कौन-सा प्रदूषण “नॉक-नी-सिंड्रोम” के लिए उत्तरदायी है ?
- (a)फ्लोराइड
- (b)मर्क्युरी/पारा
- (c)आर्सेनिक
- (d)केडमियम
सही उत्तर — (a) फ्लोराइड। दूषित भूजल के माध्यम से प्रायः दीर्घकाल तक अत्यधिक फ्लोराइड का सेवन फ्लोरोसिस उत्पन्न करता है; 'नॉक-नी सिंड्रोम' (जेनु वालगम — जिसमें पैर घुटनों पर भीतर की ओर मुड़ जाते हैं) दीर्घकालिक फ्लोराइड विषाक्तता की एक गंभीर कंकालीय अभिव्यक्ति है। यह भारत के उच्च-फ्लोराइड क्षेत्रों से रिपोर्ट किया गया है, जैसे तत्कालीन आंध्र प्रदेश के नलगोंडा क्षेत्र के कुछ भाग।
- (b)मर्क्युरी/पारा — मर्क्युरी विषाक्तता मिनामाता रोग उत्पन्न करती है — तंत्रिका-तंत्र क्षति (समन्वय की हानि, सुन्नपन) — नॉक-नी नहीं।
- (c)आर्सेनिक — आर्सेनिक संदूषण आर्सेनिकोसिस व ब्लैक-फुट रोग उत्पन्न करता है, जिसमें त्वचा घाव व संवहनी क्षति होती है, जेनु वालगम नहीं।
- (d)केडमियम — केडमियम विषाक्तता इटाई-इटाई रोग (हड्डियों का दर्दनाक कोमलीकरण/भंगुरता) उत्पन्न करती है — यह फ्लोराइड-प्रेरित नॉक-नी से भिन्न एक हड्डी विकार है।
जल में विशिष्ट रासायनिक प्रदूषकों के दीर्घकालिक संपर्क से विशिष्ट रोग उत्पन्न होते हैं। अत्यधिक फ्लोराइड दंत व कंकालीय फ्लोरोसिस उत्पन्न करता है — नॉक-नी (जेनु वालगम) कंकालीय-फ्लोरोसिस का एक लक्षण है; मर्क्युरी मिनामाता रोग उत्पन्न करता है; केडमियम इटाई-इटाई रोग उत्पन्न करता है; और आर्सेनिक आर्सेनिकोसिस/ब्लैक-फुट रोग उत्पन्न करता है। ये प्रदूषक-रोग जोड़े सामान्य विज्ञान प्रश्नों में एक मुख्य विषय हैं।
लुभावना गलत उत्तर केडमियम है, क्योंकि इटाई-इटाई भी हड्डी पर प्रभाव डालता है। परन्तु 'नॉक-नी' (जेनु वालगम) विशेष रूप से फ्लोराइड/कंकालीय-फ्लोरोसिस की विकृति है, जबकि इटाई-इटाई हड्डी का कोमलीकरण व दर्द है, न कि भीतर की ओर मुड़े हुए घुटने की मुद्रा। सटीक लक्षण को सटीक प्रदूषक से जोड़ें।
- फ्लोराइड (अत्यधिक) → दंत व कंकालीय फ्लोरोसिस; नॉक-नी (जेनु वालगम) कंकालीय-फ्लोरोसिस का एक लक्षण है।
- मर्क्युरी → मिनामाता रोग (तंत्रिका तंत्र)।
- केडमियम → इटाई-इटाई रोग (हड्डियों का दर्दनाक कोमलीकरण)।
- आर्सेनिक → आर्सेनिकोसिस/ब्लैक-फुट रोग (त्वचा व रक्त वाहिकाएँ)।
- फ्लोराइड के नॉक-नी (कंकालीय फ्लोरोसिस) को केडमियम के इटाई-इटाई से भ्रमित करना — दोनों ही हड्डी को प्रभावित करते हैं
- यह सोचना कि फ्लोरोसिस केवल दाँतों को हानि पहुँचाता है; अत्यधिक फ्लोराइड कंकाल को भी विकृत करता है
प्रायः 'कौन-सा प्रदूषक रोग X उत्पन्न करता है' या इसके विपरीत रूप में पूछा जाता है। इन जोड़ों को स्थिर कर लें: F → फ्लोरोसिस/नॉक-नी, Hg → मिनामाता, Cd → इटाई-इटाई, As → आर्सेनिकोसिस।
उथले हैंड पंप का पानी पीने वाले लोगों को निम्नलिखित में से सभी रोग होने की संभावना है, सिवाय
- (a) हैजा
- (b) टाइफाइड
- (c) पीलिया
- (d) फ्लोरोसिस
उत्तर(d) फ्लोरोसिस
वही विषय — फ्लोरोसिस विषम है क्योंकि यह पानी में फ्लोराइड (एक रासायनिक प्रदूषक) से होता है, न कि उन रोगजनकों से जो हैजा, टाइफाइड व पीलिया उत्पन्न करते हैं।
मनुष्यों में इटाई-इटाई रोग किस प्रदूषण के कारण होता है?
- (a) मर्क्युरी प्रदूषण
- (b) केडमियम प्रदूषण
- (c) आर्सेनिक प्रदूषण
- (d) नाइट्रेट प्रदूषण
उत्तर(b) केडमियम प्रदूषण
वही प्रदूषक-से-रोग मिलान कौशल — यह बाद वाला MPPSC प्रश्न केडमियम को इटाई-इटाई से जोड़ता है, जो फ्लोराइड → फ्लोरोसिस/नॉक-नी का साथी है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मनुष्यों में मिनामाता रोग निम्नलिखित में से किसके प्रदूषण के कारण होता है?
- (a)सीसा (Lead)
- (b)मर्क्युरी/पारा
- (c)फ्लोराइड
- (d)नाइट्रेट
उत्तर(b) मर्क्युरी — मिनामाता रोग मिथाइल-मर्क्युरी विषाक्तता से उत्पन्न होता है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
पेयजल में अत्यधिक फ्लोराइड मुख्यतः शरीर के किन भागों को प्रभावित करता है?
- (a)दाँत व हड्डियाँ
- (b)यकृत व वृक्क
- (c)फेफड़े
- (d)केवल त्वचा
उत्तर(a) दाँत व हड्डियाँ — जिससे दंत व कंकालीय फ्लोरोसिस होता है।