निम्नलिखित में से कौन-सा प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पी.एम.के.एस.वाई.) का उद्देश्य नहीं है ?
- (a)उर्वरक, अधिक उपज देने वाली क़िस्मों (एच.वाई.वी.) और पीड़कनाशियों के उपयोग के लिए सहायिकी (सब्सिडी) प्रदान करना
- (b)ज़मीनी स्तर पर सिंचाई में निवेशों को समन्वित करना
- (c)सुनिश्चित सिंचाई के अंतर्गत कृषि-योग्य क्षेत्र का विस्तार करना
- (d)खेतों में, जल उपयोग दक्षता में सुधार लाना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) उर्वरक, अधिक उपज देने वाली क़िस्मों (एच.वाई.वी.) और पीड़कनाशियों के उपयोग के लिए सहायिकी (सब्सिडी) प्रदान करना । स्टेम में निषेध मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए यहाँ वह बात ढूँढ़नी है जो इस योजना का उद्देश्य है ही नहीं । प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना 2015 में आरंभ की गई और उसका पूरा विषय जल है — खेत तक जल पहुँचाना और पहुँचे हुए जल का अधिक से अधिक उपयोग कराना । उसके दो सूत्रवाक्य इसी को कहते हैं : हर खेत को पानी, और प्रति बूँद अधिक फ़सल । योजना के घोषित उद्देश्यों में सिंचाई से जुड़े निवेशों को ज़मीनी स्तर पर समन्वित करना, सुनिश्चित सिंचाई के अंतर्गत कृषि-योग्य क्षेत्र बढ़ाना, खेतों में जल उपयोग दक्षता सुधारकर बर्बादी घटाना, सूक्ष्म तथा परिशुद्ध सिंचाई को बढ़ावा देना, जलभृतों का पुनर्भरण बढ़ाना और जल संरक्षण की टिकाऊ पद्धतियाँ अपनाना सम्मिलित हैं । उर्वरक, बीज और पीड़कनाशी इस सूची में कहीं नहीं आते । वे भी कृषि से जुड़े विषय हैं और उन पर सरकार की सहायिकी भी है, पर वह दूसरी योजनाओं और दूसरे विभागों के अधीन चलती है — उर्वरक पर सहायिकी उर्वरक विभाग की व्यवस्था है, बीज तथा पौध सामग्री के कार्यक्रम कृषि विभाग के अलग अभियानों में हैं, और पौध संरक्षण के अपने कार्यक्रम हैं । योजना का ढाँचा भी उसी जल-केंद्रित सोच से बना है । उसके प्रमुख घटक हैं — त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम, जिसके अंतर्गत अधूरी बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ पूरी की जाती हैं ; हर खेत को पानी, जिसमें लघु सिंचाई, जल-स्रोतों का सुधार और भूजल विकास आते हैं ; प्रति बूँद अधिक फ़सल, जिसमें टपक और फ़व्वारा सिंचाई को बढ़ावा मिलता है ; और जलग्रहण विकास, जिसमें वर्षा-सिंचित क्षेत्रों में मिट्टी तथा जल संरक्षण के काम होते हैं । इसलिए इस प्रश्न का उत्तर पहला विकल्प है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)ज़मीनी स्तर पर सिंचाई में निवेशों को समन्वित करना — यह इस योजना का घोषित उद्देश्य है, इसलिए निषेध का उत्तर नहीं बनता । समन्वय की यह बात योजना के मूल में है । उससे पहले सिंचाई पर धन कई अलग-अलग रास्तों से आता था — बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ एक कार्यक्रम से, लघु सिंचाई दूसरे से, जलग्रहण विकास तीसरे से, और सूक्ष्म सिंचाई चौथे से — और उनका आपस में कोई मेल नहीं था । इसका परिणाम यह होता था कि किसी क्षेत्र में नहर तो बन जाती थी पर खेत तक का मार्ग नहीं बनता, या टपक सिंचाई के उपकरण आ जाते थे पर जल-स्रोत ही नहीं होता । योजना का प्रयास इन्हें एक छतरी के नीचे लाकर ज़िले की एक ही सिंचाई योजना बनाना था, ताकि निवेश खेत के स्तर पर मिलकर परिणाम दें ।
- (c)सुनिश्चित सिंचाई के अंतर्गत कृषि-योग्य क्षेत्र का विस्तार करना — यह भी योजना का सीधा उद्देश्य है और उसके सूत्रवाक्य हर खेत को पानी में यही निहित है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता । भारत की बड़ी कृषि-चुनौती यही है कि खेती का एक बड़ा भाग आज भी वर्षा पर निर्भर है और मानसून की अनिश्चितता सीधे उपज पर पड़ती है । सुनिश्चित सिंचाई का अर्थ है ऐसा जल-प्रबंध जिसमें फ़सल को आवश्यक समय पर जल मिल जाए, चाहे वर्षा कम हो । इसी उद्देश्य से त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत वर्षों से अधूरी पड़ी बड़ी और मध्यम परियोजनाओं को प्राथमिकता देकर पूरा किया गया, क्योंकि अधूरी परियोजना पर लगा धन तब तक कोई सिंचाई नहीं देता जब तक अंतिम खेत तक जल न पहुँचे ।
- (d)खेतों में, जल उपयोग दक्षता में सुधार लाना — यह भी योजना का उद्देश्य है और उसके दूसरे सूत्रवाक्य प्रति बूँद अधिक फ़सल का सार यही है, इसलिए यह विकल्प भी निषेध का उत्तर नहीं बनता । जल उपयोग दक्षता का अर्थ है उतने ही जल से अधिक उपज लेना — अर्थात् वह जल घटाना जो वाष्पन, रिसाव और खेत तक पहुँचने के रास्ते में व्यर्थ चला जाता है । इसके लिए योजना टपक और फ़व्वारा जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को प्रोत्साहन देती है, जिनमें जल सीधे पौधे की जड़ तक पहुँचता है और खुली क्यारी में भर देने की तुलना में बहुत कम व्यय होता है । यह प्रश्न इस दृष्टि से भी उपयोगी है कि यह उन तीनों उद्देश्यों को एक साथ रख देता है जिन्हें योजना अपने ही शब्दों में गिनाती है, और चौथा वाक्य पूरी तरह दूसरी दिशा का है ।
अवधारणा
प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना 2015 में आरंभ हुई और उसका उद्देश्य सिंचाई से जुड़े बिखरे हुए कार्यक्रमों को एक छतरी के नीचे लाना था । उसके दो सूत्रवाक्य पूरी योजना का सार कह देते हैं — हर खेत को पानी, अर्थात् सिंचाई का विस्तार ; और प्रति बूँद अधिक फ़सल, अर्थात् उपलब्ध जल का अधिक कुशल उपयोग । योजना के चार प्रमुख घटक हैं । त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम में वर्षों से अधूरी पड़ी बड़ी तथा मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जाता है । हर खेत को पानी घटक में लघु सिंचाई, तालाबों तथा जल-स्रोतों का सुधार, भूजल विकास और खेत तक जल पहुँचाने की व्यवस्था आती है । प्रति बूँद अधिक फ़सल घटक में टपक और फ़व्वारा जैसी सूक्ष्म सिंचाई तथा जल बचाने वाली तकनीकों को प्रोत्साहन मिलता है । जलग्रहण विकास घटक में वर्षा-सिंचित क्षेत्रों में मिट्टी और जल संरक्षण, वर्षाजल संचयन तथा भूजल पुनर्भरण के काम होते हैं । इन घटकों का क्रियान्वयन एक से अधिक मंत्रालयों के बीच बँटा है, और ज़िला तथा राज्य स्तर पर सिंचाई योजना बनाकर उन्हें आपस में जोड़ा जाता है ।
सरकारी योजनाओं के प्रश्न इस प्रश्नपत्र में नियमित रूप से आते हैं और उनका सबसे आम रूप यही है — किसी योजना के उद्देश्यों की सूची देकर उसमें एक बाहरी वाक्य रख देना । बाहरी वाक्य प्रायः किसी दूसरी योजना का सही उद्देश्य होता है, इसलिए वह पढ़ने में असंगत नहीं लगता । इससे बचने का एक ही उपाय है : हर योजना के साथ उसका मूल विषय एक शब्द में जोड़कर याद रखिए । इस योजना का मूल विषय जल है — न बीज, न उर्वरक, न ऋण, न बीमा । जहाँ योजना का नाम स्वयं विषय बता दे, वहाँ यह काम और सरल हो जाता है, क्योंकि नाम में ही कृषि सिंचाई लिखा है । ध्यान रहे कि कृषि से जुड़ी अन्य बड़ी योजनाएँ अलग-अलग विषयों पर हैं — फ़सल बीमा, आय सहायता, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ई-राष्ट्रीय कृषि बाज़ार — और परीक्षक इन्हीं को आपस में मिलाकर विकल्प बनाता है ।
मुख्य तथ्य
- प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना 2015 में आरंभ हुई और इसका उद्देश्य सिंचाई से जुड़े कार्यक्रमों को एक छतरी के नीचे लाना था ।
- योजना के दो सूत्रवाक्य हैं — हर खेत को पानी, और प्रति बूँद अधिक फ़सल ।
- घोषित उद्देश्यों में सिंचाई निवेशों का ज़मीनी स्तर पर समन्वय, सुनिश्चित सिंचाई का विस्तार और खेतों में जल उपयोग दक्षता में सुधार सम्मिलित हैं ।
- अन्य उद्देश्यों में सूक्ष्म तथा परिशुद्ध सिंचाई को बढ़ावा, जलभृतों का पुनर्भरण और जल संरक्षण की टिकाऊ पद्धतियाँ अपनाना आते हैं ।
- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम घटक में वर्षों से अधूरी बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ पूरी की जाती हैं ।
- हर खेत को पानी घटक में लघु सिंचाई, जल-स्रोतों का सुधार, भूजल विकास और खेत तक जल पहुँचाने की व्यवस्था आती है ।
- प्रति बूँद अधिक फ़सल घटक में टपक और फ़व्वारा सिंचाई जैसी जल बचाने वाली तकनीकों को प्रोत्साहन मिलता है ।
- उर्वरक, बीज और पीड़कनाशी पर सहायिकी इस योजना का भाग नहीं है ; वे अलग विभागों की अलग योजनाओं के अधीन आते हैं ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- किसी दूसरी योजना का सही उद्देश्य इस योजना पर चढ़ा देना । यही ऐसे प्रश्नों की सबसे आम चाल है ।
- योजना का नाम पढ़कर भी उसका मूल विषय भूल जाना । नाम में ही सिंचाई लिखा है, इसलिए उद्देश्य जल तक सीमित रहेंगे ।
- निषेध चूक जाना और उस वाक्य पर निशान लगा देना जो सचमुच योजना का उद्देश्य है ।
- घटकों के नाम और उनके काम आपस में बदल देना । त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम बड़ी परियोजनाओं का है, प्रति बूँद अधिक फ़सल सूक्ष्म सिंचाई का ।
- योजना का आरंभ-वर्ष और उसके विस्तार के वर्ष गड्डमड्ड कर देना ।
सरकारी योजनाओं पर प्रश्न इस प्रश्नपत्र के शासन और अर्थव्यवस्था वाले खंड का स्थायी हिस्सा हैं, और उनका स्वरूप तीन प्रकार का होता है — योजना का उद्देश्य पूछना, उसके घटक पूछना, या नाम और विषय का मिलान कराना । इस प्रश्न का ढाँचा पहला है और वह निषेधात्मक भी है । ऐसे प्रश्नों में तैयारी की कसौटी विस्तार नहीं, वर्गीकरण है : हर योजना के सामने एक शब्द में उसका विषय लिख लीजिए — यह जल की है, वह बीमा की, वह आय सहायता की, वह पोषण की । फिर विकल्पों में जो वाक्य दूसरे विषय का हो वह अपने आप अलग दिख जाएगा । दूसरी बात, योजना के अपने सूत्रवाक्य याद रखिए, क्योंकि परीक्षक प्रायः उन्हीं को अलग शब्दों में विकल्प बना देता है — यहाँ तीन में से दो विकल्प सीधे योजना के दो सूत्रवाक्यों से निकले हैं । तीसरी बात, हिन्दी स्तंभ में योजनाओं के संक्षिप्ताक्षर देवनागरी अक्षरों में छपते हैं, इसलिए उन्हें पढ़ते ही अंग्रेज़ी रूप में बदल लीजिए ।
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- (d) 1 and 2 only
उत्तर(d) 1 and 2 only
पर्यावरण से जुड़ा कथन-आधारित प्रश्न — रामसर कन्वेंशन और भारत की स्थिति ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के किस घटक के अंतर्गत टपक और फ़व्वारा जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को प्रोत्साहन दिया जाता है ?
- (a)त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम
- (b)हर खेत को पानी
- (c)प्रति बूँद अधिक फ़सल
- (d)जलग्रहण विकास
उत्तर(c) प्रति बूँद अधिक फ़सल — इसी घटक में जल बचाने वाली सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा मिलता है ।
- practice — not a real PYQ
प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के किस घटक के अंतर्गत वर्षों से अधूरी पड़ी बड़ी तथा मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जाता है ?
- (a)त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम
- (b)प्रति बूँद अधिक फ़सल
- (c)जलग्रहण विकास
- (d)मृदा स्वास्थ्य कार्ड
उत्तर(a) त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम — इसी घटक में अधूरी बड़ी और मध्यम परियोजनाएँ प्राथमिकता से पूरी की जाती हैं ।