भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में, भाषाओं की सूची में, निम्नलिखित में से किस भाषा को सम्मिलित नहीं किया गया है ?
- (a)डोगरी
- (b)भोटी
- (c)मैथिली
- (d)संथाली
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) भोटी । यहाँ ‘नहीं’ मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए उत्तर वही भाषा है जो आठवीं अनुसूची की सूची में सम्मिलित नहीं है — और वह भोटी है । शेष तीनों उसमें हैं, और तीनों एक ही संशोधन से जुड़ी हैं, इसलिए यह प्रश्न उस संशोधन को याद रखने वाले के लिए बहुत सरल हो जाता है । डोगरी, मैथिली और संथाली — तीनों को बोडो के साथ एक ही संविधान संशोधन द्वारा आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया था, और उसी संशोधन के बाद इस सूची में भाषाओं की कुल संख्या बाईस हो गई । आरंभ में यह सूची चौदह भाषाओं की थी । उसके बाद तीन चरणों में उसका विस्तार हुआ : पहले सिंधी जोड़ी गई ; फिर एक ही संशोधन से कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली ; और अंत में बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली । भोटी इस सूची में कभी नहीं आई । वह हिमालयी क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है और उसे आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने की माँग समय-समय पर उठती रही है, पर वह माँग अभी माँग ही है । यहाँ यह भी ध्यान रखिए कि आठवीं अनुसूची में सम्मिलित होना और ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा पाना दो अलग-अलग बातें हैं — दूसरी व्यवस्था संविधान की नहीं, सरकार के निर्णय की है । अतः उत्तर विकल्प (b) है । परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्न को हल करने की सबसे भरोसेमंद विधि उलटी दिशा की है । यह याद रखने के बजाय कि सूची में कौन-कौन है, यह याद रखिए कि सूची में जुड़ी अंतिम भाषाएँ कौन-सी थीं और किन भाषाओं की माँग अब भी चर्चा में रहती है । पहली जानकारी से तीन विकल्प एक साथ हट जाते हैं और दूसरी से चौथे की पुष्टि हो जाती है । केवल कुल संख्या याद रखने से यह प्रश्न हल नहीं होता, क्योंकि संख्या यह नहीं बताती कि कोई विशेष नाम भीतर है या बाहर ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)डोगरी — डोगरी आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है, इसलिए यह ‘नहीं’ वाले प्रश्न का उत्तर नहीं बन सकती । वह जम्मू क्षेत्र तथा उसके आसपास बोली जाने वाली भाषा है और उसे उसी संविधान संशोधन से सूची में जोड़ा गया जिससे बोडो, मैथिली तथा संथाली जोड़ी गईं । यह विकल्प उन अभ्यर्थियों के लिए कठिन हो सकता है जो सूची के केवल आरंभिक चौदह नाम याद रखते हैं और बाद में जुड़ी भाषाओं की ओर ध्यान नहीं देते । इसीलिए इस अनुसूची को तीन चरणों में याद करना अधिक उपयोगी है — मूल सूची, फिर तीन चरणों की वृद्धि — क्योंकि परीक्षक प्रायः बाद में जुड़ी भाषाओं में से ही प्रश्न बनाता है ।
- (c)मैथिली — मैथिली भी आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं है । वह बिहार तथा उससे लगे क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषा है और उसका साहित्य बहुत प्राचीन है । उसे भी उसी संशोधन से सूची में स्थान मिला जिससे बोडो, डोगरी तथा संथाली को मिला । इस विकल्प के बारे में एक भ्रम यह भी रहता है कि जिन भाषाओं को कुछ लोग किसी बड़ी भाषा की बोली मानते रहे, वे अनुसूची में कैसे आ सकती हैं । उत्तर यह है कि अनुसूची में सम्मिलित करना संविधान संशोधन का विषय है और वह भाषाशास्त्र के वर्गीकरण से नहीं, संसद के निर्णय से तय होता है — इसलिए सूची को उसी रूप में याद रखना चाहिए जिस रूप में वह है ।
- (d)संथाली — संथाली भी आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है, इसलिए यह विकल्प भी उत्तर नहीं है । वह झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा आसपास के क्षेत्रों में बोली जाने वाली जनजातीय भाषा है, और उसे भी उसी संशोधन से सूची में स्थान मिला । ध्यान दीजिए कि इस प्रश्न के तीनों सही विकल्प एक ही संशोधन से आते हैं — यह संयोग नहीं, प्रश्न की रचना है । परीक्षक ने एक ही चरण में जुड़ी तीन भाषाएँ रखकर यह जाँचा है कि अभ्यर्थी उस चरण को जानता है या नहीं । जो उस चरण की चारों भाषाएँ याद रखता है, वह तीनों विकल्पों को एक साथ हटा देता है और चौथा नाम अपने आप उत्तर बन जाता है ।
अवधारणा
भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में उन भाषाओं की सूची है जिन्हें संविधान मान्यता देता है । इस सूची का सीधा संवैधानिक उपयोग दो स्थानों पर है : राजभाषा से जुड़े प्रावधानों में यह सूची राजभाषा आयोग तथा समिति की संरचना से जुड़ती है, और हिंदी के विकास से जुड़े प्रावधान में यह कहा गया है कि हिंदी अपने शब्द-भंडार के लिए मुख्यतः संस्कृत से और गौणतः इन भाषाओं से सामग्री ले । सूची का इतिहास चार चरणों का है । संविधान के आरंभ में इसमें चौदह भाषाएँ थीं । उसके बाद सिंधी जोड़ी गई । फिर एक संशोधन से कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली सम्मिलित हुईं । और अंत में बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली जोड़ी गईं, जिससे कुल संख्या बाईस हो गई । इसके साथ यह भेद भी स्पष्ट रखना चाहिए कि राजभाषा, आठवीं अनुसूची की भाषा और शास्त्रीय भाषा तीन अलग-अलग श्रेणियाँ हैं । संघ की राजभाषा से जुड़े प्रावधान अलग हैं, आठवीं अनुसूची एक सूची है, और शास्त्रीय भाषा का दर्जा सरकार के निर्णय से दिया जाता है, संविधान संशोधन से नहीं ।
आठवीं अनुसूची पर प्रश्न लगभग हर आयोग में आते हैं, और उनका ढाँचा प्रायः यही होता है — चार भाषाएँ देकर पूछना कि कौन-सी उसमें नहीं है । ऐसे प्रश्न में सूची की कुल संख्या याद रखना पर्याप्त नहीं होता ; नाम याद रखने पड़ते हैं, और विशेषकर वे नाम जो बाद के संशोधनों से जुड़े । यहाँ परीक्षक ने तीन ऐसी भाषाएँ रखी हैं जो एक ही संशोधन से जुड़ी हैं और एक ऐसी जो सूची में है ही नहीं । यह रचना अभ्यर्थी के लिए वस्तुतः सहायक है, क्योंकि यदि उस एक संशोधन की चारों भाषाएँ याद हों तो तीन विकल्प एक साथ हट जाते हैं । दूसरी उपयोगी दृष्टि यह है कि जिन भाषाओं की सूची में सम्मिलित होने की माँग चर्चा में रहती है, उनके नाम अलग से याद रखे जाएँ, क्योंकि परीक्षक प्रायः उन्हीं में से ग़लत विकल्प चुनता है । हिन्दी स्तंभ में चारों भाषाओं के नाम देवनागरी में हैं और स्तंभ का पाठ अंग्रेज़ी स्तंभ से थोड़ा विस्तृत है, क्योंकि वहाँ ‘भाषाओं की सूची में’ अलग से लिखा गया है ।
मुख्य तथ्य
- भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में इस समय बाईस भाषाएँ सम्मिलित हैं ; भोटी उनमें नहीं है, यद्यपि उसे जोड़ने की माँग समय-समय पर उठती रही है ।
- संविधान के आरंभ में इस सूची में चौदह भाषाएँ थीं ; उसके बाद तीन अलग-अलग चरणों में उसका विस्तार हुआ और भाषाओं की संख्या बढ़ती गई ।
- पहले चरण में सिंधी जोड़ी गई, दूसरे चरण में कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली, और तीसरे चरण में बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली सम्मिलित हुईं ।
- डोगरी, मैथिली और संथाली तीनों एक ही संविधान संशोधन से सूची में आईं, और उसी संशोधन के बाद कुल संख्या बाईस हो गई ।
- आठवीं अनुसूची में सम्मिलित होना, संघ की राजभाषा होना और शास्त्रीय भाषा का दर्जा पाना तीन अलग-अलग श्रेणियाँ हैं ; अंतिम दर्जा सरकार के निर्णय से दिया जाता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- केवल कुल संख्या याद रखना । संख्या से यह पता नहीं चलता कि कोई विशेष भाषा सूची में है या नहीं ; नाम याद रखने पड़ते हैं ।
- बाद के संशोधनों से जुड़ी भाषाओं को छोड़ देना । परीक्षक प्रायः उन्हीं में से प्रश्न बनाता है, क्योंकि मूल चौदह नाम अधिकतर याद रहते हैं ।
- आठवीं अनुसूची और शास्त्रीय भाषा के दर्जे को एक मान लेना । दोनों अलग व्यवस्थाएँ हैं और उनकी प्रक्रिया भी अलग है ।
आठवीं अनुसूची पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा यही है — चार नाम देकर पूछना कि कौन-सी भाषा सूची में नहीं है । दूसरा साँचा संख्या का है : सूची में कुल कितनी भाषाएँ हैं, और आरंभ में कितनी थीं । तीसरा साँचा संशोधन का है — कौन-सी भाषा किस संशोधन से जोड़ी गई, और यह सबसे कठिन रूप है, क्योंकि उसमें चरण और नाम दोनों याद रखने पड़ते हैं । चौथा साँचा भेद का है, जिसमें राजभाषा, आठवीं अनुसूची तथा शास्त्रीय भाषा की श्रेणियों को आपस में मिलाकर पूछा जाता है । चारों की तैयारी के लिए सूची को चरणों में लिखिए — मूल चौदह, फिर तीन वृद्धियाँ — और उसके नीचे उन दो-तीन भाषाओं के नाम जोड़ दीजिए जिनकी सम्मिलित होने की माँग चर्चा में रहती है । इसी एक पृष्ठ से इस विषय के अधिकांश प्रश्न सध जाते हैं ।
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EPFO_EOAO_2020_Q98खोलें व हल करें →UNESCO has been observing February 21 as the International Mother Language Day since 2000. The idea to celebrate the International Mother Language Day was the initiative of which of the following nations ?
- (a) Sri Lanka
- (b) Bangladesh
- (c) India
- (d) Nepal
उत्तर(b) Bangladesh
इसी प्रश्नपत्र का भाषा से जुड़ा दूसरा प्रश्न — अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का प्रस्ताव किस देश से आया, जो दिखाता है कि भाषा का प्रश्न संविधान की सूची से बाहर भी राजनीतिक रहा है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में इस समय कुल कितनी भाषाएँ सम्मिलित हैं ? (आरंभिक संख्या से तुलना कीजिए)
- (a)चौदह
- (b)अठारह
- (c)बाईस
- (d)चौबीस
उत्तर(c) बाईस — संविधान के आरंभ में यह सूची चौदह भाषाओं की थी और तीन चरणों की वृद्धि के बाद उसकी संख्या बाईस हुई ।
- practice — not a real PYQ
बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली को आठवीं अनुसूची में किस चरण में सम्मिलित किया गया था ?
- (a)सिंधी के साथ, पहले चरण में
- (b)कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली के साथ, दूसरे चरण में
- (c)सबसे अंतिम चरण में, जिसके बाद कुल संख्या बाईस हुई
- (d)संविधान के आरंभ की मूल चौदह भाषाओं में
उत्तर(c) सबसे अंतिम चरण में, जिसके बाद कुल संख्या बाईस हुई — इसी चरण की चारों भाषाएँ साथ जोड़ी गईं, इसलिए उन्हें एक जोड़े के रूप में याद रखना उपयोगी है ।