मान लीजिए n ( > 1) एक भाज्य धनपूर्ण संख्या है, जिसका वर्गमूल एक पूर्णांक नहीं है । निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. n का एक गुणक है जो 1 से बड़ा है पर n के वर्गमूल से छोटा है । 2. n का एक गुणक है जो n के वर्गमूल से बड़ा है पर n से छोटा है । ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1, न ही 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों । दी गई शर्तें दो हैं और दोनों महत्त्वपूर्ण हैं : n भाज्य है, अर्थात् उसका कोई गुणनखंड 1 और n के बीच में है ; और n का वर्गमूल पूर्णांक नहीं है, अर्थात् n पूर्ण वर्ग नहीं है । कथन 1 को देखिए । n भाज्य है, इसलिए उसे n = a × b के रूप में लिखा जा सकता है जहाँ a और b दोनों 1 से बड़े और n से छोटे हैं । मान लीजिए इनमें छोटा गुणनखंड a है । यदि a और b दोनों n के वर्गमूल से बड़े होते, तो उनका गुणनफल n से बड़ा हो जाता, जो असंभव है । अतः a n के वर्गमूल से बड़ा नहीं हो सकता । बराबर भी नहीं हो सकता, क्योंकि a पूर्णांक है और n का वर्गमूल पूर्णांक नहीं है । इसलिए a n के वर्गमूल से कड़ाई से छोटा है और 1 से बड़ा है — कथन 1 सही हुआ । अब कथन 2 । उसी a के लिए उसका सहगुणनखंड b = n ÷ a लीजिए । चूँकि a वर्गमूल से छोटा है, n ÷ a वर्गमूल से बड़ा होगा ; और चूँकि a 1 से बड़ा है, n ÷ a स्वयं n से छोटा होगा । इसलिए b n के वर्गमूल और n के बीच पड़ता है — कथन 2 भी सही हुआ । उदाहरण से देखिए : n = 12 का वर्गमूल लगभग 3·46 है, और 2 उससे छोटा गुणनखंड है तथा 6 उससे बड़ा ; n = 15 का वर्गमूल लगभग 3·87 है, 3 छोटा और 5 बड़ा गुणनखंड है । अतः दोनों कथन सही हैं और उत्तर विकल्प (c) है । यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि दोनों कथन एक ही तथ्य के दो पहलू हैं — गुणनखंड सदा जोड़ों में आते हैं, और हर जोड़े का एक सदस्य वर्गमूल के इस पार होता है तो दूसरा उस पार । एक बात और, जो इस प्रश्न को पाठ्यक्रम से जोड़ती है । दोनों कथन मिलकर वही परिणाम कहते हैं जिस पर अभाज्यता की पूरी जाँच टिकी है : यदि किसी संख्या का कोई गुणनखंड उसके वर्गमूल तक नहीं मिला, तो उससे आगे भी नहीं मिलेगा, क्योंकि आगे वाला गुणनखंड अपने साथ एक छोटा साथी लाता है जो पहले ही दिख चुका होता । इसीलिए 97 की जाँच के लिए 7 तक भाग देना पर्याप्त है और 197 की जाँच के लिए 13 तक । कथन 1 इस नियम का ‘छोटा सिरा’ है और कथन 2 उसका ‘बड़ा सिरा’ ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — ‘केवल 1’ उस अभ्यर्थी की पसंद है जो छोटे गुणनखंड तक पहुँचकर रुक जाता है । यह ठीक है कि हर भाज्य संख्या का कोई-न-कोई गुणनखंड उसके वर्गमूल से छोटा होता है — यही कारण है कि अभाज्यता की जाँच वर्गमूल तक ही करनी पड़ती है । पर यह भूल जाना कि उसी गुणनखंड का एक सहगुणनखंड भी होता है, आधी बात पर रुक जाना है । यदि a n का गुणनखंड है तो n ÷ a भी n का गुणनखंड है, और जब a वर्गमूल से छोटा हो तो n ÷ a अनिवार्यतः वर्गमूल से बड़ा होगा । इसलिए कथन 1 के सही होते ही कथन 2 अपने आप सही हो जाता है ; दोनों को अलग-अलग सिद्ध करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती । संख्या 12 पर देखिए — 2 वर्गमूल से छोटा है और उसका साथी 6 वर्गमूल से बड़ा ।
- (b)केवल 2 — ‘केवल 2’ वही भूल है, उल्टी दिशा में । अभ्यर्थी बड़ा गुणनखंड तो पहचान लेता है — 12 में 6, 15 में 5 — पर सोचता है कि छोटा गुणनखंड वर्गमूल के बराबर भी हो सकता है, इसलिए कथन 1 पर संदेह करता है । यहीं प्रश्न की दूसरी शर्त काम आती है : n का वर्गमूल पूर्णांक नहीं है । गुणनखंड सदा पूर्णांक होते हैं, इसलिए कोई गुणनखंड किसी अपूर्णांक वर्गमूल के बराबर हो ही नहीं सकता । बराबरी की संभावना समाप्त होते ही छोटा गुणनखंड वर्गमूल से कड़ाई से छोटा रह जाता है और कथन 1 भी सही सिद्ध हो जाता है । दोनों कथन एक ही जोड़े के दो सिरे हैं, इसलिए वे साथ-साथ ही सही या ग़लत हो सकते हैं ।
- (d)न तो 1, न ही 2 — ‘न तो 1, न ही 2’ लगभग हमेशा वहाँ से आता है जहाँ अभ्यर्थी जाँच के लिए कोई पूर्ण वर्ग उठा लेता है । 9 को लीजिए : उसके गुणनखंड 1, 3 और 9 हैं, और 3 ठीक वर्गमूल है — न उससे छोटा, न बड़ा । इसलिए 9 पर दोनों कथन विफल हो जाते हैं, और वहीं से यह विकल्प आकर्षक लगने लगता है । पर प्रश्न ने यही स्थिति शर्त लगाकर बाहर कर दी है — उसने कहा है कि n का वर्गमूल पूर्णांक नहीं है, अर्थात् n पूर्ण वर्ग नहीं है । 4, 9, 25, 49 जैसी संख्याएँ इस प्रश्न के दायरे में हैं ही नहीं । कथनों वाले प्रश्नों में शर्तों को पहले पढ़ना और उदाहरण उन्हीं शर्तों के भीतर से चुनना सबसे बड़ा बचाव है ।
अवधारणा
इस प्रश्न की जड़ में गुणनखंडों के जोड़े का विचार है । यदि a किसी संख्या n का गुणनखंड है, तो n ÷ a भी उसका गुणनखंड है, और ये दोनों मिलकर एक जोड़ा बनाते हैं जिसका गुणनफल n है । अब यदि a n के वर्गमूल से छोटा है तो उसका साथी वर्गमूल से बड़ा होगा, और यदि a बड़ा है तो साथी छोटा — दोनों एक साथ वर्गमूल से बड़े या दोनों एक साथ छोटे नहीं हो सकते, क्योंकि तब उनका गुणनफल n से बड़ा या छोटा हो जाता । यही कारण है कि किसी संख्या के गुणनखंड उसके वर्गमूल के आसपास सममित रूप से बिखरे रहते हैं । इसी विचार का सबसे उपयोगी परिणाम अभाज्यता की जाँच है : किसी संख्या n के अभाज्य होने की परीक्षा के लिए उसे केवल वर्गमूल तक की अभाज्य संख्याओं से भाग देकर देखना पर्याप्त है, क्योंकि यदि वर्गमूल तक कोई गुणनखंड नहीं मिला तो उससे आगे भी नहीं मिलेगा । पूर्ण वर्ग इस चित्र का एकमात्र अपवाद हैं, जहाँ जोड़े का बीच वाला सदस्य स्वयं वर्गमूल होता है और अकेला खड़ा रहता है — जैसे 36 में 6 । प्रश्न ने वर्गमूल के पूर्णांक न होने की शर्त लगाकर ठीक इसी अपवाद को हटाया है ।
कथनों वाले प्रश्न EPFO और UPSC दोनों में एक ही ढाँचे पर बने होते हैं : दो या तीन कथन, और चार विकल्प जो उनके संभावित सत्य-मानों को ढँकते हैं । ऐसे प्रश्न में सबसे बड़ा लाभ यह है कि कथन प्रायः एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, और यहाँ तो वे एक ही तथ्य के दो सिरे हैं — इसलिए एक को सिद्ध कर लेने पर दूसरा मुफ़्त मिल जाता है । दूसरा लाभ यह है कि गणितीय कथनों की जाँच उदाहरण से हो सकती है, बशर्ते उदाहरण प्रश्न की शर्तों के भीतर से चुना जाए । यही इस प्रश्न की असली परीक्षा है : शर्त कहती है कि n का वर्गमूल पूर्णांक नहीं है, और जो अभ्यर्थी जाँच के लिए 9 या 16 उठा लेगा वह शर्त तोड़कर ग़लत निष्कर्ष निकाल लेगा । पुस्तिका में n के आगे का कोष्ठक ‘n ( > 1)’ के रूप में छपा है और दोनों क्रमांकित कथन अलग-अलग पंक्तियों में लटकी हुई इंडेंट के साथ दिए गए हैं ; कथनों की गिनती लैटिन अंकों में है, विकल्पों की लैटिन अक्षरों में ।
मुख्य तथ्य
- यदि a किसी संख्या n का गुणनखंड है तो n ÷ a भी उसका गुणनखंड है ; गुणनखंड सदा जोड़ों में आते हैं और हर जोड़े का गुणनफल n होता है ।
- किसी जोड़े के दोनों सदस्य एक साथ वर्गमूल से बड़े नहीं हो सकते, क्योंकि तब उनका गुणनफल n से बड़ा हो जाता ; इसी तरह दोनों एक साथ छोटे भी नहीं हो सकते ।
- किसी संख्या के अभाज्य होने की जाँच के लिए उसे केवल उसके वर्गमूल तक की अभाज्य संख्याओं से भाग देकर देखना पर्याप्त है — यही इस प्रश्न का व्यावहारिक रूप है ।
- पूर्ण वर्ग इस चित्र के अपवाद हैं : वहाँ वर्गमूल स्वयं एक गुणनखंड होता है और अकेला खड़ा रहता है, जैसे 36 में 6 या 9 में 3 ; प्रश्न ने शर्त लगाकर इन्हें बाहर कर दिया है ।
- उदाहरण से जाँच : 12 का वर्गमूल लगभग 3·46 है और उसके गुणनखंड 2 तथा 6 वर्गमूल के दोनों ओर पड़ते हैं ; 15 का वर्गमूल लगभग 3·87 है और 3 तथा 5 उसके दोनों ओर ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- जाँच के लिए कोई पूर्ण वर्ग उठा लेना । 9 या 16 पर दोनों कथन विफल दिखते हैं, पर प्रश्न ने वर्गमूल के पूर्णांक न होने की शर्त लगाकर उन्हें दायरे से बाहर कर दिया है ।
- कथन 1 सिद्ध करके रुक जाना । छोटे गुणनखंड का सहगुणनखंड n ÷ a अपने आप वर्गमूल से बड़ा होता है, इसलिए कथन 2 अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता ही नहीं ।
- गुणनखंड के वर्गमूल के बराबर होने की संभावना खुली छोड़ देना । गुणनखंड पूर्णांक होते हैं और यहाँ वर्गमूल पूर्णांक नहीं है, इसलिए बराबरी असंभव है ।
इस विचार को आयोग तीन रूपों में पूछते हैं । सबसे सीधा रूप व्यावहारिक है : ‘किसी संख्या के अभाज्य होने की जाँच के लिए किस सीमा तक भाग देना पर्याप्त है’ — और उत्तर सदा वर्गमूल होता है, क्योंकि गुणनखंड जोड़ों में आते हैं । दूसरा रूप, जो यहाँ है, उसी तथ्य को कथनों में बाँटकर पूछता है और शर्तों में एक अपवाद छिपा देता है — यहाँ वह अपवाद पूर्ण वर्ग है । तीसरा रूप गुणनखंडों की गिनती से जुड़ा होता है : ‘किन संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है’, जिसका उत्तर पूर्ण वर्ग है, और कारण फिर वही जोड़े वाला तर्क । तीनों रूपों की तैयारी एक ही अभ्यास से हो जाती है — कुछ संख्याओं के गुणनखंड जोड़ों में लिखकर देखिए और हर जोड़े को वर्गमूल के दोनों ओर बैठा हुआ पहचानिए । कथनों वाले प्रश्नों में यह आदत भी डालिए कि शर्तें पहले पढ़ी जाएँ और जाँच के उदाहरण उन्हीं शर्तों के भीतर से चुने जाएँ ।
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EPFO_EOAO_2020_Q21खोलें व हल करें →How many times does the digit 3 appear between 1 and 100 such that the number where 3 appears is not divisible by 3 ?
- (a) 11
- (b) 12
- (c) 13
- (d) 17
उत्तर(b) 12
इसी प्रश्नपत्र का पहला संख्यात्मक प्रश्न, जहाँ गुणनखंड और विभाज्यता का यही औज़ार व्यावहारिक रूप में लगता है — 3 से विभाज्यता की कसौटी छाँटने के लिए ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी धनपूर्ण संख्या n के अभाज्य होने की जाँच के लिए, निम्नलिखित में से किन संख्याओं से भाग देकर देखना पर्याप्त है ?
- (a)2 से n – 1 तक की सभी संख्याओं से
- (b)2 से n ÷ 2 तक की सभी संख्याओं से
- (c)n के वर्गमूल से बड़ी सभी अभाज्य संख्याओं से
- (d)2 से n के वर्गमूल तक की सभी अभाज्य संख्याओं से
उत्तर(d) 2 से n के वर्गमूल तक की सभी अभाज्य संख्याओं से — क्योंकि गुणनखंड जोड़ों में आते हैं और यदि वर्गमूल तक कोई गुणनखंड नहीं मिला तो उससे आगे भी नहीं मिलेगा ।
- practice — not a real PYQ
यह जाँचने के लिए कि 97 अभाज्य है या नहीं, उसे अधिक-से-अधिक किस अभाज्य संख्या तक भाग देकर देखना पर्याप्त है ?
- (a)5
- (b)7
- (c)11
- (d)13
उत्तर(b) 7 — 97 का वर्गमूल लगभग 9·85 है, इसलिए उससे छोटी अभाज्य संख्याएँ 2, 3, 5 और 7 ही जाँचनी पड़ती हैं ; इनमें से कोई 97 को नहीं बाँटता, अतः 97 अभाज्य है ।