अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, जादू-टोना करने या डाइन होने के अभिकथन पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को शारीरिक हानि पहुँचायेगा या मानसिक यन्त्रणा देगा, वह किस अवधि के कारावास से दण्डित होगा?
- (a)जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी, किन्तु जो पाँच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से
- (b)जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी और जुर्माने से
- (c)जिसकी अवधि एक वर्ष की होगी और जुर्माने से
- (d)जिसकी अवधि पाँच वर्ष की होगी और जुर्माने से
सही उत्तर — (a) जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी, किन्तु जो पाँच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से। जादू-टोना करने या डाइन होने के अभिकथन पर किसी अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्य को शारीरिक हानि पहुँचाना या मानसिक यन्त्रणा देना, 2015 के संशोधन अधिनियम (धारा 3(1)(zb)) द्वारा जोड़ा गया एक अपराध है। धारा 3(1) के अन्य अत्याचारों की भाँति, यह छः माह से कम नहीं, किन्तु पाँच वर्ष तक बढ़ाई जा सकने वाली कारावास अवधि और जुर्माने से दण्डनीय है — अर्थात् एक परास, जिसका न्यूनतम छः माह तथा अधिकतम पाँच वर्ष है।
- (b)जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी और जुर्माने से — यह ऊपरी सीमा को हटा देता है — सही दण्ड छः माह से पाँच वर्ष तक की परास है, न कि छः माह की खुली-सीमा वाली न्यूनतम अवधि।
- (c)जिसकी अवधि एक वर्ष की होगी और जुर्माने से — एक निश्चित एक वर्ष की अवधि वह नहीं है, जो अधिनियम निर्धारित करता है; दण्ड छः माह से पाँच वर्ष तक की एक परास है।
- (d)जिसकी अवधि पाँच वर्ष की होगी और जुर्माने से — पाँच वर्ष अधिकतम सीमा है, न कि एक निश्चित अवधि — न्यूनतम छः माह है, अतः दण्ड एक परास है (छः माह से पाँच वर्ष तक), न कि सपाट पाँच वर्ष।
अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धारा 3(1) उन अत्याचारों को सूचीबद्ध करती है, जो अनुसूचित जाति/जनजाति के अतिरिक्त व्यक्तियों द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्यों के विरुद्ध किए जाते हैं; इन अपराधों के लिए सामान्य दण्ड है — छः माह से कम नहीं, किन्तु पाँच वर्ष तक बढ़ाई जा सकने वाली कारावास अवधि, साथ ही जुर्माना। 2015 के संशोधन अधिनियम ने धारा 3(1) का विस्तार करते हुए नए अपराध जोड़े — जिनमें धारा 3(1)(zb) पर यह जादू-टोना सम्बन्धी उपबन्ध भी शामिल है — ये सभी उसी मानक दण्ड के अधीन हैं।
चारों विकल्प केवल दण्ड की अवधि में भिन्न हैं। धारा 3(1) के अपराध एक ही मानक दण्ड साझा करते हैं — न्यूनतम छः माह तथा अधिकतम पाँच वर्ष, साथ ही जुर्माना — अतः वह विकल्प सही है, जो एक परास ('छः माह से पाँच वर्ष तक और जुर्माने से') बताता है; सपाट या निश्चित-अवधि वाले विकल्प जाल हैं।
- जादू-टोना सम्बन्धी अपराध (जादू-टोने के अभिकथन पर शारीरिक हानि / मानसिक यन्त्रणा) 2015 के संशोधन अधिनियम द्वारा धारा 3(1)(zb) के रूप में जोड़ा गया था।
- दण्ड: छः माह से कम नहीं, किन्तु पाँच वर्ष तक बढ़ाई जा सकने वाली कारावास अवधि, तथा जुर्माना।
- यह अधिनियम के अधीन धारा 3(1) के अत्याचारों हेतु मानक दण्ड है।
- यह उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है।
धारा 3(1) का दण्ड एक परास है — न्यूनतम छः माह, अधिकतम पाँच वर्ष, साथ ही जुर्माना।
- छः-माह-से-पाँच-वर्ष परास के बजाय निश्चित-अवधि विकल्प (एक वर्ष / पाँच वर्ष) चुन लेना
- न्यूनतम अवधि (छः माह) या अनिवार्य जुर्माने को भूल जाना
MPPSC इसे 'अपराध X के लिए दण्ड' के रूप में चार दण्ड-अवधि विकल्पों के साथ प्रस्तुत करता है; सुरक्षित सन्दर्भ-बिन्दु है मानक धारा 3(1) दण्ड — छः माह से पाँच वर्ष तथा जुर्माना।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धारा 3(1) के अधीन अत्याचारों हेतु मानक दण्ड किस कारावास अवधि का है?
- (a)छः माह से पाँच वर्ष तक, और जुर्माने के साथ
- (b)एक से तीन वर्ष
- (c)दो से सात वर्ष
- (d)दस वर्ष तक
उत्तर(a) छः माह से पाँच वर्ष तक, और जुर्माने के साथ — मानक धारा 3(1) दण्ड।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जादू-टोने के अभिकथन पर किसी अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्य को हानि पहुँचाने का अपराध अधिनियम में किसके द्वारा जोड़ा गया?
- (a)मूल 1989 का अधिनियम
- (b)1995 के नियम
- (c)2015 का संशोधन अधिनियम
- (d)2018 का संशोधन अधिनियम
उत्तर(c) 2015 का संशोधन अधिनियम।