धात्विक ज़िंक निम्नलिखित में से किसका अपचयन नहीं करेगा ?
- (a)Cu^2+
- (b)H^+
- (c)Ag^+
- (d)Al^3+
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) Al^3+ । यहाँ ‘नहीं’ मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, अर्थात् उत्तर वह आयन है जिसका अपचयन धात्विक ज़िंक नहीं कर पाएगा । चारों विकल्प आयन हैं और उनका आवेश ऊपर उठे अंक के रूप में छपा है, जिसे यहाँ पंक्ति में ^ चिह्न के साथ लिखा गया है : Cu^2+ का अर्थ है दो धन आवेश वाला कॉपर आयन, H^+ का एक धन आवेश वाला हाइड्रोजन आयन, Ag^+ का एक धन आवेश वाला सिल्वर आयन, और Al^3+ का तीन धन आवेश वाला ऐल्युमिनियम आयन । अब नियम देखिए । कोई धातु किसी आयन का अपचयन तभी कर सकती है जब वह उस आयन की धातु से अधिक क्रियाशील हो — अर्थात् जब वह सक्रियता श्रेणी में उससे ऊपर बैठती हो । ऐसा होने पर वह धातु स्वयं इलेक्ट्रॉन देकर ऑक्सीकृत हो जाती है और आयन इलेक्ट्रॉन लेकर धातु के रूप में जमा हो जाता है ; इसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं । सक्रियता श्रेणी में ऐल्युमिनियम ज़िंक से ऊपर है, अर्थात् वह ज़िंक से अधिक क्रियाशील है । इसलिए ज़िंक उससे इलेक्ट्रॉन छीनकर उसे धातु में नहीं बदल सकता ; अभिक्रिया उलटी दिशा में जाती, अर्थात् ऐल्युमिनियम ज़िंक के आयनों का अपचयन कर सकता है । शेष तीनों — कॉपर, हाइड्रोजन और सिल्वर — श्रेणी में ज़िंक से नीचे हैं, इसलिए ज़िंक उन तीनों का अपचयन कर देगा । अतः उत्तर विकल्प (d) है । सक्रियता श्रेणी का वह भाग जो इस प्रश्न के लिए पर्याप्त है, इतना ही है — ऐल्युमिनियम, फिर ज़िंक, फिर आयरन, फिर लेड, फिर हाइड्रोजन, फिर कॉपर और अंत में सिल्वर । ज़िंक पर उँगली रखिए और देखिए कि प्रश्न के चारों आयनों में से कौन उसके ऊपर पड़ता है । केवल ऐल्युमिनियम ऊपर है, शेष तीनों नीचे । इस एक पंक्ति से पूरा प्रश्न बिना कोई अभिक्रिया लिखे हल हो जाता है, और यही कारण है कि इस श्रेणी को क्रम से याद रखना रसायन विज्ञान की तैयारी का सबसे लाभदायक निवेश माना जाता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)Cu^2+ — Cu^2+ का अपचयन ज़िंक बड़ी सरलता से कर देता है, इसलिए यह ‘नहीं’ वाले प्रश्न का उत्तर नहीं बन सकता । कॉपर सक्रियता श्रेणी में ज़िंक से नीचे है, अर्थात् कम क्रियाशील है, इसलिए ज़िंक उसके आयनों को इलेक्ट्रॉन देकर धातु में बदल देता है और स्वयं आयन बनकर विलयन में चला जाता है । यह प्रयोगशाला का सबसे परिचित प्रदर्शन है : कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में ज़िंक की पट्टी डालिए, विलयन का नीला रंग धीरे-धीरे फीका पड़ता जाएगा और पट्टी पर लाल-भूरे रंग की परत जमती दिखेगी । यही अभिक्रिया डैनियल सेल का आधार भी है, जिसमें ज़िंक का इलेक्ट्रोड ऋण ध्रुव और कॉपर का धन ध्रुव बनता है ।
- (b)H^+ — H^+ का अपचयन भी ज़िंक कर देता है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं है । सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन को धातुओं के बीच एक संदर्भ-बिंदु के रूप में रखा जाता है, और जो धातुएँ उससे ऊपर हैं वे तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस विस्थापित कर देती हैं । ज़िंक उन्हीं में है । इसीलिए प्रयोगशाला में हाइड्रोजन गैस बनाने की सामान्य विधि यही है कि दानेदार ज़िंक पर तनु अम्ल डाला जाए ; बुलबुले उठने लगते हैं और गैस एकत्र कर ली जाती है । यहाँ ज़िंक इलेक्ट्रॉन देकर आयन बनता है और हाइड्रोजन आयन इलेक्ट्रॉन लेकर गैस के रूप में निकल जाते हैं । कॉपर श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है, इसलिए वह तनु अम्ल से हाइड्रोजन नहीं निकालता ।
- (c)Ag^+ — Ag^+ का अपचयन भी ज़िंक करता है, इसलिए यह विकल्प भी उत्तर नहीं है । सिल्वर सक्रियता श्रेणी में बहुत नीचे है — वह उन कम क्रियाशील धातुओं में गिना जाता है जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में भी मिल जाती हैं । इसलिए सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में ज़िंक डालने पर ज़िंक घुलता जाता है और सिल्वर चमकदार कणों के रूप में जमा होता जाता है । यही तर्क बताता है कि विस्थापन की दिशा सदा अधिक क्रियाशील धातु से कम क्रियाशील की ओर होती है । यदि इसका उलटा प्रयास किया जाए — अर्थात् सिल्वर की छड़ ज़िंक सल्फेट के विलयन में डाली जाए — तो कुछ नहीं होगा, क्योंकि सिल्वर ज़िंक से इलेक्ट्रॉन छीन नहीं सकता ।
अवधारणा
धातुओं की सक्रियता श्रेणी उन्हें उनकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति के क्रम में सजाती है । ऊपर की धातुएँ सबसे अधिक क्रियाशील होती हैं और सबसे सरलता से इलेक्ट्रॉन देकर आयन बनती हैं ; नीचे की धातुएँ कम क्रियाशील होती हैं और उनके आयन सरलता से इलेक्ट्रॉन लेकर वापस धातु बन जाते हैं । सामान्य क्रम इस प्रकार याद रखा जाता है — पोटैशियम, सोडियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, ऐल्युमिनियम, ज़िंक, आयरन, लेड, हाइड्रोजन, कॉपर, मर्करी, सिल्वर और गोल्ड । इसी श्रेणी से तीन नियम निकलते हैं । पहला, कोई धातु उसी धातु के लवण-विलयन से उसे विस्थापित कर सकती है जो श्रेणी में उससे नीचे हो । दूसरा, जो धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर हैं वे तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस निकाल देती हैं । तीसरा, श्रेणी में जितना ऊपर, उतनी अधिक प्रवृत्ति ऑक्सीकृत होने की और उतनी ही कठिन उस धातु के अयस्क से धातु निकालने की प्रक्रिया । यही कारण है कि ऐल्युमिनियम जैसे ऊपर बैठे तत्त्व को उसके यौगिक से निकालने के लिए विद्युत्-अपघटन जैसी प्रबल विधि लगानी पड़ती है, जबकि नीचे बैठी धातुएँ साधारण तापन या अपचयन से मिल जाती हैं । ऑक्सीकरण और अपचयन सदा साथ चलते हैं — जो इलेक्ट्रॉन देता है वह ऑक्सीकृत होता है और जो लेता है वह अपचयित ।
इस प्रश्न में रसायन कम और क्रम अधिक है : जिसे सक्रियता श्रेणी कंठस्थ है, उसके लिए यह पाँच सेकंड का प्रश्न है । परीक्षक ने चार आयन इस तरह चुने हैं कि तीन ज़िंक से नीचे पड़ें और एक ऊपर, इसलिए उत्तर पूरी तरह उसी क्रम की जानकारी पर टिका है । एक अतिरिक्त सावधानी आवेश की है : आयनों का आवेश अलग-अलग है — कहीं एक, कहीं दो, कहीं तीन — और कुछ अभ्यर्थी यह मान बैठते हैं कि जिसका आवेश सबसे अधिक होगा उसका अपचयन सबसे कठिन होगा । यह तर्क यहाँ संयोग से सही उत्तर तक पहुँचा देता है, पर वह नियम नहीं है ; निर्णायक बात आवेश नहीं, धातु की क्रियाशीलता है । पुस्तिका के बारे में यह ध्यान दीजिए कि आयनों के सूत्र दोनों स्तंभों में एक जैसे छपे हैं, क्योंकि रासायनिक संकेत लिप्यंतरित नहीं किए जाते ; आवेश असली उठे हुए अंक के रूप में छपा है और ‘ज़िंक’ नुक़्ते के साथ ।
मुख्य तथ्य
- कोई धातु उसी आयन का अपचयन कर सकती है जिसकी धातु सक्रियता श्रेणी में उससे नीचे हो, अर्थात् जो उससे कम क्रियाशील हो ।
- सक्रियता श्रेणी में ऐल्युमिनियम ज़िंक से ऊपर है, इसलिए ज़िंक Al^3+ का अपचयन नहीं कर सकता ; उलटी दिशा में अभिक्रिया संभव है ।
- कॉपर, हाइड्रोजन तथा सिल्वर तीनों सक्रियता श्रेणी में ज़िंक से नीचे हैं, इसलिए ज़िंक तीनों के आयनों का अपचयन कर देता है ।
- जो धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर हैं वे तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस विस्थापित कर देती हैं ; प्रयोगशाला में हाइड्रोजन बनाने के लिए ज़िंक पर तनु अम्ल डाला जाता है ।
- ऑक्सीकरण और अपचयन साथ-साथ चलते हैं — जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन देता है वह ऑक्सीकृत होता है और जो इलेक्ट्रॉन लेता है वह अपचयित होता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आवेश की मात्रा को कसौटी मान लेना । अपचयन की संभावना आवेश से नहीं, धातु की सक्रियता श्रेणी में स्थिति से तय होती है ।
- विस्थापन की दिशा उलट देना । अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील को विस्थापित करती है, उलटा कभी नहीं होता ।
- हाइड्रोजन को श्रेणी से बाहर रखना । वह धातुओं के बीच संदर्भ-बिंदु के रूप में रखा जाता है और अम्ल से गैस निकलने का नियम उसी से बनता है ।
सक्रियता श्रेणी पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा यही है — कौन-सी धातु किस आयन का अपचयन या विस्थापन करेगी या नहीं करेगी । दूसरा साँचा अम्ल का है : कौन-सी धातु तनु अम्ल से हाइड्रोजन गैस देगी और कौन-सी नहीं, जहाँ हाइड्रोजन की स्थिति निर्णायक होती है । तीसरा साँचा प्रयोग का है — किसी विलयन में कोई धातु डालने पर रंग का क्या परिवर्तन होगा और उस पर क्या जमेगा । चौथा साँचा धातुकर्म का है, जिसमें यह पूछा जाता है कि किस धातु को उसके यौगिक से निकालने के लिए कौन-सी विधि लगती है । चारों की तैयारी के लिए सक्रियता श्रेणी को एक बार क्रम से लिख लेना और उसमें हाइड्रोजन का स्थान चिह्नित कर देना पर्याप्त है । इसके साथ तीन-चार परिचित प्रयोगों का परिणाम भी याद रखिए, क्योंकि परीक्षक प्रायः नियम नहीं, प्रयोग का दृश्य पूछता है ।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित धातुओं में से कौन-सी धातु तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन गैस विस्थापित नहीं करेगी ?
- (a)ज़िंक
- (b)मैग्नीशियम
- (c)आयरन
- (d)कॉपर
उत्तर(d) कॉपर — वह सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है, इसलिए तनु अम्ल से हाइड्रोजन नहीं निकाल सकता ; शेष तीनों हाइड्रोजन से ऊपर हैं ।
- practice — not a real PYQ
कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में लोहे की कील कुछ समय के लिए डुबोकर रखने पर निम्नलिखित में से क्या होगा ?
- (a)कोई परिवर्तन नहीं होगा
- (b)विलयन का नीला रंग और गहरा हो जाएगा
- (c)विलयन का नीला रंग फीका पड़ जाएगा और कील पर लाल-भूरे रंग की परत जम जाएगी
- (d)कील पर चाँदी जैसी चमकदार सफ़ेद परत जम जाएगी
उत्तर(c) विलयन का नीला रंग फीका पड़ जाएगा और कील पर लाल-भूरे रंग की परत जम जाएगी — आयरन सक्रियता श्रेणी में कॉपर से ऊपर है, इसलिए वह कॉपर को विस्थापित कर देता है ।