वर्ष 1911 में, निम्नलिखित में से किसने बंबई में सोशल सर्विस लीग की स्थापना की थी ?
- (a)जी.के. गोखले
- (b)एस.ए. डांगे
- (c)एन.एम. जोशी
- (d)एम.आर. जयकर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) एन.एम. जोशी । नारायण मल्हार जोशी ने वर्ष 1911 में बंबई में सोशल सर्विस लीग की स्थापना की थी । वे गोपाल कृष्ण गोखले की स्थापित भारत सेवक समाज के सदस्य थे और उसी परंपरा से निकले — ऐसे कार्यकर्ताओं की परंपरा जो सार्वजनिक जीवन को व्रत की तरह लेते थे और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा समाज सेवा को राजनीतिक काम से अलग नहीं मानते थे । लीग का उद्देश्य नगर के मज़दूरों और निर्धन वर्गों के जीवन-स्तर को सुधारना था । इसके अंतर्गत रात्रि पाठशालाएँ चलाई गईं, पुस्तकालय और वाचनालय खोले गए, सहकारी समितियाँ बनाई गईं, सफ़ाई और स्वास्थ्य के काम हुए तथा श्रमिकों को क़ानूनी सहायता दी गई । उस समय बंबई कपड़ा मिलों का बड़ा केंद्र था और वहाँ मज़दूरों की बस्तियाँ, काम के लंबे घंटे तथा दुर्घटनाएँ एक स्थायी प्रश्न बन चुके थे, इसलिए ऐसे संगठन की भूमि पहले से तैयार थी । एन.एम. जोशी का महत्व यहीं समाप्त नहीं होता । भारत में संगठित ट्रेड यूनियन आंदोलन के आरंभ से उनका नाम जुड़ा है : 1920 में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना में उनकी केंद्रीय भूमिका रही, वे उसके महामंत्री बने, और आगे चलकर केंद्रीय विधान सभा में श्रमिक हितों के प्रतिनिधि के रूप में तथा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलनों में भारतीय श्रमिकों के प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहे । इसी कारण उन्हें भारत के ट्रेड यूनियन आंदोलन के प्रवर्तकों में गिना जाता है । ईपीएफओ जैसी परीक्षा के लिए यह नाम विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि श्रम विधि का जो ढाँचा इस प्रश्नपत्र में अलग से पूछा गया है, उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि इन्हीं आरंभिक संगठनों ने बनाई थी ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)जी.के. गोखले — गोपाल कृष्ण गोखले का संबंध इस परंपरा से है, पर एक दूसरी संस्था से । उन्होंने 1905 में पुणे में भारत सेवक समाज की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य ऐसे कार्यकर्ता तैयार करना था जो जीवन भर अल्प वेतन पर सार्वजनिक सेवा में लगे रहें और देश के लिए प्रशिक्षित लोक-सेवकों का एक वर्ग खड़ा करें । एन.एम. जोशी उसी समाज के सदस्य थे, इसलिए दोनों नामों के बीच वास्तविक संबंध है और यही इस विकल्प को भ्रामक बनाता है । गोखले नरमपंथी धारा के प्रमुख नेता थे, कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और गाँधीजी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे । पर 1911 में बंबई में सोशल सर्विस लीग की स्थापना उनके नाम से नहीं जुड़ी । संस्था और संस्थापक के जोड़े याद रखते समय वर्ष और नगर दोनों साथ रखिए ।
- (b)एस.ए. डांगे — श्रीपाद अमृत डांगे भारत के आरंभिक साम्यवादी नेताओं में थे, पर उनका सार्वजनिक जीवन 1911 के बाद के दौर से आरंभ होता है और उनकी धारा भी भिन्न है । वे 1924 के उस प्रसिद्ध षड्यंत्र मुक़दमे के अभियुक्तों में थे जिसमें आरंभिक साम्यवादियों पर मुक़दमा चला, और आगे चलकर मज़दूर आंदोलन तथा ट्रेड यूनियन राजनीति में उनकी लंबी भूमिका रही । अर्थात् मज़दूरों से उनका संबंध निश्चित है, पर वह संबंध समाज सेवा की उस उदार परंपरा से नहीं जुड़ता जिससे सोशल सर्विस लीग निकली थी । ऐसे प्रश्नों में यह देखना उपयोगी होता है कि दी गई तिथि पर संबंधित व्यक्ति की आयु और सार्वजनिक जीवन का चरण क्या था — इससे कई विकल्प तुरंत कट जाते हैं ।
- (d)एम.आर. जयकर — मुकुंद रामराव जयकर बंबई के प्रसिद्ध विधिवेत्ता और सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, पर उनका नाम इस संस्था से नहीं जुड़ता । वे असहयोग आंदोलन के बाद के दौर में विधान परिषदों की राजनीति में सक्रिय रहे, गोलमेज़ सम्मेलनों में भाग लिया और आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में काम किया । उनकी पहचान मुख्यतः संवैधानिक राजनीति और विधि से है, श्रमिक संगठन या समाज सेवा की संस्था से नहीं । इस विकल्प का प्रयोजन केवल यह है कि सूची में उसी नगर और उसी काल का एक और प्रतिष्ठित नाम रहे, ताकि उत्तर केवल परिचितता के आधार पर न चुना जा सके ।
अवधारणा
उन्नीसवीं शताब्दी के अंत और बीसवीं के आरंभ में भारत में सेवा तथा सुधार की अनेक संस्थाएँ बनीं, और परीक्षा में उनसे संस्था तथा संस्थापक के जोड़े पूछे जाते हैं । भारत सेवक समाज की स्थापना गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में पुणे में की, जिसका उद्देश्य आजीवन सार्वजनिक सेवा को व्रत के रूप में लेने वाले कार्यकर्ता तैयार करना था । सोशल सर्विस लीग की स्थापना एन.एम. जोशी ने 1911 में बंबई में की, जिसका बल नगर के मज़दूरों और निर्धनों के जीवन-स्तर पर था — रात्रि पाठशालाएँ, पुस्तकालय, सहकारी समितियाँ, स्वास्थ्य और क़ानूनी सहायता । श्रमिक संगठन के क्षेत्र में सबसे बड़ा पड़ाव 1920 है, जब अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई ; उसके पहले अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की और एन.एम. जोशी उसके महामंत्री बने । इसी दौर में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना हुई और भारत उसका संस्थापक सदस्य बना, जिससे भारतीय श्रम विधि पर अंतरराष्ट्रीय मानकों का प्रभाव आरंभ हुआ । 1926 का ट्रेड यूनियन अधिनियम इसी पृष्ठभूमि की देन है ।
इस प्रश्न को इस प्रश्नपत्र के श्रम विधि वाले खंडों के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए । जिस ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 पर इस पेपर में दो प्रश्न हैं, उसकी पृष्ठभूमि यही आरंभिक संगठन और आंदोलन हैं । बीसवीं शताब्दी के आरंभ में बंबई, कलकत्ता, अहमदाबाद और कानपुर जैसे नगरों में कारख़ाना मज़दूरों की बड़ी बस्तियाँ बन चुकी थीं, काम के घंटे लंबे थे, दुर्घटनाएँ आम थीं और कोई क़ानूनी संरक्षण नहीं था । पहले चरण में इस स्थिति पर काम करने वाले प्रायः समाज-सुधारक और उदार सार्वजनिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने संस्थाओं के माध्यम से शिक्षा और सहायता का काम किया ; दूसरे चरण में संगठित यूनियनें बनीं ; और तीसरे चरण में विधान आया । इस क्रम को याद रखने से इतिहास और श्रम विधि दोनों के प्रश्न एक साथ सधते हैं ।
मुख्य तथ्य
- सोशल सर्विस लीग की स्थापना एन.एम. जोशी ने वर्ष 1911 में बंबई में की थी ।
- इस लीग का उद्देश्य नगर के मज़दूरों और निर्धन वर्गों के जीवन-स्तर में सुधार करना था — रात्रि पाठशालाएँ, पुस्तकालय, सहकारी समितियाँ, स्वास्थ्य तथा क़ानूनी सहायता ।
- एन.एम. जोशी गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा 1905 में स्थापित भारत सेवक समाज के सदस्य थे ।
- 1920 में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई ; उसके पहले अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की और जोशी उसके महामंत्री बने ।
- जोशी केंद्रीय विधान सभा में श्रमिक हितों के प्रतिनिधि रहे और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलनों में भारतीय श्रमिकों का प्रतिनिधित्व किया ।
- भारत सेवक समाज की स्थापना 1905 में पुणे में हुई और उसका उद्देश्य आजीवन सार्वजनिक सेवा के लिए कार्यकर्ता तैयार करना था ।
- एस.ए. डांगे भारत के आरंभिक साम्यवादी नेताओं में थे और 1924 के षड्यंत्र मुक़दमे के अभियुक्तों में गिने जाते हैं ।
- एम.आर. जयकर बंबई के विधिवेत्ता और सार्वजनिक व्यक्ति थे, जिनकी पहचान संवैधानिक राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र से है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संस्था और संस्थापक का जोड़ा याद रखना पर वर्ष और नगर छोड़ देना ; प्रश्न प्रायः तीनों को मिलाकर पूछते हैं ।
- भारत सेवक समाज और सोशल सर्विस लीग को एक मान लेना । दोनों अलग संस्थाएँ हैं, यद्यपि उनमें संबंध है ।
- मज़दूरों से जुड़े हर नाम को एक ही धारा का मान लेना ; उदार समाज सेवा और साम्यवादी संगठन अलग परंपराएँ हैं ।
- किसी व्यक्ति की बाद की प्रसिद्धि को उस वर्ष की स्थिति मान लेना जिस वर्ष की बात प्रश्न कर रहा है ।
- देवनागरी में लिखे आद्याक्षरों को जल्दी में ग़लत पढ़ लेना ; एन.एम. और एम.आर. जैसे नाम पास-पास रखे जाते हैं ।
आधुनिक भारत के प्रश्नों में संस्था, संस्थापक, वर्ष और नगर का मिलान सबसे आम ढाँचा है, और वह इस प्रश्नपत्र में नियमित रूप से आता है । ऐसे प्रश्नों की तैयारी सूची बनाकर ही हो सकती है : हर संस्था के सामने चार बातें लिखिए — संस्थापक, वर्ष, नगर और मुख्य उद्देश्य । सूची बनने के बाद यह भी दिखने लगता है कि परीक्षक विकल्प कैसे चुनता है । वह प्रायः उसी नगर के, उसी काल के और उसी प्रकार के काम से जुड़े तीन और नाम रख देता है, ताकि उत्तर परिचितता से न निकाला जा सके — यहाँ चारों नाम बंबई और महाराष्ट्र के सार्वजनिक जीवन से जुड़े हैं । दूसरी बात, श्रम और मज़दूर आंदोलन से जुड़े प्रश्न इस परीक्षा में विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि पद स्वयं श्रम और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र का है ; इसलिए इस विषय के इतिहास को केवल सामान्य अध्ययन का भाग मानकर मत छोड़िए, उसे श्रम विधि के खंड से जोड़कर पढ़िए ।
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- (a) 1 only
- (b) 2 and 3 only
- (c) 1, 2 and 3
- (d) 1 and 3 only
उत्तर(c) 1, 2 and 3
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 में व्यवसाय-विवाद की परिभाषा से जुड़ा प्रश्न ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना निम्नलिखित में से किस वर्ष हुई थी और उसके पहले अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी ?
- (a)1918, एन.एम. जोशी
- (b)1920, लाला लाजपत राय
- (c)1926, एस.ए. डांगे
- (d)1930, वी.वी. गिरि
उत्तर(b) 1920, लाला लाजपत राय — उसी संस्था के महामंत्री एन.एम. जोशी बने ।
- practice — not a real PYQ
भारत सेवक समाज की स्थापना वर्ष 1905 में पुणे में निम्नलिखित में से किसने की थी ?
- (a)गोपाल कृष्ण गोखले
- (b)महादेव गोविंद रानडे
- (c)बाल गंगाधर तिलक
- (d)एन.एम. जोशी
उत्तर(a) गोपाल कृष्ण गोखले — इसका उद्देश्य आजीवन सार्वजनिक सेवा के लिए कार्यकर्ता तैयार करना था ।