निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ? सूक्ष्म-तरंगों का तरंगदैर्ध्य का रेंज होता है
- (a)अवरक्त तरंगों और रेडियो तरंगों के बीच ।
- (b)दृश्य तरंगों और अवरक्त प्रकाश के बीच ।
- (c)गामा (γ)-किरणों और एक्स-किरणों के बीच ।
- (d)एक्स-किरणों और दृश्य तरंगों के बीच ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) अवरक्त तरंगों और रेडियो तरंगों के बीच । इस प्रश्न का पूरा उत्तर विद्युत्-चुंबकीय स्पेक्ट्रम के क्रम में छिपा है, इसलिए पहले वह क्रम स्थिर कीजिए । बढ़ते तरंगदैर्ध्य के अनुसार यह क्रम इस प्रकार चलता है : गामा किरणें, एक्स-किरणें, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त, सूक्ष्म-तरंगें, और अंत में रेडियो तरंगें । इस पंक्ति में सूक्ष्म-तरंगें ठीक अवरक्त और रेडियो के बीच बैठती हैं — अवरक्त उनसे छोटी तरंगदैर्ध्य वाली और रेडियो उनसे बड़ी । मोटे अंकों में कहें तो सूक्ष्म-तरंगों का तरंगदैर्ध्य लगभग एक मिलीमीटर से लेकर एक मीटर तक फैला होता है, अवरक्त उससे छोटी होती है और रेडियो तरंगें उससे बड़ी । यह भी याद रखिए कि तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती हैं, क्योंकि निर्वात में सभी विद्युत्-चुंबकीय तरंगों की चाल एक ही होती है, अर्थात् प्रकाश की चाल । इसलिए यही क्रम आवृत्ति की दृष्टि से उलटा पढ़ा जाएगा : गामा किरणों की आवृत्ति सबसे अधिक और रेडियो तरंगों की सबसे कम । सूक्ष्म-तरंगों का व्यावहारिक परिचय भी उपयोगी है — रडार, उपग्रह संचार, चलभाष तंत्र और सूक्ष्म-तरंग चूल्हा सभी इसी परास में काम करते हैं । अतः उत्तर विकल्प (a) है । इस प्रश्न में विकल्पों की छँटनी भी बहुत साफ़ है और उसे क्रम की एक ही पंक्ति से किया जा सकता है । दो विकल्प स्पेक्ट्रम के छोटे तरंगदैर्ध्य वाले सिरे की बात करते हैं — एक गामा और एक्स-किरणों के बीच, दूसरा एक्स-किरणों और दृश्य प्रकाश के बीच — और सूक्ष्म-तरंगें उस सिरे से बहुत दूर, दूसरी ओर पड़ती हैं । एक विकल्प दो ऐसी पट्टियों के बीच का स्थान बताता है जो आपस में सटी हुई हैं, इसलिए वहाँ किसी तीसरी तरंग के लिए स्थान ही नहीं है । शेष एक ही विकल्प बचता है, और वही सही उत्तर है । यही कारण है कि इस विषय में क्रम याद रखना अकेला सबसे लाभदायक निवेश है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)दृश्य तरंगों और अवरक्त प्रकाश के बीच । — दृश्य तरंगों और अवरक्त प्रकाश के बीच कोई अलग पट्टी नहीं होती, क्योंकि स्पेक्ट्रम में ये दोनों आपस में सटे हुए हैं । दृश्य प्रकाश का लाल सिरा समाप्त होते ही अवरक्त आरंभ हो जाता है — ‘अवरक्त’ नाम का अर्थ ही ‘लाल से परे’ है । अर्थात् इन दोनों के बीच किसी तीसरी तरंग के लिए स्थान ही नहीं बचता, और सूक्ष्म-तरंगें तो इस स्थान से बहुत आगे, अवरक्त के दूसरी ओर पड़ती हैं । यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जिसे इतना याद है कि सूक्ष्म-तरंगों का संबंध अवरक्त से है, पर दिशा याद नहीं । दिशा तय करने का सरल सूत्र यह है : सूक्ष्म-तरंगें अवरक्त से लंबी होती हैं, इसलिए वे अवरक्त के उस ओर होंगी जिस ओर रेडियो तरंगें हैं ।
- (c)गामा (γ)-किरणों और एक्स-किरणों के बीच । — गामा किरणों और एक्स-किरणों के बीच वाला विकल्प स्पेक्ट्रम के बिलकुल दूसरे छोर की बात कर रहा है । ये दोनों सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य और सबसे अधिक ऊर्जा वाली विकिरण हैं, और उनका परास इतना निकट है कि उन्हें प्रायः उनके उद्गम से अलग किया जाता है — नाभिक से निकलने वाली विकिरण गामा कहलाती है और परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण या मंदन से निकलने वाली एक्स-किरण । सूक्ष्म-तरंगें इनसे लाखों-करोड़ों गुना बड़ी तरंगदैर्ध्य वाली हैं । अर्थात् यह विकल्प केवल थोड़ा-सा नहीं, स्पेक्ट्रम की चौड़ाई भर ग़लत है, और उसे परास का मोटा बोध रखने वाला अभ्यर्थी पढ़ते ही हटा देता है ।
- (d)एक्स-किरणों और दृश्य तरंगों के बीच । — एक्स-किरणों और दृश्य तरंगों के बीच जो पट्टी पड़ती है वह पराबैंगनी है, सूक्ष्म-तरंगें नहीं । ‘पराबैंगनी’ नाम भी यही बताता है — बैंगनी से परे, अर्थात् दृश्य प्रकाश के बैंगनी सिरे के आगे । यही वह विकिरण है जो सूर्य से आती है और जिसका अधिकांश भाग समताप मंडल की ओज़ोन परत सोख लेती है ; उसी के कारण त्वचा पर होने वाले प्रभाव और विटामिन डी का संश्लेषण दोनों जुड़े हैं । यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि जो अभ्यर्थी क्रम तो जानता है पर पट्टियों के नाम भूल जाता है, वह किसी भी रिक्त स्थान में सूक्ष्म-तरंगें बैठा दे । क्रम याद करते समय हर दो पड़ोसियों के बीच का नाम भी साथ ही दोहराइए ।
अवधारणा
विद्युत्-चुंबकीय स्पेक्ट्रम एक ही परिघटना के अलग-अलग तरंगदैर्ध्य वाले रूपों की सतत पंक्ति है । सभी विद्युत्-चुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं, उन्हें चलने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, और निर्वात में उन सबकी चाल एक ही होती है — प्रकाश की चाल । इसी कारण चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के संबंध से यह निकलता है कि तरंगदैर्ध्य बढ़ने पर आवृत्ति घटती है । बढ़ते तरंगदैर्ध्य का क्रम इस प्रकार है : गामा किरणें, एक्स-किरणें, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त, सूक्ष्म-तरंगें और रेडियो तरंगें । दृश्य प्रकाश इस पूरी पंक्ति का बहुत छोटा-सा भाग है, जो लगभग बैंगनी से लाल तक फैला है । हर पट्टी का अपना उपयोग है : गामा और एक्स चिकित्सा तथा प्रतिबिंबन में, पराबैंगनी जीवाणुनाशन में, अवरक्त ऊष्मा-संवेदन और दूरस्थ नियंत्रण में, सूक्ष्म-तरंगें रडार, उपग्रह संचार तथा चूल्हे में, और रेडियो तरंगें प्रसारण तथा संचार में । ऊर्जा की दृष्टि से पंक्ति के बाएँ सिरे की विकिरण सबसे अधिक ऊर्जावान होती है, इसलिए वहीं आयनन की क्षमता भी होती है, जबकि दाएँ सिरे की तरंगें अनआयनकारी होती हैं ।
स्पेक्ट्रम का क्रम आयोगों का प्रिय विषय है, क्योंकि उसे एक बार याद कर लेने पर उससे कई प्रकार के प्रश्न निकाले जा सकते हैं — किसका तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक है, कौन किसके बीच पड़ता है, किसकी आवृत्ति सबसे अधिक है, और कौन-सी तरंग किस काम में आती है । यहाँ प्रश्न ‘किसके बीच’ वाले रूप में आया है, जो सबसे कठिन रूप है, क्योंकि उसमें केवल क्रम नहीं, पड़ोसियों की जोड़ी याद होनी चाहिए । इसलिए क्रम याद करते समय उसे पंक्ति की तरह लिखिए और हर पड़ोसी युग्म को अलग से दोहराइए । पुस्तिका के बारे में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं । पहली, यह प्रश्न दो पंक्तियों में छपा है : पहली पंक्ति एक प्रश्न है और दूसरी पंक्ति वह वाक्य है जिसे विकल्प पूरा करते हैं । दूसरी, हिन्दी स्तंभ की उसी दूसरी पंक्ति में परसर्ग ‘का’ दो बार छप गया है ; पाठ यहाँ ठीक वैसा ही रखा गया है जैसा पुस्तिका में है, और इससे प्रश्न के अर्थ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । विकल्प (c) में यूनानी अक्षर गामा कोष्ठक में देवनागरी के बीच छपा है ।
मुख्य तथ्य
- बढ़ते तरंगदैर्ध्य के क्रम में विद्युत्-चुंबकीय स्पेक्ट्रम इस प्रकार चलता है — गामा किरणें, एक्स-किरणें, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त, सूक्ष्म-तरंगें और रेडियो तरंगें ।
- सूक्ष्म-तरंगों का तरंगदैर्ध्य मोटे तौर पर एक मिलीमीटर से एक मीटर तक फैला होता है, इसलिए वे अवरक्त से बड़ी और रेडियो तरंगों से छोटी होती हैं ।
- निर्वात में सभी विद्युत्-चुंबकीय तरंगों की चाल समान होती है, इसलिए तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती रहते हैं ।
- एक्स-किरणों और दृश्य प्रकाश के बीच पराबैंगनी विकिरण पड़ती है, जबकि दृश्य प्रकाश और सूक्ष्म-तरंगों के बीच अवरक्त ।
- सूक्ष्म-तरंगों का उपयोग रडार, उपग्रह संचार, चलभाष तंत्र तथा सूक्ष्म-तरंग चूल्हे में होता है ; वे अनआयनकारी विकिरण की श्रेणी में आती हैं ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दिशा भूल जाना । सूक्ष्म-तरंगें अवरक्त से लंबी होती हैं, इसलिए वे अवरक्त के उसी ओर पड़ती हैं जिस ओर रेडियो तरंगें हैं ।
- सटी हुई पट्टियों के बीच कोई तीसरी पट्टी मान लेना । दृश्य प्रकाश और अवरक्त आपस में सटे हुए हैं, इसलिए उनके बीच कोई और तरंग नहीं आती ।
- पट्टियों के नाम भूलकर कोई भी रिक्त स्थान भर देना । एक्स-किरणों और दृश्य प्रकाश के बीच पराबैंगनी आती है, सूक्ष्म-तरंगें नहीं ।
इस विषय पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा क्रम का है — दी गई तरंगों को बढ़ते या घटते तरंगदैर्ध्य के अनुसार सजाना । दूसरा साँचा पड़ोस का है, जैसा यहाँ है : कोई तरंग किन दो के बीच पड़ती है, या दो के बीच कौन-सी पड़ती है । तीसरा साँचा उपयोग का है — कौन-सी तरंग रडार में काम आती है, कौन-सी दूरस्थ नियंत्रण में, कौन-सी चिकित्सा-प्रतिबिंबन में । चौथा साँचा गुणों का है, जिसमें आयनन क्षमता, ऊर्जा और आवृत्ति के संबंध पूछे जाते हैं । चारों की तैयारी के लिए स्पेक्ट्रम की एक ही पंक्ति काग़ज़ पर बना लीजिए, उसके ऊपर तरंगदैर्ध्य का मोटा परास लिखिए और नीचे दो-दो उपयोग । पंक्ति को दोनों दिशाओं में दोहराइए, क्योंकि प्रश्न कभी तरंगदैर्ध्य के क्रम में पूछा जाता है और कभी आवृत्ति या ऊर्जा के क्रम में, और वे दोनों एक-दूसरे के उलटे होते हैं ।
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- (a) SHM with the same angular frequency as that of the wave
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तरंगों की मूल अवधारणा पर बना प्रश्न — डोरी पर चलती अनुप्रस्थ तरंग में किसी बिंदु की गति कैसी होती है, जो तरंग और माध्यम के कणों की गति का भेद स्पष्ट करता है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
विद्युत्-चुंबकीय स्पेक्ट्रम में एक्स-किरणों तथा दृश्य प्रकाश के बीच निम्नलिखित में से कौन-सी विकिरण पड़ती है ?
- (a)अवरक्त विकिरण
- (b)पराबैंगनी विकिरण
- (c)सूक्ष्म-तरंगें
- (d)रेडियो तरंगें
उत्तर(b) पराबैंगनी विकिरण — नाम ही बताता है कि यह दृश्य प्रकाश के बैंगनी सिरे से परे पड़ती है ; अवरक्त दृश्य प्रकाश के लाल सिरे की ओर है ।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित विद्युत्-चुंबकीय तरंगों में से किसका तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होता है ?
- (a)गामा किरणें
- (b)पराबैंगनी विकिरण
- (c)सूक्ष्म-तरंगें
- (d)रेडियो तरंगें
उत्तर(d) रेडियो तरंगें — वे स्पेक्ट्रम के सबसे लंबे तरंगदैर्ध्य वाले सिरे पर हैं, और इसीलिए उनकी आवृत्ति तथा ऊर्जा सबसे कम होती है ।