किसी श्रमिक संघ (ट्रेड यूनियन) के पंजीकरण के लिए अपेक्षित सदस्यों की न्यूनतम संख्या क्या है ?
- (a)2 सदस्य
- (b)3 सदस्य
- (c)7 सदस्य
- (d)10 सदस्य
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 7 सदस्य । ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 की धारा 4(1) कहती है कि किसी ट्रेड यूनियन के सात या अधिक सदस्य, यूनियन के नियमों पर अपने नाम लिखकर तथा पंजीकरण से संबंधित इस अधिनियम के उपबंधों का पालन करके, यूनियन के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं । यही सात का अंक इस अधिनियम की सबसे अधिक पूछी जाने वाली संख्या है । पर इस अंक के साथ दो बातें और जोड़कर याद रखनी चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः उन्हीं से आगे बढ़ते हैं । पहली, 2001 के संशोधन से धारा 4(1) में जोड़े गए परंतुक ने केवल सात सदस्य होना पर्याप्त नहीं रहने दिया : कर्मकारों की किसी यूनियन का पंजीकरण तभी होगा जब आवेदन की तारीख़ को उस प्रतिष्ठान या उद्योग में लगे कर्मकारों का कम से कम दस प्रतिशत या एक सौ कर्मकार — इनमें से जो कम हो — उस यूनियन के सदस्य हों । दूसरी, धारा 9-क कहती है कि पंजीकृत यूनियन को यह संख्या हर समय बनाए रखनी होगी, किंतु न्यूनतम सात की सीमा के अधीन । अर्थात् सात नीचे की वह रेखा है जिससे नीचे कोई पंजीकृत ट्रेड यूनियन जा ही नहीं सकती । धारा 4(2) एक व्यावहारिक कठिनाई का समाधान देती है — यदि आवेदन के बाद और पंजीकरण से पहले कुछ आवेदक सदस्य नहीं रह जाते, तो आवेदन केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं हो जाता, बशर्ते ऐसे आवेदकों की संख्या कुल आवेदकों के आधे से अधिक न हो । ध्यान रखिए कि सात केवल पंजीकरण के आवेदन की संख्या है ; ट्रेड यूनियन बनाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है । अपंजीकृत यूनियन भी हो सकती है, पर उसे धारा 17 और 18 का आपराधिक तथा सिविल वाद से संरक्षण और धारा 13 का निगमित निकाय का दर्जा नहीं मिलता — और यही संरक्षण पंजीकरण का असली आकर्षण है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)2 सदस्य — दो का अंक इस अधिनियम में कहीं नहीं आता । वह कंपनी विधि से आता है, जहाँ कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 3 के अनुसार प्राइवेट कंपनी बनाने के लिए दो व्यक्ति पर्याप्त हैं, और भागीदारी के लिए भी दो व्यक्ति चाहिए । ट्रेड यूनियन का पूरा विचार सामूहिक सौदेबाज़ी का है — एक ऐसा संगठन जो कर्मकारों के समूह की ओर से नियोजक से बात करे — इसलिए विधायिका ने आवेदकों की न्यूनतम संख्या इतनी रखी कि वह किसी सामूहिकता का प्रतिनिधित्व करे । दो सदस्यों की यूनियन उस उद्देश्य को पूरा नहीं करती । ऐसे विकल्प में फँसने से बचने का उपाय यह है कि हर श्रम अधिनियम की संख्याएँ एक साथ याद की जाएँ, ताकि दूसरे कानून का अंक इस कानून पर न चढ़े ।
- (b)3 सदस्य — तीन का अंक भी ट्रेड यूनियन अधिनियम की किसी अपेक्षा से नहीं जुड़ता । इस अधिनियम में जो संख्याएँ ध्यान देने योग्य हैं वे ये हैं : पंजीकरण के आवेदन के लिए सात सदस्य, 2001 के संशोधन से दस प्रतिशत या एक सौ कर्मकार जो कम हो, तथा धारा 22 में पदाधिकारियों का अनुपात — साधारण दशा में एक-तिहाई या पाँच, जो कम हो, उससे अधिक बाहरी व्यक्ति पदाधिकारी नहीं हो सकते, और असंगठित क्षेत्र की यूनियन में कम से कम आधे पदाधिकारी उसी उद्योग में वास्तव में लगे व्यक्ति होने चाहिए । इनमें तीन कहीं नहीं है । विकल्प केवल इसलिए रखा गया है कि दो और सात के बीच एक और छोटा अंक मौजूद रहे ।
- (d)10 सदस्य — दस का अंक श्रम विधि में बहुत जगह आता है, और यही इस विकल्प को ख़तरनाक बनाता है । उपदान संदाय अधिनियम, 1972 उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिनमें दस या अधिक व्यक्ति नियोजित हों ; कारखाना अधिनियम, 1948 में बिजली से चलने वाले कारख़ाने के लिए दस कर्मकार की सीमा है ; और स्वयं ट्रेड यूनियन अधिनियम में 2001 के संशोधन के बाद दस प्रतिशत की अपेक्षा जुड़ी है । पर पंजीकरण के आवेदन के लिए अपेक्षित सदस्यों की न्यूनतम संख्या दस नहीं, सात है — धारा 4(1) में यही शब्द है । दस प्रतिशत और दस सदस्य को एक मान लेना इस प्रश्न की सबसे स्वाभाविक भूल है, इसलिए संशोधन पढ़ते समय प्रतिशत और संख्या को अलग-अलग दर्ज कीजिए ।
अवधारणा
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 भारत में श्रमिक संघों को कानूनी पहचान देने वाला पहला अधिनियम है ; यह 1 जून 1927 से प्रवृत्त हुआ और आरंभ में इसका नाम भारतीय ट्रेड यूनियन अधिनियम था, जिसमें से भारतीय शब्द 1964 में हटा दिया गया । इसका ढाँचा सरल है । धारा 2(h) ट्रेड यूनियन को परिभाषित करती है — कर्मकारों और नियोजकों के बीच, कर्मकारों के आपस में, या नियोजकों के आपस में संबंधों को विनियमित करने के लिए बना अस्थायी या स्थायी संगम । धारा 4 पंजीकरण के आवेदन की बात करती है और वहीं सात सदस्यों की अपेक्षा है । धारा 5 आवेदन के साथ नियमों की प्रति और विवरण देने को कहती है, धारा 6 यह बताती है कि नियमों में कौन-कौन से विषय होने ही चाहिए, और धारा 8 रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण का उपबंध करती है । पंजीकरण मिलने पर धारा 13 यूनियन को निगमित निकाय बना देती है — शाश्वत उत्तराधिकार, सामान्य मुद्रा, संपत्ति रखने और वाद लाने का अधिकार । धारा 15 सामान्य निधि के अनुज्ञेय उपयोग गिनाती है और धारा 16 राजनीतिक निधि की अलग व्यवस्था करती है, जिसमें अंशदान स्वैच्छिक होता है । धारा 17 और 18 यूनियन के पदाधिकारियों तथा सदस्यों को व्यापार-विवाद से जुड़े कार्यों के लिए आपराधिक षड्यंत्र और कुछ सिविल वादों से संरक्षण देती हैं ।
पंजीकरण अनिवार्य नहीं है — यह इस अधिनियम की सबसे कम समझी जाने वाली बात है । कोई भी समूह यूनियन बना सकता है और पंजीकरण के बिना भी काम कर सकता है ; पंजीकरण से जो मिलता है वह है निगमित निकाय का दर्जा और धारा 17 तथा 18 का संरक्षण, जिसके बिना हड़ताल जैसी सामूहिक कार्रवाई पर आपराधिक षड्यंत्र और नुकसानी के वादों का ख़तरा बना रहता है । भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन का यह कानून 1920 के दशक की परिस्थितियों से निकला — 1920 में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई और मद्रास लेबर यूनियन के विरुद्ध चले व्यादेश के मुक़दमे ने यह दिखाया कि संगठित श्रमिकों को कानूनी संरक्षण के बिना छोड़ देना कितना महँगा है । आज यह अधिनियम औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में समाहित कर दिया गया है, जो ट्रेड यूनियन, स्थायी आदेश और औद्योगिक विवाद तीनों विषयों को एक जगह लाती है ।
मुख्य तथ्य
- ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 की धारा 4(1) : किसी ट्रेड यूनियन के सात या अधिक सदस्य नियमों पर नाम लिखकर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं ।
- 2001 के संशोधन से जुड़ा परंतुक : कर्मकारों की यूनियन के पंजीकरण के लिए संबंधित प्रतिष्ठान या उद्योग के कम से कम दस प्रतिशत या एक सौ कर्मकार, जो कम हो, उसके सदस्य होने चाहिए ।
- धारा 9-क : पंजीकृत यूनियन को यह सदस्य-संख्या हर समय बनाए रखनी होगी, किंतु न्यूनतम सात सदस्यों की सीमा के अधीन ।
- धारा 4(2) : आवेदन के बाद कुछ आवेदकों के सदस्य न रह जाने से आवेदन अविधिमान्य नहीं होता, बशर्ते ऐसे आवेदक कुल का आधे से अधिक न हों ।
- धारा 13 : पंजीकरण के बाद ट्रेड यूनियन निगमित निकाय बन जाती है — शाश्वत उत्तराधिकार, सामान्य मुद्रा और संपत्ति रखने तथा वाद लाने का अधिकार ।
- धारा 17 और 18 : पंजीकृत यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों को व्यापार-विवाद से जुड़े कार्यों के लिए आपराधिक षड्यंत्र तथा कुछ सिविल वादों से संरक्षण ।
- धारा 22 : साधारण दशा में एक-तिहाई या पाँच, जो कम हो, से अधिक पदाधिकारी बाहरी नहीं हो सकते ; असंगठित क्षेत्र में कम से कम आधे पदाधिकारी उसी उद्योग से होने चाहिए ।
- यह अधिनियम 1 जून 1927 से प्रवृत्त हुआ ; इसका मूल नाम भारतीय ट्रेड यूनियन अधिनियम था और भारतीय शब्द 1964 में हटाया गया ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दस प्रतिशत की अपेक्षा को दस सदस्यों की अपेक्षा समझ लेना । प्रतिशत 2001 के संशोधन से आया है ; न्यूनतम संख्या आज भी सात है ।
- यह मान लेना कि पंजीकरण के बिना ट्रेड यूनियन बन ही नहीं सकती । पंजीकरण ऐच्छिक है ; उससे केवल दर्जा और संरक्षण मिलता है ।
- पंजीकरण के लिए अपेक्षित सात सदस्यों को कुल सदस्यता की ऊपरी या निश्चित सीमा मान लेना । वह केवल न्यूनतम है ।
- धारा 22 के पदाधिकारी संबंधी अनुपात और धारा 4 की सदस्य संख्या को मिला देना — दोनों अलग-अलग अपेक्षाएँ हैं ।
- अधिनियम का वर्ष 1926 और प्रवर्तन का वर्ष 1927 गड्डमड्ड कर देना ; प्रश्न कभी-कभी प्रवर्तन की तारीख़ ही पूछ लेते हैं ।
इस पेपर के श्रम विधि खंडों में संख्या वाले प्रश्न सबसे अधिक आते हैं, और उनका उत्तर याद रखने के अलावा कोई उपाय नहीं होता — तर्क से सात और दस के बीच निर्णय नहीं किया जा सकता । इसलिए तैयारी की सबसे उपयोगी विधि यह है कि हर अधिनियम की संख्याएँ एक पृष्ठ पर एक साथ लिखी जाएँ : ट्रेड यूनियन अधिनियम में सात सदस्य, दस प्रतिशत या सौ कर्मकार, एक-तिहाई या पाँच बाहरी पदाधिकारी ; उपदान संदाय अधिनियम में दस कर्मचारी और पाँच वर्ष की सेवा ; कारखाना अधिनियम में दस और बीस कर्मकार तथा आयु की सीमाएँ ; कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम में बीस कर्मचारी । एक साथ लिखी संख्याएँ आपस में गड्डमड्ड नहीं होतीं, अलग-अलग पढ़ी गई संख्याएँ हो जाती हैं । इसके साथ यह भी देखिए कि संशोधन से कोई नई संख्या तो नहीं जुड़ी, क्योंकि प्रश्न प्रायः पुरानी और नई दोनों संख्याएँ विकल्पों में रख देते हैं ।
संबंधित PYQ
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- (a) 1 only
- (b) 2 and 3 only
- (c) 1, 2 and 3
- (d) 1 and 3 only
उत्तर(c) 1, 2 and 3
इसी अधिनियम की एक और परिभाषा — व्यवसाय-विवाद — जो नियोजन, अनियोजन और श्रम परिस्थितियों को समेटती है ।
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- (a) Who has completed 15 years of age but is less than 18 years
- (b) Who is less than 18 years
- (c) Who has completed 14 years of age but is less than 18 years
- (d) Who has completed 16 years of age but is less than 18 years
उत्तर(a) Who has completed 15 years of age but is less than 18 years
श्रम विधि की एक और संख्या — कारखाना अधिनियम, 1948 में कुमार की आयु-सीमा ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 के अंतर्गत पंजीकरण के बाद कोई ट्रेड यूनियन निम्नलिखित में से क्या बन जाती है ?
- (a)एक निगमित निकाय
- (b)एक सरकारी विभाग
- (c)एक सहकारी समिति
- (d)एक न्यास
उत्तर(a) एक निगमित निकाय — धारा 13 के अनुसार पंजीकृत यूनियन शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला निगमित निकाय हो जाती है ।
- practice — not a real PYQ
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 में 2001 के संशोधन के बाद कर्मकारों की यूनियन के पंजीकरण के लिए संबंधित प्रतिष्ठान के कितने कर्मकार उसके सदस्य होने चाहिए ?
- (a)कम से कम पाँच प्रतिशत या पचास, जो कम हो
- (b)कम से कम दस प्रतिशत या एक सौ, जो कम हो
- (c)कम से कम पंद्रह प्रतिशत या दो सौ, जो कम हो
- (d)कम से कम पचास प्रतिशत
उत्तर(b) कम से कम दस प्रतिशत या एक सौ, जो कम हो — और न्यूनतम सात सदस्यों की सीमा तब भी बनी रहती है ।