निम्नलिखित में से कौन-सा वनोन्मूलन का परिणाम नहीं है ?
- (a)बढ़ता भौम जलस्तर
- (b)घटती जैव-विविधता
- (c)बढ़ता मृदा अपरदन
- (d)घटती वृष्टि
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) बढ़ता भौम जलस्तर । यहाँ निषेध मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, अर्थात् तीन विकल्प वनोन्मूलन के वास्तविक परिणाम हैं और एक नहीं — और वही उत्तर है । वनों के कटने से भौम जलस्तर बढ़ता नहीं, घटता है, और इसका कारण जल-चक्र में है । जब वन खड़ा होता है तो वर्षा की बूँदें सीधे भूमि पर नहीं गिरतीं ; वे पहले पत्तियों की छतरी से टकराकर धीमी होती हैं, फिर गिरे हुए पत्तों की परत पर पहुँचती हैं, और वहाँ से धीरे-धीरे मिट्टी में रिसती हैं । जड़ों से बनी असंख्य सूक्ष्म नलिकाएँ मिट्टी को छिद्रमय बनाए रखती हैं, जिससे पानी नीचे उतरता रहता है और भूजल भंडार भरता है — इसी प्रक्रिया को अंतःस्यंदन कहते हैं । वन कट जाने पर यह पूरी शृंखला टूट जाती है : बूँद सीधे नंगी मिट्टी पर गिरती है, ऊपरी सतह सख़्त हो जाती है, और अधिकांश पानी रिसने के बजाय सतह पर बहकर निकल जाता है । पुनर्भरण घटता है, इसलिए जलस्तर नीचे उतरता है । यही कारण है कि वन-विहीन ढलानों पर वर्षा के तुरंत बाद बाढ़ जैसी स्थिति बनती है और कुछ ही सप्ताह बाद सूखा-सा दिखाई देने लगता है — पानी आया तो बहुत, पर ठहरा नहीं । अतः बढ़ते जलस्तर वाला कथन वनोन्मूलन का परिणाम नहीं है और विकल्प (a) ही उत्तर है । विकल्पों को छाँटने का एक और, बहुत तेज़ रास्ता भी है । वनोन्मूलन एक क्षति है, इसलिए उसके परिणाम भी क्षति की दिशा में ही जाएँगे — जैव-विविधता घटेगी, अपरदन बढ़ेगा, वर्षा घटेगी । इन तीनों में कहीं कोई सुधार नहीं है । केवल एक विकल्प ऐसा है जो एक अनुकूल परिणाम बता रहा है, अर्थात् जलस्तर का बढ़ना, और ‘नहीं’ वाले प्रश्न में वही उत्तर होगा । यह दिशा वाली जाँच पर्यावरण के लगभग हर बेमेल-छाँटने वाले प्रश्न में लागू होती है और उसमें किसी तंत्र को याद रखने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)घटती जैव-विविधता — घटती जैव-विविधता वनोन्मूलन का सीधा और सबसे व्यापक परिणाम है, इसलिए यह ‘नहीं’ वाले प्रश्न का उत्तर नहीं बन सकता । वन केवल पेड़ों का समूह नहीं होते ; वे एक पूरा पारितंत्र होते हैं, जिसमें छतरी, मध्य स्तर, झाड़ियाँ और भूमि की परत — हर स्तर पर अलग-अलग जीव रहते हैं । जब वन कटता है तो एक साथ अनेक आवास समाप्त हो जाते हैं, और जिन प्रजातियों का वितरण पहले से सीमित होता है वे सबसे पहले संकट में आती हैं । एक और प्रभाव आवासों के टुकड़ों में बँट जाने का होता है : बचा हुआ वन छोटे-छोटे द्वीपों में बदल जाता है, जिनके बीच जीव आ-जा नहीं पाते, और छोटी आबादियाँ धीरे-धीरे समाप्त होती जाती हैं ।
- (c)बढ़ता मृदा अपरदन — बढ़ता मृदा अपरदन भी वनोन्मूलन का जाना-पहचाना परिणाम है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं है । इसके पीछे दो अलग-अलग क्रियाएँ हैं । पहली, जड़ों का जाल मिट्टी के कणों को बाँधे रखता है और वन कट जाने पर यह बंधन ढीला पड़ जाता है । दूसरी, पत्तियों की छतरी और गिरे हुए पत्तों की परत वर्षा की बूँद का प्रहार सहती है ; वह आवरण हटते ही बूँद सीधे मिट्टी पर पड़ती है और ऊपरी उपजाऊ परत को ढीला करके बहा ले जाती है । ढलान वाले क्षेत्रों में यह प्रभाव और तेज़ होता है, क्योंकि वहाँ बहाव की गति अधिक होती है । बही हुई मिट्टी नदियों और जलाशयों में जमा होकर उनकी भंडारण क्षमता भी घटाती है ।
- (d)घटती वृष्टि — घटती वृष्टि भी वनोन्मूलन का परिणाम मानी जाती है, इसलिए यह विकल्प भी उत्तर नहीं है । इसका तंत्र वाष्पोत्सर्जन से जुड़ा है : वन के पेड़ जड़ों से जल खींचकर पत्तियों के रंध्रों से वाष्प के रूप में वायुमंडल में छोड़ते रहते हैं, और यह वाष्प स्थानीय स्तर पर बादल बनने और वर्षा होने में योगदान देती है । बड़े वन-क्षेत्र इस प्रकार अपनी वर्षा का एक भाग स्वयं बनाते हैं । वन हटने पर यह वाष्प-आपूर्ति घटती है और स्थानीय वर्षा पर असर पड़ता है । इसके साथ भूमि की परावर्तन-क्षमता भी बदलती है और सतह अधिक गर्म होती है, जिससे वायु की गति और आर्द्रता के प्रतिरूप बदल जाते हैं ।
अवधारणा
वन जिन सेवाओं को चुपचाप देते रहते हैं, उन्हें एक साथ देखने पर यह प्रश्न सरल हो जाता है । जल के मामले में वन दो काम करते हैं : वे वर्षा-जल के भूमि में रिसने की गति बढ़ाते हैं, जिससे भूजल का पुनर्भरण होता है, और वे वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से वायुमंडल को नमी लौटाते हैं, जिससे स्थानीय वर्षा को सहारा मिलता है । मिट्टी के मामले में उनकी जड़ें कणों को बाँधती हैं और उनका पत्ती-आवरण वर्षा के प्रहार को रोकता है, जिससे अपरदन घटता है । जलवायु के मामले में वे कार्बन के अवशोषक हैं, क्योंकि प्रकाश-संश्लेषण से लिया गया कार्बन लकड़ी और मिट्टी में संचित होता रहता है । और जीवन के मामले में वे असंख्य प्रजातियों का आवास हैं । अब वनोन्मूलन को इन्हीं चार खानों में उलटकर पढ़िए : पुनर्भरण घटेगा और जलस्तर गिरेगा, वर्षा घटेगी, अपरदन बढ़ेगा, संचित कार्बन वायुमंडल में लौटेगा, और जैव-विविधता घटेगी । इस प्रकार वनोन्मूलन के परिणाम याद करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती ; वन की सेवाओं को उलट देना पर्याप्त है ।
पर्यावरण से जुड़े इस प्रकार के प्रश्न आयोगों में इसलिए लोकप्रिय हैं कि उनमें कोई तिथि या आँकड़ा याद नहीं करना पड़ता, केवल कारण-परिणाम की समझ चाहिए । यहाँ रचना बहुत साफ़ है : तीन विकल्प एक ही दिशा में जाते हैं — कुछ घटता है, कुछ बढ़ता है, पर सब बिगाड़ की ओर — और एक विकल्प उलटी दिशा में सुधार बताता है । इसलिए ‘नहीं’ वाला उत्तर वही होगा जो अकेला सुधार की बात कर रहा हो । यह युक्ति ऐसे लगभग हर प्रश्न में काम करती है, क्योंकि परीक्षक बेमेल विकल्प बनाने के लिए प्रायः दिशा ही उलट देता है । ध्यान दीजिए कि यहाँ तीन विकल्पों में क्रिया-पद ‘बढ़ता’ और ‘घटती’ आपस में मिलाकर रखे गए हैं, ताकि केवल क्रिया देखकर छाँटना संभव न रह जाए — इसलिए दिशा नहीं, अर्थ देखिए : कौन-सा कथन पर्यावरण के लिए अनुकूल परिणाम बता रहा है ।
मुख्य तथ्य
- वन वर्षा-जल के भूमि में रिसने की गति बढ़ाते हैं ; वन कटने पर अंतःस्यंदन घटता है, सतही बहाव बढ़ता है और भौम जलस्तर नीचे चला जाता है ।
- वनों की जड़ें मिट्टी के कणों को बाँधे रखती हैं और पत्तियों की छतरी वर्षा की बूँद का प्रहार सहती है, इसलिए वनोन्मूलन से मृदा अपरदन बढ़ जाता है ।
- पेड़ वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से वायुमंडल को नमी लौटाते हैं, जिससे स्थानीय वर्षा को सहारा मिलता है ; वन हटने पर वृष्टि घटती है ।
- वन बहुस्तरीय पारितंत्र होते हैं, इसलिए उनके कटने से एक साथ अनेक आवास समाप्त होते हैं और जैव-विविधता घटती है ।
- वन कार्बन के अवशोषक हैं, क्योंकि प्रकाश-संश्लेषण से लिया गया कार्बन लकड़ी तथा मिट्टी में संचित रहता है ; वन कटने पर वही कार्बन वायुमंडल में लौट जाता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- क्रिया-पद देखकर छाँटना । यहाँ ‘बढ़ता’ और ‘घटती’ दोनों प्रकार के कथन सही विकल्पों में भी हैं, इसलिए दिशा नहीं, अर्थ देखना पड़ता है ।
- पेड़ों के जल खींचने से जलस्तर घटने की कल्पना करना । वन जितना जल लेते हैं उससे कहीं अधिक जल को भूमि में रिसने का अवसर देते हैं, इसलिए शुद्ध प्रभाव पुनर्भरण के पक्ष में रहता है ।
- वर्षा को केवल वायुमंडलीय परिघटना मानना । बड़े वन-क्षेत्र वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से अपनी वर्षा में योगदान देते हैं, इसलिए वन हटने का असर वर्षा पर भी पड़ता है ।
वनोन्मूलन और पर्यावरण-क्षरण पर प्रश्न तीन रूपों में आते हैं । पहला रूप यही है — परिणामों की सूची में से बेमेल छाँटना, जहाँ बेमेल कथन प्रायः दिशा उलटकर बनाया जाता है । दूसरा रूप तंत्र का है : किसी परिणाम का कारण पूछना, जैसे अपरदन क्यों बढ़ता है या स्थानीय वर्षा क्यों घटती है, और वहाँ उत्तर में क्रिया-विधि बतानी पड़ती है । तीसरा रूप उपायों का है — मृदा संरक्षण की विधियाँ, वर्षा-जल संचयन, संयुक्त वन प्रबंधन तथा वनरोपण के कार्यक्रम । तीनों की तैयारी के लिए वन की चार सेवाओं की एक सूची बना लीजिए — जल, मिट्टी, जलवायु और जैव-विविधता — और हर सेवा के सामने यह लिख दीजिए कि वन हटने पर उसका क्या होगा । इस एक तालिका से इस विषय के अधिकांश प्रश्न बिना अलग से याद किए हल हो जाते हैं, क्योंकि परिणाम सेवाओं के उलटाव मात्र हैं ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q36खोलें व हल करें →Which one of the following facts pertaining to the National Green Tribunal (NGT) is not correct ?
- (a) The NGT was set up in the year 2010.
- (b) Its purpose is to ensure effective and expeditious disposal of cases relating to environmental protection and conservation of forests and other natural resources.
- (c) It is bound by the procedure laid down under the Code of Civil Procedure.
- (d) It is guided by the principles of natural justice.
उत्तर(c) It is bound by the procedure laid down under the Code of Civil Procedure.
इसी प्रश्नपत्र का पर्यावरण-शासन वाला प्रश्न — वह अधिकरण, जो वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटान के लिए बनाया गया है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वनोन्मूलन के बाद किसी ढलान वाले क्षेत्र में मृदा अपरदन बढ़ जाने का मुख्य कारण निम्नलिखित में से क्या है ?
- (a)मिट्टी में लवणों की मात्रा बढ़ जाती है
- (b)जड़ों की पकड़ और पत्तियों का आवरण हट जाने से वर्षा-जल सीधे मिट्टी पर गिरता और बहता है
- (c)मिट्टी का तापमान घट जाता है
- (d)भूमिगत जल ऊपर आकर मिट्टी को बहा ले जाता है
उत्तर(b) जड़ों की पकड़ और पत्तियों का आवरण हट जाने से वर्षा-जल सीधे मिट्टी पर गिरता और बहता है — इससे ऊपरी उपजाऊ परत ढीली होकर बह जाती है, और ढलानों पर यह प्रभाव और तेज़ होता है ।
- practice — not a real PYQ
जलवायु परिवर्तन को धीमा करने में वन मुख्य रूप से किस भूमिका के कारण सहायक माने जाते हैं ?
- (a)कार्बन के अवशोषक के रूप में
- (b)ओज़ोन के उत्पादक के रूप में
- (c)मीथेन के प्रमुख स्रोत के रूप में
- (d)सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह परावर्तित करके
उत्तर(a) कार्बन के अवशोषक के रूप में — प्रकाश-संश्लेषण से लिया गया कार्बन लकड़ी तथा मिट्टी में संचित रहता है, और वन कटने पर वही कार्बन वायुमंडल में लौट जाता है ।