मशीनरी के संस्थापन के लिए प्रदत्त मज़दूरी निम्नलिखित में से किस खाते (लेखा) में नामे डाली जाती है ?
- (a)मज़दूरी लेखा
- (b)मशीनरी लेखा
- (c)संस्थापन लेखा
- (d)लाभ-हानि लेखा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) मशीनरी लेखा । लेखांकन का नियम यह है कि किसी स्थायी परिसंपत्ति को उस स्थिति और उस स्थान तक लाने में जो भी व्यय होता है कि वह काम करने योग्य हो जाए, वह सारा व्यय उसकी लागत में जोड़ा जाता है और परिसंपत्ति के खाते में नामे डाला जाता है । इसी को पूँजीगत व्यय कहते हैं । मशीन के प्रसंग में इसमें क्रय मूल्य के साथ ढुलाई, चुंगी या आयात शुल्क, बीमा, संस्थापन की मज़दूरी, नींव और ढाँचा बनाने का ख़र्च तथा परीक्षण-संचालन का व्यय — सब सम्मिलित हो जाते हैं । कारण सीधा है : जब तक मशीन जोड़कर खड़ी नहीं की जाती, वह उत्पादन नहीं दे सकती, इसलिए उसे खड़ा करने में लगी मज़दूरी उस मशीन को उपयोगी बनाने की लागत का ही भाग है, उस अवधि का साधारण ख़र्च नहीं । इसलिए प्रविष्टि होगी — मशीनरी लेखा नामे और रोकड़ या बैंक जमा । इससे मशीन की लागत उतनी ही बढ़ जाती है और आगे मूल्यह्रास भी उसी बढ़ी हुई लागत पर लगेगा, अर्थात् यह व्यय एक ही वर्ष में नहीं, मशीन के पूरे उपयोगी जीवन में क्रमशः लाभ-हानि खाते तक पहुँचेगा । यही मिलान संकल्पना का तक़ाज़ा भी है, क्योंकि मशीन कई वर्ष तक आय कमाएगी । यदि यही मज़दूरी साधारण मज़दूरी लेखा में डाल दी जाए तो दो ग़लतियाँ एक साथ होंगी — चालू वर्ष का लाभ वास्तविक से कम दिखेगा और चिट्ठे में मशीन अपनी सही लागत से कम पर खड़ी रहेगी । ऐसी भूल को सिद्धांत की त्रुटि कहा जाता है, क्योंकि इसमें पूँजीगत व्यय को आयगत व्यय मान लिया गया है । ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि यह त्रुटि शेष परीक्षण पकड़ नहीं पाती, क्योंकि नामे और जमा की रक़म तो बराबर ही रहती है — केवल नामे ग़लत खाते में गया है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)मज़दूरी लेखा — यह सबसे स्वाभाविक दिखने वाला और इसीलिए सबसे भ्रामक विकल्प है — रक़म मज़दूरी के रूप में दी गई है, तो मज़दूरी लेखा में क्यों न जाए । पर लेखांकन में यह नहीं देखा जाता कि रक़म किस नाम से दी गई, बल्कि यह देखा जाता है कि वह किस प्रयोजन से दी गई । मज़दूरी लेखा में वह मज़दूरी जाती है जो उत्पादन के सामान्य कार्य पर व्यय होती है और जो उसी अवधि की आय कमाने में लगती है ; वह आयगत व्यय है और वर्ष के अंत में व्यापार खाते में चली जाती है । संस्थापन की मज़दूरी उससे भिन्न है, क्योंकि उसका लाभ एक वर्ष तक सीमित नहीं । इसे मज़दूरी लेखा में डालना सिद्धांत की त्रुटि कहलाता है, और उसकी विशेषता यह है कि शेष परीक्षण उसे पकड़ नहीं पाता ।
- (c)संस्थापन लेखा — साधारण व्यवहार में संस्थापन के नाम से कोई अलग खाता नहीं खोला जाता । संस्थापन कोई स्वतंत्र परिसंपत्ति नहीं है और न ही वह अपने आप में कोई आवर्ती व्यय है ; वह उस मशीन को काम करने योग्य बनाने की लागत का अंश है, इसलिए उसका स्थान मशीनरी लेखा के भीतर है । यदि ऐसा खाता खोल भी दिया जाए तो अंततः उसका शेष मशीनरी लेखा में ही मिलाना पड़ेगा, अन्यथा चिट्ठे में एक ऐसी मद खड़ी रहेगी जिसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं । यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि वह पढ़ने में तकनीकी और सटीक लगता है । लेखांकन में सामान्य नियम यही है कि नया खाता तभी खोला जाए जब कोई स्वतंत्र मद हो ; परिसंपत्ति से जुड़ी लागतें उसी परिसंपत्ति में समाहित की जाती हैं ।
- (d)लाभ-हानि लेखा — लाभ-हानि लेखा में वे व्यय जाते हैं जो उसी अवधि से संबंधित हैं और जिनका लाभ उसी अवधि में समाप्त हो जाता है — वेतन, किराया, बीमा, ब्याज, विज्ञापन और ऐसे ही आयगत व्यय । संस्थापन की मज़दूरी इस श्रेणी में नहीं आती, क्योंकि उससे बनी सुविधा वर्षों चलेगी । इसे सीधे लाभ-हानि खाते में डाल देना उसी सिद्धांत की त्रुटि का दूसरा रूप है — पूँजीगत व्यय को आयगत मान लेना — और उसका प्रभाव यह होगा कि पहले वर्ष का लाभ अनुचित रूप से घट जाएगा तथा बाद के वर्षों का लाभ उतना ही बढ़ा हुआ दिखेगा, क्योंकि उन वर्षों में मूल्यह्रास कम लगेगा । ध्यान रखिए कि यह व्यय अंततः लाभ-हानि खाते तक पहुँचता ही है, पर एक बार में नहीं, मूल्यह्रास के रूप में वर्षों में बँटकर ।
अवधारणा
पूँजीगत और आयगत व्यय का भेद लेखाशास्त्र की सबसे अधिक पूछी जाने वाली धारणाओं में है । पूँजीगत व्यय वह है जिससे कोई स्थायी परिसंपत्ति प्राप्त होती है, या जिससे किसी विद्यमान परिसंपत्ति की क्षमता, आयु या कार्यकुशलता स्थायी रूप से बढ़ती है ; उसका लाभ एक से अधिक लेखा-अवधि तक चलता है और वह चिट्ठे में दिखाया जाता है । आयगत व्यय वह है जो दैनिक संचालन के लिए किया जाता है और जिसका लाभ उसी अवधि में समाप्त हो जाता है ; वह व्यापार खाते या लाभ-हानि खाते में जाता है । किसी परिसंपत्ति की लागत में वे सब व्यय जोड़े जाते हैं जो उसे उसके स्थान और काम करने योग्य स्थिति तक लाने में लगे — क्रय मूल्य, ढुलाई, बीमा, आयात शुल्क, संस्थापन और परीक्षण-संचालन । एक बार परिसंपत्ति चालू हो जाने के बाद उस पर होने वाला साधारण मरम्मत और रखरखाव का ख़र्च आयगत व्यय है, पर कोई ऐसा बड़ा सुधार जिससे उसकी उत्पादन क्षमता या शेष आयु बढ़ जाए, फिर पूँजीगत माना जाता है । यही सिद्धांत परिसंपत्ति, संयंत्र और उपकरण से संबंधित लेखा-मानकों में भी दिया गया है ।
इस प्रश्न में एक व्यापक शिक्षा छिपी है : लेखांकन में प्रविष्टि व्यय के नाम से नहीं, उसके प्रयोजन से तय होती है । उसी प्रकार के और उदाहरण याद रखिए — नई ख़रीदी गई पुरानी मशीन की मरम्मत का ख़र्च, जो उसे चलाने योग्य बनाने के लिए किया गया, पूँजीगत है, जबकि उसी मशीन पर एक वर्ष बाद की मरम्मत आयगत ; भवन बनवाते समय दी गई मज़दूरी पूँजीगत है, पर उसी भवन की सफ़ाई की मज़दूरी आयगत ; नई मशीन ढोने की गाड़ी का किराया पूँजीगत है, पर बिक्री के माल की ढुलाई आयगत । यह प्रश्न इस पेपर के लेखाशास्त्र खंड की शैली भी दिखाता है — छोटा-सा व्यावहारिक प्रसंग देकर यह पूछ लेना कि प्रविष्टि किस खाते में जाएगी । ऐसे प्रश्नों में समय बहुत कम लगता है यदि यह एक सिद्धांत स्पष्ट हो ।
मुख्य तथ्य
- किसी स्थायी परिसंपत्ति को काम करने योग्य स्थिति तक लाने में हुआ सारा व्यय उसकी लागत में जोड़ा जाता है और परिसंपत्ति के खाते में नामे डाला जाता है ।
- मशीन की लागत में क्रय मूल्य के साथ ढुलाई, आयात शुल्क, बीमा, संस्थापन की मज़दूरी, नींव का ख़र्च और परीक्षण-संचालन का व्यय आते हैं ।
- संस्थापन की मज़दूरी की प्रविष्टि है — मशीनरी लेखा नामे और रोकड़ या बैंक जमा ।
- इस व्यय का प्रभाव लाभ-हानि खाते तक मूल्यह्रास के रूप में पहुँचता है, एक ही वर्ष में नहीं, परिसंपत्ति के पूरे उपयोगी जीवन में ।
- पूँजीगत व्यय को आयगत मान लेना सिद्धांत की त्रुटि कहलाती है, और वह शेष परीक्षण के मिलान को प्रभावित नहीं करती ।
- आयगत व्यय दैनिक संचालन के लिए किया जाता है और उसका लाभ उसी अवधि में समाप्त हो जाता है, इसलिए वह व्यापार या लाभ-हानि खाते में जाता है ।
- परिसंपत्ति चालू हो जाने के बाद साधारण मरम्मत आयगत व्यय है, पर क्षमता या आयु बढ़ाने वाला बड़ा सुधार पूँजीगत ।
- लेखांकन में प्रविष्टि व्यय के नाम से नहीं, उसके प्रयोजन से तय होती है — यही इस प्रश्न का मूल सिद्धांत है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- व्यय के नाम को देखकर खाता तय कर देना । मज़दूरी शब्द होने से प्रविष्टि मज़दूरी लेखा में नहीं जाती ।
- परिसंपत्ति से जुड़ी लागत के लिए अलग खाता खोल देना । वह उसी परिसंपत्ति की लागत में जुड़नी चाहिए ।
- पूँजीगत व्यय को सीधे लाभ-हानि खाते में डाल देना ; उससे पहले वर्ष का लाभ कम और बाद के वर्षों का अधिक दिखेगा ।
- यह मान लेना कि शेष परीक्षण मिल जाने से ऐसी त्रुटि पकड़ी जाएगी । सिद्धांत की त्रुटि में दोनों पक्ष बराबर ही रहते हैं ।
- नई परिसंपत्ति को चलाने योग्य बनाने की मरम्मत और बाद की साधारण मरम्मत में अंतर न करना ।
लेखाशास्त्र के प्रश्नों में यह ढाँचा सबसे अधिक दोहराया जाता है — कोई एक लेनदेन बताकर पूछ लेना कि वह किस खाते में नामे या जमा होगा । ऐसे प्रश्न सीधे लगते हैं, पर उनके विकल्प जानबूझकर उस शब्द के आसपास बनाए जाते हैं जो प्रश्न में आया है ; यहाँ मज़दूरी शब्द स्टेम में भी है और एक विकल्प में भी । इसलिए हल करने का क्रम यही रखिए : पहले पूछिए कि यह व्यय पूँजीगत है या आयगत, फिर पूछिए कि किस परिसंपत्ति या किस अवधि से संबंधित है, और तब खाते का नाम चुनिए । इस दो-चरणीय जाँच से इस श्रेणी के लगभग सारे प्रश्न सध जाते हैं । तैयारी में एक छोटी सूची बना लीजिए जिसमें एक ओर वे व्यय हों जो परिसंपत्ति की लागत में जुड़ते हैं और दूसरी ओर वे जो अवधि के व्यय हैं ; परीक्षक प्रायः इसी सीमा-रेखा के आसपास से प्रश्न उठाता है, क्योंकि वहीं भूल की संभावना सबसे अधिक है ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q86खोलें व हल करें →Which one of the following statements about Trial Balance is correct ?
- (a) It is a book containing different accounts of an entity.
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- (d) It is a statement containing the various ledger balances of an entity on a particular date.
उत्तर(d) It is a statement containing the various ledger balances of an entity on a particular date.
इसी खंड का प्रश्न — शेष परीक्षण के बारे में कौन-सा कथन सही है ।
EPFO_EOAO_2020_Q88खोलें व हल करें →When are current liabilities payable ?
- (a) Within a year
- (b) After one year but within five years
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उत्तर(a) Within a year
लेखांकन का अगला प्रश्न — चालू देयताएँ कब देय होती हैं ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी पुरानी मशीन को ख़रीदने के बाद उसे चलाने योग्य बनाने के लिए की गई मरम्मत का व्यय निम्नलिखित में से किस प्रकार का व्यय माना जाएगा ?
- (a)आयगत व्यय
- (b)पूँजीगत व्यय
- (c)आस्थगित आयगत व्यय
- (d)व्यक्तिगत व्यय
उत्तर(b) पूँजीगत व्यय — वह मशीन को काम करने योग्य बनाने की लागत का भाग है, इसलिए मशीन के खाते में जुड़ेगा ।
- practice — not a real PYQ
पूँजीगत व्यय को आयगत व्यय मान लेने से होने वाली भूल को लेखांकन में निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है ?
- (a)लोप की त्रुटि
- (b)लेखन की त्रुटि
- (c)सिद्धांत की त्रुटि
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उत्तर(c) सिद्धांत की त्रुटि — और यह त्रुटि शेष परीक्षण के मिलान को प्रभावित नहीं करती ।