शेष परीक्षण (ट्रायल बैलेंस) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है ?
- (a)यह किसी इकाई के भिन्न-भिन्न लेखाओं से संबंधित बही है ।
- (b)यह किसी इकाई के देनदारों के शेषों से संबंधित विवरण है ।
- (c)यह किसी इकाई के देनदारों और लेनदारों के शेषों से संबंधित विवरण है ।
- (d)यह किसी विशेष तारीख़ को किसी इकाई के विविध खाता-बही शेषों से संबंधित विवरण है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) यह किसी विशेष तारीख़ को किसी इकाई के विविध खाता-बही शेषों से संबंधित विवरण है । इस वाक्य के तीन अंश हैं और तीनों महत्वपूर्ण हैं — यह विवरण है, इसमें खाता-बही के शेष आते हैं, और वे किसी निश्चित तारीख़ के होते हैं । पहले अंश पर ध्यान दीजिए : शेष परीक्षण, जिसे हिन्दी की लेखा-पुस्तकों में प्रायः तलपट भी कहा जाता है, कोई बही नहीं है । बहियाँ दो प्रकार की होती हैं — प्रारंभिक लेखे की बहियाँ, जैसे जर्नल और सहायक बहियाँ, तथा अंतिम लेखे की बही, अर्थात् खाता-बही । शेष परीक्षण इनमें से किसी में नहीं आता ; वह खाता-बही से निकालकर बनाया गया एक विवरण है, एक कार्य-पत्रक, जिसमें दोहरा लेखा प्रणाली की कोई प्रविष्टि नहीं होती । दूसरा अंश यह बताता है कि उसमें क्या आता है : खाता-बही के सब खातों के शेष — संपत्ति, देयता, पूँजी, आय और व्यय सभी । यही उसे देनदारों की सूची या लेनदारों की सूची से अलग करता है, जो केवल एक श्रेणी के खातों तक सीमित रहती हैं । तीसरा अंश तारीख़ का है, क्योंकि शेष किसी क्षण के होते हैं ; कल कोई प्रविष्टि हो गई तो शेष बदल जाएगा, इसलिए हर शेष परीक्षण के शीर्ष पर एक निश्चित तारीख़ लिखी जाती है । बनाने का उद्देश्य भी इसी से जुड़ा है — यह देखना कि बहियों का अंकगणित ठीक बैठा या नहीं । दोहरा लेखा प्रणाली में हर प्रविष्टि में जितना नामे होता है उतना ही जमा, इसलिए यदि सब कुछ ठीक चढ़ा हो तो सब खातों के नामे शेषों का योग और जमा शेषों का योग बराबर आना चाहिए । इसके अतिरिक्त यह विवरण अंतिम खाते बनाने का आधार भी है, क्योंकि व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता और तुलन-पत्र इसी से तैयार किए जाते हैं ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)यह किसी इकाई के भिन्न-भिन्न लेखाओं से संबंधित बही है । — यह वाक्य खाता-बही का वर्णन है, शेष परीक्षण का नहीं । खाता-बही वह बही है जिसमें प्रत्येक खाता अलग-अलग खोला जाता है और उसमें उस खाते से संबंधित सारी प्रविष्टियाँ जर्नल तथा सहायक बहियों से चढ़ाई जाती हैं ; इसे प्रधान बही भी कहा जाता है, क्योंकि किसी खाते की स्थिति जाननी हो तो वहीं देखी जाती है । शेष परीक्षण उसी खाता-बही से निकाला जाता है — प्रत्येक खाते का शेष लेकर एक पत्रक पर उतार लिया जाता है — पर वह स्वयं बही नहीं है और उसमें कोई प्रविष्टि नहीं की जाती । यह भेद परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है, इसलिए इसे इस रूप में याद रखिए : बही में लिखा जाता है, विवरण में दिखाया जाता है ।
- (b)यह किसी इकाई के देनदारों के शेषों से संबंधित विवरण है । — यह वाक्य विवरण शब्द तो ठीक रखता है, पर उसकी विषय-वस्तु बहुत संकीर्ण कर देता है । देनदारों के शेषों की सूची अलग से बनाई जाती है और उसे देनदारों की अनुसूची कहा जाता है ; उसका उपयोग यह मिलान करने में होता है कि सब व्यक्तिगत देनदारों के शेषों का योग विक्रय खाता-बही के कुल शेष से मिलता है या नहीं । शेष परीक्षण उससे कहीं व्यापक है : उसमें देनदार भी आते हैं, लेनदार भी, रोकड़ और बैंक भी, स्थायी संपत्तियाँ भी, पूँजी और आहरण भी, तथा सारी आय और सारे व्यय भी । यदि शेष परीक्षण में केवल देनदार होते तो उससे न बहियों का अंकगणित जाँचा जा सकता और न अंतिम खाते बनाए जा सकते ।
- (c)यह किसी इकाई के देनदारों और लेनदारों के शेषों से संबंधित विवरण है । — यह विकल्प पिछले से एक क़दम आगे जाता है और इसीलिए अधिक भ्रामक है, पर वह अब भी अधूरा है । देनदार और लेनदार दोनों को जोड़ लेने पर भी बात केवल व्यक्तिगत खातों तक सीमित रहती है । लेखांकन में खाते तीन प्रकार के माने जाते हैं — व्यक्तिगत, वास्तविक और नाममात्र के । देनदार और लेनदार व्यक्तिगत खाते हैं ; रोकड़, माल, भवन और मशीन वास्तविक खाते हैं ; और मज़दूरी, किराया, ब्याज तथा कमीशन नाममात्र के खाते । शेष परीक्षण तीनों प्रकार के खातों के शेष समेटता है, इसीलिए उसके दोनों स्तंभों का योग बराबर आने की अपेक्षा की जाती है । केवल दो श्रेणियाँ लेकर बना विवरण न संतुलित होगा और न अंतिम खातों का आधार बन सकेगा ।
अवधारणा
लेखांकन का चक्र इस क्रम में चलता है । कोई लेनदेन होने पर उसका प्रमाणक बनता है, फिर वह प्रारंभिक लेखे की बही में दर्ज होता है — जर्नल में या रोकड़ बही, क्रय बही, विक्रय बही जैसी सहायक बहियों में । वहाँ से प्रविष्टियाँ खाता-बही के संबंधित खातों में चढ़ाई जाती हैं और अवधि के अंत में हर खाते का शेष निकाला जाता है । उन्हीं शेषों को एक पत्रक पर नामे और जमा दो स्तंभों में उतारकर शेष परीक्षण बनाया जाता है, और उसी के आधार पर व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता तथा तुलन-पत्र तैयार होते हैं । शेष परीक्षण बनाने की तीन विधियाँ बताई जाती हैं — योग विधि, जिसमें प्रत्येक खाते के दोनों पक्षों के योग लिखे जाते हैं ; शेष विधि, जो सबसे प्रचलित है और जिसमें केवल शेष लिखा जाता है ; और दोनों का मिश्रण । सामान्य नियम यह है कि संपत्ति, व्यय और आहरण के खातों में नामे शेष होता है, जबकि देयता, पूँजी और आय के खातों में जमा शेष । यह विवरण न तो दोहरा लेखा प्रणाली का भाग है और न कोई खाता ; वह केवल एक जाँच-पत्रक है ।
हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थी के लिए इस प्रश्न में एक अतिरिक्त कठिनाई है । पुस्तिका ने ट्रायल बैलेंस के लिए शेष परीक्षण शब्द चुना है और कोष्ठक में अंग्रेज़ी शब्द का देवनागरी लिप्यंतरण दे दिया है, जबकि हिन्दी की अधिकांश लेखा-पुस्तकें इसी के लिए तलपट शब्द का प्रयोग करती हैं । इसलिए तीनों रूप साथ रखकर याद कीजिए — तलपट, शेष परीक्षण और ट्रायल बैलेंस — ताकि किसी भी रूप में प्रश्न आए तो अटकाव न हो । यही सावधानी लेखांकन के अन्य शब्दों में भी आवश्यक है, क्योंकि हिन्दी में एक ही अंग्रेज़ी शब्द के लिए दो-तीन पर्याय चलते हैं : खाता-बही और लेजर, रोज़नामचा और जर्नल, तुलन-पत्र और चिट्ठा । परीक्षा की भाषा जिस रूप को चुनती है वह हर वर्ष एक जैसा नहीं होता ।
मुख्य तथ्य
- शेष परीक्षण किसी विशेष तारीख़ को खाता-बही के सब खातों के शेषों को नामे और जमा दो स्तंभों में दिखाने वाला विवरण है ।
- यह कोई बही या खाता नहीं है, इसलिए इसमें दोहरा लेखा प्रणाली की कोई प्रविष्टि नहीं की जाती ; यह केवल एक जाँच-पत्रक है ।
- इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य बहियों की अंकगणितीय शुद्धता जाँचना और अंतिम खातों का आधार तैयार करना है ।
- हिन्दी की लेखा-पुस्तकों में इसी के लिए प्रायः तलपट शब्द भी प्रयुक्त होता है ।
- बनाने की तीन विधियाँ हैं — योग विधि, शेष विधि और दोनों का मिश्रण ; इनमें शेष विधि सबसे प्रचलित है ।
- संपत्ति, व्यय और आहरण के खातों में नामे शेष रहता है, जबकि देयता, पूँजी और आय के खातों में जमा शेष ।
- लेखांकन में खाते तीन प्रकार के माने जाते हैं — व्यक्तिगत, वास्तविक और नाममात्र के — और शेष परीक्षण तीनों को समेटता है ।
- देनदारों अथवा लेनदारों की अलग सूची को अनुसूची कहा जाता है और उसका उपयोग सहायक खाता-बही से मिलान में होता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- शेष परीक्षण को बही मान लेना । वह खाता-बही से निकाला गया विवरण है, स्वयं कोई बही नहीं ।
- उसे केवल देनदारों या लेनदारों तक सीमित समझ लेना । उसमें सब प्रकार के खातों के शेष आते हैं ।
- तारीख़ का उल्लेख छोड़ देना । शेष किसी क्षण के होते हैं, इसलिए विवरण सदा किसी निश्चित तारीख़ का होता है ।
- यह मान लेना कि दोनों पक्ष मिल जाने से बहियाँ पूर्णतः शुद्ध सिद्ध हो जाती हैं । कई त्रुटियाँ मिलान को प्रभावित ही नहीं करतीं ।
- हिन्दी पर्यायों में उलझ जाना । तलपट, शेष परीक्षण और ट्रायल बैलेंस एक ही वस्तु के नाम हैं ।
लेखाशास्त्र इस प्रश्नपत्र के दो पूरे खंडों में आता है, और उसका स्तर वाणिज्य की स्नातक स्तर की आधारभूत पुस्तक से आगे नहीं जाता । सबसे आम रूप यही है — किसी मूल धारणा की चार परिभाषाएँ देकर सही परिभाषा चुनवाना । ऐसे प्रश्नों में विकल्प प्रायः एक ही परिवार से चुने जाते हैं, ताकि केवल शब्द की परिचितता से काम न चले ; यहाँ चारों वाक्य बही या विवरण की ही बात करते हैं और अंतर केवल इस बात का है कि उसमें क्या आता है । इसलिए तैयारी में हर धारणा के लिए तीन बातें अलग-अलग लिख लीजिए — वह क्या है (बही, खाता या विवरण), उसमें क्या आता है, और वह किस उद्देश्य से बनाई जाती है । यह तीन-भागी ढाँचा शेष परीक्षण, खाता-बही, रोकड़ बही, तुलन-पत्र और लाभ-हानि खाता सबके लिए बनाया जा सकता है, और उसके बाद इस प्रकार का कोई भी प्रश्न कुछ सेकंड में हल हो जाता है ।
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अभ्यास
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