मालव संवत इस नाम से भी जाना जाता है
- (a)कलचुरि संवत
- (b)कृत संवत
- (c)शक संवत
- (d)गुप्त संवत
सही उत्तर — (b) कृत संवत। जिस युग को आज लोकप्रिय रूप से 'विक्रम संवत' (57-58 ईसा पूर्व से गणित) कहा जाता है, उसे अपने प्रारंभिक अभिलेखों में 'विक्रम' नहीं कहा गया था — इसे सबसे पहले कृत (कृत) युग के रूप में और बाद में मालव युग के रूप में दर्ज किया गया, जिसका नाम वर्तमान पश्चिमी मध्यप्रदेश क्षेत्र की मालव जनजाति/क्षेत्र पर रखा गया था। उज्जैन के किंवदंती राजा विक्रमादित्य से जुड़ाव और 'विक्रम संवत' नाम केवल लगभग 9वीं शताब्दी ईस्वी से ही सामने आता है। इस प्रकार 'मालव संवत' और 'कृत संवत' एक ही युग के दो ऐतिहासिक नाम हैं।
- (a)कलचुरि संवत — कलचुरि (चेदि) युग एक अलग गणना है, जो लगभग 248-249 ईस्वी से आरंभ हुई और मुख्यतः कलचुरि राजवंश द्वारा मध्य भारत में प्रयुक्त हुई — मालव/कृत युग से भिन्न आरंभ बिंदु और भिन्न प्रायोजक राजवंश।
- (c)शक संवत — शक युग 78 ईस्वी में आरंभ हुआ (आज भारत के राष्ट्रीय पंचांग का आधार) — मालव/कृत युग के आरंभ से एक शताब्दी से भी अधिक बाद में, और मालव क्षेत्र के बजाय शक शासकों के नाम पर।
- (d)गुप्त संवत — गुप्त युग 319-320 ईस्वी में आरंभ हुआ, जो गुप्त राजवंश के उदय को चिह्नित करता है — मालव/कृत युग से सदियों बाद और मूल में उससे असंबंधित।
प्राचीन और प्रारंभिक-मध्ययुगीन भारत में एक साझा पंचांग के बजाय कई राज्य/राजवंशीय युग प्रयोग में थे। जो युग अंततः 'विक्रम संवत' बना (आज भी हिंदू पंचांग में प्रयुक्त), उसे अपने सबसे प्रारंभिक अभिलेखों में केवल कृत युग के रूप में, फिर मालव युग — वर्तमान पश्चिमी मध्यप्रदेश/राजस्थान क्षेत्र की मालव जनजाति के नाम पर — दर्ज किया गया। केवल सदियों बाद ही परंपरा ने इसे उज्जैन के किंवदंती राजा विक्रमादित्य से जोड़ा और इसका नाम 'विक्रम संवत' रखा।
युक्ति यह पहचानना है कि 'विक्रम संवत', 'कृत संवत' और 'मालव संवत' अपने नामकरण इतिहास के अलग-अलग बिंदुओं पर वही एक युग हैं, तीन अलग-अलग युग नहीं — जाल यह है कि कोई वास्तव में भिन्न युग (शक, गुप्त, कलचुरि) चुन लिया जाए जो केवल समान रूप से 'प्राचीन' लगता है।
- एक ही युग, समय के साथ अलग-अलग नाम: कृत → मालव → विक्रम संवत
- लगभग 57-58 ईसा पूर्व से गणना; इसे 'विक्रम' कहने वाले सबसे प्रारंभिक अभिलेख केवल 9वीं शताब्दी ईस्वी से मिलते हैं
- शक युग 78 ईस्वी में आरंभ हुआ; गुप्त युग 319-320 ईस्वी में आरंभ हुआ; कलचुरि (चेदि) युग लगभग 248-249 ईस्वी में आरंभ हुआ — प्रत्येक एक अलग राजवंशीय गणना
- पश्चिमी मध्यप्रदेश की मालव जनजाति/क्षेत्र के नाम पर 'मालव' नामित
एक ही युग, समय के साथ अलग-अलग नाम — मालव/कृत संवत ही बाद में विक्रम संवत के नाम से जाना गया।
- 'मालव संवत', 'कृत संवत' और 'विक्रम संवत' को तीन अलग-अलग युग मानना — ये अपने नामकरण इतिहास के अलग-अलग बिंदुओं पर वही एक युग हैं
- शक युग (78 ईस्वी, राष्ट्रीय पंचांग) को पुराने विक्रम/मालव युग (57-58 ईसा पूर्व) के साथ भ्रमित करना
आमतौर पर एक सीधा 'X युग को इस नाम से भी जाना जाता है' प्रश्न, या युगों को आरंभ तिथियों से मिलाने वाला प्रश्न (UPSC 1995 में यही पूछा गया) — चार आरंभ तिथियाँ याद रखने से (विक्रम/मालव 58 ईसा पूर्व, शक 78 ईस्वी, गुप्त 320 ईस्वी, कलचुरि 248 ईस्वी) अधिकांश रूपांतर हल हो जाते हैं।
सूची I को सूची II से सुमेलित करें और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें: सूची I (युग) — I. विक्रम युग II. शक युग III. गुप्त युग IV. कलि युग; सूची II (गणना किस से) — A) 3102 ईसा पूर्व B) 320 ईस्वी C) 78 ईस्वी D) 58 ईसा पूर्व E) 248 ईस्वी
- (a) I-B, II-D, III-E, IV-A
- (b) I-A, II-C, III-B, IV-D
- (c) I-D, II-E, III-B, IV-C
- (d) I-D, II-C, III-B, IV-A
उत्तर(d) I-D, II-C, III-B, IV-A — विक्रम युग 58 ईसा पूर्व, शक युग 78 ईस्वी, गुप्त युग 320 ईस्वी, कलि युग 3102 ईसा पूर्व।
एक ही मूल तथ्य की परीक्षा लेता है — प्रत्येक प्राचीन भारतीय युग (विक्रम अर्थात् मालव/कृत संवत सहित) को उसकी सही आरंभ तिथि से मिलाना।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
शक युग, जो भारत के राष्ट्रीय पंचांग का आधार है, किस वर्ष से गणा जाता है ?
- (a)58 ईसा पूर्व
- (b)78 ईस्वी
- (c)320 ईस्वी
- (d)248 ईस्वी
उत्तर(b) 78 ईस्वी — शक युग भारत के राष्ट्रीय पंचांग का आधार है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
गुप्त युग का आरंभ किस वर्ष माना जाता है ?
- (a)57 ईसा पूर्व
- (b)78 ईस्वी
- (c)319-320 ईस्वी
- (d)606 ईस्वी
उत्तर(c) 319-320 ईस्वी — चंद्रगुप्त प्रथम के अधीन गुप्त राजवंश के उदय को चिह्नित करता है।