जल में मिलाए जाने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकाश-किरणपुंज प्रकीर्णित नहीं करेगा ?
- (a)कॉपर सल्फेट
- (b)चॉक पाउडर
- (c)दूध
- (d)स्याही
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) कॉपर सल्फेट । यहाँ ‘नहीं’ मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए उत्तर वही पदार्थ है जो जल में मिलाए जाने पर प्रकाश-किरणपुंज को प्रकीर्णित नहीं करेगा । प्रकाश का यह प्रकीर्णन टिंडल प्रभाव कहलाता है, और वह तभी दिखाई देता है जब मिश्रण में ऐसे कण हों जो प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में पर्याप्त बड़े हों । इसी कसौटी पर मिश्रणों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है । वास्तविक विलयन में विलेय के कण आयन या अणु के आकार के होते हैं, अर्थात् इतने छोटे कि वे प्रकाश को बिखेर नहीं पाते ; ऐसा मिश्रण पारदर्शी रहता है और उसमें से गुज़रती किरण का मार्ग दिखाई नहीं देता । कोलॉइड में कण उससे बड़े होते हैं, इसलिए किरण का मार्ग चमकता हुआ दिखाई देता है, यद्यपि कण फिर भी छनकर अलग नहीं होते और न बैठते हैं । निलंबन में कण सबसे बड़े होते हैं ; वहाँ प्रकीर्णन भी होता है और कुछ समय बाद कण नीचे बैठ भी जाते हैं । अब कॉपर सल्फेट को देखिए । वह जल में पूरी तरह घुलकर अपने आयनों में बँट जाता है और नीले रंग का पारदर्शी विलयन बनाता है — अर्थात् वास्तविक विलयन । उसमें कण इतने छोटे हैं कि प्रकीर्णन होता ही नहीं । रंग होना और प्रकाश बिखेरना दो अलग बातें हैं : रंग अवशोषण से आता है, प्रकीर्णन कणों के आकार से । इसीलिए उत्तर विकल्प (a) है । परीक्षा में इस प्रश्न को दस सेकंड में निपटाने का तरीक़ा यह है कि हर विकल्प पर केवल एक प्रश्न लगाया जाए — क्या यह पदार्थ जल में सचमुच घुलता है, या केवल उसमें बिखरता है । चॉक बिखरता है, दूध की वसा बिखरती है, स्याही के रंजक-कण बिखरते हैं ; इन तीनों में कण बचे रहते हैं और वही प्रकाश को बिखेरते हैं । कॉपर सल्फेट घुलता है, अर्थात् उसके कण आयनों में बँट जाते हैं और कोई कण बचता ही नहीं जो प्रकाश को बिखेर सके ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)चॉक पाउडर — चॉक पाउडर जल में घुलता नहीं ; वह निलंबन बनाता है, इसलिए वह प्रकाश को प्रकीर्णित करता है और यह विकल्प उत्तर नहीं है । चॉक मुख्यतः कैल्सियम कार्बोनेट है, जो जल में लगभग अघुलनशील है । हिलाने पर उसके महीन कण जल में बिखर जाते हैं और मिश्रण धुँधला दिखने लगता है ; उसमें से किरण गुज़ारने पर उसका मार्ग स्पष्ट दिखाई देता है । कुछ देर छोड़ देने पर कण नीचे बैठ जाते हैं और उन्हें छानकर अलग भी किया जा सकता है — यही निलंबन की पहचान है । अर्थात् यह विकल्प उस श्रेणी का है जहाँ कण सबसे बड़े होते हैं, और वहाँ प्रकीर्णन सबसे स्पष्ट दिखाई देता है ।
- (c)दूध — दूध कोलॉइड का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है और वह प्रकाश को स्पष्ट रूप से प्रकीर्णित करता है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं है । दूध में वसा की सूक्ष्म बूँदें जल में बिखरी रहती हैं ; ऐसे मिश्रण को, जिसमें एक द्रव की बूँदें दूसरे द्रव में फैली हों, पायस कहते हैं । दूध का सफ़ेद दिखना ही प्रकीर्णन का परिणाम है — बूँदें प्रकाश के सभी रंगों को बिखेर देती हैं, इसलिए वह श्वेत दिखता है । कोलॉइड की एक विशेषता यह भी है कि उसके कण छानकर अलग नहीं होते और सामान्यतः बैठते भी नहीं, इसलिए वह देखने में समांगी लगता है, यद्यपि होता विषमांगी है ।
- (d)स्याही — स्याही भी जल में वास्तविक विलयन नहीं, कोलॉइड बनाती है, इसलिए वह भी प्रकाश को प्रकीर्णित करती है और यह विकल्प उत्तर नहीं है । स्याही में रंजक या कार्बन के अत्यंत सूक्ष्म कण जल या किसी अन्य माध्यम में बिखरे रहते हैं, और उनका आकार कोलॉइड की परास में आता है । इसी कारण स्याही मिले जल में से किरण गुज़ारने पर उसका मार्ग दिखाई देने लगता है । यह विकल्प इसलिए भी उपयोगी है कि वह एक आम भ्रम तोड़ता है : कोई मिश्रण देखने में एकसार और पारदर्शी-सा लग सकता है और फिर भी कोलॉइड हो सकता है । वास्तविक विलयन और कोलॉइड में भेद करने की भरोसेमंद कसौटी आँख नहीं, किरण का मार्ग है ।
अवधारणा
मिश्रणों को कणों के आकार के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है, और यही वर्गीकरण इस प्रश्न का पूरा आधार है । वास्तविक विलयन में विलेय के कण आयन या अणु के आकार के होते हैं ; ऐसा मिश्रण समांगी होता है, पारदर्शी रहता है, टिंडल प्रभाव नहीं दिखाता, कण छानकर अलग नहीं होते और वे बैठते भी नहीं । कोलॉइड में कण उससे बड़े होते हैं ; ऐसा मिश्रण देखने में समांगी लग सकता है पर वस्तुतः विषमांगी होता है, वह टिंडल प्रभाव दिखाता है, उसके कण साधारण छन्ने से अलग नहीं होते और वे स्थिर रहते हैं । निलंबन में कण सबसे बड़े होते हैं ; वह विषमांगी होता है, टिंडल प्रभाव दिखाता है, कण छानकर अलग किए जा सकते हैं और वे कुछ समय में नीचे बैठ जाते हैं । टिंडल प्रभाव को प्रयोगशाला के बाहर भी देखा जा सकता है — घने वन में पत्तों के बीच से आती सूर्य की किरणें, कोहरे में वाहन की बत्ती का दिखता हुआ शंकु, और किसी अँधेरे कमरे में झिरी से आती धूप की पट्टी में उड़ती धूल । इन सब में प्रकाश स्वयं दिखाई नहीं देता ; दिखाई वह देता है जो प्रकाश को बिखेर रहा है ।
यह प्रश्न देखने में सामान्य ज्ञान का लगता है, पर वस्तुतः वह एक वर्गीकरण की परीक्षा है — चार पदार्थ देकर पूछा जा रहा है कि इनमें से कौन जल के साथ वास्तविक विलयन बनाता है और कौन नहीं । इसीलिए हल का पहला क़दम यह पूछना है कि पदार्थ जल में घुलता है या केवल बिखरता है । कॉपर सल्फेट घुलता है, शेष तीन बिखरते हैं । यहाँ परीक्षक ने एक अतिरिक्त जाल भी रखा है : कॉपर सल्फेट का विलयन गहरे नीले रंग का होता है, और रंग देखकर मन को लगता है कि वहाँ कुछ ठोस-सा तैर रहा है । पर रंग अवशोषण से आता है और प्रकीर्णन कणों के आकार से — दोनों अलग परिघटनाएँ हैं । शेष तीनों उदाहरण रोज़मर्रा के हैं और उनके बारे में अनुभव भी यही कहता है कि वे धुँधले दिखते हैं । यह भी ध्यान दीजिए कि इसी प्रश्नपत्र में इससे पहले वाला प्रश्न भी ‘जल में मिलाए जाने पर’ से आरंभ होता है, पर उसकी कसौटी pH है और इसकी प्रकीर्णन — दोनों को पढ़ते समय कसौटी अलग-अलग पकड़नी चाहिए ।
मुख्य तथ्य
- टिंडल प्रभाव प्रकाश के प्रकीर्णन की वह परिघटना है जो कोलॉइड तथा निलंबन दोनों में दिखाई देती है, पर वास्तविक विलयन में नहीं दिखती ।
- कॉपर सल्फेट जल में पूरी तरह घुलकर वास्तविक विलयन बनाता है, इसलिए उसके कण इतने छोटे रहते हैं कि प्रकाश का प्रकीर्णन होता ही नहीं ।
- चॉक पाउडर जल में अघुलनशील है और निलंबन बनाता है ; उसके कण छानकर अलग किए जा सकते हैं और कुछ समय में नीचे बैठ जाते हैं ।
- दूध एक पायस है, जिसमें वसा की सूक्ष्म बूँदें जल में बिखरी रहती हैं ; उसका सफ़ेद दिखना ही प्रकाश के प्रकीर्णन का परिणाम है ।
- रंग और प्रकीर्णन दो अलग परिघटनाएँ हैं — रंग प्रकाश के अवशोषण से आता है, जबकि प्रकीर्णन परिक्षिप्त कणों के आकार पर निर्भर करता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- रंग को प्रकीर्णन का प्रमाण मान लेना । कॉपर सल्फेट का विलयन गहरा नीला होता है, फिर भी वह वास्तविक विलयन है और प्रकाश नहीं बिखेरता ।
- पारदर्शी दिखने वाले हर मिश्रण को वास्तविक विलयन मान लेना । कुछ कोलॉइड देखने में लगभग साफ़ लगते हैं, पर किरण का मार्ग वहाँ दिखाई देता है ।
- टिंडल प्रभाव को केवल कोलॉइड से जोड़ना । निलंबन में भी प्रकीर्णन होता है, अंतर यह है कि वहाँ कण बैठ भी जाते हैं ।
मिश्रणों के वर्गीकरण पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा यही है — चार पदार्थ देकर पूछना कि कौन-सा टिंडल प्रभाव दिखाएगा या नहीं दिखाएगा । दूसरा साँचा उदाहरण का है : दूध, धुआँ, कुहरा, फेन, जेली किस प्रकार के कोलॉइड हैं और उनमें परिक्षिप्त प्रावस्था तथा माध्यम क्या है । तीसरा साँचा कसौटी का है — तीनों वर्गों में भेद किस आधार पर किया जाता है, और कौन-सा मिश्रण छानकर अलग हो सकता है । चौथा साँचा प्रकृति से जुड़े प्रकीर्णन का है, जिसमें आकाश का नीला रंग या सूर्यास्त की लालिमा पूछी जाती है । चारों की तैयारी के लिए एक तालिका बनाइए जिसमें तीन वर्गों के सामने कणों का आकार, टिंडल प्रभाव, छानन, स्थायित्व और दो-दो उदाहरण लिखे हों । उदाहरण अवश्य लिखिए, क्योंकि परीक्षक प्रायः परिभाषा नहीं, रोज़मर्रा का पदार्थ देकर वर्ग पूछता है ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q51खोलें व हल करें →Which one of the following substances, when added to water, will not change the pH ?
- (a) NaHCO3
- (b) NH4Cl
- (c) Na2CO3
- (d) NaCl
उत्तर(d) NaCl
इसी प्रश्नपत्र का पड़ोसी प्रश्न, जो उसी वाक्य-ढाँचे से आरंभ होता है — जल में मिलाए जाने पर पदार्थ का व्यवहार — पर वहाँ कसौटी विलयन का pH है, प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से किस मिश्रण में से प्रकाश की किरण गुज़ारने पर उसका मार्ग स्पष्ट दिखाई देगा ?
- (a)चीनी का जलीय विलयन
- (b)दूध
- (c)साधारण नमक का जलीय विलयन
- (d)कॉपर सल्फेट का जलीय विलयन
उत्तर(b) दूध — वह एक पायस है, जिसमें वसा की सूक्ष्म बूँदें बिखरी रहती हैं और वे प्रकाश को प्रकीर्णित करती हैं ; शेष तीनों वास्तविक विलयन हैं ।
- practice — not a real PYQ
वास्तविक विलयन, कोलॉइड तथा निलंबन के बीच भेद मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस आधार पर किया जाता है ?
- (a)मिश्रण के रंग के आधार पर
- (b)परिक्षिप्त कणों के आकार के आधार पर
- (c)मिश्रण के ताप के आधार पर
- (d)मिश्रण के घनत्व के आधार पर
उत्तर(b) परिक्षिप्त कणों के आकार के आधार पर — इसी आकार से यह तय होता है कि टिंडल प्रभाव दिखेगा या नहीं, कण छनेंगे या नहीं, और वे बैठेंगे या नहीं ।