बल-संबंधी निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है ?
- (a)धनात्मक बल आकर्षक प्रकृति का होता है ।
- (b)ऋणात्मक बल प्रतिकर्षी प्रकृति का होता है ।
- (c)धनात्मक बल आकर्षक और प्रतिकर्षी, दोनों प्रकृति का हो सकता है ।
- (d)ऋणात्मक बल आकर्षक प्रकृति का होता है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) ऋणात्मक बल आकर्षक प्रकृति का होता है । बल एक सदिश राशि है, इसलिए उसके साथ लगा चिह्न परिमाण नहीं, दिशा बताता है — और दिशा तभी अर्थ रखती है जब कोई एक दिशा पहले से धनात्मक मान ली गई हो । दो पिंडों के बीच लगने वाले बल की चर्चा में यह परिपाटी लगभग सदा एक ही होती है : दोनों को जोड़ने वाली रेखा पर, केंद्र से बाहर की ओर जाने वाली दिशा धनात्मक मानी जाती है । इस परिपाटी के भीतर बात बिलकुल स्पष्ट हो जाती है । यदि बल का चिह्न ऋणात्मक है तो वह भीतर की ओर, अर्थात् दूसरे पिंड की ओर, लग रहा है — और भीतर की ओर लगने वाला बल दोनों को पास लाता है, इसलिए वह आकर्षक है । यदि चिह्न धनात्मक है तो बल बाहर की ओर लग रहा है और वह दोनों को दूर करता है, इसलिए वह प्रतिकर्षी है । उदाहरण से देखिए । गुरुत्वाकर्षण का सूत्र ऋण चिह्न के साथ लिखा जाता है और गुरुत्वाकर्षण सदा आकर्षक होता है । दो असमान आवेशों के बीच का कूलॉम बल भी इसी परिपाटी में ऋणात्मक निकलता है और वह भी आकर्षक होता है, जबकि दो समान आवेशों के बीच का बल धनात्मक निकलता है और प्रतिकर्षी होता है । यही संबंध स्थितिज ऊर्जा से भी निकाला जा सकता है, क्योंकि बल स्थितिज ऊर्जा के दूरी के सापेक्ष परिवर्तन का ऋणात्मक होता है । इसलिए उत्तर विकल्प (d) है । विकल्पों की आपसी संगति देखने से यह प्रश्न और तेज़ी से खुलता है । पहले दो विकल्प एक ही परिपाटी के दो आधे हैं — एक धनात्मक को आकर्षक कहता है और दूसरा ऋणात्मक को प्रतिकर्षी — इसलिए वे दोनों एक साथ ही सही या ग़लत हो सकते हैं । चूँकि प्रश्न केवल एक सही कथन माँग रहा है, दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते, अर्थात् दोनों ग़लत हैं । शेष दो में से एक चिह्न के अर्थ को ही निरर्थक बना देता है । इस तरह बिना कोई सूत्र लगाए तीन विकल्प हट जाते हैं ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)धनात्मक बल आकर्षक प्रकृति का होता है । — यह कथन ठीक उलटी बात कहता है । अपनाई गई परिपाटी में धनात्मक चिह्न का अर्थ है कि बल केंद्र से बाहर की ओर लग रहा है, और बाहर की ओर लगने वाला बल दोनों पिंडों को एक-दूसरे से दूर ले जाता है । अर्थात् धनात्मक बल प्रतिकर्षी होता है, आकर्षक नहीं । इस विकल्प का आकर्षण भाषा में है : रोज़मर्रा की बोली में ‘धनात्मक’ शब्द अनुकूल और ‘ऋणात्मक’ प्रतिकूल अर्थ रखता है, इसलिए मन धनात्मक को जोड़ने वाला और ऋणात्मक को तोड़ने वाला मान लेता है । भौतिकी में ये चिह्न मूल्य नहीं, दिशा बताते हैं । उदाहरण याद रखिए — गुरुत्वाकर्षण, जो जोड़ने वाला बल है, ऋण चिह्न के साथ लिखा जाता है ।
- (b)ऋणात्मक बल प्रतिकर्षी प्रकृति का होता है । — यह कथन भी उलटा है, और वह पहले वाले का ही दूसरा आधा है । ऋणात्मक चिह्न का अर्थ है कि बल भीतर की ओर लग रहा है, इसलिए वह पिंडों को पास लाता है और आकर्षक होता है, प्रतिकर्षी नहीं । ध्यान दीजिए कि इस प्रश्न में पहले दो विकल्प एक ही भूल के दो रूप हैं — एक धनात्मक को आकर्षक कहता है और दूसरा ऋणात्मक को प्रतिकर्षी — और दोनों एक साथ ही सही या ग़लत होंगे । यह देखते ही आधा प्रश्न हल हो जाता है : यदि इनमें से कोई एक ग़लत है तो दूसरा भी ग़लत होगा, इसलिए उत्तर शेष दो विकल्पों में ही मिलेगा । विकल्पों की आपसी संगति देखना कथन-आधारित प्रश्नों में बहुत काम आता है ।
- (c)धनात्मक बल आकर्षक और प्रतिकर्षी, दोनों प्रकृति का हो सकता है । — यह कथन उस भ्रम से आता है जिसमें ‘चिह्न परिपाटी पर निर्भर करता है’ को ‘एक ही चिह्न दोनों प्रकृतियों का हो सकता है’ समझ लिया जाता है । यह सच है कि चिह्न का अर्थ तभी तय होता है जब कोई दिशा धनात्मक मान ली जाए ; यदि कोई भीतर की दिशा को धनात्मक मान ले तो सारे चिह्न उलट जाएँगे । पर किसी एक परिपाटी के भीतर चिह्न का अर्थ एक ही रहता है — वह एक ही दिशा बताता है, इसलिए वह एक ही प्रकृति बता सकता है । यदि एक ही चिह्न दोनों प्रकृतियों का होता, तो चिह्न लिखने का कोई प्रयोजन ही न रहता । अर्थात् यह विकल्प उस बात को तोड़ देता है जिसके लिए चिह्न बनाया ही गया है ।
अवधारणा
बल सदिश राशि है, अर्थात् उसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है । एक विमा वाली स्थिति में दिशा को अलग से तीर बनाकर दिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती ; उसे चिह्न से ही व्यक्त कर दिया जाता है, बशर्ते पहले यह तय कर लिया जाए कि कौन-सी दिशा धनात्मक मानी जाएगी । दो पिंडों के बीच के बल की चर्चा में मानक परिपाटी यह है कि उन्हें जोड़ने वाली रेखा पर बाहर की ओर की दिशा धनात्मक होती है । इसी परिपाटी से यह निकलता है कि आकर्षक बल ऋणात्मक और प्रतिकर्षी बल धनात्मक लिखा जाता है । इस संबंध का दूसरा, अधिक गहरा रूप स्थितिज ऊर्जा से आता है : बल स्थितिज ऊर्जा के दूरी के सापेक्ष परिवर्तन का ऋणात्मक होता है, इसलिए जहाँ दूरी घटने पर स्थितिज ऊर्जा घटती है वहाँ बल भीतर की ओर, अर्थात् आकर्षक, होगा । प्रकृति के चार मूल बलों में गुरुत्वाकर्षण सदा आकर्षक है ; विद्युत्-चुंबकीय बल आवेशों के चिह्न के अनुसार आकर्षक या प्रतिकर्षी दोनों हो सकता है ; प्रबल नाभिकीय बल नाभिक को बाँधे रखता है और उसकी परास अत्यंत छोटी है ; और दुर्बल नाभिकीय बल क्षय की प्रक्रियाओं से जुड़ा है ।
यह प्रश्न किसी सूत्र या आँकड़े का नहीं, परिपाटी की समझ का है, और इसीलिए वह उस अभ्यर्थी को भी उलझा देता है जिसने बहुत-से सूत्र याद कर रखे हैं । यहाँ कठिनाई भाषा और भौतिकी के बीच के अंतर से पैदा होती है : साधारण बोली में धनात्मक का अर्थ अच्छा और ऋणात्मक का अर्थ बुरा होता है, जबकि भौतिकी में ये केवल दो विपरीत दिशाएँ हैं । विकल्पों की रचना भी इसी को परखती है — दो विकल्प इसी भाषिक अंतर्ज्ञान पर टिके हैं, एक विकल्प चिह्न के अर्थ को ही निरर्थक बना देता है, और एक सही परिपाटी बताता है । ऐसे प्रश्न में सबसे भरोसेमंद रास्ता किसी परिचित उदाहरण पर लौटना है : गुरुत्वाकर्षण आकर्षक है और उसका सूत्र ऋण चिह्न के साथ लिखा जाता है — यही एक उदाहरण चारों विकल्पों को छाँट देता है । यह भी ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ में चारों विकल्प पूरे वाक्य हैं और प्रत्येक के अंत में स्थान छोड़कर पूर्ण विराम लगाया गया है ।
मुख्य तथ्य
- बल सदिश राशि है ; एक विमा वाली स्थिति में उसका चिह्न दिशा बताता है, और चिह्न का अर्थ तभी तय होता है जब कोई दिशा पहले से धनात्मक मान ली गई हो ।
- दो पिंडों के बीच के बल की मानक परिपाटी में बाहर की ओर की दिशा धनात्मक मानी जाती है ; इसलिए ऋणात्मक बल भीतर की ओर लगता है और आकर्षक होता है ।
- इसी परिपाटी में धनात्मक बल बाहर की ओर लगता है और पिंडों को दूर करता है, अर्थात् वह प्रतिकर्षी होता है ।
- गुरुत्वाकर्षण का सूत्र ऋण चिह्न के साथ लिखा जाता है और गुरुत्वाकर्षण सदा आकर्षक होता है ; दो समान आवेशों के बीच का बल धनात्मक तथा प्रतिकर्षी होता है ।
- बल स्थितिज ऊर्जा के दूरी के सापेक्ष परिवर्तन का ऋणात्मक होता है, इसलिए चिह्न और प्रकृति का यह संबंध ऊर्जा की दृष्टि से भी निकाला जा सकता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- चिह्न को मूल्य समझ लेना । भौतिकी में धनात्मक और ऋणात्मक अच्छे-बुरे नहीं, दो विपरीत दिशाएँ बताते हैं ।
- परिपाटी तय किए बिना चिह्न का अर्थ निकालना । यदि भीतर की दिशा को धनात्मक मान लिया जाए तो सारे चिह्न उलट जाएँगे ।
- एक ही चिह्न को दोनों प्रकृतियों का मान लेना । किसी एक परिपाटी के भीतर चिह्न एक ही दिशा बताता है, इसलिए एक ही प्रकृति भी ।
बल और चिह्न-परिपाटी पर प्रश्न तीन रूपों में आते हैं । पहला रूप यही है — कथनों में से सही चुनना, जहाँ विकल्प चिह्न और प्रकृति के संबंध को उलट-पलट कर रखे जाते हैं । दूसरा रूप उदाहरण का है : कौन-सा बल सदा आकर्षक है, कौन-सा दोनों प्रकार का हो सकता है, और किसकी परास सबसे कम है — यहाँ प्रकृति के चार मूल बलों की तालिका काम आती है । तीसरा रूप ऊर्जा का है, जिसमें स्थितिज ऊर्जा के वक्र से बल की दिशा या साम्यावस्था की स्थिति पूछी जाती है । तीनों की तैयारी के लिए यह आदत बनाइए कि हर प्रश्न में पहले दिशा की परिपाटी लिख लीजिए, फिर किसी परिचित उदाहरण से उसे जाँच लीजिए । गुरुत्वाकर्षण इसके लिए सबसे अच्छा उदाहरण है, क्योंकि वह सदा आकर्षक है और उसका चिह्न सदा ऋणात्मक लिखा जाता है — यह एक जोड़ा याद रहने पर इस परिवार के अधिकांश प्रश्न स्वयं खुल जाते हैं ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q50खोलें व हल करें →When a dielectric material is kept in an external electric field, which one of the following phenomena may be realized ?
- (a) Magnetization
- (b) Polarization
- (c) Photoionization
- (d) Circularization
उत्तर(b) Polarization
इसी प्रश्नपत्र का विद्युत्-क्षेत्र वाला प्रश्न, जो उसी विद्युत्-चुंबकीय अंतःक्रिया का दूसरा पक्ष दिखाता है — बाह्य क्षेत्र में रखे पदार्थ के भीतर आवेशों का व्यवहार ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
दो समान प्रकार के आवेशों के बीच लगने वाला कूलॉम बल निम्नलिखित में से किस प्रकार का होता है ? (चिह्न भी सोचिए)
- (a)सदैव आकर्षक
- (b)सदैव प्रतिकर्षी
- (c)पहले आकर्षक और अधिक दूरी पर प्रतिकर्षी
- (d)सदैव शून्य
उत्तर(b) सदैव प्रतिकर्षी — समान आवेश एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं, और मानक परिपाटी में यह बल धनात्मक चिह्न के साथ लिखा जाता है ।
- practice — not a real PYQ
गुरुत्वाकर्षण बल की प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)यह सदैव आकर्षक होता है
- (b)यह द्रव्यमानों के अनुसार आकर्षक अथवा प्रतिकर्षी हो सकता है
- (c)यह केवल आवेशित पिंडों के बीच लगता है
- (d)यह दूरी बढ़ने पर बढ़ता जाता है
उत्तर(a) यह सदैव आकर्षक होता है — इसीलिए उसका सूत्र ऋण चिह्न के साथ लिखा जाता है, और दूरी बढ़ने पर वह वर्ग के व्युत्क्रमानुपात में घटता है ।