एल.पी.जी. ग्राहकों को सेवा प्रदान करने की सुलक्षित प्रणाली के रूप में प्रारंभ की गई योजना का नाम निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
- (a)सहज
- (b)पहल
- (c)उदय
- (d)उड़ान
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) सहज । सहज सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की वह व्यवस्था है जिसके अंतर्गत नया घरेलू रसोई गैस कनेक्शन ऑनलाइन लिया जा सकता है । इसमें आवेदक जाल-स्थल पर स्वयं पंजीकरण करता है, अपना वितरक चुनता है, भुगतान ऑनलाइन करता है और उसे विद्युत रूप में अभिदान प्रमाणपत्र मिल जाता है ; उसके बाद सिलेंडर, नियामक और काग़ज़ात घर पर पहुँचा दिए जाते हैं । स्टेम के शब्दों को ध्यान से पढ़िए — वहाँ ग्राहकों को सेवा प्रदान करने की सुलक्षित प्रणाली कहा गया है । सेवा प्रदान करना यहाँ कुंजी शब्द है : प्रश्न उस व्यवस्था की बात कर रहा है जिससे ग्राहक तक सेवा पहुँचती है, न कि उस व्यवस्था की जिससे उसे कोई धनराशि मिलती है । सुलक्षित इसलिए कि आवेदक की पहचान ऑनलाइन ही सत्यापित होती है और यह भी देखा जाता है कि उसके नाम पर किसी और कंपनी में पहले से कनेक्शन तो नहीं है, जिससे एक ही घर में दो कनेक्शन होने की गुंजाइश घटती है । पुरानी पद्धति में नया कनेक्शन लेने के लिए वितरक के कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, प्रतीक्षा-सूची में नाम लिखाना पड़ता था और काग़ज़ जमा करने में समय लगता था ; इस व्यवस्था ने वही पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी । रसोई गैस से जुड़ी सरकारी पहलों को इसी भेद के साथ अलग-अलग याद रखना चाहिए, क्योंकि उनके नाम मिलते-जुलते हैं और परीक्षा उन्हीं को आपस में बदलकर पूछती है — एक व्यवस्था सहायिकी सीधे खाते में भेजने की है, एक निर्धन परिवारों की महिलाओं को निःशुल्क कनेक्शन देने की, और यह वाली नया कनेक्शन ऑनलाइन देने की । अतः इस प्रश्न का उत्तर सहज है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)पहल — आयोग की कुंजी यह विकल्प नहीं लेती । पहल का संबंध भी रसोई गैस से ही है, इसलिए यह चारों में सबसे निकट का विकल्प है और इसे ठीक-ठीक समझ लेना चाहिए । पहल अर्थात् प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ वह व्यवस्था है जिसमें रसोई गैस पर मिलने वाली सहायिकी उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है और सिलेंडर बाज़ार मूल्य पर ख़रीदना पड़ता है । यह 2014 में कुछ ज़िलों में आरंभ हुई और 1 जनवरी 2015 से पूरे देश में लागू की गई । ध्यान दीजिए कि इसका विषय सहायिकी का हस्तांतरण है, अर्थात् धन का लक्षित प्रवाह — जबकि प्रश्न सेवा प्रदान करने की प्रणाली पूछ रहा है, अर्थात् ग्राहक तक कनेक्शन और सामान पहुँचाने की व्यवस्था । यही अंतर इस प्रश्न का असली विभाजक है, और दोनों नामों को इसी भेद के साथ याद रखिए ।
- (c)उदय — उदय का रसोई गैस से कोई संबंध नहीं है ; वह बिजली क्षेत्र की योजना है । इसका पूरा नाम उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना है और यह 2015 में विद्युत मंत्रालय ने राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए आरंभ की थी । उन कंपनियों पर भारी ऋण था, उनकी वसूली कम थी और पारेषण तथा वितरण में हानि अधिक ; योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों ने उनके ऋण का बड़ा भाग अपने ऊपर लिया और बदले में हानि घटाने, विद्युत मीटर लगाने तथा दरों में सुधार जैसे लक्ष्य तय किए गए । नाम की ध्वनि से भ्रम हो सकता है, क्योंकि उज्ज्वला भी एक योजना का नाम है और वह रसोई गैस की ही है ; पर उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना और उज्ज्वला योजना दो अलग विषयों की योजनाएँ हैं ।
- (d)उड़ान — उड़ान नागरिक विमानन क्षेत्र की योजना है, इसलिए इस प्रश्न से उसका कोई संबंध नहीं । इसका पूरा नाम उड़े देश का आम नागरिक है और यह क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाने के लिए 2016 की राष्ट्रीय नागर विमानन नीति के अंतर्गत आरंभ हुई । इसका उद्देश्य छोटे नगरों के उन हवाई अड्डों को फिर से चालू करना है जहाँ उड़ानें नहीं थीं या बहुत कम थीं, और वहाँ की उड़ानों में कुछ सीटों का किराया सीमित रखना, जिसकी भरपाई विमान कंपनियों को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण से की जाती है । योजनाओं के नामों की यह भीड़ ही ऐसे प्रश्नों का आधार है, इसलिए हर नाम के सामने उसका क्षेत्र एक शब्द में लिख लीजिए — यह गैस की, यह बिजली की, यह विमानन की — तब विकल्प देखते ही तीन नाम अपने आप कट जाते हैं ।
अवधारणा
रसोई गैस से जुड़ी सरकारी पहलों को तीन अलग-अलग कामों में बाँटकर देखना चाहिए, क्योंकि तीनों के नाम छोटे हैं और परीक्षा उन्हें आपस में बदलकर पूछती है । पहला काम है सहायिकी को सही व्यक्ति तक पहुँचाना : इसके लिए पहल नामक व्यवस्था है, जिसमें सहायिकी उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे जाती है और सिलेंडर बाज़ार मूल्य पर लिया जाता है ; यह 2014 में कुछ ज़िलों में आरंभ होकर 1 जनवरी 2015 से पूरे देश में लागू हुई । दूसरा काम है उन घरों तक कनेक्शन पहुँचाना जिनके पास वह था ही नहीं : इसके लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना है, जो 2016 में आरंभ हुई और जिसमें निर्धन परिवारों की महिलाओं के नाम पर निःशुल्क कनेक्शन दिया जाता है, ताकि लकड़ी और उपले के धुएँ से होने वाले स्वास्थ्य-नुक़सान से बचा जा सके । तीसरा काम है नया कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना : इसके लिए सहज नामक ऑनलाइन व्यवस्था है, जिसमें पंजीकरण, वितरक का चुनाव, भुगतान और प्रमाणपत्र सब जाल-स्थल से हो जाते हैं । इनके अतिरिक्त सहायिकी छोड़ने के लिए स्वैच्छिक अभियान भी चला, जिसमें सक्षम उपभोक्ताओं से सहायिकी त्यागने का आग्रह किया गया ।
इस प्रकार के प्रश्न योजनाओं के नाम पर नहीं, उनके विषय पर बनते हैं, और उनका सबसे बड़ा जाल यही है कि एक ही क्षेत्र की दो योजनाएँ विकल्पों में साथ रख दी जाती हैं । ऐसे में उत्तर स्टेम के शब्दों से निकलता है । यहाँ स्टेम ने सेवा प्रदान करने की प्रणाली कहा है, सहायिकी या लाभ का हस्तांतरण नहीं — और यही एक वाक्यांश दो निकट विकल्पों के बीच निर्णय करता है । इसलिए योजनाओं के प्रश्नों में स्टेम की क्रिया पर ध्यान दीजिए : सेवा देना, धन देना, बीमा देना, ऋण देना, प्रशिक्षण देना — हर क्रिया एक अलग योजना की ओर ले जाती है । दूसरी बात, हिन्दी स्तंभ में योजनाओं के नाम देवनागरी में एक शब्द के रूप में छपे हैं, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वे बड़े अक्षरों में हैं ; इससे पढ़ने में कोई अंतर नहीं पड़ता, पर संक्षिप्ताक्षर वाले नामों में सावधानी चाहिए ।
मुख्य तथ्य
- सहज सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की वह व्यवस्था है जिसमें नया घरेलू रसोई गैस कनेक्शन ऑनलाइन लिया जा सकता है ।
- इसमें पंजीकरण, वितरक का चुनाव, भुगतान और अभिदान प्रमाणपत्र सब ऑनलाइन होते हैं और सामान घर पर पहुँचाया जाता है ।
- आवेदन के समय यह भी जाँचा जाता है कि आवेदक के नाम पर पहले से कोई कनेक्शन तो नहीं है, जिससे दोहरे कनेक्शन की गुंजाइश घटती है ।
- पहल अर्थात् प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ में रसोई गैस की सहायिकी उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है और सिलेंडर बाज़ार मूल्य पर मिलता है ।
- पहल 2014 में कुछ ज़िलों में आरंभ हुई और 1 जनवरी 2015 से पूरे देश में लागू की गई ।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 2016 में आरंभ हुई और उसमें निर्धन परिवारों की महिलाओं के नाम पर निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन दिया जाता है ।
- उदय अर्थात् उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना 2015 में विद्युत मंत्रालय ने वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए आरंभ की थी ।
- उड़ान अर्थात् उड़े देश का आम नागरिक क्षेत्रीय हवाई संपर्क की योजना है, जो 2016 की राष्ट्रीय नागर विमानन नीति के अंतर्गत आई ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- एक ही क्षेत्र की दो योजनाओं को आपस में बदल देना । सहज कनेक्शन देने की व्यवस्था है और पहल सहायिकी भेजने की ।
- उदय और उज्ज्वला के नामों की ध्वनि से भ्रमित हो जाना । पहली बिजली वितरण कंपनियों की योजना है और दूसरी रसोई गैस की ।
- स्टेम की क्रिया पर ध्यान न देना । सेवा प्रदान करना और लाभ हस्तांतरित करना दो अलग बातें हैं ।
- योजनाओं के आरंभ-वर्ष गड्डमड्ड कर देना, विशेषकर जब वे एक ही अवधि की हों ।
- योजना का नाम याद रखना पर उसका मंत्रालय भूल जाना ; प्रश्न कभी-कभी मंत्रालय ही पूछ लेते हैं ।
सरकारी योजनाओं पर प्रश्न इस प्रश्नपत्र में लगभग हर खंड-चक्र में आते हैं और उनका सबसे आम रूप यही है — कोई विवरण देकर योजना का नाम पूछ लेना, या नाम देकर उसका क्षेत्र पूछ लेना । विकल्पों में प्रायः चार लोकप्रिय नाम रख दिए जाते हैं जिनमें एक-दो उसी क्षेत्र के होते हैं और शेष दूसरे क्षेत्रों के । इसलिए तैयारी में सबसे उपयोगी काम यह है कि योजनाओं की एक तालिका बनाई जाए जिसमें नाम, आरंभ-वर्ष, संबंधित मंत्रालय और एक पंक्ति में उद्देश्य लिखा हो । तालिका बन जाने के बाद अधिकांश प्रश्न केवल क्षेत्र देखकर हल हो जाते हैं । दूसरी बात, जब दो विकल्प एक ही क्षेत्र के हों — यहाँ रसोई गैस के — तब निर्णय स्टेम के शब्दों से ही होगा, इसलिए उसे दोबारा पढ़िए और उस क्रिया या विशेषण को पकड़िए जो दोनों में से एक की ओर इशारा करता है ।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
रसोई गैस पर मिलने वाली सहायिकी को उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे भेजने की व्यवस्था निम्नलिखित में से किस नाम से जानी जाती है ?
- (a)सहज
- (b)पहल
- (c)उज्ज्वला
- (d)उदय
उत्तर(b) पहल — इसमें सहायिकी सीधे बैंक खाते में जाती है और सिलेंडर बाज़ार मूल्य पर लेना पड़ता है ।
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उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना अर्थात् उदय का संबंध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है ?
- (a)रसोई गैस वितरण
- (b)विद्युत वितरण कंपनियाँ
- (c)क्षेत्रीय हवाई संपर्क
- (d)ग्रामीण सड़कें
उत्तर(b) विद्युत वितरण कंपनियाँ — यह योजना उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए आरंभ की गई थी ।