गाँधीजी ने दांडी नमक यात्रा का प्रारंभ निम्नलिखित में से किस स्थान से किया था ?
- (a)कोचरब आश्रम
- (b)साबरमती आश्रम
- (c)अहमदाबाद टेक्सटाइल मिल
- (d)अहमदाबाद कारागार
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) साबरमती आश्रम । दांडी नमक यात्रा 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से आरंभ हुई । गाँधीजी अपने अठहत्तर चुने हुए सहयोगियों के साथ वहाँ से पैदल चले और लगभग चौबीस दिन में, तीन सौ पचासी किलोमीटर के आसपास की दूरी तय करके, गुजरात के समुद्र तट पर बसे दांडी गाँव पहुँचे । 6 अप्रैल 1930 को उन्होंने समुद्र के किनारे से नमक उठाकर नमक क़ानून तोड़ा और इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन देश भर में फैल गया । यात्रा का आरंभ-स्थल किसी संयोग से नहीं चुना गया था । साबरमती आश्रम 1917 से गाँधीजी का केंद्र था और सत्याग्रह आश्रम कहलाता था ; असहयोग आंदोलन से लेकर रचनात्मक कार्यक्रमों तक उनकी राजनीति की धुरी वही स्थान रहा । चलते समय उन्होंने यह संकल्प लिया था कि जब तक स्वराज नहीं मिलता, वे इस आश्रम में लौटकर नहीं आएँगे — और वे लौटे भी नहीं । इसीलिए इस यात्रा में साबरमती केवल भौगोलिक बिंदु नहीं, प्रतीक भी है । नमक को चुनने का कारण भी समझ लेना चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः वहीं से आगे बढ़ते हैं । नमक पर सरकार का एकाधिकार था और उस पर कर लगता था ; समुद्र तट पर पड़ा नमक बनाना या उठाना तक क़ानूनन अपराध था । यह ऐसी वस्तु थी जिसकी आवश्यकता सबसे धनी और सबसे निर्धन दोनों को समान रूप से थी, इसलिए इस एक प्रतीक ने आंदोलन को उन लोगों तक पहुँचा दिया जिन्हें संवैधानिक बहसें कभी नहीं छूतीं । पृष्ठभूमि में दिसंबर 1929 का लाहौर अधिवेशन था, जहाँ पूर्ण स्वराज का लक्ष्य स्वीकार किया गया और 26 जनवरी 1930 को स्वाधीनता दिवस मनाने का निश्चय हुआ ; उसके बाद गाँधीजी ने वायसराय इर्विन के सामने ग्यारह माँगें रखीं, और उनके अस्वीकार होने पर यह यात्रा आरंभ हुई । अतः आरंभ-स्थल साबरमती आश्रम ही है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)कोचरब आश्रम — कोचरब आश्रम इतिहास में महत्वपूर्ण है, पर दूसरे कारण से । दक्षिण अफ़्रीका से लौटने के बाद गाँधीजी ने 1915 में अहमदाबाद के कोचरब में अपना पहला आश्रम स्थापित किया था ; वह उनके भारतीय जीवन का आरंभिक केंद्र था । कुछ ही वर्षों में, 1917 में, आश्रम साबरमती नदी के तट पर स्थानांतरित कर दिया गया और वही आगे चलकर साबरमती आश्रम अथवा सत्याग्रह आश्रम के नाम से प्रसिद्ध हुआ । अर्थात् 1930 तक कोचरब गाँधीजी की गतिविधियों का केंद्र रह ही नहीं गया था । यह विकल्प इसीलिए रखा गया है कि जो अभ्यर्थी दोनों आश्रमों के नाम जानता है पर उनका क्रम नहीं जानता, वह चूक जाए । क्रम याद रखिए — पहले कोचरब, फिर साबरमती, और यात्रा साबरमती से ।
- (c)अहमदाबाद टेक्सटाइल मिल — अहमदाबाद की कपड़ा मिलों का संबंध गाँधीजी के एक दूसरे और पहले के संघर्ष से है । 1918 में वहाँ के मिल मज़दूरों और मिल-मालिकों के बीच मज़दूरी को लेकर विवाद हुआ, और गाँधीजी ने मज़दूरों के पक्ष में हस्तक्षेप करते हुए अपना पहला अनशन किया ; अनसूया साराभाई इस आंदोलन में उनके साथ थीं और इसी संघर्ष से आगे चलकर मज़दूर महाजन संघ बना । वह वर्ष गाँधीजी के आरंभिक भारतीय संघर्षों का वर्ष है — चंपारण का नील सत्याग्रह और खेड़ा का किसान सत्याग्रह भी उन्हीं दो वर्षों के हैं । पर 1930 की नमक यात्रा का उससे कोई संबंध नहीं । यह विकल्प एक ही नगर के दो अलग-अलग प्रसंगों को आपस में मिला देने की परीक्षा लेता है ।
- (d)अहमदाबाद कारागार — कारागार से यात्रा आरंभ होने का प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि 12 मार्च 1930 को गाँधीजी बंदी नहीं थे — वे आश्रम से खुले रूप से, समाचारपत्रों की पूरी जानकारी में और सरकार को पहले से सूचित करके निकले थे । यह इस आंदोलन की एक विशेषता थी : उन्होंने वायसराय इर्विन को पत्र लिखकर अपनी माँगें और अपना इरादा पहले ही बता दिया था । गिरफ़्तारी बाद में हुई — नमक क़ानून टूटने के बाद, मई 1930 में — और तब धरासना का सत्याग्रह सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में आगे बढ़ा । साबरमती नदी के किनारे स्थित कारागार भी उसी नगर में है, इसलिए नाम की समानता से भ्रम हो सकता है ; पर यात्रा का आरंभ-स्थल आश्रम था, कारागार नहीं ।
अवधारणा
दांडी यात्रा सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरंभ-बिंदु है । दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया और 26 जनवरी 1930 को पहला स्वाधीनता दिवस मनाया गया । इसके बाद गाँधीजी ने वायसराय इर्विन के सामने ग्यारह माँगें रखीं, जिनमें नमक कर समाप्त करना, भू-राजस्व घटाना, सैन्य व्यय में कमी, मुद्रा विनिमय दर में परिवर्तन और विदेशी कपड़े पर संरक्षक शुल्क जैसी माँगें थीं । माँगें अस्वीकार होने पर उन्होंने नमक क़ानून तोड़ने का निश्चय किया । 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से यात्रा आरंभ हुई और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक बनाकर क़ानून तोड़ा गया । इसके बाद आंदोलन देश भर में फैला — तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने त्रिचिनापल्ली से वेदारण्यम तक यात्रा की, मालाबार में के. केलप्पन ने, और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के ख़ुदाई ख़िदमतगारों ने आंदोलन को असाधारण शक्ति दी । मई 1930 में गाँधीजी की गिरफ़्तारी के बाद धरासना नमक कारख़ाने पर सत्याग्रह सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में हुआ ।
नमक को प्रतीक बनाने का निर्णय इस आंदोलन की सबसे अधिक चर्चित रणनीतिक चतुराई माना जाता है । नमक पर सरकार का एकाधिकार था, उस पर कर लगता था, और समुद्र तट पर स्वयं नमक बनाना अपराध था — जबकि नमक ऐसी वस्तु है जिसके बिना किसी घर का काम नहीं चलता । इसलिए इस एक माँग ने संवैधानिक बहसों को गाँव-गाँव के रसोईघर तक पहुँचा दिया, और आंदोलन में महिलाओं तथा निर्धन वर्गों की भागीदारी पहले से कहीं अधिक हुई । ध्यान रखने योग्य बात यह भी है कि सविनय अवज्ञा आंदोलन असहयोग आंदोलन से भिन्न था : असहयोग में सरकारी संस्थाओं का बहिष्कार किया गया था, जबकि सविनय अवज्ञा में क़ानूनों को जानबूझकर तोड़ा गया । यह अंतर परीक्षा में सीधे भी पूछा जाता है और विकल्पों में छिपाकर भी ।
मुख्य तथ्य
- दांडी नमक यात्रा 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से आरंभ हुई और गाँधीजी के साथ अठहत्तर चुने हुए सहयोगी चले ।
- यात्रा लगभग चौबीस दिन चली और तीन सौ पचासी किलोमीटर के आसपास की दूरी तय करके दांडी पहुँची, जहाँ 6 अप्रैल 1930 को नमक क़ानून तोड़ा गया ।
- गाँधीजी का पहला आश्रम 1915 में कोचरब में बना था ; 1917 में वह साबरमती नदी के तट पर स्थानांतरित हुआ और सत्याग्रह आश्रम कहलाया ।
- यात्रा पर निकलते समय गाँधीजी ने संकल्प लिया था कि स्वराज मिलने तक साबरमती आश्रम नहीं लौटेंगे, और वे लौटे नहीं ।
- दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का लक्ष्य स्वीकार हुआ और 26 जनवरी 1930 को पहला स्वाधीनता दिवस मनाया गया ।
- यात्रा से पहले गाँधीजी ने वायसराय इर्विन के सामने ग्यारह माँगें रखी थीं, जिनमें नमक कर की समाप्ति भी सम्मिलित थी ।
- 1918 का अहमदाबाद मिल-मज़दूर संघर्ष गाँधीजी के पहले अनशन से जुड़ा है और उसमें अनसूया साराभाई उनके साथ थीं ।
- गाँधीजी की गिरफ़्तारी के बाद मई 1930 में धरासना नमक कारख़ाने पर सत्याग्रह सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में हुआ ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कोचरब और साबरमती आश्रम का क्रम उलट देना । पहला 1915 का है और दूसरा 1917 से गाँधीजी का केंद्र रहा ।
- यात्रा के आरंभ और समापन की तिथियाँ मिला देना । आरंभ 12 मार्च 1930 और नमक क़ानून का उल्लंघन 6 अप्रैल 1930 ।
- 1918 के अहमदाबाद मिल संघर्ष को 1930 की यात्रा से जोड़ देना । दोनों एक ही नगर से हैं, पर बारह वर्ष का अंतर है ।
- असहयोग और सविनय अवज्ञा को एक मान लेना । पहला बहिष्कार का आंदोलन था और दूसरा क़ानून तोड़ने का ।
- धरासना सत्याग्रह का नेतृत्व गाँधीजी को दे देना । उस समय वे बंदी थे और नेतृत्व सरोजिनी नायडू ने किया ।
राष्ट्रीय आंदोलन इस प्रश्नपत्र का सबसे भरा हुआ हिस्सा है और उसमें गाँधी-युग के प्रश्न सबसे अधिक आते हैं । ऐसे प्रश्नों का रूप प्रायः स्थान, तिथि, व्यक्ति या संगठन के स्तर पर होता है, और विकल्प एक ही परिवेश से चुने जाते हैं ताकि सामान्य जानकारी से काम न चले — यहाँ चारों विकल्प अहमदाबाद से ही जुड़े हैं । इसलिए इस विषय की तैयारी में हर बड़े आंदोलन के लिए एक छोटी तालिका बना लीजिए : आरंभ की तिथि और स्थान, प्रमुख नेता, तात्कालिक कारण, विस्तार के क्षेत्र और समाप्ति का कारण । दूसरी उपयोगी आदत यह है कि एक ही नगर या एक ही व्यक्ति से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों को वर्ष के साथ अलग-अलग दर्ज किया जाए, क्योंकि परीक्षक उन्हीं को आपस में बदलकर विकल्प बनाता है । अहमदाबाद इसका अच्छा उदाहरण है — वहाँ 1915 का आश्रम भी है, 1918 का मज़दूर संघर्ष भी और 1930 की यात्रा का आरंभ भी ।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
गाँधीजी ने दांडी में नमक क़ानून निम्नलिखित में से किस तिथि को तोड़ा था ?
- (a)12 मार्च 1930
- (b)6 अप्रैल 1930
- (c)26 जनवरी 1930
- (d)5 मई 1930
उत्तर(b) 6 अप्रैल 1930 — यात्रा 12 मार्च को आरंभ हुई थी और इसी दिन दांडी में नमक बनाकर क़ानून तोड़ा गया ।
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गाँधीजी की गिरफ़्तारी के बाद धरासना नमक कारख़ाने पर हुए सत्याग्रह का नेतृत्व निम्नलिखित में से किसने किया था ?
- (a)कस्तूरबा गाँधी
- (b)सरोजिनी नायडू
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उत्तर(b) सरोजिनी नायडू — मई 1930 में गाँधीजी के बंदी होने पर उन्होंने धरासना सत्याग्रह का नेतृत्व किया ।