एक ही पौधे के एक पुष्प के परागकोश से परागकण का उसी पौधे के दूसरे पुष्प की वर्तिकाग्र में स्थानांतरण कहलाता है
- (a)स्वक युग्मन
- (b)सजांतपुष्पी परागण
- (c)पर-परागण
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (b) सजांतपुष्पी परागण (Geitonogamy)। सजांतपुष्पी परागण एक पुष्प के परागकोश से उसी पौधे पर स्थित किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र में परागकण के स्थानांतरण को कहते हैं। आनुवंशिक दृष्टि से यह अब भी स्व-परागण है (दोनों पुष्प एक ही मातृ पौधे से संबंधित हैं), परन्तु चूँकि परागकण को पुष्पों के बीच यात्रा करनी होती है, इसे प्रायः पर-परागण की भाँति ही किसी परागण-कारक की आवश्यकता होती है। यह ठीक प्रश्न से मेल खाता है।
- (a)स्वक युग्मन — स्वक युग्मन (Autogamy) उसी पुष्प के भीतर होने वाला स्व-परागण है — परागकोश से परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं, किसी अन्य पुष्प पर नहीं।
- (c)पर-परागण — पर-परागण (Xenogamy) में परागकण किसी भिन्न पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचाए जाते हैं, न कि उसी पौधे के भीतर — जबकि प्रश्न में दोनों पुष्प एक ही पौधे के हैं।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — गलत — सजांतपुष्पी परागण (Geitonogamy) नामक विशिष्ट शब्द ठीक इसी पौधे पर पुष्प-से-पुष्प स्थानांतरण का सटीक वर्णन करता है।
परागण को इस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है कि परागकण कितनी दूर तक यात्रा करते हैं। स्वक युग्मन (Autogamy) = परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक। सजांतपुष्पी परागण (Geitonogamy) = परागकण उसी पौधे के किसी अन्य पुष्प तक। पर-परागण (Xenogamy) = परागकण किसी आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधे के पुष्प तक। स्वक युग्मन व सजांतपुष्पी परागण दोनों आनुवंशिक दृष्टि से 'स्व-परागण' हैं; पर-परागण वास्तविक पर-परागण है जो नई आनुवंशिक विविधता लाता है।
जाल है वाक्यांश 'दूसरे पुष्प' में। चूँकि कोई परागणकर्ता दो पुष्पों के बीच परागकण ले जाता है, विद्यार्थी सीधे पर-परागण (Xenogamy) की ओर बढ़ सकते हैं। परन्तु दोनों पुष्प एक ही पौधे के हैं, इसलिए यह सजांतपुष्पी परागण है — एक मध्यवर्ती स्थिति जो क्रियात्मक रूप से पर-परागण है परन्तु आनुवंशिक दृष्टि से स्व-परागण है।
- स्वक युग्मन (Autogamy) — उसी पुष्प के भीतर परागकण का स्थानांतरण (कठोर अर्थ में स्व-परागण)।
- सजांतपुष्पी परागण (Geitonogamy) — उसी पौधे के दो पुष्पों के बीच परागकण का स्थानांतरण; आनुवंशिक दृष्टि से स्व-परागण परन्तु परागणकर्ता की आवश्यकता।
- पर-परागण (Xenogamy) — किसी भिन्न पौधे के पुष्प तक परागकण का स्थानांतरण; वास्तविक पर-परागण जो आनुवंशिक विविधता लाता है।
- परागकोश (anther) पुंकेसर का परागकण-उत्पादक भाग है; वर्तिकाग्र (stigma) स्त्रीकेसर/अंडप का परागकण-ग्राही सिरा है।
- 'दूसरे पुष्प' को भिन्न पौधे के रूप में पढ़कर पर-परागण चुन लेना — यहाँ पुष्प एक ही पौधे के हैं (सजांतपुष्पी परागण)
- सजांतपुष्पी परागण को आनुवंशिक रूप से पर-परागण मान लेना — यह आनुवंशिक दृष्टि से स्व-परागण है
MPPSC एवं UPSC आपसे परागण-शब्द का उसकी परिभाषा से मिलान करने, अथवा यह पहचानने को कहते हैं कि कौन-सा प्रकार पौधे को आनुवंशिक रूप से 'स्व-परागित' रखता है — इस क्रम को स्थिर कर लें: स्वक युग्मन (उसी पुष्प में) → सजांतपुष्पी परागण (उसी पौधे में) → पर-परागण (भिन्न पौधे में)।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
परागकणों का उसी पुष्प के वर्तिकाग्र में स्थानांतरण कहलाता है:
- (a)सजांतपुष्पी परागण
- (b)पर-परागण
- (c)स्वक युग्मन
- (d)अपसंतति (Apogamy)
उत्तर(c) स्वक युग्मन — उसी पुष्प के भीतर स्व-परागण।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कौन-सा परागण प्रकार, किसी आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधे के पुष्प में परागकण स्थानांतरित कर आनुवंशिक विविधता लाता है?
- (a)स्वक युग्मन
- (b)सजांतपुष्पी परागण
- (c)पर-परागण
- (d)क्लिस्टोगेमी (Cleistogamy)
उत्तर(c) पर-परागण — भिन्न पौधों के बीच वास्तविक पर-परागण, जो नई आनुवंशिक विविधता लाता है।