सच्चा न्यायोचित विश्वास अक्सर कहा जाता है
- (a)हाइपोथीसिस
- (b)इंटेलिजेंस
- (c)ज्ञान
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (c) ज्ञान। ज्ञानमीमांसा (epistemology — ज्ञान के दर्शन) में पारंपरिक विश्लेषण ज्ञान को 'न्यायोचित सत्य विश्वास' (Justified True Belief, JTB) के रूप में परिभाषित करता है: किसी व्यक्ति को किसी कथन को 'जानने वाला' तब कहा जाता है जब वह उस पर विश्वास करता है, वह वास्तव में सत्य है, और उसके विश्वास के लिए पर्याप्त औचित्य है। यह त्रि-भागीय परिभाषा परंपरागत रूप से प्लेटो के संवाद थियेटेटस से जोड़ी जाती है और ज्ञान क्या है, इस चर्चा में मानक संदर्भ बिंदु बनी हुई है।
- (a)हाइपोथीसिस — हाइपोथीसिस (परिकल्पना) एक प्रस्तावित, अस्थायी स्पष्टीकरण या मान्यता है जिसे परीक्षण हेतु प्रस्तुत किया जाता है — इसे अभी सत्य या न्यायोचित होना आवश्यक नहीं, जो ज्ञान को परिभाषित करने वाली स्थिर, न्यायोचित, सत्य अवस्था के विपरीत है।
- (b)इंटेलिजेंस — इंटेलिजेंस (बुद्धि) तर्क करने, सीखने और ज्ञान लागू करने की सामान्य संज्ञानात्मक क्षमता को संदर्भित करती है — यह एक मानसिक क्षमता है, न कि स्वयं किसी कथन के बारे में न्यायोचित-सत्य-विश्वास की एक विशिष्ट अवस्था।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — गलत — 'ज्ञान' ज्ञानमीमांसा में न्यायोचित सत्य विश्वास के लिए ठीक-ठीक स्थापित शब्द है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
ज्ञानमीमांसा (epistemology) ज्ञान की प्रकृति, स्रोतों और सीमाओं का अध्ययन करती है। इसका शास्त्रीय आरंभ बिंदु न्यायोचित सत्य विश्वास (JTB) की परिभाषा है: किसी चीज़ को जानने के लिए आवश्यक है (1) उस पर विश्वास करना, (2) उसका सत्य होना, और (3) उस विश्वास के लिए औचित्य रखना। इस त्रि-भागीय दृष्टिकोण को बाद में दार्शनिक एडमंड गेटियर ने चुनौती दी, जिनके 1963 के लेख 'Is Justified True Belief Knowledge?' ने ऐसे प्रति-उदाहरण दिए जिनमें एक विश्वास संयोगवश न्यायोचित व सत्य होकर भी वास्तव में ज्ञान नहीं माना जा सकता — यह बहस आज भी 'गेटियर समस्या' के नाम से जानी जाती है।
प्रश्न JTB सूत्र को सरल शब्दों ('सच्चा न्यायोचित विश्वास') में दोहराता है और उस दार्शनिक शब्द को पूछता है जिसे यह परिभाषित करता है — यह पहचानना कि 'न्यायोचित + सत्य + विश्वास = ज्ञान' है, ही पूरी युक्ति है।
- ज्ञान (शास्त्रीय/JTB परिभाषा) = विश्वास + सत्य + औचित्य
- परंपरागत रूप से प्लेटो के संवाद थियेटेटस से जोड़ी जाती है
- ज्ञानमीमांसा (epistemology) दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो ज्ञान का अध्ययन करती है
- एडमंड गेटियर के 1963 के लेख ने ज्ञान की पर्याप्त परिभाषा के रूप में JTB को चुनौती दी
- 'इंटेलिजेंस' को इसलिए चुनना क्योंकि यह 'चीज़ों को जानने' से संबंधित लगता है — इंटेलिजेंस एक संज्ञानात्मक क्षमता है, ज्ञान की परिभाषा नहीं
- यह चूक जाना कि प्रश्न एक सामान्य तर्क प्रश्न के बजाय मानक पाठ्यपुस्तक JTB सूत्र का सीधा पुनर्कथन है
MPPSC सामान्य-अभिरुचि/तर्कशक्ति खंड कभी-कभी इस जैसा एक बुनियादी दर्शन/तर्कशास्त्र परिभाषात्मक प्रश्न डाल देते हैं — शब्द-रचना आमतौर पर मानक पाठ्यपुस्तक परिभाषा से लगभग शब्दशः मेल खाती है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दर्शनशास्त्र की वह शाखा जो ज्ञान की प्रकृति, स्रोतों और सीमाओं का अध्ययन करती है, क्या कहलाती है ?
- (a)नीतिशास्त्र
- (b)ज्ञानमीमांसा
- (c)तत्वमीमांसा
- (d)सौंदर्यशास्त्र
उत्तर(b) ज्ञानमीमांसा — ज्ञान का दार्शनिक अध्ययन।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एडमंड गेटियर के 1963 के लेख ने ज्ञान की किस शास्त्रीय परिभाषा को चुनौती दी ?
- (a)न्यायोचित सत्य विश्वास
- (b)तर्कसंगत अंतर्ज्ञान
- (c)अनुभवजन्य अवलोकन
- (d)श्रेणीबद्ध अनिवार्यता
उत्तर(a) न्यायोचित सत्य विश्वास — गेटियर के प्रति-उदाहरणों ने प्रश्न उठाया कि क्या JTB ज्ञान के लिए पर्याप्त है।