भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के संबंध में कौन-सा कथन सही है ? (i) 24 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 के द्वारा अनुच्छेद 368 संशोधित किया गया था । (ii) 101 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के द्वारा अनुच्छेद 368 संशोधित किया गया था । कूट :
- (a)(i) सही है एवं (ii) गलत है
- (b)(i) गलत है एवं (ii) सही है
- (c)(i) एवं (ii) दोनों सही हैं
- (d)(i) एवं (ii) दोनों गलत हैं
सही उत्तर — (c) (i) एवं (ii) दोनों सही हैं। अनुच्छेद 368 (संशोधन शक्ति) को 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा संशोधित किया गया (जिसने संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति की सहमति को अनिवार्य बनाया तथा संविधान के किसी भी भाग को संशोधित करने की संसद की शक्ति को स्पष्ट किया)। इसे पुनः 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 (GST) द्वारा संशोधित किया गया, जिसने अनुच्छेद 279A को उस परंतुक (proviso) की सूची में जोड़ा जिसमें राज्यों द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक है।
- (a)(i) सही है एवं (ii) गलत है — (ii) भी सही है — 101वें संशोधन (2016, GST) ने भी अनुच्छेद 368 को संशोधित किया था।
- (b)(i) गलत है एवं (ii) सही है — (i) भी सही है — 24वें संशोधन (1971) ने अनुच्छेद 368 को संशोधित किया था।
- (d)(i) एवं (ii) दोनों गलत हैं — दोनों संशोधनों ने वास्तव में अनुच्छेद 368 को स्पर्श किया, अतः यह गलत है।
अनुच्छेद 368 संसद की संविधान संशोधन की शक्ति व प्रक्रिया निर्धारित करता है। इसे स्वयं एक से अधिक बार संशोधित किया गया है — विशेष रूप से गोलकनाथ मामले के बाद 24वें संशोधन (1971) द्वारा, तथा 101वें (GST) संशोधन (2016) द्वारा, जिसने अनुच्छेद 279A को इसके अनुसमर्थन-परंतुक में शामिल किया।
दोनों कथन ऐतिहासिक रूप से सटीक हैं। 24वाँ संशोधन गोलकनाथ मामले की प्रतिक्रिया में था; 101वें GST संशोधन ने अनुच्छेद 368 के परंतुक के माध्यम से राज्य-अनुसमर्थन आवश्यक किया।
- अनुच्छेद 368 = संविधान संशोधन की शक्ति व प्रक्रिया।
- 24वाँ संशोधन (1971): संशोधन विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति को अनिवार्य बनाया; किसी भी भाग को संशोधित करने की शक्ति की पुष्टि की।
- 101वाँ संशोधन (2016, GST): अनुच्छेद 368 के परंतुक में अनुच्छेद 279A को शामिल करने हेतु संशोधित किया।
- केशवानंद भारती मामला (1973) ने बाद में अनुच्छेद 368 पर 'आधारभूत ढाँचा' सीमा निर्धारित की।
- यह मान लेना कि अनुच्छेद 368 को कभी स्वयं संशोधित नहीं किया गया
- यह भूल जाना कि GST (101वें) संशोधन ने अनुच्छेद 368 को भी स्पर्श किया
अनुच्छेद 368 को किन संशोधनों ने स्पर्श किया, इस पर सही/गलत कथन-समुच्चय।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, संसद संविधान के किसी भी प्रावधान में निम्नलिखित के माध्यम से संशोधन कर सकती है: 1. परिवर्धन (Addition) 2. परिवर्तन (Variation) 3. निरसन (Repeal) नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(d) 1, 2 और 3
UPSC 2024 में अनुच्छेद 368 पर प्रश्न — वही संशोधन-शक्ति प्रावधान, जो यह परखता है कि संसद परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के माध्यम से संशोधन कर सकती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
24वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 मुख्यतः किस मामले की प्रतिक्रिया में अधिनियमित किया गया था?
- (a)गोलकनाथ मामला
- (b)केशवानंद भारती मामला
- (c)मिनर्वा मिल्स मामला
- (d)मेनका गांधी मामला
उत्तर(a) गोलकनाथ मामला (1967)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 ने कौन-सा प्रमुख सुधार पेश किया?
- (a)वस्तु एवं सेवा कर (GST)
- (b)दल-बदल विरोधी कानून
- (c)पंचायती राज
- (d)शिक्षा का अधिकार
उत्तर(a) वस्तु एवं सेवा कर (GST)।