निम्नलिखित में से किसे “वनस्पति जगत् का उभयचर” नहीं कहा जा सकता ?
- (a)स्पाइरोगाइरा
- (b)रिक्सिया
- (c)फ्यूनेरिया
- (d)मार्केंशिया
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) स्पाइरोगाइरा । ‘वनस्पति जगत् का उभयचर’ यह उपाधि ब्रायोफाइट्स को दी जाती है, और इसका कारण उनके जीवन-चक्र में है । ब्रायोफाइट्स स्थल पर उगते हैं, प्रायः नम और छायादार स्थानों पर, पर उनका लैंगिक जनन जल के बिना पूरा नहीं होता — नर युग्मक चलनशील होते हैं और उन्हें अंडे तक पहुँचने के लिए पानी की एक पतली परत चाहिए । जीवन का एक भाग थल पर और जनन का एक भाग जल पर निर्भर — ठीक वैसे ही जैसे उभयचर प्राणी । अब विकल्प देखिए । रिक्सिया और मार्केंशिया दोनों लिवरवर्ट हैं और फ्यूनेरिया एक मॉस है ; तीनों ब्रायोफाइट्स के मानक उदाहरण हैं और तीनों को यह उपाधि दी जा सकती है । स्पाइरोगाइरा इनसे भिन्न है — वह एक हरित शैवाल है, तंतुमय संरचना वाला, और वह पूरी तरह जलीय है । जो पौधा अपना पूरा जीवन ही जल में बिताता है उसे ‘उभयचर’ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उभयचर होने का अर्थ ही दो माध्यमों के बीच का जीवन है । इसीलिए प्रश्न में पूछा गया है कि किसे यह नाम नहीं दिया जा सकता, और उत्तर स्पाइरोगाइरा है । ध्यान दीजिए कि प्रश्न में निषेध मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए यहाँ तीन विकल्प सही कथन हैं और उत्तर वही है जो सूची से बाहर पड़ता है । अतः विकल्प (a) ही उत्तर है । इस उत्तर को स्मृति में बाँधने के लिए दो तथ्य साथ रखिए । पहला, ब्रायोफाइट्स में संवहन ऊतक नहीं होता और वास्तविक जड़ों के स्थान पर मूलाभास होते हैं — इसीलिए वे छोटे रह जाते हैं और नमी वाले स्थानों से दूर नहीं जा पाते । दूसरा, शैवाल इस सीढ़ी में उनसे नीचे हैं और प्रायः पूर्णतः जलीय होते हैं, इसलिए उनके लिए जल कोई बाधा नहीं, उनका सामान्य आवास है । ‘उभयचर’ शब्द का अर्थ ही दो माध्यमों के बीच का जीवन है ; जो एक ही माध्यम में रहता हो, उस पर यह उपाधि लागू नहीं होती । यही एक वाक्य चारों विकल्पों को छाँट देता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)रिक्सिया — रिक्सिया एक लिवरवर्ट है, अर्थात् ब्रायोफाइट्स के उसी वर्ग से आता है जिसे ‘वनस्पति जगत् का उभयचर’ कहा जाता है ; इसलिए यह ‘नहीं’ वाले प्रश्न का उत्तर नहीं बन सकता । लिवरवर्ट प्रायः नम मिट्टी, चट्टानों या पेड़ों की छाल पर चपटी, हरी और शाखित संरचना के रूप में उगते हैं । उनमें वास्तविक जड़ें नहीं होतीं ; उनके स्थान पर मूलाभास होते हैं, जो केवल जकड़ने और जल सोखने का काम करते हैं । यही कारण है कि ब्रायोफाइट्स आकार में छोटे रहते हैं और नमी वाले स्थानों तक सीमित रहते हैं । वे कायिक जनन भी करते हैं, पर लैंगिक जनन के लिए जल की आवश्यकता बनी रहती है — और यही वह विशेषता है जिस पर पूरी उपाधि टिकी है ।
- (c)फ्यूनेरिया — फ्यूनेरिया एक मॉस है और मॉस भी ब्रायोफाइट्स में ही आते हैं, इसलिए यह भी उत्तर नहीं है । मॉस का शरीर लिवरवर्ट की तुलना में कुछ अधिक विकसित दिखाई देता है — उसमें तने जैसा अक्ष और पत्ती जैसी संरचनाएँ होती हैं, यद्यपि वे वास्तविक तना और पत्ती नहीं कहलातीं, क्योंकि उनमें संवहन ऊतक नहीं होता । नीचे मूलाभास होते हैं । मॉस की एक व्यावहारिक भूमिका भी है : वे नंगी चट्टानों पर बसने वाले आरंभिक जीवों में गिने जाते हैं और मिट्टी के निर्माण तथा मृदा अपरदन रोकने में सहायक होते हैं । इन सबके बावजूद उनका लैंगिक जनन जल पर निर्भर रहता है, इसलिए वे भी उसी उपाधि के अधिकारी हैं ।
- (d)मार्केंशिया — मार्केंशिया भी एक लिवरवर्ट है, इसलिए वह भी ब्रायोफाइट्स में आता है और यह उत्तर नहीं हो सकता । वह ब्रायोफाइट्स का सबसे अधिक पढ़ाया जाने वाला उदाहरण है, क्योंकि उसमें कायिक जनन की विशेष संरचनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं । यह विकल्प इस प्रश्न में इसलिए रखा गया है कि तीनों ब्रायोफाइट-उदाहरण एक साथ आ जाएँ और अभ्यर्थी के सामने यह स्पष्ट हो जाए कि बेमेल केवल एक है । यदि आपको तीनों नाम पहचान में आ जाएँ तो प्रश्न वहीं समाप्त हो जाता है, चाहे चौथे नाम के बारे में कुछ याद न हो । ‘बेमेल छाँटिए’ वाले प्रश्नों में यही सबसे उपयोगी युक्ति है — तीन को पहचानिए, चौथा अपने आप उत्तर बन जाता है ।
अवधारणा
पादप जगत् का पारंपरिक वर्गीकरण पाँच बड़े समूहों में चलता है, और उन्हें बढ़ती जटिलता के क्रम में देखने पर यह प्रश्न अपने आप खुल जाता है । सबसे नीचे शैवाल हैं, जो प्रायः जलीय होते हैं और जिनमें शरीर का विभेदन बहुत कम होता है ; स्पाइरोगाइरा इसी समूह का तंतुमय हरित शैवाल है । उसके ऊपर ब्रायोफाइट्स आते हैं — लिवरवर्ट और मॉस — जो स्थल पर उगने वाले पहले पौधे माने जाते हैं, पर जिनमें संवहन ऊतक नहीं होता और जिनका लैंगिक जनन जल पर निर्भर रहता है ; इसी दोहरेपन के कारण उन्हें ‘वनस्पति जगत् का उभयचर’ कहा जाता है । उनसे ऊपर टेरिडोफाइट्स हैं, जिनमें पहली बार वास्तविक संवहन ऊतक — जाइलम तथा फ्लोएम — दिखाई देता है और इसीलिए उन्हें संवहनी बीजाणुधारी कहा जाता है ; उनका जनन भी जल पर निर्भर रहता है । उसके बाद अनावृतबीजी आते हैं, जिनके बीज नग्न होते हैं और जिनमें परागण के लिए जल की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, और अंत में आवृतबीजी, अर्थात् पुष्पी पादप, जिनमें बीज फल के भीतर सुरक्षित रहता है । इस सीढ़ी को याद रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि हर चरण पर यह पूछा जाए कि जल पर निर्भरता कितनी घटी और संरचना कितनी जटिल हुई ।
‘वनस्पति जगत् का उभयचर’ जैसी उपाधियाँ परीक्षा में बहुत लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे एक वाक्य में किसी समूह की परिभाषित विशेषता बाँध देती हैं और उन्हें पूछना सरल होता है । इस प्रश्न की रचना उसी परिचित उपाधि पर टिकी है, पर उसे उलट कर पूछा गया है — किसे यह नाम नहीं दिया जा सकता । इस उलटाव के कारण अभ्यर्थी को केवल उपाधि याद होना पर्याप्त नहीं ; उसे यह भी जानना पड़ता है कि कौन-सा नाम किस समूह का है । यहाँ तीन नाम ब्रायोफाइट्स के हैं और एक शैवाल का, और शैवाल पूरी तरह जलीय होने के कारण उपाधि की शर्त ही पूरी नहीं करता । ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि हिन्दी स्तंभ में चारों वंश-नाम देवनागरी में लिप्यंतरित हैं और तिरछे अक्षरों में छपे हैं, क्योंकि वैज्ञानिक नाम तिरछे लिखे जाते हैं ; सादे पाठ में यह संकेत दिखाई नहीं देता । उद्धृत वाक्यांश दोहरे उद्धरण-चिह्नों के भीतर है और ‘जगत्’ हलंत के साथ छपा है ।
मुख्य तथ्य
- ब्रायोफाइट्स को ‘वनस्पति जगत् का उभयचर’ कहा जाता है, क्योंकि वे स्थल पर उगते हैं पर उनके लैंगिक जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है ।
- रिक्सिया तथा मार्केंशिया लिवरवर्ट हैं और फ्यूनेरिया एक मॉस है ; तीनों ब्रायोफाइट्स के मानक उदाहरण हैं ।
- स्पाइरोगाइरा एक तंतुमय हरित शैवाल है और पूरी तरह जलीय है, इसलिए उस पर उभयचर वाली उपाधि लागू नहीं होती ।
- ब्रायोफाइट्स में संवहन ऊतक नहीं होता और वास्तविक जड़ों के स्थान पर मूलाभास होते हैं, इसीलिए वे आकार में छोटे और नम स्थानों तक सीमित रहते हैं ।
- पादप जगत् में संवहन ऊतक सबसे पहले टेरिडोफाइट्स में दिखाई देता है, और बीज के भीतर सुरक्षित भ्रूण की व्यवस्था अनावृतबीजी तथा आवृतबीजी में आती है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- उपाधि याद रखकर उदाहरण भूल जाना । यहाँ पूछा यही जा रहा है कि कौन-सा नाम उस समूह का नहीं है, इसलिए नाम और समूह का जोड़ा याद रखना पड़ता है ।
- शैवाल और ब्रायोफाइट्स को एक मान लेना । शैवाल प्रायः पूर्णतः जलीय होते हैं, जबकि ब्रायोफाइट्स स्थलीय हैं और केवल जनन के लिए जल पर निर्भर ।
- मॉस की पत्ती जैसी संरचनाओं को वास्तविक पत्ती मान लेना । उनमें संवहन ऊतक नहीं होता, इसलिए वे वास्तविक तना या पत्ती नहीं कहलातीं ।
पादप जगत् के वर्गीकरण पर प्रश्न चार रूपों में आते हैं । पहला रूप उपाधि का है — ‘वनस्पति जगत् का उभयचर’, ‘संवहनी बीजाणुधारी’, ‘नग्नबीजी’ — जहाँ पद देकर समूह पूछा जाता है या समूह देकर पद । दूसरा रूप उदाहरण का है, जैसा यहाँ है : चार नामों में से बताइए कि कौन इस समूह में नहीं आता । तीसरा रूप विशेषता का है — किस समूह में सबसे पहले संवहन ऊतक आया, किसमें बीज नग्न होता है, किसमें जनन जल पर निर्भर है । चौथा रूप क्रम का है, जिसमें समूहों को बढ़ती जटिलता के अनुसार सजाना पड़ता है । चारों की तैयारी के लिए एक ही तालिका पर्याप्त है, जिसमें पाँच समूहों के नाम, हर समूह की दो पहचानने वाली विशेषताएँ और दो-दो उदाहरण लिखे हों । उदाहरण अवश्य लिखिए, क्योंकि परीक्षक प्रायः विशेषता नहीं, नाम पूछता है ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2017_Q99Which one of the following has the characteristics of both an animal as well as a plant?
- (a) Fern
- (b) Moss
- (c) Earthworm
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उत्तर(d) Euglena
वर्गीकरण की उसी कसौटी पर बना दूसरा प्रश्न — वह जीव कौन-सा है जिसमें पादप तथा जंतु दोनों के लक्षण मिलते हैं, जहाँ भी उत्तर समूह की परिभाषित विशेषता से निकलता है ।
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ऐतिहासिक स्मारकों की सतह पर उगने वाले जीवों पर बना प्रश्न, जो इसी तरह किसी समूह की पहचान पर टिका है और वर्गीकरण की जानकारी माँगता है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
पादप जगत् के वर्गीकरण में, वास्तविक संवहन ऊतक सर्वप्रथम निम्नलिखित में से किस समूह में दिखाई देता है ?
- (a)शैवाल
- (b)ब्रायोफाइटा
- (c)टेरिडोफाइटा
- (d)कवक
उत्तर(c) टेरिडोफाइटा — इसीलिए उन्हें संवहनी बीजाणुधारी कहा जाता है ; ब्रायोफाइट्स में संवहन ऊतक नहीं होता और कवक पादप जगत् के इस क्रम में आते ही नहीं ।
- practice — not a real PYQ
ब्रायोफाइट्स को ‘वनस्पति जगत् का उभयचर’ कहे जाने का मुख्य कारण निम्नलिखित में से क्या है ?
- (a)वे जल तथा थल दोनों में भोजन बनाते हैं
- (b)वे स्थल पर उगते हैं, किन्तु उनके लैंगिक जनन के लिए जल आवश्यक होता है
- (c)उनमें वास्तविक जड़, तना तथा पत्ती तीनों पाए जाते हैं
- (d)वे केवल समुद्री जल में पाए जाते हैं
उत्तर(b) वे स्थल पर उगते हैं, किन्तु उनके लैंगिक जनन के लिए जल आवश्यक होता है — नर युग्मक चलनशील होते हैं और उन्हें अंडे तक पहुँचने के लिए जल की पतली परत चाहिए ।