कालिका पुराण किस धर्म से सम्बन्धित है?
- (a)वैष्णव
- (b)शाक्त
- (c)बौद्ध
- (d)जैन
आयोग की उत्तर-कुंजी (d) जैन को श्रेय देती है — अर्थात् अंकन के लिए MPPSC ने विकल्प (d) को ही सही माना। परन्तु विद्वत्तापूर्ण अभिलेख के अनुसार, कालिका पुराण एक जैन रचना नहीं है: यह एक शाक्त उपपुराण है, जो लगभग 10वीं-11वीं शताब्दी ईस्वी में रचित देवी-उपासना का ग्रन्थ है और कामरूप (असम) क्षेत्र से सम्बद्ध है, जो देवी को उसके विभिन्न रूपों (काली, कामाख्या, सती/पार्वती) में समर्पित है। इसकी विषयवस्तु के अनुसार यह शाक्त मत — विकल्प (b) — से सम्बन्धित है। श्रेय-प्राप्त उत्तर को आयोग के उत्तर के रूप में दर्ज करें, परन्तु सही सम्बद्धता याद रखें: कालिका पुराण ↔ शाक्त मत।
- (a)वैष्णव — वैष्णव मत विष्णु तथा उनके अवतारों पर केन्द्रित है; कालिका पुराण एक देवी-केन्द्रित ग्रन्थ है, वैष्णव नहीं।
- (b)शाक्त — विद्वत्तापूर्ण अभिलेख के अनुसार यह वास्तव में सही परम्परा है — कालिका पुराण एक शाक्त उपपुराण है, जो देवी को समर्पित है — यद्यपि आयोग की उत्तर-कुंजी ने यहाँ इसे श्रेय नहीं दिया।
- (c)बौद्ध — कालिका पुराण एक पौराणिक हिन्दू ग्रन्थ है, बौद्ध ग्रन्थ-सूची का भाग नहीं।
पुराण, हिन्दू धार्मिक साहित्य का एक विशाल भाग हैं। अठारह महापुराणों के अतिरिक्त अनेक उपपुराण (गौण पुराण) हैं, जिनमें से प्रत्येक सामान्यतः किसी सम्प्रदाय-विशेष परम्परा की ओर झुकाव रखता है — वैष्णव (विष्णु), शैव (शिव) अथवा शाक्त (देवी)। कालिका पुराण एक शाक्त उपपुराण है, जो असम में देवी कामाख्या की उपासना के वर्णन के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
यह एक ज्ञात समस्याग्रस्त प्रश्न है। कालिका पुराण एक शाक्त ग्रन्थ है, अतः 'शाक्त मत' ऐतिहासिक दृष्टि से सही सम्बद्धता है, फिर भी आयोग की उत्तर-कुंजी ने 'जैन' अंकित किया। परीक्षा के अंकन हेतु (d) को श्रेय दिया गया; अपने ज्ञान हेतु, ग्रन्थ की शाक्त पहचान याद रखें — और अलग जैन पुराण परम्परा (आदि पुराण, महापुराण) को अलग खाने में रखें।
- कालिका पुराण एक शाक्त उपपुराण है — देवी-उपासना परम्परा का एक ग्रन्थ।
- इसकी तिथि लगभग 10वीं-11वीं शताब्दी ईस्वी मानी जाती है और यह कामरूप (असम) क्षेत्र से सम्बद्ध है।
- यह देवी कामाख्या की उपासना तथा उनके मन्दिर में होने वाले अनुष्ठानों का वर्णन करता है।
- MPPSC की उत्तर-कुंजी ने इस प्रश्न के लिए 'जैन' को श्रेय दिया, यद्यपि विद्वान इस ग्रन्थ को शाक्त मत के अन्तर्गत वर्गीकृत करते हैं।
- कालिका पुराण की सुविज्ञापित शाक्त पहचान के बजाय एक अकेली उत्तर-कुंजी पर भरोसा करना
- हिन्दू पुराणों को अलग जैन पुराण परम्परा से भ्रमित करना
परीक्षाएँ पूछती हैं 'ग्रन्थ X किस परम्परा/धर्म से सम्बद्ध है' — प्रत्येक पुराण को वैष्णव/शैव/शाक्त से जोड़ें, और जैन पुराणों (आदि पुराण, महापुराण) को एक अलग समूह के रूप में याद रखें।
भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में, निम्नलिखित ग्रन्थों पर विचार करें: 1. नेत्तिपकरण 2. परिशिष्टपर्वन 3. अवदानशतक 4. त्रिषष्टिलक्षण महापुराण उपर्युक्त में से कौन-से जैन ग्रन्थ हैं?
- (a) 1, 2 और 3
- (b) केवल 2 और 4
- (c) 1, 3 और 4
- (d) 2, 3 और 4
उत्तर(b) केवल 2 और 4
समान कौशल — किसी प्राचीन ग्रन्थ/पुराण को उसकी धार्मिक परम्परा से जोड़ना (यहाँ, जैन ग्रन्थों को बौद्ध ग्रन्थों से अलग पहचानना)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कालिका पुराण किस देवता की उपासना पर केन्द्रित है?
- (a)विष्णु
- (b)देवी (शक्ति/काली/कामाख्या)
- (c)सूर्य
- (d)गणेश
उत्तर(b) देवी (शक्ति/काली/कामाख्या) — यह एक शाक्त उपपुराण है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा एक जैन पुराण है?
- (a)कालिका पुराण
- (b)मार्कण्डेय पुराण
- (c)आदि पुराण (महापुराण)
- (d)भागवत पुराण
उत्तर(c) आदि पुराण/महापुराण — एक जैन ग्रन्थ (जिनसेन कृत); शेष हिन्दू पुराण हैं।