यदि किसी परावैद्युत पदार्थ को किसी बाह्य वैद्युत-क्षेत्र में रखा जाए, तो निम्नलिखित में से कौन-सी परिघटना होगी ?
- (a)चुम्बकन
- (b)ध्रुवण
- (c)प्रकाशिक आयनन
- (d)वृत्तीयकरण (सर्कुलेराइज़ेशन)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) ध्रुवण । परावैद्युत पदार्थ वह होता है जिसमें मुक्त आवेश नहीं होते, अर्थात् वह विद्युत् का कुचालक है ; काँच, अभ्रक, मोम-काग़ज़ और शुद्ध जल इसके उदाहरण हैं । जब ऐसे पदार्थ को किसी बाह्य वैद्युत-क्षेत्र में रखा जाता है तो उसमें धारा नहीं बहती, क्योंकि आवेश स्वतंत्र रूप से चल ही नहीं सकते । पर कुछ होता अवश्य है, और वही ध्रुवण कहलाता है । पदार्थ के भीतर हर अणु में धन और ऋण आवेश-केंद्र होते हैं, और बाह्य क्षेत्र उन्हें विपरीत दिशाओं में हल्का-सा खींचता है । इससे प्रत्येक अणु एक छोटा द्विध्रुव बन जाता है, और ये सब द्विध्रुव क्षेत्र की दिशा में क़तार में आ जाते हैं । यह दो तरह से होता है : जिन अणुओं में पहले से स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण नहीं होता उनमें वह प्रेरित हो जाता है, और जिनमें पहले से होता है वे क्षेत्र की दिशा में घूमकर व्यवस्थित हो जाते हैं । परिणाम यह होता है कि पदार्थ की विपरीत सतहों पर बद्ध आवेश उभर आते हैं, जो भीतर एक ऐसा क्षेत्र बनाते हैं जिसकी दिशा बाह्य क्षेत्र के विपरीत होती है । इसीलिए पदार्थ के भीतर कुल क्षेत्र घट जाता है, और यही कारण है कि संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत रखने पर उसकी धारिता बढ़ जाती है । अतः उत्तर विकल्प (b) है । इस प्रश्न को हल करने का सबसे छोटा रास्ता कारण और परिघटना को जोड़ना है । प्रश्न में कारण स्पष्ट है — बाह्य वैद्युत-क्षेत्र । अब विकल्पों को कारण के अनुसार बाँटिए : एक परिघटना चुंबकीय क्षेत्र से होती है, एक पर्याप्त ऊर्जा वाले विकिरण से, और एक पद ऐसा है जो इस संदर्भ में परिभाषित ही नहीं है । केवल एक विकल्प बचता है जो वैद्युत-क्षेत्र से जुड़ी परिभाषित परिघटना का नाम है, और वही उत्तर है । यही कसौटी विज्ञान के बड़े भाग में लागू होती है, क्योंकि परीक्षक प्रायः समानांतर परिघटनाओं को आपस में मिलाकर विकल्प बनाता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)चुम्बकन — चुम्बकन उसी प्रकार की परिघटना है, पर वह वैद्युत-क्षेत्र में नहीं, चुंबकीय क्षेत्र में होती है । जब किसी चुंबकीय पदार्थ को बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो उसके भीतर के सूक्ष्म चुंबकीय आघूर्ण क्षेत्र के सापेक्ष व्यवस्थित होने लगते हैं और पदार्थ में एक कुल चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न हो जाता है । दोनों परिघटनाओं की बनावट आपस में समानांतर है — एक में विद्युत् द्विध्रुव क़तार में आते हैं, दूसरी में चुंबकीय आघूर्ण — और यही समानता इस विकल्प को आकर्षक बनाती है । पर क्षेत्र का प्रकार अलग है, और प्रश्न स्पष्ट रूप से वैद्युत-क्षेत्र की बात कर रहा है । ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले यह देखिए कि कारण विद्युत् है या चुंबकीय ।
- (c)प्रकाशिक आयनन — प्रकाशिक आयनन का अर्थ है प्रकाश या किसी अन्य विकिरण के फोटॉन से इतनी ऊर्जा मिलना कि परमाणु या अणु से इलेक्ट्रॉन ही बाहर निकल जाए और वह आयन बन जाए । इसके लिए फोटॉन की ऊर्जा एक निश्चित सीमा से अधिक होनी चाहिए, और यह प्रक्रिया विकिरण से जुड़ी है, किसी स्थिर वैद्युत-क्षेत्र में पदार्थ रख देने से नहीं होती । ध्रुवण और आयनन में एक बुनियादी अंतर भी है : ध्रुवण में आवेश अपने अणु के भीतर ही थोड़ा-सा खिसकते हैं और बँधे रहते हैं, जबकि आयनन में इलेक्ट्रॉन अणु छोड़कर ही चला जाता है । परावैद्युत की परिभाषा में ही यह निहित है कि उसमें आवेश बँधे रहते हैं ।
- (d)वृत्तीयकरण (सर्कुलेराइज़ेशन) — वृत्तीयकरण इस संदर्भ में भौतिकी की मानक शब्दावली का पद नहीं है ; बाह्य वैद्युत-क्षेत्र में रखे परावैद्युत पदार्थ में होने वाली किसी परिघटना का यह नाम नहीं है । ऐसे विकल्प परीक्षा में जान-बूझकर रखे जाते हैं, क्योंकि वे सुनने में तकनीकी लगते हैं और उनका अंग्रेज़ी रूप भी उसी शैली का होता है जिसमें शेष तीन विकल्प हैं । इनसे बचने का एक ही तरीक़ा है : उत्तर उस पद में खोजिए जिसे आपने पाठ्यपुस्तक में परिभाषित रूप में पढ़ा हो, न कि उस पद में जो केवल उपयुक्त ध्वनि रखता हो । ध्रुवण, चुम्बकन और आयनन तीनों परिभाषित पद हैं ; उनमें से क्षेत्र के प्रकार के अनुसार सही चुन लेना ही पूरा हल है ।
अवधारणा
पदार्थों को विद्युत् के व्यवहार के आधार पर मोटे तौर पर चालक और कुचालक में बाँटा जाता है । चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए बाह्य क्षेत्र लगते ही वे बहकर सतह पर पहुँच जाते हैं और चालक के भीतर कुल क्षेत्र शून्य हो जाता है । कुचालक, जिन्हें इसी संदर्भ में परावैद्युत कहा जाता है, में मुक्त आवेश नहीं होते ; वहाँ आवेश अपने-अपने अणु में बँधे रहते हैं और बाह्य क्षेत्र उन्हें केवल थोड़ा-सा विस्थापित कर पाता है । इसी विस्थापन और अणुओं के क़तारबद्ध होने को ध्रुवण कहते हैं । ध्रुवण के दो मार्ग होते हैं — अध्रुवीय अणुओं में द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित होना, और ध्रुवीय अणुओं का पहले से मौजूद द्विध्रुव आघूर्ण क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित होना । दोनों का परिणाम एक ही है : पदार्थ की सतहों पर बद्ध आवेश उभरते हैं और भीतर विपरीत दिशा का क्षेत्र बनता है, जिससे कुल क्षेत्र घट जाता है । जितने गुना क्षेत्र घटता है उसे परावैद्युतांक कहते हैं, और वही बताता है कि संधारित्र में उस पदार्थ को रखने पर धारिता कितने गुना बढ़ेगी । चुंबकत्व में इसका समानांतर रूप चुम्बकन है, और वहाँ पदार्थों को प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय तथा लौहचुंबकीय में बाँटा जाता है ।
इस प्रश्न की रचना एक ही सूत्र पर टिकी है — कारण और परिणाम को सही ढंग से जोड़ना । चार विकल्पों में तीन ऐसी परिघटनाएँ हैं जो भौतिकी में सचमुच होती हैं, पर वे अलग-अलग कारणों से होती हैं : एक चुंबकीय क्षेत्र से, एक पर्याप्त ऊर्जा वाले विकिरण से, और एक वैद्युत-क्षेत्र से । चौथा विकल्प केवल तकनीकी ध्वनि वाला पद है । इसलिए हल का पहला क़दम यह पूछना है कि प्रश्न में कारण क्या दिया गया है, और फिर उसी कारण से जुड़ी परिघटना चुननी है । यह आदत सामान्य विज्ञान के बड़े भाग में काम आती है, क्योंकि परीक्षक प्रायः समानांतर परिघटनाओं को आपस में मिला देता है — विद्युत् और चुंबकत्व, अपवर्तन और परावर्तन, वाष्पीकरण और उर्ध्वपातन । यह भी ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ में विकल्प (d) के साथ उसका अंग्रेज़ी पर्याय कोष्ठक में देवनागरी लिप्यंतरण के रूप में छपा है और उसमें नुक़्ता भी है, जबकि शेष तीन विकल्प केवल हिन्दी पद हैं ।
मुख्य तथ्य
- परावैद्युत पदार्थ वह कुचालक है जिसमें मुक्त आवेश नहीं होते ; बाह्य वैद्युत-क्षेत्र में रखने पर उसमें धारा नहीं बहती, बल्कि ध्रुवण होता है ।
- ध्रुवण दो मार्गों से होता है — अध्रुवीय अणुओं में द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित होना, और ध्रुवीय अणुओं के पहले से मौजूद आघूर्ण का क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित होना ।
- ध्रुवण से पदार्थ की सतहों पर बद्ध आवेश उभरते हैं, जो भीतर बाह्य क्षेत्र के विपरीत दिशा का क्षेत्र बनाते हैं और कुल क्षेत्र घटा देते हैं ।
- इसी कारण संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत रखने पर उसकी धारिता बढ़ जाती है ; क्षेत्र जितने गुना घटता है वही अनुपात परावैद्युतांक कहलाता है ।
- चुम्बकन ध्रुवण की समानांतर परिघटना है, पर वह चुंबकीय क्षेत्र में होती है ; प्रकाशिक आयनन के लिए पर्याप्त ऊर्जा वाले फोटॉन चाहिए, स्थिर वैद्युत-क्षेत्र नहीं ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विद्युत् और चुंबकीय क्षेत्र की परिघटनाओं को आपस में मिला देना । ध्रुवण वैद्युत-क्षेत्र में होता है और चुम्बकन चुंबकीय क्षेत्र में ।
- ध्रुवण को आयनन समझ लेना । ध्रुवण में आवेश अणु के भीतर ही खिसकते हैं और बँधे रहते हैं, जबकि आयनन में इलेक्ट्रॉन अणु छोड़ ही देता है ।
- तकनीकी ध्वनि वाले पद को उत्तर मान लेना । उत्तर उसी पद में खोजिए जिसे पाठ्यपुस्तक में परिभाषित रूप में पढ़ा हो ।
परावैद्युत और संधारित्र पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं । पहला साँचा यही है — कारण देकर परिघटना पूछना, जहाँ विकल्पों में समानांतर परिघटनाएँ रख दी जाती हैं । दूसरा साँचा प्रभाव का है : परावैद्युत डालने पर धारिता, आवेश, विभवांतर या भीतर के क्षेत्र का क्या होता है, और वहाँ यह ध्यान रखना पड़ता है कि संधारित्र बैटरी से जुड़ा है या अलग कर दिया गया है । तीसरा साँचा वर्गीकरण का है — कौन-सा पदार्थ चालक है, कौन-सा परावैद्युत, और चुंबकत्व में कौन-सा पदार्थ किस श्रेणी का । तीनों की तैयारी के लिए विद्युत् और चुंबकत्व की एक समानांतर तालिका बनाइए, जिसमें एक ओर वैद्युत-क्षेत्र, ध्रुवण, परावैद्युतांक हों और दूसरी ओर चुंबकीय क्षेत्र, चुम्बकन तथा चुंबकशीलता । दोनों स्तंभों को साथ रखने से वह भ्रम अपने आप कम हो जाता है जिस पर यह प्रश्न टिका है ।
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उत्तर(d) Iron
चुंबकीय पदार्थों के वर्गीकरण पर बना प्रश्न, जो इसी कार्ड के पहले विकल्प का विषय है — बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में पदार्थ का व्यवहार और उसकी श्रेणियाँ ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ रख देने पर उसकी धारिता पर निम्नलिखित में से क्या प्रभाव पड़ता है ?
- (a)धारिता घट जाती है
- (b)धारिता बढ़ जाती है
- (c)धारिता अपरिवर्तित रहती है
- (d)धारिता शून्य हो जाती है
उत्तर(b) धारिता बढ़ जाती है — ध्रुवण के कारण भीतर का कुल क्षेत्र घटता है, इसलिए उतने ही आवेश पर विभवांतर कम रह जाता है और धारिता परावैद्युतांक के गुणक से बढ़ जाती है ।
- practice — not a real PYQ
किसी चुंबकीय पदार्थ को बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर होने वाली परिघटना निम्नलिखित में से क्या कहलाती है ?
- (a)ध्रुवण
- (b)चुम्बकन
- (c)आयनन
- (d)अपवर्तन
उत्तर(b) चुम्बकन — यह ध्रुवण की समानांतर परिघटना है, पर उसका कारण वैद्युत-क्षेत्र नहीं, चुंबकीय क्षेत्र होता है ।