निम्नलिखित में से कौन-सा, मानव में स्त्री जननांग नहीं है ?
- (a)अंडाशय
- (b)अंडवाहिनियाँ
- (c)गर्भाशय-ग्रीवा
- (d)पुंकेसर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) पुंकेसर । यहाँ ‘नहीं’ मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, अर्थात् उत्तर वह विकल्प है जो मानव में स्त्री जननांग नहीं है — और वही पुंकेसर है, क्योंकि पुंकेसर मानव का अंग है ही नहीं । पुंकेसर पुष्प का नर जनन-भाग है ; वह परागकोश और पुतंतु से मिलकर बनता है, और परागकोश में परागकण बनते हैं । पुष्प का मादा भाग स्त्रीकेसर कहलाता है, जिसके तीन भाग होते हैं — वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय । अब शेष तीनों विकल्प देखिए, क्योंकि तीनों मानव स्त्री जनन तंत्र के वास्तविक अंग हैं । अंडाशय एक जोड़े में होते हैं और उनमें अंडाणु बनते हैं तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन स्रावित होते हैं । अंडवाहिनियाँ, जिन्हें फैलोपियन नलिकाएँ भी कहा जाता है, अंडाशय से निकले अंडाणु को गर्भाशय तक ले जाती हैं, और सामान्यतः निषेचन इन्हीं नलिकाओं के भीतर होता है । गर्भाशय-ग्रीवा गर्भाशय का निचला सँकरा भाग है, जो योनि में खुलता है और प्रसव के समय जन्म-मार्ग का भाग बनता है । अर्थात् तीन विकल्प एक ही तंत्र के तीन अंग हैं और चौथा एक बिलकुल दूसरे जगत् से आया है । इस प्रश्न की चतुराई यहीं है : परीक्षक ने ऐसा शब्द चुना है जो वनस्पति विज्ञान से आता है, पर जिसके साथ ‘अंडाशय’ शब्द भी जुड़ा रहता है, क्योंकि पुष्प में भी अंडाशय होता है । इसी साझा शब्दावली से भ्रम बनता है । इसलिए उत्तर विकल्प (d) है । छँटनी को नियम की तरह लिख लीजिए, क्योंकि यह पूरे जीव विज्ञान खंड में काम आता है : विकल्पों पर एक-एक करके यह प्रश्न लगाइए कि यह अंग किस जगत् का है । यदि तीन एक जगत् के निकलें और एक दूसरे जगत् का, तो वही उत्तर है — और इस जाँच में न किसी अंग का कार्य याद करना पड़ता है, न उसकी स्थिति । शेष जानकारी उत्तर की पुष्टि के लिए है, उस तक पहुँचने के लिए नहीं ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)अंडाशय — अंडाशय मानव स्त्री जनन तंत्र का प्रमुख अंग है, इसलिए यह ‘नहीं’ वाले प्रश्न का उत्तर नहीं बन सकता । वे एक जोड़े में होते हैं और उदर गुहा के निचले भाग में स्थित रहते हैं । उनका दोहरा काम है : एक ओर उनमें अंडाणु परिपक्व होते हैं, और दूसरी ओर वे अंतःस्रावी ग्रंथि की तरह काम करते हुए एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन स्रावित करते हैं, जो मासिक चक्र और गर्भधारण दोनों को नियंत्रित करते हैं । ध्यान दीजिए कि ‘अंडाशय’ शब्द वनस्पति विज्ञान में भी आता है, जहाँ वह पुष्प के स्त्रीकेसर का निचला फूला हुआ भाग है जिसमें बीजांड रहते हैं । एक ही शब्द दो जगत् में अलग-अलग अंगों के लिए चलता है, और परीक्षक इसी साझी शब्दावली पर खेलता है ।
- (b)अंडवाहिनियाँ — अंडवाहिनियाँ भी मानव स्त्री जनन तंत्र का अंग हैं, इसलिए यह उत्तर नहीं है । इन्हें फैलोपियन नलिकाएँ भी कहा जाता है और ये अंडाशय के निकट से आरंभ होकर गर्भाशय तक जाती हैं । उनका मुख अंडाशय से जुड़ा नहीं होता, बल्कि झालरदार सिरे के रूप में उसके पास खुला रहता है और अंडोत्सर्ग के समय निकले अंडाणु को भीतर खींच लेता है । सामान्यतः निषेचन इन्हीं नलिकाओं के भीतरी चौड़े भाग में होता है, और उसके बाद बना युग्मनज विभाजित होता हुआ गर्भाशय तक पहुँचता है, जहाँ वह गर्भाशय की भित्ति में रोपित होता है । अर्थात् ये नलिकाएँ केवल मार्ग नहीं, निषेचन का स्थल भी हैं ।
- (c)गर्भाशय-ग्रीवा — गर्भाशय-ग्रीवा भी मानव स्त्री जनन तंत्र का ही भाग है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं है । वह गर्भाशय का निचला सँकरा भाग है, जो योनि में खुलता है । गर्भावस्था में यह भाग बंद रहकर गर्भ की रक्षा करता है और प्रसव के समय फैलकर जन्म-मार्ग का भाग बन जाता है । यह विकल्प उन अभ्यर्थियों के लिए कठिन हो सकता है जो जनन तंत्र के अंगों की सूची में केवल अंडाशय, गर्भाशय और योनि तक रुक जाते हैं और बीच के भागों को अलग अंग के रूप में नहीं गिनते । सूची पूरी याद रखिए — अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय-ग्रीवा और योनि — तो ऐसे विकल्प पढ़ते ही परिचित लगेंगे ।
अवधारणा
मानव स्त्री जनन तंत्र को क्रम से देखिए तो वह एक मार्ग की तरह बनता है । दोनों ओर एक-एक अंडाशय होता है, जिसमें अंडाणु बनते और परिपक्व होते हैं । अंडोत्सर्ग के बाद अंडाणु अंडवाहिनी में पहुँचता है ; अंडवाहिनी का भीतरी चौड़ा भाग सामान्यतः निषेचन का स्थल होता है । निषेचित अंडाणु विभाजित होता हुआ गर्भाशय तक पहुँचता है और उसकी भित्ति में रोपित होता है, जहाँ भ्रूण का विकास होता है । गर्भाशय का निचला सँकरा भाग गर्भाशय-ग्रीवा है, जो योनि में खुलता है, और यही मार्ग प्रसव के समय जन्म-मार्ग बनता है । सहायक ग्रंथियों में स्तन ग्रंथियाँ आती हैं । दूसरी ओर पुष्पी पादपों में जनन के अंग पुष्प में होते हैं : नर भाग पुंकेसर है, जो परागकोश तथा पुतंतु से बनता है, और मादा भाग स्त्रीकेसर है, जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय होते हैं । दोनों जगत् की शब्दावली कुछ स्थानों पर मिलती है — ‘अंडाशय’ और ‘युग्मक’ दोनों में चलते हैं — पर अंगों की संरचना और क्रिया-विधि बिलकुल भिन्न है । परीक्षा की दृष्टि से दोनों सूचियाँ अलग-अलग बनाकर याद रखना ही सबसे सुरक्षित तरीक़ा है ।
जीव विज्ञान का यह खंड EPFO के प्रश्नपत्र में पाँच प्रश्नों का है और उसमें प्रायः वही विषय आते हैं जो विद्यालय स्तर की पुस्तकों में पढ़ाए जाते हैं — जनन तंत्र, गुणसूत्र, पादप जगत् का वर्गीकरण, पोषण और रोग । ‘बेमेल छाँटिए’ वाली रचना यहाँ भी काम कर रही है, और उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बेमेल विकल्प किसी दूर के विषय से नहीं, ठीक पड़ोसी विषय से उठाया गया है : जनन के अंगों में एक पादप-अंग रख दिया गया है । इसीलिए जो अभ्यर्थी विकल्पों को एक-एक करके ‘क्या यह मानव में होता है’ की कसौटी पर परखता है, उसे उत्तर पढ़ते ही मिल जाता है । यह भी ध्यान दीजिए कि प्रश्न में ‘नहीं’ मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, जो इस प्रश्नपत्र की शैली है, और हिन्दी स्तंभ में ‘कौन-सा’ के बाद अल्पविराम भी छपा है — दोनों बातें पाठ में वैसी ही रखी गई हैं जैसी पुस्तिका में हैं ।
मुख्य तथ्य
- पुंकेसर पुष्प का नर जनन-भाग है और वह परागकोश तथा पुतंतु से मिलकर बनता है ; परागकोश में परागकण बनते हैं ।
- पुष्प का मादा भाग स्त्रीकेसर कहलाता है, जिसके तीन भाग होते हैं — वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय, तथा अंडाशय में बीजांड रहते हैं ।
- मानव में अंडाशय एक जोड़े में होते हैं ; उनमें अंडाणु बनते हैं और एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन भी स्रावित होते हैं ।
- अंडवाहिनी, जिसे फैलोपियन नलिका भी कहते हैं, अंडाणु को गर्भाशय तक ले जाती है और सामान्यतः निषेचन इसी नलिका के भीतरी चौड़े भाग में होता है ।
- गर्भाशय-ग्रीवा गर्भाशय का निचला सँकरा भाग है, जो योनि में खुलता है और प्रसव के समय जन्म-मार्ग का भाग बन जाता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- साझी शब्दावली से भ्रमित होना । ‘अंडाशय’ मानव और पुष्प दोनों में होता है, पर दोनों की संरचना और कार्य भिन्न हैं ।
- जनन तंत्र की सूची अधूरी याद रखना । गर्भाशय-ग्रीवा भी एक अलग अंग है, केवल गर्भाशय का हिस्सा कहकर छोड़ देने से विकल्प अपरिचित लगने लगता है ।
- निषेचन का स्थान ग़लत याद रखना । वह सामान्यतः अंडवाहिनी में होता है, गर्भाशय में नहीं ; गर्भाशय में रोपण होता है ।
जनन तंत्र पर आयोगों के प्रश्न तीन रूपों में आते हैं । पहला रूप यही है — अंगों की सूची में से बेमेल छाँटना, जहाँ बेमेल विकल्प प्रायः पादप जगत् से या नर तंत्र से उठाया जाता है । दूसरा रूप कार्य का है : कौन-सा अंग क्या करता है, निषेचन कहाँ होता है, रोपण कहाँ होता है, और कौन-सा हार्मोन कहाँ से स्रावित होता है । तीसरा रूप क्रम का है — अंडोत्सर्ग से लेकर रोपण तक की घटनाओं को सही क्रम में रखना । तीनों की तैयारी के लिए एक चित्र मन में बना लीजिए जिसमें अंडाशय से लेकर योनि तक का मार्ग क्रम से हो, और हर अंग के आगे एक पंक्ति में उसका काम लिखा हो । इसके साथ पुष्प की संरचना का चित्र अलग से रखिए, क्योंकि परीक्षक की सबसे आम चाल दोनों की शब्दावली को आपस में मिला देने की है ।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q91The pillar-like structures which hang vertically downward from the aerial branches found in banyan tree are known as
- (a) tap roots
- (b) climbing roots
- (c) fibrous roots
- (d) prop roots
उत्तर(d) prop roots
उसी पादप-शब्दावली का दूसरा प्रश्न — बरगद की हवाई शाखाओं से लटकने वाली खंभे जैसी संरचनाओं का नाम, जो दिखाता है कि आयोग वनस्पति विज्ञान के पद भी उसी सहजता से पूछता है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
पुष्प का नर जननांग पुंकेसर निम्नलिखित में से किन दो भागों से मिलकर बनता है ? (मादा भाग से अलग पहचानिए)
- (a)वर्तिकाग्र तथा वर्तिका
- (b)परागकोश तथा पुतंतु
- (c)अंडाशय तथा बीजांड
- (d)दलपुंज तथा बाह्यदलपुंज
उत्तर(b) परागकोश तथा पुतंतु — परागकोश में परागकण बनते हैं ; वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय स्त्रीकेसर के भाग हैं, और दलपुंज तथा बाह्यदलपुंज पुष्प के सहायक चक्र हैं ।
- practice — not a real PYQ
मानव में निषेचन सामान्यतः निम्नलिखित में से किस भाग में होता है ? (रोपण के स्थान से अलग है)
- (a)अंडाशय में
- (b)गर्भाशय में
- (c)अंडवाहिनी में
- (d)गर्भाशय-ग्रीवा में
उत्तर(c) अंडवाहिनी में — उसके भीतरी चौड़े भाग में ; गर्भाशय में निषेचन नहीं, निषेचित अंडाणु का रोपण होता है ।