अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत किसी निर्णय, दण्डादेश या आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील होती है
- (a)केवल तथ्यों के सम्बंध में
- (b)केवल विधि के सम्बंध में
- (c)तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (c), तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में। अधिनियम की धारा 14A(1) (2015 के संशोधन द्वारा जोड़ी गई) यह उपबंधित करती है कि दण्ड प्रक्रिया संहिता के होते हुए भी, किसी विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय के किसी निर्णय, दण्डादेश या आदेश — अंतर्वर्ती आदेश को छोड़कर — के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील होगी, जो तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में होगी। अतः उच्च न्यायालय तथ्यगत निष्कर्षों और विधि के प्रश्नों, दोनों की पुनः जाँच कर सकता है।
- (a)केवल तथ्यों के सम्बंध में — अपील केवल तथ्यों तक सीमित नहीं है; धारा 14A स्पष्ट रूप से इसे विधि के प्रश्नों तक भी विस्तारित करती है।
- (b)केवल विधि के सम्बंध में — यह लुभावना है, क्योंकि उच्च न्यायालय की अपीलें प्रायः केवल विधि के बिंदुओं तक सीमित मानी जाती हैं — किंतु धारा 14A जानबूझकर तथ्यों पर भी अपील की अनुमति देती है।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — अपील होती है, और धारा 14A यह निर्दिष्ट करती है कि यह तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में है, इसलिए 'कोई नहीं' गलत है।
धारा 14A को 2015 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया ताकि अत्याचार अधिनियम के अंतर्गत एक स्पष्ट, शीघ्र अपीलीय मार्ग प्राप्त हो सके। किसी विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय से अपील सीधे उच्च न्यायालय में जाती है, तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में, और सामान्यतः तीन महीने के भीतर निपटाई जानी चाहिए। इसका 'होते हुए भी' खंड दण्ड प्रक्रिया संहिता की सामान्य अपील-योजना को अध्यारोहित करता है।
जाल 'केवल विधि के सम्बंध में' है, क्योंकि उच्च न्यायालय की अपीलें प्रायः विधि के शुद्ध प्रश्नों से जोड़ी जाती हैं। किंतु धारा 14A तथ्यों की भी पुनः जाँच की अनुमति देने हेतु प्रारूपित की गई थी, इसलिए सही विकल्प 'तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में' है। अंतर्वर्ती आदेश इस अपील से बाहर रखे गए हैं।
- धारा 14A (2015 के संशोधन द्वारा जोड़ी गई): विशेष/अनन्य विशेष न्यायालय से उच्च न्यायालय में अपील, तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में।
- अंतर्वर्ती आदेश इस अपील से बाहर रखे गए हैं।
- ऐसी अपील सामान्यतः तीन महीने के भीतर निपटाई जानी चाहिए।
- 'होते हुए भी' खंड दण्ड प्रक्रिया संहिता के सामान्य अपील उपबंधों को अध्यारोहित करता है।
- 'केवल विधि के सम्बंध में' चुन लेना — धारा 14A तथ्यों पर भी अपील की अनुमति देती है।
- यह भूल जाना कि अंतर्वर्ती आदेश इस अपील से बाहर रखे गए हैं।
MPPSC सटीक धारा (14A) और अपील के दायरे की परीक्षा लेता है; 'तथ्यों और विधि' दोनों के दायरे तथा तीन महीने के निपटान-मानक, दोनों को ध्यान में रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 14A के अंतर्गत, किसी विशेष न्यायालय से उच्च न्यायालय में अपील सामान्यतः किस अवधि के भीतर निपटाई जानी चाहिए :
- (a)एक महीना
- (b)तीन महीने
- (c)छह महीने
- (d)एक वर्ष
उत्तर(b) तीन महीने।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम (धारा 14A) के अंतर्गत उच्च न्यायालय में तथ्यों और विधि दोनों के सम्बंध में अपील का उपबंध किसके द्वारा लाया गया :
- (a)मूल 1989 अधिनियम द्वारा
- (b)2015 के संशोधन द्वारा
- (c)दण्ड प्रक्रिया संहिता द्वारा
- (d)उच्चतम न्यायालय के किसी निर्णय द्वारा
उत्तर(b) 2015 के संशोधन द्वारा।