आर्थिक सर्वेक्षण 2020 – 21 के अनुसार, वर्ष 2021 – 22 में भारत की वास्तविक जी.डी.पी. में वृद्धि निम्नलिखित में से कितनी रहेगी ?
- (a)9%
- (b)11%
- (c)13%
- (d)15%
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 11% । आर्थिक सर्वेक्षण 2020 – 21 जनवरी 2021 में संसद में प्रस्तुत हुआ था, और उसमें अगले वित्तीय वर्ष, अर्थात् 2021 – 22, के लिए भारत की वास्तविक जी.डी.पी. वृद्धि 11 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया । इस आँकड़े को समझने के लिए उसकी पृष्ठभूमि देखिए । वर्ष 2020 – 21 महामारी और उससे जुड़ी बंदी का वर्ष था, जिसमें अर्थव्यवस्था सिकुड़ी थी ; सर्वेक्षण ने उस वर्ष के लिए लगभग 7·7 प्रतिशत के संकुचन का उल्लेख किया था । जब किसी वर्ष उत्पादन घटता है तो अगले वर्ष का आधार छोटा हो जाता है, और उसी छोटे आधार पर गणना करने से वृद्धि की दर बड़ी दिखाई देती है — इसे आधार-प्रभाव कहते हैं । सर्वेक्षण का तर्क यह था कि पुनरुद्धार अंग्रेज़ी के अक्षर वी जैसा होगा, अर्थात् तेज़ गिरावट के तुरंत बाद तेज़ चढ़ाव, और उसी आधार पर दो अंकों की वृद्धि का अनुमान रखा गया । अंकों से देखिए तो बात और साफ़ हो जाती है : यदि 2019 – 20 का उत्पादन 100 मान लिया जाए, तो लगभग 7·7 प्रतिशत के संकुचन के बाद वह घटकर लगभग 92 रह जाता है, और उस पर 11 प्रतिशत की वृद्धि उसे लगभग 102 तक ले जाती है — अर्थात् सर्वेक्षण यह कह रहा था कि अगले वर्ष उत्पादन महामारी-पूर्व स्तर से कुछ ऊपर निकल जाएगा । यही 11 प्रतिशत वाला अनुमान इस प्रश्न का उत्तर है, और वह विकल्प (b) है । यहाँ एक सावधानी और आवश्यक है, क्योंकि विकल्पों में उसी दस्तावेज़ का दूसरा आँकड़ा भी बैठा है । सर्वेक्षण ने उसी वर्ष के लिए सांकेतिक जी.डी.पी. वृद्धि लगभग 15·4 प्रतिशत रहने का अनुमान भी लगाया था, और वह 15 प्रतिशत वाले विकल्प के बहुत निकट है । सांकेतिक और वास्तविक का भेद यही है कि सांकेतिक चालू क़ीमतों पर नापी जाती है, इसलिए उसमें क़ीमतों की वृद्धि भी जुड़ जाती है, जबकि वास्तविक स्थिर क़ीमतों पर नापी जाती है । प्रश्न में ‘वास्तविक’ शब्द स्पष्ट रूप से छपा है, इसलिए वही आँकड़ा उठाना है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)9% — 9% सर्वेक्षण का अनुमान नहीं था । यह विकल्प एक अंक वाली वृद्धि दर्शाता है, जबकि सर्वेक्षण का पूरा तर्क दो अंकों की वृद्धि पर टिका था — क्योंकि आधार-प्रभाव के कारण संकुचन के अगले वर्ष वृद्धि दर असामान्य रूप से ऊँची दिखनी ही थी । अंकों से जाँचिए : 100 के आधार पर लगभग 7·7 प्रतिशत के संकुचन के बाद उत्पादन लगभग 92 रह जाता है, और उस पर 9 प्रतिशत की वृद्धि उसे मुश्किल से 100 तक ही पहुँचाती है । अर्थात् 9 प्रतिशत का अर्थ होता कि अर्थव्यवस्था अगले वर्ष बमुश्किल महामारी-पूर्व स्तर पर लौटती है, जबकि सर्वेक्षण उससे कुछ ऊपर जाने की बात कह रहा था । इसीलिए यह आँकड़ा उस दस्तावेज़ के अनुमान से मेल नहीं खाता ।
- (c)13% — 13% भी सर्वेक्षण का आँकड़ा नहीं है । यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि वह दो सही आँकड़ों के ठीक बीच में पड़ता है — वास्तविक वृद्धि का अनुमान 11 प्रतिशत था और सांकेतिक वृद्धि का अनुमान लगभग 15 प्रतिशत, और 13 इन दोनों के बीच बैठकर दोनों की स्मृति को गड्डमड्ड कर देता है । ऐसे प्रश्नों में यह पूछना सबसे उपयोगी होता है कि पूछा गया आँकड़ा वास्तविक है या सांकेतिक । जो अभ्यर्थी दोनों में से केवल एक याद रखता है, वह दबाव में बीच का मान चुन लेता है और यही परीक्षक की अपेक्षा भी होती है । वास्तविक और सांकेतिक दोनों आँकड़े अलग-अलग याद रखिए, क्योंकि प्रश्न किसी एक को स्पष्ट रूप से नामित करता है ।
- (d)15% — 15% वास्तविक वृद्धि का नहीं, सांकेतिक वृद्धि का अनुमान है । सर्वेक्षण ने वर्ष 2021 – 22 के लिए सांकेतिक जी.डी.पी. वृद्धि लगभग 15·4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, और यह आँकड़ा इस विकल्प के बहुत निकट है — इसीलिए यह सबसे ख़तरनाक विकल्प है । वास्तविक और सांकेतिक का भेद यहीं निर्णायक है : सांकेतिक वृद्धि में क़ीमतों का बढ़ना भी सम्मिलित रहता है, जबकि वास्तविक वृद्धि में उसे हटा दिया जाता है । दोनों का अंतर लगभग वही होता है जो जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक से मापी गई क़ीमत-वृद्धि है । प्रश्न में स्पष्ट रूप से ‘वास्तविक जी.डी.पी.’ लिखा है, इसलिए उत्तर 11 प्रतिशत ही होगा ।
अवधारणा
आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा, मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार किया जाता है और परंपरा के अनुसार केंद्रीय बजट से एक दिन पहले संसद में प्रस्तुत किया जाता है । वह बीते वर्ष की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा देता है और आगामी वर्ष के लिए अनुमान तथा नीति-सुझाव रखता है ; उसके सुझाव सरकार पर बाध्यकारी नहीं होते । इस प्रश्न को हल करने के लिए दो अवधारणाएँ स्पष्ट होनी चाहिए । पहली, वास्तविक और सांकेतिक जी.डी.पी. का भेद : सांकेतिक जी.डी.पी. चालू क़ीमतों पर नापी जाती है, इसलिए उसमें उत्पादन के साथ क़ीमतों का बढ़ना भी सम्मिलित हो जाता है, जबकि वास्तविक जी.डी.पी. किसी आधार वर्ष की स्थिर क़ीमतों पर नापी जाती है और वही उत्पादन की सच्ची वृद्धि दिखाती है । दोनों के बीच का अनुपात जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक कहलाता है, और मोटे तौर पर सांकेतिक वृद्धि लगभग वास्तविक वृद्धि तथा अपस्फीतिकारक से मापी गई क़ीमत-वृद्धि का जोड़ होती है । दूसरी अवधारणा आधार-प्रभाव की है : वृद्धि दर सदा पिछले वर्ष के मुक़ाबले नापी जाती है, इसलिए यदि पिछला वर्ष असामान्य रूप से नीचा रहा हो तो अगले वर्ष की दर बड़ी दिखेगी, भले ही उत्पादन का स्तर अभी पुराने शिखर तक ही लौटा हो ।
समसामयिकी वाले खंड में आर्थिक सर्वेक्षण और बजट से जुड़े आँकड़े लगभग हर परीक्षा में आते हैं, और उनकी कठिनाई यह है कि एक ही दस्तावेज़ में कई आँकड़े होते हैं — वास्तविक वृद्धि, सांकेतिक वृद्धि, राजकोषीय घाटा, चालू खाते का शेष — और प्रश्न उनमें से किसी एक को नामित करके पूछता है । इस प्रश्न में परीक्षक ने ‘वास्तविक जी.डी.पी.’ शब्द स्पष्ट रूप से रखा है और विकल्पों में सांकेतिक वृद्धि के निकट का आँकड़ा भी डाल दिया है, ताकि जो अभ्यर्थी भेद नहीं करता वह फँस जाए । इसलिए ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले यह देखिए कि आँकड़ा किस राशि का माँगा गया है । एक और सावधानी वर्ष की है : सर्वेक्षण 2020 – 21 का है पर अनुमान 2021 – 22 का, और दोनों वर्ष प्रश्न में साथ-साथ छपे हैं । हिन्दी स्तंभ में दोनों वर्ष-युग्म लंबे डैश के साथ छपे हैं और प्रतिशत का चिह्न अंक से सटा हुआ है ।
मुख्य तथ्य
- आर्थिक सर्वेक्षण 2020 – 21 ने वर्ष 2021 – 22 के लिए भारत की वास्तविक जी.डी.पी. वृद्धि 11 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था ।
- उसी दस्तावेज़ में उसी वर्ष के लिए सांकेतिक जी.डी.पी. वृद्धि लगभग 15·4 प्रतिशत रहने का अनुमान था ; दोनों का अंतर क़ीमतों की वृद्धि को दर्शाता है ।
- सर्वेक्षण ने वर्ष 2020 – 21 के लिए लगभग 7·7 प्रतिशत के संकुचन का उल्लेख किया था और आगे अंग्रेज़ी के अक्षर वी जैसे पुनरुद्धार की बात कही थी ।
- आधार-प्रभाव का अर्थ है कि संकुचन के अगले वर्ष वृद्धि दर बड़ी दिखाई देती है, क्योंकि तुलना का आधार छोटा हो चुका होता है ।
- आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार होता है और परंपरा के अनुसार केंद्रीय बजट से एक दिन पहले प्रस्तुत किया जाता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- वास्तविक और सांकेतिक वृद्धि को एक मान लेना । यहाँ वास्तविक का अनुमान 11 प्रतिशत था और सांकेतिक का लगभग 15 प्रतिशत, और दोनों विकल्पों में मौजूद हैं ।
- सर्वेक्षण का वर्ष और अनुमान का वर्ष मिला देना । दस्तावेज़ 2020 – 21 का है, पर आँकड़ा 2021 – 22 के लिए है ।
- ऊँची वृद्धि दर को ऊँचा उत्पादन-स्तर मान लेना । आधार-प्रभाव के कारण बड़ी दर का अर्थ केवल इतना हो सकता है कि उत्पादन पुराने स्तर पर लौट रहा है ।
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट से जुड़े प्रश्न तीन रूपों में आते हैं । पहला रूप आँकड़े का है, जैसा यहाँ है — किसी वर्ष के लिए वृद्धि, घाटा या कोई अनुपात कितना अनुमानित किया गया, जहाँ विकल्पों में उसी दस्तावेज़ का कोई दूसरा आँकड़ा भी रख दिया जाता है । दूसरा रूप प्रक्रिया का है : सर्वेक्षण कौन तैयार करता है, कब प्रस्तुत होता है, और क्या वह सरकार पर बाध्यकारी है । तीसरा रूप विषयवस्तु का है — किसी वर्ष के सर्वेक्षण की मुख्य विषय-वस्तु या उसके किसी विशेष अध्याय का तर्क । तीनों की तैयारी के लिए हर वर्ष के सर्वेक्षण से चार-पाँच केंद्रीय आँकड़े और एक-दो प्रमुख विषय अलग पन्ने पर लिख लीजिए, और आँकड़े के साथ यह भी लिखिए कि वह वास्तविक है या सांकेतिक, अनुमान है या वास्तविक उपलब्धि । यही अतिरिक्त पंक्ति परीक्षा में सबसे अधिक काम आती है ।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
आर्थिक सर्वेक्षण निम्नलिखित में से किसके द्वारा तैयार किया जाता है और परंपरा के अनुसार वह कब प्रस्तुत किया जाता है ?
- (a)नीति आयोग द्वारा, केंद्रीय बजट के तुरंत बाद
- (b)वित्त मंत्रालय द्वारा, केंद्रीय बजट से एक दिन पहले
- (c)भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा, वित्तीय वर्ष के अंत में
- (d)सांख्यिकी तथा कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा, बजट के साथ
उत्तर(b) वित्त मंत्रालय द्वारा, केंद्रीय बजट से एक दिन पहले — इसे आर्थिक कार्य विभाग मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार करता है और इसके सुझाव सरकार पर बाध्यकारी नहीं होते ।
- practice — not a real PYQ
यदि किसी वर्ष वास्तविक जी.डी.पी. वृद्धि 11 प्रतिशत और सांकेतिक जी.डी.पी. वृद्धि लगभग 15 प्रतिशत अनुमानित हो, तो दोनों के बीच का अंतर मुख्यतः किसे दर्शाता है ?
- (a)जनसंख्या की वृद्धि दर
- (b)क़ीमतों में हुई वृद्धि, जिसे जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक मापता है
- (c)विदेशी मुद्रा भंडार में परिवर्तन
- (d)राजकोषीय घाटे का आकार
उत्तर(b) क़ीमतों में हुई वृद्धि, जिसे जी.डी.पी. अपस्फीतिकारक मापता है — सांकेतिक जी.डी.पी. चालू क़ीमतों पर नापी जाती है, इसलिए उसमें क़ीमतों का बढ़ना भी सम्मिलित रहता है ।