उल्लेख करते हुए। जाल यह है कि उस विशिष्ट राजवंश के बजाय, जिसे इस प्रशासनिक विशेषता का श्रेय दिया जाता है, किसी भी दक्षिण भारतीय राजवंश (पाण्ड्य, पल्लव, चेर) को चुन लिया जाए।
- ग्राम सभाएँ: उर (सामान्य) और सभा/महासभा (ब्रह्मदेय गाँव)
- परांतक प्रथम के शासनकाल के उत्तरमेरूर अभिलेख समिति-चुनाव प्रक्रियाओं का विवरण देते हैं
- विशेष समितियाँ (वारियम) सिंचाई तालाबों, बागों एवं न्याय का प्रबंधन करती थीं
- प्रारंभिक मध्यकालीन भारत में स्थानीय स्वशासन का सबसे विकसित मॉडल माना जाता है
- पल्लव या पाण्ड्य को इसलिए चुन लेना क्योंकि वे भी दक्षिण भारतीय राजवंश हैं जिनकी कुछ स्थानीय सभाएँ थीं
- यह मान लेना कि 'ग्राम स्वायत्तता' मौर्य या गुप्त-काल की विशेषता है — यह चोल-युग की विशिष्टता है
सामान्यतः प्रत्यक्ष ('किस राजवंश का प्रशासन ग्राम स्वायत्तता/स्थानीय स्वशासन के लिए जाना जाता है'), या उत्तरमेरूर अभिलेख/कुडवोलई प्रणाली को तथ्य-जाँच के रूप में परखते हुए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
ग्राम समिति सदस्यों के चयन की विस्तृत प्रक्रिया का वर्णन करने वाले उत्तरमेरूर अभिलेख किस राजवंश से संबंधित हैं?
- (a)चोल
- (b)पल्लव
- (c)पाण्ड्य
- (d)चालुक्य
उत्तर(a) चोल — परांतक प्रथम के शासनकाल में अभिलिखित।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चोल ग्राम प्रशासन में, किसी ब्रह्मदेय (भूमि-अनुदान) गाँव की सभा को क्या कहा जाता था?
- (a)उर
- (b)सभा
- (c)नगरम
- (d)वारियम
उत्तर(b) सभा — उर सामान्य ग्राम सभा थी, और नगरम व्यापारिक नगर की सभा।