निम्नलिखित में से ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ के लेखक कौन हैं ?
- (a)महादेव देसाई
- (b)शाहिद अमीन
- (c)लुई फिशर
- (d)डेविड आर्नल्ड
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) शाहिद अमीन । ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ शाहिद अमीन का प्रसिद्ध निबंध है, जो सबाल्टर्न स्टडीज़ नामक श्रृंखला के तीसरे खंड में प्रकाशित हुआ था । उसका पूरा शीर्षक बताता है कि वह किस बारे में है — पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में 1921 और 1922 के वर्षों का अध्ययन । अमीन का प्रश्न यह नहीं है कि गाँधीजी क्या कहते थे, बल्कि यह है कि साधारण किसानों ने उन्हें कैसे समझा । उन्होंने स्थानीय समाचारपत्रों और अफ़वाहों की छानबीन करके दिखाया कि असहयोग के दिनों में गाँव-गाँव में ‘महात्मा’ के चमत्कारों की कहानियाँ फैलीं — कहीं उनके विरोध करने वाले का घर गिर गया, कहीं उनका नाम लेने से कुआँ भर गया । अर्थात् किसानों की कल्पना में जो ‘महात्मा’ बना, वह गाँधीजी के अपने कार्यक्रम से भिन्न था, और कई बार उनके अहिंसा-संबंधी निर्देशों से भी आगे निकल जाता था । यही तर्क चौरी-चौरा की घटना को समझने का सूत्र भी देता है, जो इसी गोरखपुर ज़िले में फरवरी 1922 में हुई थी । शाहिद अमीन इतिहासकार हैं और सबाल्टर्न स्टडीज़ समूह से जुड़े रहे हैं ; उनकी एक और प्रसिद्ध पुस्तक चौरी-चौरा पर ही केंद्रित है, जिसमें उन्होंने उस घटना की स्मृति के बदलते रूपों का अध्ययन किया है । इसलिए इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (b) है । ध्यान रखिए कि शेष तीनों नाम गाँधी-साहित्य से ही जुड़े हैं, पर उनकी पुस्तकें अलग हैं — और यही इस प्रश्न को कठिन बनाता है । इस उत्तर तक पहुँचने का एक व्यावहारिक रास्ता भी है । शीर्षक स्वयं संकेत देता है : ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ का अर्थ है ‘गाँधी, महात्मा के रूप में’ — अर्थात् उसका विषय गाँधीजी का जीवन नहीं, वह प्रक्रिया है जिससे वे लोक-दृष्टि में ‘महात्मा’ बने । ऐसा शीर्षक किसी सचिव की दैनंदिनी या पत्रकार की जीवनी का नहीं हो सकता ; वह इतिहास-लेखन के उस अध्ययन का ही हो सकता है जो छवि-निर्माण को अपना विषय बनाता हो ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)महादेव देसाई — महादेव देसाई गाँधीजी के निजी सचिव थे और उनके सबसे निकट सहयोगियों में गिने जाते हैं, पर ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ उनकी रचना नहीं है । देसाई ने वर्षों तक गाँधीजी के साथ रहते हुए विस्तृत दैनंदिनी लिखी, जो बाद में कई खंडों में प्रकाशित हुई और गाँधीजी के दैनिक जीवन तथा निर्णयों का सबसे भरोसेमंद अभिलेख मानी जाती है । उन्होंने गाँधीजी की गुजराती आत्मकथा का अंग्रेज़ी अनुवाद भी किया, जिससे वह पुस्तक भारत के बाहर पढ़ी जा सकी । यह विकल्प इसलिए आकर्षक है कि निकटता को लेखकत्व मान लेने की प्रवृत्ति स्वाभाविक है । पर अमीन की रचना का स्वभाव ही भिन्न है — वह संस्मरण नहीं, इतिहास-लेखन का शोध-निबंध है, और वह गाँधीजी के साथी की दृष्टि से नहीं, गोरखपुर के किसानों की दृष्टि से लिखा गया है ।
- (c)लुई फिशर — लुई फिशर अमेरिकी पत्रकार और लेखक थे, और उन्होंने गाँधीजी की एक विस्तृत जीवनी लिखी है, जिसका शीर्षक ‘द लाइफ़ ऑफ महात्मा गाँधी’ है — पर वह इस प्रश्न में पूछी गई रचना नहीं है । फिशर की पुस्तक जीवनी की परंपरा में आती है : वह गाँधीजी के जीवन की घटनाओं को क्रम से रखती है और उन्हें विश्व-राजनीति की पृष्ठभूमि में देखती है । इसके विपरीत ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ जीवनी है ही नहीं ; वह दो वर्षों के एक ज़िले का सूक्ष्म अध्ययन है और उसका विषय गाँधीजी का जीवन नहीं, उनकी लोक-छवि है । दोनों में शीर्षक की समानता भ्रम पैदा करती है, क्योंकि दोनों में ‘महात्मा’ शब्द आता है । शीर्षक पूरा पढ़ना ही इस भ्रम की एकमात्र काट है ।
- (d)डेविड आर्नल्ड — डेविड आर्नल्ड ब्रिटिश इतिहासकार हैं, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत पर बहुत काम किया है और गाँधीजी पर एक संक्षिप्त पुस्तक भी लिखी है, पर ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ उनकी रचना नहीं है । उनका सर्वाधिक चर्चित कार्य औपनिवेशिक भारत में चिकित्सा, महामारी और राज्य की भूमिका पर है, तथा पुलिस और औपनिवेशिक शासन पर भी उनका महत्त्वपूर्ण अध्ययन है । यह विकल्प उन अभ्यर्थियों को खींचता है जिन्होंने सबाल्टर्न स्टडीज़ से जुड़े नाम तो सुने हैं पर उन्हें आपस में अलग नहीं कर पाते । ऐसे प्रश्नों में सहायता इस बात से मिलती है कि लेखक और उसकी एक हस्ताक्षर-रचना को जोड़े के रूप में याद रखा जाए, अकेले नाम के रूप में नहीं ।
अवधारणा
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का इतिहास-लेखन कई धाराओं में बँटा है, और इस प्रश्न को समझने के लिए उन धाराओं का मोटा नक़्शा जानना आवश्यक है । उपनिवेशवादी या कैंब्रिज धारा आंदोलन को मुख्यतः सत्ता और संरक्षण की प्रतिस्पर्धा के रूप में देखती है । राष्ट्रवादी धारा उसे नेतृत्व और जन-जागरण की कहानी के रूप में लिखती है । मार्क्सवादी धारा वर्ग-संघर्ष और आर्थिक हितों पर बल देती है । इन सबसे अलग, वर्ष 1982 में रणजीत गुहा के संपादन में सबाल्टर्न स्टडीज़ नामक श्रृंखला आरंभ हुई, जिसका कहना था कि आंदोलन का इतिहास अब तक ऊपर से, नेताओं की दृष्टि से लिखा गया है, और उसमें किसान, आदिवासी, मज़दूर तथा स्त्रियाँ केवल अनुयायी के रूप में दिखते हैं । इस धारा ने ‘नीचे से इतिहास’ लिखने का प्रयास किया और यह दिखाया कि जन-समुदाय की अपनी चेतना, अपने प्रतीक और अपनी पहलक़दमी थी । शाहिद अमीन का निबंध इसी धारा का सबसे अधिक उद्धृत उदाहरण है, क्योंकि वह अफ़वाह जैसे अनौपचारिक स्रोत को इतिहास की सामग्री बनाता है और दिखाता है कि लोक-कल्पना का ‘महात्मा’ और ऐतिहासिक गाँधी एक नहीं थे ।
पुस्तक और लेखक जोड़ने वाले प्रश्न EPFO के इतिहास खंड में नियमित रूप से आते हैं, और उनमें परीक्षक की चाल प्रायः एक ही होती है — चारों नाम एक ही विषय-क्षेत्र से लिए जाते हैं, ताकि विषय जानने भर से काम न चले । यहाँ चारों नाम गाँधी-साहित्य से जुड़े हैं : एक निजी सचिव और दैनंदिनी लेखक, एक विदेशी पत्रकार-जीवनीकार, एक ब्रिटिश इतिहासकार और एक सबाल्टर्न इतिहासकार । ऐसे प्रश्न में केवल वही अभ्यर्थी टिकता है जिसने लेखक और रचना को जोड़े के रूप में याद किया है । एक और बात ध्यान देने योग्य है : हिन्दी स्तंभ में पुस्तक का नाम अंग्रेज़ी से देवनागरी में लिप्यंतरित किया गया है और एकल उद्धरण-चिह्नों के भीतर तिरछे अक्षरों में छपा है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वही नाम रोमन लिपि में है । तिरछी छपाई ही उसे शीर्षक के रूप में चिह्नित करती है, और सादे पाठ में वह संकेत दिखाई नहीं देता ।
मुख्य तथ्य
- ‘गाँधी ऐज़ महात्मा’ शाहिद अमीन का निबंध है, जो सबाल्टर्न स्टडीज़ श्रृंखला के तीसरे खंड में प्रकाशित हुआ और गोरखपुर ज़िले में 1921–22 के वर्षों का अध्ययन करता है ।
- उस निबंध का मुख्य तर्क यह है कि किसानों ने अफ़वाहों और चमत्कार-कथाओं के माध्यम से गाँधीजी की जो ‘महात्मा’ छवि गढ़ी, वह उनके अपने कार्यक्रम से भिन्न थी ।
- सबाल्टर्न स्टडीज़ श्रृंखला वर्ष 1982 में रणजीत गुहा के संपादन में आरंभ हुई और उसका उद्देश्य आंदोलन का इतिहास नेताओं के बजाय जन-समुदाय की दृष्टि से लिखना था ।
- महादेव देसाई गाँधीजी के निजी सचिव थे, उन्होंने विस्तृत दैनंदिनी लिखी और गाँधीजी की गुजराती आत्मकथा का अंग्रेज़ी अनुवाद भी किया ।
- लुई फिशर अमेरिकी पत्रकार थे और उनकी लिखी गाँधी-जीवनी का शीर्षक ‘द लाइफ़ ऑफ महात्मा गाँधी’ है ; डेविड आर्नल्ड ब्रिटिश इतिहासकार हैं, जिनका प्रमुख कार्य औपनिवेशिक भारत में चिकित्सा तथा राज्य पर है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निकटता को लेखकत्व मान लेना । महादेव देसाई गाँधीजी के सबसे निकट थे, पर यह निबंध उनका नहीं ; वह एक शोध-निबंध है, संस्मरण नहीं ।
- मिलते-जुलते शीर्षकों को एक मान लेना । लुई फिशर की जीवनी में भी ‘महात्मा’ शब्द आता है, इसलिए शीर्षक पूरा पढ़ना आवश्यक है ।
- सबाल्टर्न धारा के नामों को आपस में मिला देना । रणजीत गुहा श्रृंखला के संपादक थे और शाहिद अमीन इस निबंध के लेखक ; दोनों की भूमिकाएँ अलग हैं ।
पुस्तक-लेखक वाले प्रश्न तीन रूपों में लौटते हैं । सबसे सीधा रूप यही है — शीर्षक देकर लेखक पूछना, या लेखक देकर शीर्षक । दूसरा रूप सुमेलन का होता है, जिसमें चार पुस्तकें और चार लेखक अलग-अलग सूचियों में रखकर सही जोड़े बनाने को कहा जाता है ; वहाँ एक जोड़ा भी ग़लत हो जाए तो पूरा उत्तर बदल जाता है । तीसरा रूप विषयवस्तु का होता है : किसी पुस्तक का मुख्य तर्क क्या है, या वह किस इतिहास-धारा से जुड़ी है । तीनों की तैयारी के लिए सबसे कारगर तरीक़ा यह है कि एक ही पृष्ठ पर तीन स्तंभ बनाकर लेखक, शीर्षक और एक पंक्ति में विषय लिख लिया जाए, और उसमें राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी बीस-पच्चीस प्रमुख पुस्तकें रखी जाएँ । केवल नाम रटने से सुमेलन वाले प्रश्न नहीं सधते, क्योंकि वहाँ विषय की पहचान ही जोड़ा बनाने में सहायता करती है ।
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उत्तर(a) Dalai Lama
इसी प्रश्नपत्र का दूसरा पुस्तक-लेखक प्रश्न, जो उसी साँचे पर बना है — शीर्षक देकर लेखक पूछना, जहाँ चारों नाम एक ही परिचित दायरे से लिए गए हैं ।
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उत्तर(b) Dr. B. R. Ambedkar
इसी साँचे का एक और उदाहरण, जिसमें औपनिवेशिक भारत के प्रांतीय वित्त पर लिखे गए एक शोध-कार्य का लेखक पूछा गया है — वहाँ भी उत्तर व्यक्ति की सामान्य प्रसिद्धि से नहीं, विशिष्ट रचना से जुड़ता है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
सबाल्टर्न स्टडीज़ नामक इतिहास-लेखन की श्रृंखला के संस्थापक संपादक निम्नलिखित में से कौन थे ?
- (a)रणजीत गुहा
- (b)शाहिद अमीन
- (c)पार्थ चटर्जी
- (d)सुमित सरकार
उत्तर(a) रणजीत गुहा — उन्हीं के संपादन में वर्ष 1982 में यह श्रृंखला आरंभ हुई ; शाहिद अमीन और पार्थ चटर्जी इसके लेखकों में रहे, जबकि सुमित सरकार बाद में इससे अलग हो गए ।
- practice — not a real PYQ
गाँधीजी पर लिखी गई ‘द लाइफ़ ऑफ महात्मा गाँधी’ नामक विस्तृत जीवनी के लेखक निम्नलिखित में से कौन हैं ?
- (a)विलियम शीरर
- (b)लुई फिशर
- (c)डेविड आर्नल्ड
- (d)महादेव देसाई
उत्तर(b) लुई फिशर — अमेरिकी पत्रकार, जिनकी यह विस्तृत जीवनी गाँधीजी के जीवन को विश्व-राजनीति की पृष्ठभूमि में रखती है ; महादेव देसाई की रचना दैनंदिनी है, जीवनी नहीं ।