किसी नियंत्रित उद्योग का क्या आशय है ?
- (a)कोई ऐसा उद्योग जिसका संघ द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है
- (b)कोई ऐसा उद्योग जिसका राज्य द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी राज्य अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है
- (c)कोई ऐसा उद्योग जिसका नगरपालिका द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी नगरपालिका नियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है
- (d)कोई ऐसा उद्योग जिसका राज्य द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) कोई ऐसा उद्योग जिसका संघ द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है । यह औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(ee) की परिभाषा है और उसमें तीन बातें एक साथ बँधी हैं — नियंत्रण संघ का हो, घोषणा किसी केंद्रीय अधिनियम से हुई हो, और घोषणा का आधार लोकहित हो । चारों विकल्प इन्हीं तीन तत्वों को आगे-पीछे करके बनाए गए हैं, इसलिए उत्तर वही होगा जो तीनों को उसी क्रम में रखता है । इस परिभाषा की जड़ संविधान में है । संघ सूची की प्रविष्टि 52 कहती है — ऐसे उद्योग जिनका संघ के नियंत्रण में होना संसद द्वारा विधि द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया हो । राज्य सूची की प्रविष्टि 24 राज्यों को उद्योग पर विधि बनाने की शक्ति देती है, पर स्पष्ट रूप से संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन रहते हुए । अर्थात् उद्योग मूलतः राज्य का विषय है, किंतु जिस क्षण संसद किसी उद्योग को लोकहित में अपने नियंत्रण में लेने की घोषणा कर देती है, वह उद्योग उस सीमा तक संघ के क्षेत्र में चला जाता है । ऐसी घोषणा करने वाला मुख्य कानून उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 है, जिसकी पहली अनुसूची में वे उद्योग गिनाए गए हैं जिन पर संघ का नियंत्रण घोषित है । श्रम कानून के लिए इस परिभाषा का महत्व यह है कि यह तय करती है कि विवाद में उपयुक्त सरकार कौन होगी । धारा 2(a) के अनुसार जिस उद्योग को केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा नियंत्रित उद्योग के रूप में विनिर्दिष्ट कर देती है, उसके औद्योगिक विवाद में उपयुक्त सरकार केंद्र सरकार होती है — और उपयुक्त सरकार ही सुलह अधिकारी नियुक्त करती है, विवाद अधिकरण को सौंपती है और आदेश की तामील कराती है । इसलिए यह शब्द केवल परिभाषा नहीं, अधिकारिता का द्वार है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)कोई ऐसा उद्योग जिसका राज्य द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी राज्य अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है — यहाँ दोनों तत्व बदल दिए गए हैं — नियंत्रण राज्य का और घोषणा राज्य अधिनियम से । ऐसा उद्योग हो सकता है, क्योंकि राज्य सूची की प्रविष्टि 24 राज्यों को उद्योग पर विधि बनाने की शक्ति देती है, पर उसे औद्योगिक विवाद अधिनियम नियंत्रित उद्योग नहीं कहता । नियंत्रित उद्योग शब्द अधिनियम में एक विशेष प्रयोजन से गढ़ा गया है : यह बताने के लिए कि किस विवाद में उपयुक्त सरकार केंद्र होगी, राज्य नहीं । यदि राज्य के अपने अधिनियम से घोषित उद्योग भी नियंत्रित उद्योग मान लिया जाए, तो परिभाषा का पूरा उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि तब वह केंद्र और राज्य के बीच कोई रेखा ही नहीं खींचेगी । संविधान की भाषा भी यही है — प्रविष्टि 52 में घोषणा संसद करती है, राज्य विधानमंडल नहीं ।
- (c)कोई ऐसा उद्योग जिसका नगरपालिका द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी नगरपालिका नियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है — नगरपालिकाएँ किसी उद्योग को इस अर्थ में अपने नियंत्रण में नहीं ले सकतीं । उनकी शक्तियाँ राज्य विधानमंडल की दी हुई होती हैं, और संविधान के अनुच्छेद 243W तथा बारहवीं अनुसूची जिन विषयों की सूची देती है वे नगर नियोजन, भूमि उपयोग का विनियमन, जल आपूर्ति, लोक स्वास्थ्य, सड़क, प्रकाश और ऐसी ही स्थानीय सेवाएँ हैं — किसी उद्योग को लोकहित में नियंत्रण में लेने की घोषणा उनमें नहीं है । नगरपालिका किसी कारख़ाने को व्यापार अनुज्ञप्ति दे सकती है, प्रदूषण या भवन उपविधि के आधार पर रोक लगा सकती है, पर यह किसी उद्योग को नियंत्रित उद्योग बना देना नहीं है । विकल्प में नियम शब्द भी संकेत है : परिभाषा अधिनियम की माँग करती है, किसी अधीनस्थ विधान की नहीं ।
- (d)कोई ऐसा उद्योग जिसका राज्य द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया है — यही चारों में सबसे कठिन विकल्प है, क्योंकि इसका आधा हिस्सा सही है । घोषणा का साधन ठीक बताया गया है — केंद्रीय अधिनियम — पर नियंत्रण करने वाला बदल दिया गया है : संघ के स्थान पर राज्य । परिभाषा का सारा भार इसी शब्द पर है । संघ सूची की प्रविष्टि 52 का पूरा तर्क यह है कि संसद किसी उद्योग को स्वयं संघ के नियंत्रण में लेने की घोषणा करती है और उतनी सीमा तक वह विषय राज्य के हाथ से निकल जाता है ; केंद्रीय अधिनियम बनाकर नियंत्रण राज्य को सौंप देना इस प्रविष्टि की योजना ही नहीं है । पढ़ते समय इस प्रकार के विकल्पों को दो हिस्सों में तोड़कर देखिए — कौन नियंत्रण करता है, और किस विधि से — तब यह विकल्प तुरंत अलग दिख जाता है ।
अवधारणा
नियंत्रित उद्योग औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(ee) में परिभाषित है : ऐसा उद्योग जिसका संघ द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित कर दिया गया हो । इस परिभाषा का सीधा संबंध संविधान की सातवीं अनुसूची से है । उद्योग साधारणतः राज्य सूची की प्रविष्टि 24 का विषय है, किंतु वह प्रविष्टि स्वयं संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन है । प्रविष्टि 52 संसद को यह शक्ति देती है कि वह विधि द्वारा किसी उद्योग को लोकहित में संघ के नियंत्रण में घोषित कर दे । इसी शक्ति के अंतर्गत उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 बना, जिसकी पहली अनुसूची में अनुसूचित उद्योग गिनाए गए हैं और जिसने अनुज्ञप्ति, पंजीकरण तथा जाँच का तंत्र खड़ा किया । अधिनियम में यह परिभाषा किसलिए है, यह धारा 2(a) से समझ आता है : उपयुक्त सरकार के निर्धारण के लिए । जिन उद्योगों को केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा नियंत्रित उद्योग के रूप में विनिर्दिष्ट कर देती है, उनके औद्योगिक विवादों में उपयुक्त सरकार केंद्र सरकार होती है ; शेष में संबंधित राज्य सरकार । और उपयुक्त सरकार ही सुलह, अधिकरण को निर्देश तथा पंचाट के प्रवर्तन की धुरी है ।
किसी अधिनियम की परिभाषाएँ अपने आप में सुंदर वाक्य नहीं होतीं, वे किसी न किसी काम की होती हैं — और परीक्षा का अच्छा प्रश्न यही पूछता है कि वह काम क्या है । नियंत्रित उद्योग का काम अधिकारिता तय करना है : वह उत्तर देता है कि किसी विवाद में सरकार कौन-सी है, कौन सुलह अधिकारी नियुक्त करेगी और किस अधिकरण के पास मामला जाएगा । यही कारण है कि ईपीएफओ जैसे पदों की परीक्षा में ऐसे शब्द बार-बार आते हैं ; प्रवर्तन अधिकारी को व्यवहार में यही तय करना पड़ता है कि किसी प्रतिष्ठान पर कौन-सा प्राधिकारी और कौन-सा उपबंध लागू है । संघ और राज्य के बीच उद्योग पर शक्ति के बँटवारे का यह ढाँचा राजव्यवस्था के प्रश्नों में भी उसी रूप में लौटता है, जहाँ प्रविष्टि 52 और उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 का उल्लेख होता है ।
मुख्य तथ्य
- औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(ee) : नियंत्रित उद्योग वह है जिसका संघ द्वारा नियंत्रण में लिया जाना किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित किया गया हो ।
- संविधान की सातवीं अनुसूची, संघ सूची की प्रविष्टि 52 : ऐसे उद्योग जिनका संघ के नियंत्रण में होना संसद द्वारा विधि द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित किया गया हो ।
- राज्य सूची की प्रविष्टि 24 राज्यों को उद्योग पर विधि बनाने की शक्ति देती है, किंतु वह संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन रहकर ही ।
- उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 प्रविष्टि 52 के अंतर्गत बना केंद्रीय अधिनियम है और उसकी पहली अनुसूची अनुसूचित उद्योगों की सूची देती है ।
- धारा 2(a) के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट नियंत्रित उद्योग के औद्योगिक विवाद में उपयुक्त सरकार केंद्र सरकार होती है ।
- उपयुक्त सरकार ही सुलह अधिकारी नियुक्त करती है, विवाद को श्रम न्यायालय या अधिकरण को निर्देशित करती है और पंचाट प्रवर्तित कराती है ।
- संघ सूची की प्रविष्टि 7 प्रतिरक्षा के प्रयोजनों के लिए घोषित उद्योगों को अलग से संघ के क्षेत्र में रखती है ।
- औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 औद्योगिक विवाद अधिनियम सहित तीन अधिनियमों को समेटती है और उपयुक्त सरकार का यही ढाँचा आगे ले जाती है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नियंत्रण करने वाले और घोषणा करने वाले को गड्डमड्ड कर देना । परिभाषा में नियंत्रण संघ का है और घोषणा केंद्रीय अधिनियम की ।
- यह मान लेना कि उद्योग पूरी तरह संघ का विषय है । वह मूलतः राज्य सूची में है और प्रविष्टि 52 की घोषणा से ही संघ के पास आता है ।
- नियंत्रित उद्योग को सार्वजनिक क्षेत्र का उद्योग समझ लेना । स्वामित्व का इस परिभाषा से कोई संबंध नहीं, केवल विधायी नियंत्रण का है ।
- अधिनियम और नियम का अंतर छोड़ देना । परिभाषा केंद्रीय अधिनियम माँगती है, किसी अधीनस्थ विधान या स्थानीय उपविधि से काम नहीं चलता ।
- इस परिभाषा को केवल शब्दावली मान लेना । इसका असली काम यह तय करना है कि विवाद में उपयुक्त सरकार केंद्र होगी या राज्य ।
इस प्रश्नपत्र में श्रम विधि दो खंडों में आती है और उनमें अधिकांश प्रश्न किसी अधिनियम की धारा 2 से बनते हैं । इस प्रश्न का ढाँचा विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है : चारों विकल्प लगभग एक ही लंबा वाक्य हैं और उनमें केवल दो शब्द बदलते हैं — कौन नियंत्रण करता है, और किस विधि के द्वारा । ऐसे प्रश्न पूरे वाक्य पढ़कर नहीं, चरों को अलग करके हल होते हैं । पढ़ते ही तय कर लीजिए कि विकल्पों में क्या-क्या बदल रहा है, फिर हर चर का सही मान अलग से याद कीजिए और उसी संयोजन को चुनिए । यह आदत सुमेलित सूची, कथन-आधारित प्रश्न और परिभाषा वाले प्रश्नों तीनों में काम आती है । साथ ही ध्यान रखिए कि श्रम विधि के कई शब्दों की जड़ संविधान की सातवीं अनुसूची में है, इसलिए राजव्यवस्था और श्रम विधि को अलग-अलग विषय मानकर पढ़ना यहाँ महँगा पड़ता है ।
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EPFO_EOAO_2020_Q61खोलें व हल करें →Match List I with List II and select the correct answer using the code given below the lists : List I (Term) A. Closure B. Workmen C. Strike D. Lockout List II (Explanation) 1. Permanent closing down of a place of employment 2. Any person employed in any industry to do skilled, unskilled or manual work 3. Temporary closing down of workplace by the management 4. Cessation of work by employees
- (a) A-1, B-2, C-4, D-3
- (b) A-3, B-4, C-2, D-1
- (c) A-1, B-4, C-2, D-3
- (d) A-3, B-2, C-4, D-1
उत्तर(a) A-1, B-2, C-4, D-3
इसी अधिनियम की चार अन्य परिभाषाएँ — बंदी, कर्मकार, हड़ताल और तालाबंदी — सुमेलित सूची के रूप में ।
EPFO_EOAO_2020_Q65खोलें व हल करें →Which of the following disputes is/are considered as trade dispute(s) under the provision of the Trade Union Act, 1926 ? Any dispute of any person connected with 1. Employment 2. Non-Employment 3. Conditions of Labour Select the correct answer using the code given below :
- (a) 1 only
- (b) 2 and 3 only
- (c) 1, 2 and 3
- (d) 1 and 3 only
उत्तर(c) 1, 2 and 3
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 में व्यवसाय-विवाद की परिभाषा, श्रम विधि का एक और परिभाषा-आधारित प्रश्न ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
संविधान की सातवीं अनुसूची की कौन-सी प्रविष्टि संसद को किसी उद्योग को लोकहित में संघ के नियंत्रण में घोषित करने की शक्ति देती है ?
- (a)संघ सूची की प्रविष्टि 52
- (b)राज्य सूची की प्रविष्टि 24
- (c)समवर्ती सूची की प्रविष्टि 22
- (d)संघ सूची की प्रविष्टि 43
उत्तर(a) संघ सूची की प्रविष्टि 52 — यही प्रविष्टि नियंत्रित उद्योग की धारणा का संवैधानिक आधार है ।
- practice — not a real PYQ
संघ सूची की प्रविष्टि 52 के अंतर्गत बनाया गया वह केंद्रीय अधिनियम कौन-सा है जिसकी पहली अनुसूची अनुसूचित उद्योगों की सूची देती है ?
- (a)कारखाना अधिनियम, 1948
- (b)उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951
- (c)कंपनी अधिनियम, 2013
- (d)औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
उत्तर(b) उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 — इसी की पहली अनुसूची अनुसूचित उद्योग गिनाती है ।