सामान्य पुरुष में, निम्नलिखित गुणसूत्रों में से किसमें बेमेल युग्म है ?
- (a)गुणसूत्र संख्या 21
- (b)गुणसूत्र संख्या 18
- (c)X-गुणसूत्र
- (d)गुणसूत्र संख्या 13
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) X-गुणसूत्र । सामान्य मानव कोशिका में छियालीस गुणसूत्र होते हैं, अर्थात् तेईस जोड़े । इनमें बाईस जोड़े अलिंगसूत्र कहलाते हैं और उन्हें आकार के अनुसार 1 से 22 तक क्रमांक दिए जाते हैं ; तेईसवाँ जोड़ा लिंग-गुणसूत्रों का होता है । अलिंगसूत्रों के दोनों सदस्य समजात होते हैं — आकार, आकृति और जीन-क्रम में लगभग समान — इसलिए वे मेल खाते जोड़े बनाते हैं, और यह बात स्त्री तथा पुरुष दोनों में समान रूप से लागू होती है । अंतर तेईसवें जोड़े में आता है । सामान्य स्त्री में यह जोड़ा दो X गुणसूत्रों का होता है, इसलिए वहाँ भी दोनों सदस्य आपस में मेल खाते हैं । सामान्य पुरुष में यह जोड़ा एक X और एक Y से बनता है, और X तथा Y आपस में बहुत भिन्न हैं — X बड़ा है और उस पर बहुत अधिक जीन हैं, जबकि Y छोटा है और उस पर बहुत कम । दोनों केवल अपने सिरों के छोटे-से भाग में एक-दूसरे से मेल खाते हैं, और अर्धसूत्री विभाजन के समय वहीं जुड़कर व्यवहार करते हैं । यही कारण है कि सामान्य पुरुष में X गुणसूत्र का साथी उससे मेल नहीं खाता, अर्थात् वही जोड़ा बेमेल है । अलिंगसूत्र 13, 18 और 21 तीनों पुरुष में भी समजात जोड़े बनाते हैं, इसलिए वे उत्तर नहीं हो सकते । अतः विकल्प (c) ही उत्तर है । इस प्रश्न का सबसे छोटा रास्ता एक ही पंक्ति में समा जाता है । अलिंगसूत्र स्त्री और पुरुष दोनों में एक जैसे होते हैं ; इसलिए यदि उत्तर किसी अलिंगसूत्र में होता तो प्रश्न में ‘सामान्य पुरुष में’ लिखने की कोई आवश्यकता ही न पड़ती । जिस क्षण प्रश्न लिंग को नामित करता है, उसी क्षण वह संकेत दे देता है कि उत्तर उसी जोड़े में मिलेगा जो स्त्री और पुरुष में भिन्न होता है — अर्थात् तेईसवें जोड़े में । और उस जोड़े में पुरुष के पास X के साथ Y है, जो उससे मेल नहीं खाता । शेष तीनों विकल्पों को इसी एक तर्क से एक साथ हटाया जा सकता है, बिना यह याद किए कि किस क्रमांक से कौन-सी स्थिति जुड़ी है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)गुणसूत्र संख्या 21 — गुणसूत्र संख्या 21 एक अलिंगसूत्र है और सामान्य पुरुष में उसका जोड़ा भी समजात होता है, इसलिए यह उत्तर नहीं है । यह संख्या इसीलिए परिचित लगती है कि इसी गुणसूत्र से जुड़ी एक प्रसिद्ध स्थिति है, जिसमें कोशिका में इस गुणसूत्र की दो के बजाय तीन प्रतियाँ आ जाती हैं और गुणसूत्रों की कुल संख्या सैंतालीस हो जाती है । पर ध्यान दीजिए कि वह एक असामान्य स्थिति है, जबकि प्रश्न स्पष्ट रूप से ‘सामान्य पुरुष’ की बात कर रहा है । संख्या की अतिरिक्त प्रति होना और जोड़े का बेमेल होना दो अलग बातें हैं : पहली में सदस्य तीन हो जाते हैं, दूसरी में दोनों सदस्य आपस में भिन्न होते हैं ।
- (b)गुणसूत्र संख्या 18 — गुणसूत्र संख्या 18 भी अलिंगसूत्र है और सामान्य पुरुष में उसका जोड़ा समजात रहता है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं बन सकता । इस विकल्प का प्रयोजन वही है जो पिछले का — परीक्षक ने ऐसे तीन क्रमांक चुने हैं जो चिकित्सा-विज्ञान की चर्चा में बार-बार आते हैं, ताकि उनकी परिचितता ही अभ्यर्थी को खींच ले । पर परिचितता का अर्थ यह नहीं कि जोड़ा बेमेल है । सामान्य कोशिका में हर अलिंगसूत्र की ठीक दो प्रतियाँ होती हैं, एक माता से और एक पिता से, और वे दोनों एक ही आकार तथा एक ही जीन-क्रम की होती हैं । बेमेल जोड़ा केवल वहीं बनता है जहाँ दो भिन्न प्रकार के गुणसूत्र साथ आते हैं ।
- (d)गुणसूत्र संख्या 13 — गुणसूत्र संख्या 13 भी अलिंगसूत्र है, इसलिए यह विकल्प भी उत्तर नहीं है । तीनों अलिंगसूत्र-विकल्पों को एक साथ हटाने का सबसे सुरक्षित तर्क यह है : अलिंगसूत्र स्त्री और पुरुष दोनों में एक जैसे होते हैं । यदि इनमें से कोई जोड़ा पुरुष में बेमेल होता, तो वह स्त्री में भी बेमेल होता, और तब प्रश्न में ‘सामान्य पुरुष में’ लिखने का कोई अर्थ ही न रह जाता । प्रश्न ने लिंग को स्पष्ट रूप से नामित किया है, और यही संकेत है कि उत्तर लिंग-गुणसूत्रों में ही मिलेगा । प्रश्न के शब्दों को इस तरह पढ़ना — कि कोई शब्द व्यर्थ नहीं रखा जाता — कई प्रश्नों में सीधा उत्तर तक पहुँचा देता है ।
अवधारणा
किसी जीव की कोशिका में गुणसूत्रों के पूरे समुच्चय को उनके आकार और आकृति के अनुसार सजाकर देखने को गुणसूत्र-चित्र कहा जाता है । मानव में यह चित्र तेईस जोड़े दिखाता है : बाईस जोड़े अलिंगसूत्रों के, जिन्हें घटते आकार के अनुसार 1 से 22 तक क्रमांक मिलते हैं, और एक जोड़ा लिंग-गुणसूत्रों का । हर जोड़े का एक सदस्य माता से और एक पिता से आता है । अलिंगसूत्रों के दोनों सदस्य समजात होते हैं, अर्थात् उन पर एक ही क्रम में एक ही प्रकार के जीन होते हैं, यद्यपि उनके रूप भिन्न हो सकते हैं । लिंग-गुणसूत्रों में स्थिति भिन्न है : स्त्री में दो X होते हैं और पुरुष में एक X तथा एक Y । X और Y आकार में बहुत असमान हैं और उन पर जीन भी बहुत भिन्न हैं ; वे केवल अपने सिरों के छोटे-से भाग में एक-दूसरे से मेल खाते हैं और अर्धसूत्री विभाजन के समय वहीं जुड़ते हैं । इसी असमानता के कारण मानव में पुरुष विषमयुग्मकी कहलाता है — उसके शुक्राणु दो प्रकार के बनते हैं, कुछ X लिए हुए और कुछ Y — जबकि स्त्री के सभी अंडाणु X लिए होते हैं । इसीलिए संतान का लिंग शुक्राणु में उपस्थित लिंग-गुणसूत्र से तय होता है ।
जीव विज्ञान के इस खंड में गुणसूत्रों पर प्रश्न लगभग हर वर्ष आते हैं, और उनकी कठिनाई प्रायः शब्दों में छिपी होती है । यहाँ ‘बेमेल युग्म’ पद निर्णायक है : वह जोड़े के भीतर की असमानता की बात कर रहा है, संख्या की गड़बड़ी की नहीं । परीक्षक ने तीन ऐसे अलिंगसूत्र-क्रमांक चुने हैं जो चिकित्सा से जुड़ी चर्चाओं में सुनाई देते हैं, ताकि उनकी परिचितता भ्रम पैदा करे । दूसरा निर्णायक शब्द ‘सामान्य पुरुष’ है — यह एक साथ दो काम करता है : ‘सामान्य’ कहकर असामान्य स्थितियों को बाहर कर देता है, और ‘पुरुष’ कहकर उत्तर की दिशा लिंग-गुणसूत्रों की ओर मोड़ देता है । ऐसे प्रश्नों में सबसे अच्छी आदत यह है कि पहले यह पूछा जाए कि प्रश्न ने कौन-से शब्द क्यों रखे हैं । यह भी ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ में विकल्प (c) मिश्रित लिपि में छपा है — रोमन बड़ा अक्षर X और उसके बाद योजक चिह्न लगाकर देवनागरी में ‘गुणसूत्र’ ।
मुख्य तथ्य
- सामान्य मानव कोशिका में छियालीस गुणसूत्र होते हैं, अर्थात् तेईस जोड़े — बाईस जोड़े अलिंगसूत्रों के और एक जोड़ा लिंग-गुणसूत्रों का ।
- अलिंगसूत्रों के दोनों सदस्य समजात होते हैं और यह बात स्त्री तथा पुरुष दोनों में समान रूप से लागू होती है ; इसलिए क्रमांक 13, 18 और 21 के जोड़े दोनों में मेल खाते हैं ।
- सामान्य स्त्री में लिंग-गुणसूत्रों का जोड़ा दो X से बनता है, जबकि सामान्य पुरुष में वह एक X तथा एक Y से बनता है ।
- X गुणसूत्र Y की तुलना में बहुत बड़ा है और उस पर कहीं अधिक जीन हैं ; दोनों केवल अपने सिरों के छोटे भाग में एक-दूसरे से मेल खाते हैं ।
- मानव में पुरुष विषमयुग्मकी होता है — उसके शुक्राणु X या Y लिए होते हैं, जबकि स्त्री के सभी अंडाणु X लिए होते हैं — इसलिए संतान का लिंग शुक्राणु से तय होता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ‘बेमेल युग्म’ को गुणसूत्रों की अतिरिक्त प्रति समझ लेना । बेमेल का अर्थ है जोड़े के दोनों सदस्यों का आपस में भिन्न होना, संख्या का बढ़ना नहीं ।
- परिचित क्रमांकों की ओर खिंच जाना । 13, 18 और 21 चिकित्सा-चर्चाओं में सुनाई देते हैं, पर तीनों अलिंगसूत्र हैं और उनके जोड़े समजात होते हैं ।
- ‘सामान्य पुरुष’ शब्द को छोड़ देना । वही शब्द असामान्य स्थितियों को बाहर करता है और उत्तर की दिशा लिंग-गुणसूत्रों की ओर मोड़ता है ।
गुणसूत्रों पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा संख्या का है — मानव में कितने गुणसूत्र होते हैं, कितने जोड़े अलिंगसूत्र हैं, और युग्मक में कितने होते हैं । दूसरा साँचा भेद का है, जैसा यहाँ है : अलिंगसूत्र और लिंग-गुणसूत्र में अंतर, या स्त्री तथा पुरुष के गुणसूत्र-चित्र में अंतर । तीसरा साँचा लिंग-निर्धारण का है, जिसमें यह पूछा जाता है कि संतान का लिंग किससे तय होता है और क्यों । चौथा साँचा वंशागति का है, जिसमें लिंग-सहलग्न लक्षणों की चर्चा आती है और यह पूछा जाता है कि कोई लक्षण पुरुषों में अधिक क्यों दिखता है । चारों की तैयारी के लिए एक ही चित्र पर्याप्त है : तेईस जोड़ों की पंक्ति बनाइए, बाईस को समान जोड़ों के रूप में और तेईसवें को स्त्री तथा पुरुष के लिए अलग-अलग दिखाइए । इसी चित्र से संख्या, भेद, लिंग-निर्धारण और सहलग्नता चारों प्रश्न निकल आते हैं ।
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EPFO_EOAO_2020_Q41खोलें व हल करें →Which one of the following is not a female reproductive organ in humans ?
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उत्तर(d) Stamen
इसी प्रश्नपत्र का जनन तंत्र वाला प्रश्न, जो उसी विषय का दूसरा सिरा है — युग्मक जिन अंगों में बनते हैं और लिंग-गुणसूत्र जिनके माध्यम से अगली पीढ़ी तक जाते हैं ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
मानव में संतान के लिंग-निर्धारण के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)संतान का लिंग माता के अंडाणु में उपस्थित लिंग-गुणसूत्र से तय होता है
- (b)संतान का लिंग पिता के शुक्राणु में उपस्थित लिंग-गुणसूत्र से तय होता है
- (c)संतान का लिंग माता-पिता में से किसी के गुणसूत्रों से तय नहीं होता
- (d)संतान का लिंग अंडाणु के आकार पर निर्भर करता है
उत्तर(b) संतान का लिंग पिता के शुक्राणु में उपस्थित लिंग-गुणसूत्र से तय होता है — स्त्री के सभी अंडाणु X लिए होते हैं, जबकि शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं, कुछ X लिए और कुछ Y ।
- practice — not a real PYQ
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- (a)इक्कीस
- (b)बाईस
- (c)तेईस
- (d)छियालीस
उत्तर(b) बाईस — इनके अतिरिक्त एक जोड़ा लिंग-गुणसूत्रों का होता है, इसलिए कुल तेईस जोड़े अर्थात् छियालीस गुणसूत्र बनते हैं ।