निम्नलिखित में से कौन-सा 21 और 55 के बीच की सभी अभाज्य संख्याओं का औसत है ?
- (a)35·85
- (b)36·71
- (c)38·00
- (d)39·00
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 38·00 । पहले 21 और 55 के बीच की सभी अभाज्य संख्याएँ सावधानी से गिनिए । अभाज्य वह संख्या है जिसके ठीक दो भाजक हों — एक और स्वयं वह संख्या । इस परास में वे आठ हैं : 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47 और 53 । इनके बीच पड़ने वाली विषम संख्याओं को एक बार जाँच लीजिए ताकि कोई छूट न जाए — 25 पाँच से, 27 तीन से, 33 तीन से, 35 पाँच से, 39 तीन से, 45 तीन से, 49 सात से और 51 तीन से विभाज्य है, इसलिए इनमें से कोई अभाज्य नहीं । अब जोड़िए । 23 और 29 मिलकर 52, उसमें 31 जोड़ने पर 83, 37 से 120, 41 से 161, 43 से 204, 47 से 251 और 53 से 304 । कुल योग 304 है और संख्याएँ आठ हैं, इसलिए औसत 304 को 8 से भाग देने पर 38 आता है । यही उत्तर है । जोड़ को आसान करने का एक ढंग यह भी है कि संख्याओं को 38 के आसपास सोचकर विचलन जोड़े जाएँ : 23 से 38 तक का विचलन ऋण 15, 29 से ऋण 9, 31 से ऋण 7, 37 से ऋण 1, 41 से धन 3, 43 से धन 5, 47 से धन 9 और 53 से धन 15 । ऋणात्मक विचलनों का योग बत्तीस है और धनात्मक विचलनों का योग भी बत्तीस, अर्थात् दोनों बराबर — इसका सीधा अर्थ यही है कि औसत ठीक 38 है । यह तरीक़ा परीक्षा में समय बचाता है, क्योंकि इसमें बड़ी संख्याएँ जोड़नी ही नहीं पड़तीं । अंत में यह भी ध्यान दीजिए कि इस प्रश्न के तीनों दूसरे विकल्प तब बनते हैं जब सूची में से कोई एक अभाज्य संख्या छूट जाए, इसलिए यहाँ सारी सावधानी गिनने में ही लगानी है, गणना में नहीं ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)35·85 — यह मान वहाँ पहुँचता है जहाँ सूची की अंतिम अभाज्य संख्या छूट जाए । यदि कोई 53 को छोड़ दे — यह सोचकर कि परास 50 तक है, या केवल जल्दबाज़ी में — तो शेष सात संख्याओं का योग 251 रह जाता है और उसे सात से भाग देने पर लगभग 35·86 आता है, जो इसी विकल्प के आसपास है । यह इस प्रश्न की सबसे आम भूल है, क्योंकि सूची के अंतिम सिरे पर ध्यान सबसे कम रहता है । इससे बचने का उपाय यह है कि परास की दोनों सीमाओं को पहले लिख लीजिए और फिर ऊपरी सीमा से नीचे की ओर गिनना आरंभ कीजिए, न कि नीचे से ऊपर की ओर । इस प्रश्न में ऊपरी सीमा 55 है और उससे ठीक नीचे 53 अभाज्य है, इसलिए उसे सबसे पहले पकड़ लेना चाहिए ।
- (b)36·71 — यह मान तब आता है जब सूची में से 47 छूट जाए । ऐसा प्रायः इसलिए होता है कि 47 के आसपास 45 और 49 दोनों भ्रामक हैं — 45 तीन से और 49 सात से विभाज्य है — और जाँचते समय ध्यान उन्हीं पर टिक जाता है । 47 को छोड़ देने पर शेष सात संख्याओं का योग 257 रह जाता है और उसे सात से भाग देने पर लगभग 36·71 आता है, जो ठीक इसी विकल्प का मान है । यहाँ से एक सामान्य सीख निकलती है : औसत के प्रश्नों में विकल्प प्रायः गणना की भूल से नहीं, सूची की भूल से बनाए जाते हैं । इसलिए भाग देने से पहले एक बार यह गिन लीजिए कि आपकी सूची में कितनी संख्याएँ हैं, क्योंकि ग़लत गिनती दोनों जगह असर डालती है — योग में भी और भाजक में भी ।
- (d)39·00 — यह मान तब आता है जब 31 छूट जाए । शेष सात संख्याओं का योग 273 रह जाता है और उसे सात से भाग देने पर ठीक 39 आता है — पूरा अंक, जो देखने में और भी विश्वसनीय लगता है और इसीलिए यह विकल्प ख़तरनाक है । ध्यान दीजिए कि 30 के आसपास तीन संख्याएँ पास-पास हैं — 29, 31 और 37 — और बीच में 33 तथा 35 अनभाज्य हैं ; इस भीड़ में एक संख्या छूट जाना आसान है । उत्तर के रूप में पूरा अंक दिखना किसी विकल्प के सही होने का प्रमाण नहीं है । यहाँ सही उत्तर भी पूरा अंक ही है, इसलिए दोनों में अंतर केवल इसी से होगा कि सूची पूरी बनी थी या नहीं ।
अवधारणा
अभाज्य संख्या वह प्राकृत संख्या है जो एक से बड़ी हो और जिसके ठीक दो भाजक हों — एक और स्वयं वह संख्या । एक न अभाज्य है न भाज्य ; दो सबसे छोटी अभाज्य संख्या है और एकमात्र सम अभाज्य भी । किसी संख्या के अभाज्य होने की जाँच का व्यावहारिक नियम यह है कि उसके वर्गमूल तक की सभी अभाज्य संख्याओं से भाग देकर देख लिया जाए ; यदि कोई भाग न दे तो वह अभाज्य है । इस प्रश्न की सीमा 55 है और 55 का वर्गमूल आठ से कम है, इसलिए 2, 3, 5 और 7 से जाँच कर लेना पर्याप्त है । सौ तक की अभाज्य संख्याएँ पच्चीस हैं और उन्हें एक बार क्रम से याद कर लेना ऐसे हर प्रश्न में समय बचाता है : 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89 और 97 । औसत की परिभाषा सीधी है — सभी पदों का योग, पदों की संख्या से भाग । जहाँ संख्याएँ बड़ी हों वहाँ विचलन विधि उपयोगी होती है : कोई सुविधाजनक मान मानकर उससे विचलन जोड़िए और विचलनों का औसत उस मान में जोड़ दीजिए ।
इस प्रश्न का असली विषय औसत नहीं, अभाज्य संख्याओं की सूची है । गणना इतनी सरल है कि उसमें कोई भूल नहीं होती ; भूल सूची बनाने में होती है, और परीक्षक ने विकल्प भी ठीक उसी भूल के अनुसार बनाए हैं — तीनों ग़लत विकल्प उन्हीं मानों के आसपास हैं जो किसी एक अभाज्य संख्या के छूट जाने पर आते हैं । यह संख्यात्मक अभियोग्यता के प्रश्नों का एक सामान्य ढंग है : कठिनाई गणना में नहीं, प्रश्न को ठीक-ठीक पढ़ने और सूची पूरी बनाने में रखी जाती है । इसीलिए ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले वह छोटा-सा काम कीजिए जिसे सब हल्के में लेते हैं — परास की सीमाएँ लिखिए, सूची लिखिए, और गिनिए कि सूची में कितने पद हैं ।
मुख्य तथ्य
- 21 और 55 के बीच की अभाज्य संख्याएँ आठ हैं — 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47 और 53 ।
- इन आठों का योग 304 है और औसत 304 को 8 से भाग देने पर ठीक 38 आता है ।
- अभाज्य संख्या वह है जिसके ठीक दो भाजक हों ; एक न अभाज्य है न भाज्य, और दो एकमात्र सम अभाज्य संख्या है ।
- किसी संख्या के अभाज्य होने की जाँच के लिए उसके वर्गमूल तक की अभाज्य संख्याओं से भाग देकर देख लेना पर्याप्त है ।
- इस परास की भ्रामक संख्याएँ — 25 और 35 पाँच से, 27, 33, 39, 45 और 51 तीन से, तथा 49 सात से विभाज्य हैं ।
- सौ तक कुल पच्चीस अभाज्य संख्याएँ होती हैं, और उनकी सूची एक बार याद कर लेना ऐसे प्रश्नों में समय बचाता है ।
- औसत निकालने की विचलन विधि में किसी सुविधाजनक मान से विचलन जोड़े जाते हैं ; यहाँ 38 से ऋणात्मक और धनात्मक विचलन दोनों बत्तीस हैं ।
- इस प्रश्न के तीनों ग़लत विकल्प उन्हीं मानों के पास हैं जो सूची में से क्रमशः 53, 47 या 31 छूट जाने पर निकलते हैं ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- परास के सिरों की संख्याओं को छोड़ देना या जोड़ लेना । यहाँ 21 और 55 दोनों अभाज्य नहीं हैं, इसलिए यह प्रश्न इस भूल से बच जाता है ।
- 49 को अभाज्य मान लेना । वह सात का वर्ग है, और इसी प्रकार 51 तीन से विभाज्य है ।
- सूची तो ठीक बनाना पर पदों की संख्या ग़लत गिन लेना ; ग़लत भाजक पूरा उत्तर बदल देता है ।
- पूरे अंक वाले विकल्प को सही मान लेना । इस प्रश्न में एक ग़लत विकल्प भी पूरा अंक है ।
- जोड़ जल्दबाज़ी में करना जबकि विचलन विधि से वही काम बिना बड़ी संख्याओं के हो जाता है ।
संख्यात्मक अभियोग्यता इस प्रश्नपत्र में तीन खंडों में आती है और उसका स्तर स्नातक स्तर की सामान्य गणित से आगे नहीं जाता । औसत, अनुपात, प्रतिशत, समय और दूरी तथा संख्या पद्धति उसके सबसे आम विषय हैं । इस प्रश्न जैसा ढाँचा विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है : गणित सरल है और पूरी परीक्षा इस बात की है कि सूची ठीक बनी या नहीं । ऐसे प्रश्नों में विकल्प भी सामान्यतः उन्हीं मानों के बनाए जाते हैं जो एक पद छूटने या एक अतिरिक्त पद जुड़ने पर आते हैं, इसलिए विकल्प देखकर यह भ्रम मत पालिए कि उत्तर के पास होना उसके सही होने का प्रमाण है । दो आदतें यहाँ बहुत काम आती हैं । पहली, परास की सीमाएँ लिखकर सूची बनाइए और सूची के पदों की संख्या अलग से गिनिए । दूसरी, बड़ी संख्याओं का औसत निकालते समय विचलन विधि अपनाइए, जिसमें केवल छोटे अंक जोड़ने पड़ते हैं और भूल की संभावना घट जाती है ।
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अभ्यास
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40 और 60 के बीच की सभी अभाज्य संख्याओं का योग निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
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