वर्ष 1915 में, दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद, गाँधीजी सबसे पहले कहाँ व्यापक जन-समुदाय के बीच उपस्थित हुए थे ?
- (a)बम्बई विश्वविद्यालय
- (b)खेड़ा
- (c)चंपारण
- (d)बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय । पहले प्रश्न की बनावट पर ध्यान दीजिए, क्योंकि यहीं सबसे अधिक अभ्यर्थी फिसलते हैं । ‘वर्ष 1915 में’ गाँधीजी के लौटने का वर्ष बता रहा है, उपस्थिति का वर्ष नहीं । वे दक्षिण अफ्रीका से जनवरी 1915 में भारत लौटे और मुम्बई पहुँचे । उनके राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह थी कि वे लगभग एक वर्ष तक देश भर में घूमकर भारत को देखें-समझें और सार्वजनिक विषयों पर राय देने में जल्दबाज़ी न करें । गाँधीजी ने यह सलाह मानी और आरंभ के महीने यात्रा तथा आश्रम की स्थापना में लगाए । इसी कारण उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति लौटने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि कुछ समय बाद हुई — फरवरी 1916 में, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में । वहाँ मंच पर देशी रियासतों के शासक, बड़े ज़मींदार और नेता उपस्थित थे, और गाँधीजी ने अपने भाषण में उस समारोह की चमक-दमक तथा भारत की व्यापक निर्धनता के बीच के अंतर पर सीधी बात कही, अंग्रेज़ी के बजाय जनभाषा के प्रयोग पर बल दिया और यह कहा कि भारत का उद्धार किसान और मज़दूर के बिना संभव नहीं । यह भाषण इतना स्पष्ट और असुविधाजनक था कि समारोह में हलचल मच गई । इसी अवसर को मानक पाठ्यपुस्तकें गाँधीजी की भारत में पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति कहती हैं, और इसीलिए विकल्प (d) ही उत्तर है । इस उत्तर को कालक्रम से भी जाँच लीजिए, क्योंकि शेष तीन विकल्पों में से दो उसी कालक्रम के आगे के पड़ाव हैं । लौटना जनवरी 1915, विश्वविद्यालय का समारोह फरवरी 1916, चंपारण 1917, अहमदाबाद के मिल मज़दूरों का आंदोलन तथा खेड़ा दोनों 1918 । जो विकल्प सबसे पहले आता है वही ‘सबसे पहले उपस्थित हुए’ की कसौटी पर खरा उतरेगा, और वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय है । यही जाँच खेड़ा और चंपारण दोनों को एक साथ हटा देती है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)बम्बई विश्वविद्यालय — बम्बई विश्वविद्यालय इस प्रश्न का उत्तर नहीं है । यह सच है कि गाँधीजी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटकर सबसे पहले मुम्बई ही पहुँचे और वहाँ उनके स्वागत में सभाएँ हुईं, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के संघर्ष से उनका नाम भारत में पहले ही परिचित हो चुका था । पर स्वागत-समारोह में उपस्थित होना और व्यापक जन-समुदाय के सामने अपनी बात रखना दो अलग बातें हैं । इस विकल्प का आकर्षण केवल इतना है कि लौटने का स्थान मुम्बई था, और अभ्यर्थी ‘सबसे पहले’ को स्थान से जोड़ लेता है । प्रश्न स्थान नहीं, अवसर पूछ रहा है — वह अवसर जहाँ वे पहली बार बड़े जन-समुदाय के बीच उपस्थित हुए ।
- (b)खेड़ा — खेड़ा गाँधीजी के आरंभिक भारतीय संघर्षों में अवश्य आता है, पर वह इस उपस्थिति से बाद का है । खेड़ा सत्याग्रह वर्ष 1918 में गुजरात के खेड़ा ज़िले में हुआ, जहाँ फ़सल चौपट हो जाने पर भी भू-राजस्व में छूट न मिलने के विरुद्ध किसानों ने कर न देने का आंदोलन चलाया । उस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल गाँधीजी के साथ आगे आए और यहीं से उनकी राजनीतिक साझेदारी गहरी हुई । ध्यान दीजिए कि खेड़ा एक किसान आंदोलन था, कोई सार्वजनिक समारोह नहीं, इसलिए ‘पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति’ की कसौटी पर वह इस प्रश्न में आता ही नहीं । कालक्रम याद रखिए — पहले विश्वविद्यालय का समारोह, फिर चंपारण, फिर खेड़ा ।
- (c)चंपारण — चंपारण इस प्रश्न का सबसे आकर्षक ग़लत उत्तर है, क्योंकि वहीं से गाँधीजी का भारतीय राजनीति में निर्णायक प्रवेश माना जाता है । चंपारण सत्याग्रह वर्ष 1917 में बिहार में हुआ, जहाँ नील की खेती से जुड़ी तीनकठिया व्यवस्था के विरुद्ध किसानों ने आवाज़ उठाई थी और राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर गाँधीजी वहाँ पहुँचे । वह भारत में उनका पहला सत्याग्रह था — और यही वह शब्द है जिस पर भ्रम टिकता है । ‘पहला सत्याग्रह’ और ‘पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति’ दो अलग-अलग प्रश्न हैं, और उनके उत्तर भी अलग हैं । कालक्रम भी यही बताता है : विश्वविद्यालय का समारोह 1916 में हुआ और चंपारण उसके बाद, 1917 में ।
अवधारणा
गाँधीजी के भारतीय जीवन के आरंभिक वर्ष एक स्पष्ट क्रम में चलते हैं, और वही क्रम इस प्रकार के हर प्रश्न की कुंजी है । वे जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटे, जहाँ वे दो दशक से अधिक रहकर भारतीय समुदाय के अधिकारों के लिए सत्याग्रह की पद्धति विकसित कर चुके थे । लौटने पर गोखले ने उन्हें सलाह दी कि वे एक वर्ष देश भर में यात्रा करें और सार्वजनिक विषयों पर तुरंत राय न दें ; गाँधीजी ने इसे माना और उसी वर्ष अहमदाबाद के पास कोचरब में अपना पहला आश्रम स्थापित किया, जो बाद में साबरमती के तट पर चला गया । फरवरी 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में उनका भाषण उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति मानी जाती है । इसके बाद तीन आंदोलन तेज़ी से आते हैं — 1917 में चंपारण, जहाँ नील की खेती की तीनकठिया व्यवस्था प्रश्न में थी ; 1918 में अहमदाबाद के मिल मज़दूरों का आंदोलन, जिसमें उन्होंने पहली बार अनशन का प्रयोग किया ; और 1918 में ही खेड़ा, जहाँ भू-राजस्व में छूट की माँग थी । इन तीनों के बाद ही वे 1919 के रॉलट सत्याग्रह के साथ अखिल भारतीय नेतृत्व की ओर बढ़ते हैं ।
आधुनिक भारतीय इतिहास इस प्रश्नपत्र का सबसे बड़ा खंड है, और उसमें गाँधीजी के आरंभिक वर्ष लगभग हर बार आते हैं । परीक्षक की चाल प्रायः यही होती है कि वह ‘पहला’ शब्द रखकर दो अलग-अलग ‘पहलों’ को आपस में मिला दे — पहली सार्वजनिक उपस्थिति, पहला सत्याग्रह, पहला आश्रम, पहला अनशन । इनके उत्तर क्रमशः बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, चंपारण, कोचरब और अहमदाबाद मिल आंदोलन हैं, और चारों अलग-अलग वर्षों के हैं । दूसरी चाल वर्ष की है : प्रश्न में 1915 लिखकर परीक्षक देखता है कि अभ्यर्थी उसे लौटने से जोड़ता है या घटना से । इस प्रश्न में वह वर्ष लौटने का है, और उपस्थिति उसके अगले वर्ष हुई । इसलिए ऐसे प्रश्नों में वाक्य को टुकड़ों में तोड़कर पढ़ने की आदत डालिए — कौन-सा उपवाक्य किस बात का समय बता रहा है, यह पहले तय कीजिए, फिर विकल्पों की ओर बढ़िए ।
मुख्य तथ्य
- गाँधीजी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और मुम्बई पहुँचे ; उनके राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले ने उन्हें पहले एक वर्ष देश भर में यात्रा करने की सलाह दी थी ।
- उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति फरवरी 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में हुई, जहाँ उन्होंने समारोह की चमक और देश की निर्धनता के अंतर पर सीधी बात कही ।
- उसी भाषण में उन्होंने अंग्रेज़ी के बजाय जनभाषा के प्रयोग पर बल दिया और कहा कि भारत का उद्धार किसान तथा मज़दूर के बिना संभव नहीं ।
- भारत में उनका पहला सत्याग्रह वर्ष 1917 में चंपारण, बिहार में हुआ, जहाँ नील की खेती से जुड़ी तीनकठिया व्यवस्था के विरुद्ध किसानों ने आवाज़ उठाई थी ।
- खेड़ा सत्याग्रह वर्ष 1918 में गुजरात में हुआ, जहाँ फ़सल चौपट होने पर भी भू-राजस्व में छूट न मिलने के विरुद्ध किसानों ने कर न देने का आंदोलन चलाया और सरदार वल्लभभाई पटेल आगे आए ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ‘वर्ष 1915’ को घटना का वर्ष मान लेना । वह लौटने का वर्ष है ; विश्वविद्यालय का समारोह उसके अगले वर्ष, फरवरी 1916 में हुआ ।
- ‘पहली सार्वजनिक उपस्थिति’ और ‘पहला सत्याग्रह’ को एक मान लेना । पहला उत्तर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय है और दूसरा चंपारण, और दोनों अलग वर्षों के हैं ।
- लौटने के स्थान को ही उत्तर बना देना । वे मुम्बई पहुँचे अवश्य थे, पर प्रश्न स्थान नहीं, वह अवसर पूछ रहा है जहाँ वे व्यापक जन-समुदाय के बीच आए ।
गाँधीजी के आरंभिक भारतीय वर्षों पर आयोग तीन तरह के प्रश्न बनाते हैं । पहला प्रकार ‘पहला’ शब्द के इर्द-गिर्द घूमता है — पहली सार्वजनिक उपस्थिति, पहला सत्याग्रह, पहला आश्रम, पहला अनशन — और उसकी काट यही है कि इन चारों के उत्तर अलग-अलग याद रखे जाएँ । दूसरा प्रकार कालक्रम पूछता है : चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद को सही क्रम में रखिए, जहाँ 1917 और 1918 का भेद निर्णायक होता है । तीसरा प्रकार व्यक्ति और आंदोलन को मिलाने का होता है — किस आंदोलन में कौन नेता उभरा, जैसे खेड़ा में सरदार पटेल या चंपारण में राजकुमार शुक्ल । तीनों की तैयारी के लिए 1915 से 1919 तक की एक छोटी समय-रेखा बनाकर उस पर वर्ष, स्थान, मुद्दा और प्रमुख व्यक्ति चार स्तंभों में लिख लेना पर्याप्त है ; इसी एक पृष्ठ से इस काल के अधिकांश प्रश्न सध जाते हैं ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q73खोलें व हल करें →Gandhiji's Salt March to Dandi was started from which one of the following places ?
- (a) Kochrab Ashram
- (b) Sabarmati Ashram
- (c) Ahmedabad Textile Mill
- (d) Ahmedabad Jail
उत्तर(b) Sabarmati Ashram
इसी प्रश्नपत्र का दूसरा गाँधी-प्रश्न, जो दांडी की नमक यात्रा के आरंभ-स्थल पर टिका है — वही आश्रम, जो 1915 में कोचरब से आरंभ होकर आगे साबरमती के तट पर आया ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत लौटने के बाद गाँधीजी ने अपना पहला सत्याग्रह निम्नलिखित में से किस स्थान पर चलाया था ?
- (a)चंपारण
- (b)खेड़ा
- (c)अहमदाबाद
- (d)बारदोली
उत्तर(a) चंपारण — वर्ष 1917 में बिहार के चंपारण में, नील की खेती से जुड़ी तीनकठिया व्यवस्था के विरुद्ध ; खेड़ा और अहमदाबाद के आंदोलन उसके अगले वर्ष हुए ।
- practice — not a real PYQ
दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद गाँधीजी ने भारत में अपना पहला आश्रम निम्नलिखित में से कहाँ स्थापित किया था ?
- (a)कोचरब, अहमदाबाद
- (b)साबरमती, अहमदाबाद
- (c)सेवाग्राम, वर्धा
- (d)फ़ीनिक्स, डरबन
उत्तर(a) कोचरब, अहमदाबाद — वर्ष 1915 में ; साबरमती आश्रम बाद में बना, सेवाग्राम उससे भी बाद में, और फ़ीनिक्स बस्ती दक्षिण अफ्रीका में थी ।