निम्नलिखित में से स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक कौन थे ?
- (a)सी. राजगोपालाचारी
- (b)दीन दयाल उपाध्याय
- (c)श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- (d)आचार्य नरेन्द्र देव
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) सी. राजगोपालाचारी । स्वतंत्र पार्टी की स्थापना वर्ष 1959 में हुई और उसके पीछे मुख्य व्यक्ति सी. राजगोपालाचारी थे ; उनके साथ मीनू मसानी तथा एन.जी. रंगा जैसे नेता भी इस प्रयास में सम्मिलित थे । दल के बनने का कारण उस समय की आर्थिक नीति से जुड़ा था । स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में सरकार नियोजित अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रही थी, जिसमें उद्योगों पर लाइसेंस और अनुमति की व्यवस्था थी, सार्वजनिक क्षेत्र को अग्रणी भूमिका दी जा रही थी, और कृषि में सहकारी खेती तथा भूमि की अधिकतम सीमा जैसे प्रस्ताव सामने आ रहे थे । स्वतंत्र पार्टी ने इन्हीं का विरोध किया । उसका तर्क था कि आर्थिक निर्णय राज्य के बजाय व्यक्ति और उद्यम के पास रहने चाहिए, और अत्यधिक नियंत्रण उद्यमशीलता को कुंठित करता है । इस अर्थ में वह उस दौर की राजनीति में उदार आर्थिक दृष्टि का प्रतिनिधित्व करती थी । दल को कुछ समय तक अच्छी सफलता भी मिली और वह लोक सभा में सबसे बड़ा विपक्षी दल बनकर उभरा, यद्यपि आगे चलकर वह कमज़ोर पड़ता गया । स्वयं राजगोपालाचारी का व्यक्तित्व भी इस उत्तर को याद रखने में सहायक है — वे भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल रहे, मद्रास के मुख्यमंत्री रहे, और भारत रत्न से सम्मानित होने वालों की पहली पंक्ति में थे । इसीलिए उत्तर विकल्प (a) है । इस उत्तर तक पहुँचने की एक और युक्ति दल के नाम में ही छिपी है । ‘स्वतंत्र’ शब्द यहाँ राजनीतिक स्वतंत्रता का नहीं, आर्थिक स्वतंत्रता का संकेत है — अर्थात् उद्यम और व्यक्ति को राज्य के नियंत्रण से मुक्त रखने का आग्रह । यह पूछते ही कि चारों नामों में से किसकी पहचान आर्थिक नीति पर बनी थी, तीन नाम एक साथ हट जाते हैं : दो की पहचान सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय प्रश्नों पर बनी और एक की समाजवादी दृष्टि पर, जो इस दल की दृष्टि से उलटी दिशा में जाती है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)दीन दयाल उपाध्याय — दीन दयाल उपाध्याय का संबंध स्वतंत्र पार्टी से नहीं, भारतीय जनसंघ से था । वे उस दल के प्रमुख विचारक तथा संगठनकर्ता रहे और उन्होंने ‘एकात्म मानववाद’ नामक विचार प्रस्तुत किया, जिसमें व्यक्ति, समाज और प्रकृति को एक समग्र इकाई के रूप में देखने की बात कही गई थी । यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी दोनों उस दौर में सत्तारूढ़ दल के विपक्ष में थीं, इसलिए अभ्यर्थी को दोनों एक जैसी दिख सकती हैं । पर उनकी दिशा भिन्न थी : स्वतंत्र पार्टी का आग्रह मुख्यतः आर्थिक नीति पर था, जबकि जनसंघ की पहचान सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय प्रश्नों पर बनी । दल और विचारक का जोड़ा अलग-अलग याद रखिए ।
- (c)श्यामा प्रसाद मुखर्जी — श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संबंध भी स्वतंत्र पार्टी से नहीं है ; उन्होंने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी । वे स्वतंत्रता के बाद बनी पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सम्मिलित थे और बाद में मतभेद के कारण उससे अलग हो गए, जिसके बाद उन्होंने नया दल खड़ा किया । यह विकल्प उन अभ्यर्थियों को खींचता है जो यह याद रखते हैं कि उस दौर में एक नया विपक्षी दल बना था, पर यह भूल जाते हैं कि उन वर्षों में एक से अधिक नए दल बने । इसीलिए इस काल की तैयारी में दल, संस्थापक और स्थापना का वर्ष तीनों को एक पंक्ति में जोड़कर याद रखना चाहिए, अलग-अलग नामों के रूप में नहीं ।
- (d)आचार्य नरेन्द्र देव — आचार्य नरेन्द्र देव समाजवादी धारा के नेता थे और उनका संबंध स्वतंत्र पार्टी से नहीं है । वे काँग्रेस के भीतर बने समाजवादी समूह से जुड़े रहे और आगे चलकर समाजवादी राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने गए । ध्यान दीजिए कि उनकी आर्थिक दृष्टि स्वतंत्र पार्टी की दृष्टि से लगभग विपरीत थी : समाजवादी धारा राज्य की अधिक भूमिका और संसाधनों के पुनर्वितरण की पक्षधर थी, जबकि स्वतंत्र पार्टी राज्य के हस्तक्षेप को घटाने की । इस प्रकार यह विकल्प केवल ग़लत ही नहीं, उलटी दिशा का है — और यही उसे परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी बनाता है, क्योंकि वह उस दौर के वैचारिक विस्तार को दिखा देता है ।
अवधारणा
स्वतंत्रता के बाद के पहले दो दशकों में भारत की दल-व्यवस्था पर एक ही दल का प्रभुत्व था, पर विपक्ष अनुपस्थित नहीं था — वह कई धाराओं में बँटा हुआ था और उनमें से हर धारा की अपनी वैचारिक पहचान थी । एक ओर समाजवादी धारा थी, जिसकी जड़ें काँग्रेस के भीतर बने समाजवादी समूह में थीं और जो आगे चलकर अलग दलों के रूप में सामने आई ; उसका आग्रह भूमि सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र और श्रमिकों के अधिकारों पर था । दूसरी ओर वामपंथी धारा थी, जो वर्ग-संघर्ष की दृष्टि से राजनीति देखती थी । तीसरी ओर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की धारा थी, जिसका प्रतिनिधित्व भारतीय जनसंघ ने किया, जिसकी स्थापना वर्ष 1951 में हुई । और चौथी वह धारा थी जिसे स्वतंत्र पार्टी ने वर्ष 1959 में खड़ा किया — आर्थिक उदारता की धारा, जो नियोजन तथा नियंत्रण की व्यवस्था के विरुद्ध थी और बाज़ार तथा निजी उद्यम की पक्षधर । इन चारों धाराओं को उनके दलों, संस्थापकों तथा मुख्य मुद्दों के साथ याद रखना इस पूरे काल की तैयारी का सबसे उपयोगी ढाँचा है ।
इस प्रकार के प्रश्न में चारों विकल्प एक ही काल के प्रसिद्ध नेता होते हैं, इसलिए केवल नाम पहचानने से काम नहीं चलता — नाम को दल के साथ जोड़ना पड़ता है । यहाँ तीन नाम ऐसे हैं जिनका संबंध दो अन्य धाराओं से है : दो भारतीय जनसंघ से और एक समाजवादी धारा से । इसीलिए यह प्रश्न वस्तुतः इस बात की जाँच है कि अभ्यर्थी उस दौर के विपक्ष की चारों धाराओं को अलग-अलग पहचानता है या नहीं । ऐसे प्रश्नों में एक अतिरिक्त सुविधा भी रहती है : यदि दल का मुख्य मुद्दा याद हो तो संस्थापक का अनुमान लगाना सरल हो जाता है, क्योंकि नेता और मुद्दा प्रायः साथ-साथ याद रहते हैं । यहाँ मुद्दा आर्थिक नियंत्रण का विरोध है, और वही नाम उत्तर बनता है जो उस दृष्टि से जुड़ा है । यह भी ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ में चारों नाम देवनागरी में हैं और पहले नाम का आद्याक्षर देवनागरी अक्षर के बाद पूर्ण विराम के साथ छपा है ।
मुख्य तथ्य
- स्वतंत्र पार्टी की स्थापना वर्ष 1959 में हुई और उसके पीछे मुख्य व्यक्ति सी. राजगोपालाचारी थे ; मीनू मसानी तथा एन.जी. रंगा भी इस प्रयास में सम्मिलित रहे ।
- यह दल नियोजित अर्थव्यवस्था, लाइसेंस तथा अनुमति की व्यवस्था, सहकारी खेती और भूमि की अधिकतम सीमा जैसे प्रस्तावों का विरोध करता था ।
- सी. राजगोपालाचारी भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल रहे, मद्रास के मुख्यमंत्री रहे, और भारत रत्न से सम्मानित होने वालों की पहली पंक्ति में थे ।
- भारतीय जनसंघ की स्थापना वर्ष 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी ; दीन दयाल उपाध्याय उसी दल के प्रमुख विचारक थे और उन्होंने एकात्म मानववाद का विचार प्रस्तुत किया ।
- आचार्य नरेन्द्र देव समाजवादी धारा के नेता थे, जिसकी आर्थिक दृष्टि स्वतंत्र पार्टी की दृष्टि से लगभग विपरीत थी ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विपक्ष के सभी दलों को एक जैसा मान लेना । उस दौर का विपक्ष कई धाराओं में बँटा था और उनकी दिशाएँ आपस में बहुत भिन्न थीं ।
- दल और विचारक का जोड़ा उलट देना । भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले और उसके प्रमुख विचारक दो अलग व्यक्ति थे ।
- स्थापना के वर्ष गड्डमड्ड करना । जनसंघ 1951 में बना और स्वतंत्र पार्टी 1959 में, इसलिए वर्ष के आधार पर भी दोनों अलग किए जा सकते हैं ।
स्वतंत्रता के बाद की दल-व्यवस्था पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा यही है — किसी दल का संस्थापक पूछना, जहाँ विकल्पों में उसी काल के अन्य दलों के नेता रखे जाते हैं । दूसरा साँचा वर्ष का है : कौन-सा दल कब बना, और वहाँ दो-तीन दलों के वर्ष एक साथ याद रखने पड़ते हैं । तीसरा साँचा विचारधारा का है — कौन-सा दल किस आर्थिक या सांस्कृतिक दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता था, और उसका मुख्य विरोध किस नीति से था । चौथा साँचा व्यक्ति के जीवन का है, जिसमें किसी नेता के अन्य पदों या योगदानों पर प्रश्न बनता है । चारों की तैयारी के लिए एक तालिका बनाइए जिसमें दल, स्थापना का वर्ष, संस्थापक, प्रमुख विचारक और मुख्य मुद्दा पाँच स्तंभों में हों । मुद्दा अवश्य लिखिए, क्योंकि नाम भूल जाने पर भी मुद्दा याद रहने से उत्तर तक पहुँचा जा सकता है ।
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EPFO_EOAO_2020_Q74खोलें व हल करें →Who among the following was not a member of the Socialist group in the Congress Party ?
- (a) Jayaprakash Narayan
- (b) Rajendra Prasad
- (c) N.G. Ranga
- (d) Narendra Dev
उत्तर(b) Rajendra Prasad
इसी प्रश्नपत्र का दूसरा प्रश्न, जो काँग्रेस के भीतर बने समाजवादी समूह की सदस्यता पर टिका है — वही धारा, जिससे इस कार्ड का चौथा विकल्प जुड़ा है और जिसकी आर्थिक दृष्टि स्वतंत्र पार्टी से विपरीत थी ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारतीय जनसंघ की स्थापना वर्ष 1951 में निम्नलिखित में से किस नेता ने की थी ? (उसके प्रमुख विचारक से अलग पहचानिए)
- (a)दीन दयाल उपाध्याय
- (b)श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- (c)सी. राजगोपालाचारी
- (d)जयप्रकाश नारायण
उत्तर(b) श्यामा प्रसाद मुखर्जी — दीन दयाल उपाध्याय उसी दल के प्रमुख विचारक थे, संस्थापक नहीं ; सी. राजगोपालाचारी ने स्वतंत्र पार्टी खड़ी की थी ।
- practice — not a real PYQ
स्वतंत्र भारत के प्रथम तथा अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल निम्नलिखित में से कौन थे ?
- (a)लॉर्ड माउंटबेटन
- (b)सी. राजगोपालाचारी
- (c)डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- (d)सरदार वल्लभभाई पटेल
उत्तर(b) सी. राजगोपालाचारी — लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल अवश्य थे, पर भारतीय नहीं ; गणतंत्र बनने पर यह पद ही समाप्त हो गया ।