निम्नलिखित में से किस स्थान पर वर्ष 1965 में, एशिया का पहला निर्यात प्रक्रमण ज़ोन [एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (ई.पी.ज़ेड.)] स्थापित किया गया था ?
- (a)अहमदाबाद
- (b)काँडला
- (c)मुम्बई
- (d)जयपुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) काँडला । एशिया का पहला निर्यात प्रक्रमण ज़ोन 1965 में गुजरात के काँडला में स्थापित किया गया था । आरंभ में इसे मुक्त व्यापार ज़ोन कहा गया और बाद में यही निर्यात प्रक्रमण ज़ोन के रूप में जाना गया ; सन 2000 के बाद जब देश में विशेष आर्थिक ज़ोन की नीति आई, तब इसे विशेष आर्थिक ज़ोन में बदल दिया गया । स्थान का चुनाव संयोग नहीं था । काँडला कच्छ की खाड़ी पर स्थित बंदरगाह है और विभाजन के बाद उसका महत्व विशेष रूप से बढ़ा, क्योंकि पश्चिमी भारत का जो बड़ा बंदरगाह कराची था वह पाकिस्तान में चला गया और उत्तर तथा पश्चिम भारत के भीतरी भाग को समुद्र तक पहुँचाने के लिए एक नए बंदरगाह की आवश्यकता थी । निर्यात के लिए बना ज़ोन बंदरगाह के पास ही उपयोगी होता है, क्योंकि उसका पूरा विचार यही है कि कच्चा माल शुल्क के झंझट के बिना आए, वहीं संसाधित हो और तैयार माल सीधे बाहर चला जाए । ऐसे ज़ोन को प्रायः देश के सीमा-शुल्क क्षेत्र से बाहर माना जाता है और वहाँ आयात-निर्यात पर सामान्य शुल्क तथा प्रक्रियाएँ लागू नहीं होतीं ; बदले में वहाँ स्थापित इकाइयों से यह अपेक्षा रहती है कि वे मुख्यतः निर्यात के लिए उत्पादन करें । यह प्रयोग उस समय भारत की सामान्य आर्थिक नीति से अलग था, क्योंकि 1960 के दशक में देश की नीति आयात-प्रतिस्थापन की थी और व्यापार पर अनेक नियंत्रण थे ; इसी कारण काँडला का यह ज़ोन एक अपवाद के रूप में शुरू हुआ । एशिया में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग था, और यही इस प्रश्न का उत्तर है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)अहमदाबाद — अहमदाबाद गुजरात का सबसे बड़ा औद्योगिक नगर रहा है और कपड़ा उद्योग का पुराना केंद्र भी, पर वह समुद्र तट पर नहीं है । निर्यात प्रक्रमण ज़ोन की पूरी उपयोगिता बंदरगाह अथवा हवाई अड्डे से उसकी निकटता पर टिकी होती है, क्योंकि वहाँ कच्चा माल बाहर से आता है और तैयार माल बाहर ही जाता है ; बीच में जितनी स्थल-यात्रा जुड़े, उतना ही लाभ घटता जाता है । इसीलिए भारत के आरंभिक ज़ोन बंदरगाह नगरों में या उनके पास बने । यह विकल्प केवल इसलिए आकर्षक लगता है कि प्रश्न में राज्य का नाम नहीं दिया गया और गुजरात का नाम सुनते ही अहमदाबाद ध्यान में आता है । ऐसे प्रश्नों में उद्योग-नगर और बंदरगाह-नगर का अंतर याद रखना चाहिए ।
- (c)मुम्बई — मुंबई का संबंध इस श्रृंखला से है, पर पहले नहीं दूसरे स्थान पर । वहाँ सांताक्रुज़ में इलेक्ट्रॉनिकी के निर्यात के लिए बना ज़ोन 1973 में स्थापित हुआ और वह भारत का दूसरा निर्यात प्रक्रमण ज़ोन था ; उसकी विशेषता यह थी कि वह एक ही उद्योग पर केंद्रित था और हवाई अड्डे के पास था, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सामान हल्का होता है और प्रायः वायुमार्ग से भेजा जाता है । यही विकल्प इस प्रश्न में सबसे भ्रामक है, क्योंकि दोनों नाम एक ही सूची के हैं और केवल क्रम अलग है । इसलिए ऐसे तथ्यों को क्रम के साथ याद कीजिए — पहला काँडला 1965 में, दूसरा मुंबई का सांताक्रुज़ ज़ोन 1973 में — क्योंकि प्रश्न प्रायः पहला या दूसरा पूछकर ही अंतर करता है ।
- (d)जयपुर — जयपुर राजस्थान में है, समुद्र तट से बहुत दूर, और 1965 में वहाँ ऐसा कोई ज़ोन स्थापित नहीं हुआ था । बाद के वर्षों में जब विशेष आर्थिक ज़ोन की नीति के अंतर्गत देश भर में ज़ोन बने, तब भीतरी राज्यों में भी ज़ोन स्थापित हुए, विशेषकर रत्न-आभूषण, सूचना प्रौद्योगिकी और हस्तशिल्प जैसे उन उद्योगों के लिए जिनका माल हल्का होता है और जिन्हें बंदरगाह की उतनी आवश्यकता नहीं पड़ती । पर यह बाद की कहानी है । प्रश्न स्पष्ट रूप से 1965 और एशिया के पहले ज़ोन की बात कर रहा है, इसलिए उत्तर उसी बंदरगाह-नगर से आएगा जहाँ वह प्रयोग आरंभ हुआ ।
अवधारणा
निर्यात प्रक्रमण ज़ोन ऐसा सीमांकित क्षेत्र होता है जिसे व्यापार की दृष्टि से देश के सामान्य सीमा-शुल्क क्षेत्र से बाहर माना जाता है । वहाँ की इकाइयाँ कच्चा माल और पूँजीगत सामान बिना सामान्य शुल्क के मँगा सकती हैं, वहीं उसका प्रसंस्करण करती हैं और तैयार माल निर्यात करती हैं ; बदले में उनसे निर्यात-संबंधी दायित्व पूरा करने की अपेक्षा रहती है । इसका उद्देश्य निर्यात बढ़ाना, विदेशी मुद्रा अर्जित करना, विदेशी निवेश तथा तकनीक लाना और रोज़गार देना होता है । भारत में यह प्रयोग 1965 में काँडला से आरंभ हुआ, जो एशिया का पहला ऐसा ज़ोन था ; 1973 में मुंबई के सांताक्रुज़ में इलेक्ट्रॉनिकी पर केंद्रित दूसरा ज़ोन बना ; और 1980 के दशक में नोएडा, चेन्नई, कोच्चि, फाल्टा तथा विशाखापत्तनम में और ज़ोन स्थापित हुए । सन 2000 में सरकार ने विशेष आर्थिक ज़ोन की नीति की घोषणा की और पुराने निर्यात प्रक्रमण ज़ोन क्रमशः विशेष आर्थिक ज़ोन में बदल दिए गए । इस व्यवस्था को कानूनी आधार 2005 के विशेष आर्थिक ज़ोन अधिनियम से मिला, जो अगले वर्ष नियमों के साथ प्रभावी हुआ ।
इस प्रश्न का ऐतिहासिक संदर्भ ध्यान देने योग्य है । 1965 में भारत की आर्थिक नीति आयात-प्रतिस्थापन की थी : विदेशी मुद्रा दुर्लभ थी, आयात पर कठोर नियंत्रण थे और उद्योगों को अनुज्ञप्ति लेकर चलना पड़ता था । ऐसे वातावरण में एक ऐसा क्षेत्र बनाना जहाँ शुल्क और नियंत्रण लागू न हों, अपने आप में असाधारण निर्णय था । इसीलिए काँडला का ज़ोन नीतिगत दृष्टि से एक द्वीप जैसा था — शेष अर्थव्यवस्था बंद थी और वह एक कोना खुला रखा गया । 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद यही सोच व्यापक हुई और आगे चलकर विशेष आर्थिक ज़ोन का पूरा ढाँचा खड़ा हुआ । परीक्षा में इस विषय के प्रश्न प्रायः तीन दिशाओं से आते हैं — पहला ज़ोन कहाँ और कब, विशेष आर्थिक ज़ोन अधिनियम किस वर्ष का, और ज़ोन में मिलने वाली सुविधाएँ क्या हैं ।
मुख्य तथ्य
- एशिया का पहला निर्यात प्रक्रमण ज़ोन 1965 में गुजरात के काँडला में स्थापित हुआ ; आरंभ में उसे मुक्त व्यापार ज़ोन कहा गया ।
- काँडला कच्छ की खाड़ी पर स्थित बंदरगाह है, जिसका महत्व विभाजन के बाद बढ़ा क्योंकि कराची बंदरगाह पाकिस्तान में चला गया ।
- भारत का दूसरा निर्यात प्रक्रमण ज़ोन 1973 में मुंबई के सांताक्रुज़ में बना और वह इलेक्ट्रॉनिकी के निर्यात पर केंद्रित था ।
- 1980 के दशक में नोएडा, चेन्नई, कोच्चि, फाल्टा और विशाखापत्तनम में और निर्यात प्रक्रमण ज़ोन स्थापित किए गए ।
- ऐसे ज़ोन को व्यापार की दृष्टि से देश के सामान्य सीमा-शुल्क क्षेत्र से बाहर माना जाता है, इसलिए वहाँ आयात पर सामान्य शुल्क नहीं लगते ।
- इनका उद्देश्य निर्यात बढ़ाना, विदेशी मुद्रा अर्जित करना, विदेशी निवेश तथा तकनीक लाना और रोज़गार देना है ।
- सन 2000 में विशेष आर्थिक ज़ोन की नीति घोषित हुई और पुराने निर्यात प्रक्रमण ज़ोन क्रमशः विशेष आर्थिक ज़ोन में बदल दिए गए ।
- विशेष आर्थिक ज़ोन अधिनियम 2005 में पारित हुआ और अगले वर्ष नियमों के साथ प्रभावी हुआ ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहले और दूसरे ज़ोन का क्रम उलट देना । काँडला 1965 का है और मुंबई का सांताक्रुज़ ज़ोन 1973 का ।
- निर्यात प्रक्रमण ज़ोन और विशेष आर्थिक ज़ोन को एक मान लेना । दूसरा बाद की और व्यापक व्यवस्था है ।
- काँडला को केवल बंदरगाह मानकर छोड़ देना । वह बंदरगाह भी है और एशिया के पहले ज़ोन का स्थान भी ।
- विशेष आर्थिक ज़ोन नीति के वर्ष 2000 और अधिनियम के वर्ष 2005 को गड्डमड्ड कर देना ।
- यह मान लेना कि ऐसे ज़ोन केवल तटीय क्षेत्रों में ही बन सकते हैं ; बाद के वर्षों में भीतरी राज्यों में भी ज़ोन बने ।
अर्थव्यवस्था और समसामयिकी के प्रश्नों में पहले, सबसे बड़ा और सबसे पुराना जैसी कोटियाँ बहुत पूछी जाती हैं, क्योंकि उनका उत्तर निश्चित होता है और उस पर विवाद नहीं होता । इस प्रश्न में तीनों बातें एक साथ हैं — पहला ज़ोन, एशिया में, और वर्ष भी दिया हुआ । ऐसे प्रश्नों की तैयारी में प्रथम की सूची बनाकर रखिए और हर प्रविष्टि के आगे उसका वर्ष तथा स्थान लिखिए, क्योंकि परीक्षक प्रायः दूसरे या तीसरे को विकल्प बनाकर रख देता है । दूसरी बात, ऐसे प्रश्नों में भूगोल का सामान्य ज्ञान भी काम आ जाता है : निर्यात के ज़ोन बंदरगाह के पास बनते हैं, इसलिए तटीय स्थान वाले विकल्प पहले जाँचिए और भीतरी नगरों को बाद में । तीसरी बात, हिन्दी स्तंभ में तकनीकी शब्द कोष्ठक में लिप्यंतरित होकर छपे हैं, इसलिए पढ़ते ही उनका अंग्रेज़ी रूप मन में रख लीजिए ।
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- (b)मुंबई
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भारत में विशेष आर्थिक ज़ोन को कानूनी आधार देने वाला अधिनियम निम्नलिखित में से किस वर्ष पारित हुआ था ?
- (a)1991
- (b)2000
- (c)2005
- (d)2010
उत्तर(c) 2005 — विशेष आर्थिक ज़ोन अधिनियम इसी वर्ष पारित हुआ और अगले वर्ष नियमों के साथ प्रभावी हुआ ।