निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं ? 1. भारत रामसर कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है । 2. रामसर कन्वेंशन आर्द्र-भूमि संरक्षण से संबंधित है । 3. इस समय भारत में 76 रामसर स्थल हैं । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 2 और 3
- (b)1, 2 और 3
- (c)केवल 1
- (d)केवल 1 और 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) केवल 1 और 2 । तीनों कथनों को अलग-अलग जाँचिए । कथन 1 सही है : भारत रामसर कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है और यह संधि भारत के लिए 1 फ़रवरी 1982 से प्रभावी हुई ; भारत के पहले दो रामसर स्थल चिल्का झील और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान थे । कथन 2 भी सही है : रामसर कन्वेंशन का पूरा नाम ही आर्द्र-भूमियों पर, विशेषकर जलपक्षी आवास के रूप में उनके अंतरराष्ट्रीय महत्व पर, बनी संधि है । यह 1971 में ईरान के रामसर नगर में स्वीकार हुई और 1975 से लागू हुई ; इसका केंद्रीय विचार विवेकपूर्ण उपयोग है, अर्थात् आर्द्र-भूमि को मनुष्य से पूरी तरह अलग करके नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक स्वरूप को बनाए रखते हुए उपयोग करते रहना । कथन 3 ग़लत है, और यही इस प्रश्न का निर्णायक बिंदु है । जिस समय यह प्रश्नपत्र बना, उस समय भारत में रामसर स्थलों की संख्या पचास से भी कम थी — छिहत्तर की संख्या तक भारत बहुत बाद में पहुँचा । अगस्त 2022 में एक साथ कई स्थल जोड़े जाने पर यह संख्या पचहत्तर हुई थी, और उसके बाद भी नए स्थल जुड़ते रहे हैं । अर्थात् कथन में दी गई संख्या उस समय के तथ्य से मेल नहीं खाती थी । यहीं एक सामान्य नियम बनता है जो ऐसे हर प्रश्न में काम आता है : जिस कथन में इस समय, वर्तमान में या हाल ही में जैसे शब्दों के साथ कोई संख्या दी हो, उसे उसी वर्ष की स्थिति से तौलिए, आज की स्थिति से नहीं । संधि किस विषय पर है और भारत उसका पक्षकार है या नहीं — ये स्थायी तथ्य हैं और वर्षों तक नहीं बदलते ; स्थलों की गिनती हर वर्ष बदलती है । इसीलिए कथन 1 और 2 सही हैं और कथन 3 नहीं, और उत्तर वही विकल्प है जो पहले दो को लेता है और तीसरे को छोड़ देता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 2 और 3 — यह विकल्प दो ग़लतियाँ एक साथ करता है । पहली, वह उस कथन को छोड़ देता है जो पूरी तरह सही है — भारत रामसर कन्वेंशन का पक्षकार है और 1982 से उसके लिए यह संधि प्रभावी है ; भारत के रामसर स्थलों की सूची स्वयं इसका प्रमाण है, क्योंकि ऐसी सूची केवल पक्षकार देशों की होती है । दूसरी, वह उस कथन को ले लेता है जिसकी संख्या प्रश्नपत्र के समय की स्थिति से मेल नहीं खाती । यदि कोई अभ्यर्थी संख्या के बारे में निश्चित न हो, तब भी वह इस विकल्प को इस आधार पर काट सकता है कि पहला कथन असंदिग्ध रूप से सही है, और जो विकल्प एक निश्चित रूप से सही कथन को छोड़ता हो वह उत्तर नहीं हो सकता । कथन-आधारित प्रश्नों में यह सबसे भरोसेमंद युक्ति है ।
- (b)1, 2 और 3 — यह विकल्प तभी सही होता जब तीनों कथन सही होते, पर तीसरा कथन उस संख्या को बताता है जो उस समय भारत में रामसर स्थलों की संख्या नहीं थी । वह संख्या कई वर्ष बाद की स्थिति के आसपास बैठती है — अगस्त 2022 में भारत के रामसर स्थलों की संख्या पचहत्तर हुई थी और आगे और बढ़ी । कथन-आधारित प्रश्नों में सबसे व्यापक विकल्प चुन लेने की प्रवृत्ति स्वाभाविक है, विशेषकर तब जब पहले दो कथन स्पष्ट रूप से सही दिख रहे हों ; पर जहाँ किसी कथन में गिनती हो, वहाँ पूरा विकल्प उसी गिनती पर टिक जाता है । इसलिए संख्यावाले कथन को सबसे अंत में नहीं, सबसे पहले जाँचिए — वही प्रायः विकल्पों को दो हिस्सों में बाँट देता है ।
- (c)केवल 1 — यह विकल्प उस कथन को भी छोड़ देता है जो संधि की परिभाषा भर है । रामसर कन्वेंशन आर्द्र-भूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग की ही संधि है ; उसका पूरा नाम आर्द्र-भूमियों पर, विशेषकर जलपक्षी आवास के रूप में उनके अंतरराष्ट्रीय महत्व पर बनी संधि है । उसमें आर्द्र-भूमि की परिभाषा भी बहुत चौड़ी रखी गई है — दलदल, कच्छ, पीट भूमि, झीलें, नदियाँ, ज्वारनदमुख, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ और छह मीटर तक गहरे समुद्री जल तक । अतः कथन 2 को ग़लत ठहराने का कोई आधार नहीं । यह विकल्प उन अभ्यर्थियों के लिए रखा गया है जो संख्या से घबराकर सबसे संकीर्ण विकल्प पर चले जाते हैं ; पर संकीर्ण विकल्प तभी सही है जब शेष कथन वास्तव में ग़लत हों ।
अवधारणा
रामसर कन्वेंशन का पूरा नाम है आर्द्र-भूमियों पर, विशेषकर जलपक्षी आवास के रूप में उनके अंतरराष्ट्रीय महत्व पर बनी संधि । यह 1971 में ईरान के रामसर नगर में स्वीकार की गई और 1975 से लागू हुई ; यह पर्यावरण से जुड़ी सबसे पुरानी अंतर-सरकारी संधियों में गिनी जाती है और अकेली ऐसी संधि है जो किसी एक पारितंत्र-प्रकार पर केंद्रित है । इसका केंद्रीय विचार विवेकपूर्ण उपयोग है — आर्द्र-भूमि को मनुष्य की पहुँच से पूरी तरह काटकर नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक स्वरूप को बनाए रखते हुए उपयोग में लाते रहना । संधि में आर्द्र-भूमि की परिभाषा बहुत चौड़ी है : दलदल, कच्छ, पीट भूमि, प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थायी या अस्थायी जल-क्षेत्र, तथा वह समुद्री जल भी जिसकी गहराई भाटे के समय छह मीटर से अधिक न हो । पक्षकार देश अपने चुने हुए क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्र-भूमि की सूची में दर्ज कराते हैं, जिन्हें रामसर स्थल कहा जाता है । जिन स्थलों का पारिस्थितिक स्वरूप बदल रहा हो, उन्हें मॉन्ट्रो अभिलेख में रखा जाता है । भारत में चिल्का झील और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान सबसे पहले सूचीबद्ध हुए, और भारत में आर्द्र-भूमि के प्रबंध के लिए आर्द्र-भूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम, 2017 बने हैं ।
आर्द्र-भूमियाँ पारिस्थितिकी में इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि वे एक साथ कई काम करती हैं — बाढ़ का पानी रोकती हैं, भूजल भरती हैं, तट को कटाव से बचाती हैं, पानी को छानती हैं, कार्बन संचित करती हैं और प्रवासी पक्षियों तथा मछलियों को आवास देती हैं । फिर भी नगरों के फैलाव, कृषि भूमि में परिवर्तन, कचरे और अतिक्रमण के कारण वे तेज़ी से घटती जा रही हैं । प्रत्येक वर्ष 2 फ़रवरी को विश्व आर्द्र-भूमि दिवस मनाया जाता है, जो इसी संधि के स्वीकार किए जाने की तिथि है । परीक्षा की दृष्टि से इस विषय के प्रश्न प्रायः चार दिशाओं से आते हैं — संधि का वर्ष और स्थान, उसका विषय, भारत की स्थिति, और किसी विशेष स्थल का नाम या राज्य । इनमें पहले तीन स्थायी तथ्य हैं और चौथा बदलता रहता है, इसलिए तैयारी में इन दोनों प्रकार के तथ्यों को अलग-अलग रखना चाहिए ।
मुख्य तथ्य
- रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर नगर में स्वीकार हुई और 1975 से लागू हुई ; इसका विषय आर्द्र-भूमियों का संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग है ।
- इसका पूरा नाम है आर्द्र-भूमियों पर, विशेषकर जलपक्षी आवास के रूप में उनके अंतरराष्ट्रीय महत्व पर बनी संधि ।
- भारत के लिए यह संधि 1 फ़रवरी 1982 से प्रभावी हुई ; भारत के पहले दो रामसर स्थल चिल्का झील और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान थे ।
- संधि में आर्द्र-भूमि की परिभाषा दलदल, कच्छ, पीट भूमि, झीलों, नदियों और भाटे के समय छह मीटर तक गहरे समुद्री जल तक फैली है ।
- जिन रामसर स्थलों का पारिस्थितिक स्वरूप बदल रहा हो, उन्हें मॉन्ट्रो अभिलेख में दर्ज किया जाता है ।
- प्रत्येक वर्ष 2 फ़रवरी को विश्व आर्द्र-भूमि दिवस मनाया जाता है, जो संधि के स्वीकार किए जाने की तिथि है ।
- अगस्त 2022 में एक साथ कई स्थल जोड़े जाने पर भारत के रामसर स्थलों की संख्या पचहत्तर हुई थी, और उसके बाद भी नए स्थल जुड़ते रहे हैं ।
- भारत में आर्द्र-भूमियों के प्रबंध के लिए आर्द्र-भूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम, 2017 बनाए गए हैं ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संख्या वाले कथन को आज की स्थिति से जाँच लेना । उसे उसी वर्ष की स्थिति से तौलना चाहिए जिस वर्ष का प्रश्नपत्र है ।
- रामसर को केवल पक्षियों की संधि मान लेना । वह पूरी आर्द्र-भूमि और उसके विवेकपूर्ण उपयोग की संधि है ।
- संधि के स्वीकार होने के वर्ष 1971 और उसके लागू होने के वर्ष 1975 को गड्डमड्ड कर देना ।
- मॉन्ट्रो अभिलेख को रामसर सूची का पर्याय समझ लेना । वह उन स्थलों की अलग सूची है जिनका स्वरूप बदल रहा है ।
- किसी विकल्प को इसलिए चुन लेना कि वह सबसे व्यापक है । हर कथन अलग से जाँचिए, विशेषकर वह जिसमें कोई गिनती हो ।
पर्यावरण और समसामयिकी के प्रश्न इस प्रश्नपत्र में कथन-आधारित कूट के रूप में भी आते हैं, और उनकी बनावट लगभग एक जैसी रहती है : दो स्थायी तथ्य और एक बदलता हुआ आँकड़ा । स्थायी तथ्य वे हैं जो वर्षों तक नहीं बदलते — संधि किस वर्ष और कहाँ बनी, उसका विषय क्या है, भारत उसका पक्षकार कब बना । बदलता आँकड़ा वह है जो हर वर्ष नया होता है — स्थलों की संख्या, बाघों की गिनती, संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार । परीक्षक प्रायः स्थायी तथ्यों को सही रखता है और आँकड़े को बदल देता है, इसलिए हल करने का क्रम यही होना चाहिए कि संख्या वाला कथन पहले जाँचा जाए । यदि वह ग़लत निकले तो उसे लेने वाले सारे विकल्प एक साथ कट जाते हैं और प्रश्न प्रायः वहीं हल हो जाता है । दूसरी बात, जिस कथन के बारे में आप पूर्णतः निश्चित हैं उसे लंगर बनाइए — यहाँ भारत का पक्षकार होना ऐसा ही लंगर है, और वह अकेला दो विकल्प काट देता है ।
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