द्वि-आधारी संख्या 101110 का तुल्य दशमलव मान क्या है ?
- (a)46
- (b)56
- (c)64
- (d)65
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) 46 । द्वि-आधारी (binary) संख्या को दशमलव में बदलने का नियम स्थानीय मान का है । द्वि-आधारी पद्धति में आधार 2 होता है, इसलिए दाहिने सिरे से बाईं ओर चलते हुए स्थानीय मान 1, 2, 4, 8, 16, 32 इस क्रम में बढ़ते हैं — हर अगला स्थान पिछले का दुगुना । अब 101110 के अंकों को दाहिने सिरे से बैठाइए : सबसे दाहिना अंक 0 है, उसका स्थानीय मान 1 ; उससे बाईं ओर 1 है, स्थानीय मान 2 ; फिर 1, स्थानीय मान 4 ; फिर 1, स्थानीय मान 8 ; फिर 0, स्थानीय मान 16 ; और सबसे बाईं ओर 1, स्थानीय मान 32 । जिन स्थानों पर 1 खड़ा है केवल उन्हीं के मान जोड़ने हैं, क्योंकि 0 वाले स्थान कुछ नहीं जोड़ते । अतः योग है 32 + 8 + 4 + 2 = 46, अर्थात् विकल्प (a) । यही उत्तर बाएँ से दाहिने चलने वाली दुगुना-और-जोड़ो विधि से भी मिलता है, जो काग़ज़ पर सबसे तेज़ है : शून्य से आरंभ कीजिए ; पहला अंक 1 है, इसलिए 0 × 2 + 1 = 1 ; अगला अंक 0, इसलिए 1 × 2 + 0 = 2 ; फिर 1, इसलिए 2 × 2 + 1 = 5 ; फिर 1, इसलिए 5 × 2 + 1 = 11 ; फिर 1, इसलिए 11 × 2 + 1 = 23 ; और अंत में 0, इसलिए 23 × 2 + 0 = 46 । दोनों विधियाँ एक ही उत्तर पर पहुँचती हैं । उत्तर की एक तुरंत जाँच भी है : छह अंकों की द्वि-आधारी संख्या का अधिकतम मान 111111 अर्थात् 63 होता है, इसलिए उत्तर 63 से बड़ा हो ही नहीं सकता — और यह अकेली जाँच दो विकल्पों को तत्काल हटा देती है । व्यवहार में इस विधि को और छोटा किया जा सकता है । 2 की घातें — 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128, 256, 512, 1024 — एक बार कंठस्थ कर लीजिए ; फिर द्वि-आधारी संख्या देखते ही केवल उन स्थानों पर उँगली रखनी पड़ती है जहाँ 1 खड़ा है और उनके मान जोड़ लेने होते हैं । यहाँ चार स्थानों पर 1 है, इसलिए चार संख्याएँ जोड़नी पड़ीं और काम समाप्त । उलटी दिशा भी उतनी ही सरल है : 46 में से सबसे बड़ी समाने वाली घात 32 निकालिए, शेष 14 में से 8, शेष 6 में से 4, शेष 2 में से 2 — जिन घातों का प्रयोग हुआ उन स्थानों पर 1 और शेष पर 0 रखने से 101110 वापस बन जाता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)56 — 56 उसी संख्या का अष्टाधारी (octal) रूप है, दशमलव नहीं । द्वि-आधारी से अष्टाधारी में बदलने का तरीक़ा यह है कि अंकों को दाहिने सिरे से तीन-तीन के समूहों में बाँटा जाए, क्योंकि 8 = 2 का घन है । यहाँ 101110 दो समूहों में बँटता है — 101 और 110 । पहला समूह 4 + 0 + 1 = 5 है और दूसरा 4 + 2 + 0 = 6, इसलिए अष्टाधारी रूप 56 बनता है । यह मान ग़लत नहीं है, बस वह उत्तर है जो पूछा नहीं गया । यही चूक चार-चार के समूहों में भी हो सकती है, जो षोडश आधार देती है : 0010 और 1110 यानी 2 तथा E, अर्थात् 2E — और 2E का दशमलव मान 2 × 16 + 14 = 46 ही है, जो सही उत्तर की एक अच्छी जाँच है ।
- (c)64 — 64 छह अंकों की किसी भी द्वि-आधारी संख्या का मान हो ही नहीं सकता । छह अंकों से कुल 2 की छठी घात अर्थात् 64 भिन्न-भिन्न मान बनाए जा सकते हैं, पर वे 0 से लेकर 63 तक होते हैं, 64 तक नहीं । स्वयं 64 को लिखने के लिए सात अंक चाहिए — 1000000 । अर्थात् यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो अंकों की संख्या देखकर सीधे 2 की घात लगा देता है और यह भूल जाता है कि गिनती शून्य से शुरू होती है । यह ग़लती कंप्यूटर से जुड़े प्रश्नों में बहुत आम है, क्योंकि वहाँ 2 की घातें बार-बार दिखती हैं और उन्हें उत्तर मान लेने की आदत बन जाती है । जाँच का नियम सरल है : n अंकों की द्वि-आधारी संख्या का अधिकतम मान 2 की n-वीं घात में से 1 घटाकर मिलता है ।
- (d)65 — 65 भी उसी कारण असंभव है । छह अंकों की द्वि-आधारी संख्या का अधिकतम मान 111111 है, जिसका दशमलव मान 63 होता है ; इसलिए 64 की तरह 65 भी दायरे से बाहर है । ध्यान दीजिए कि 65 और 56 एक-दूसरे के अंक उलट कर बनते हैं, और परीक्षक ने यह जोड़ा जान-बूझकर रखा है — जो अभ्यर्थी जल्दबाज़ी में अष्टाधारी मान 56 निकालकर उसे उलटा पढ़ लेगा, वह भी फँस जाएगा । इस प्रश्न में सबसे सुरक्षित तरीक़ा यही है कि पहले 63 वाली ऊपरी सीमा लगाकर दो विकल्प हटा दिए जाएँ, और फिर बचे हुए दो में से स्थानीय मान जोड़कर सही चुना जाए । इससे पूरी गणना बीस सेकंड में समाप्त हो जाती है ।
अवधारणा
संख्या पद्धतियों का पूरा खेल आधार (base) और स्थानीय मान पर टिका है । दशमलव पद्धति का आधार 10 है, इसलिए वहाँ स्थानीय मान 1, 10, 100, 1000 चलते हैं ; द्वि-आधारी पद्धति का आधार 2 है, इसलिए वहाँ 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64 चलते हैं । कंप्यूटर द्वि-आधारी पद्धति इसलिए प्रयोग करता है कि उसके परिपथ में केवल दो अवस्थाएँ — चालू और बंद — भरोसे से पहचानी जा सकती हैं, और इन्हीं दो अवस्थाओं को 1 तथा 0 कहा जाता है । द्वि-आधारी से दशमलव में बदलने की दो मानक विधियाँ हैं : स्थानीय मानों का योग, और बाएँ से दाहिने चलने वाली दुगुना-और-जोड़ो विधि । उल्टी दिशा में, दशमलव से द्वि-आधारी में बदलने के लिए संख्या को बार-बार 2 से भाग देकर शेषफल नीचे से ऊपर पढ़े जाते हैं । अष्टाधारी और षोडशाधारी पद्धतियाँ द्वि-आधारी की संक्षिप्त लिपियाँ हैं : 8 = 2 का घन होने के कारण तीन-तीन अंकों का समूह एक अष्टाधारी अंक बनता है, और 16 = 2 की चौथी घात होने के कारण चार-चार अंकों का समूह एक षोडशाधारी अंक । यही कारण है कि स्मृति के पते षोडशाधारी में लिखे जाते हैं — वे द्वि-आधारी की तुलना में चौथाई लंबे होते हैं ।
EPFO के प्रश्नपत्रों में कंप्यूटर वाला खंड लगभग हर बार एक संख्या-पद्धति का प्रश्न रखता है, और वह प्रायः सीधा रूपांतरण ही होता है । इस प्रश्न की असली परीक्षा गणना नहीं, यह पहचानना है कि किस पद्धति में उत्तर माँगा गया है, क्योंकि विकल्पों में उसी संख्या का दूसरी पद्धति वाला मान बैठा हुआ है । 56 अष्टाधारी मान है और वह ठीक उसी अभ्यर्थी को पकड़ता है जिसने तीन-तीन के समूह बनाने की विधि याद कर रखी है पर यह नहीं पढ़ा कि प्रश्न दशमलव माँग रहा है । दूसरी ओर 64 और 65 वे विकल्प हैं जिन्हें छह अंकों की ऊपरी सीमा जानने वाला अभ्यर्थी पढ़ते ही हटा देता है । इस तरह एक ही प्रश्न में दो अलग कौशल जाँचे जा रहे हैं — रूपांतरण की विधि और परिमाण का बोध । पुस्तिका के हिन्दी स्तंभ में ‘द्वि-आधारी’ शब्द प्रयुक्त हुआ है और संख्या 101110 लैटिन अंकों में छपी है, जैसा इस पूरे प्रश्नपत्र में होता है ।
मुख्य तथ्य
- द्वि-आधारी पद्धति में स्थानीय मान दाहिने सिरे से बाईं ओर 1, 2, 4, 8, 16, 32 इस क्रम में बढ़ते हैं — हर अगला स्थान पिछले स्थान का दुगुना होता है ।
- 101110 में 1 चार स्थानों पर है, जिनके मान 32, 8, 4 और 2 हैं ; इनका योग 46 है, और यही इस संख्या का दशमलव मान है ।
- दुगुना-और-जोड़ो विधि से भी यही उत्तर मिलता है : 1, 2, 5, 11, 23, 46 — हर क़दम पर पिछले मान को दुगुना करके अगला अंक जोड़ा जाता है ।
- n अंकों की द्वि-आधारी संख्या का अधिकतम मान 2 की n-वीं घात में से 1 घटाकर मिलता है ; छह अंकों की अधिकतम संख्या 111111 है, जिसका मान 63 होता है ।
- तीन-तीन अंकों का समूह अष्टाधारी अंक देता है और चार-चार का समूह षोडशाधारी ; 101110 का अष्टाधारी रूप 56 और षोडशाधारी रूप 2E है, और 2E का दशमलव मान भी 46 ही निकलता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- स्थानीय मान बाएँ सिरे से गिनना । द्वि-आधारी में गिनती सदा दाहिने सिरे से शुरू होती है, जहाँ स्थानीय मान 1 होता है ।
- अष्टाधारी या षोडशाधारी रूप को ही उत्तर मान लेना । 56 इसी संख्या का अष्टाधारी मान है, और वह विकल्पों में जान-बूझकर रखा गया है ।
- अंकों की संख्या देखकर सीधे 2 की घात लगा देना । छह अंक 64 भिन्न मान बनाते हैं, पर वे 0 से 63 तक होते हैं, इसलिए 64 स्वयं छह अंकों में लिखा ही नहीं जा सकता ।
संख्या-पद्धति के प्रश्न आयोगों में चार रूपों में लौटते हैं । पहला रूप यही है — द्वि-आधारी से दशमलव, जिसमें स्थानीय मानों का योग ही पूरा हल है । दूसरा रूप उल्टी दिशा का होता है, दशमलव से द्वि-आधारी, जहाँ बार-बार 2 से भाग देकर शेषफल नीचे से ऊपर पढ़े जाते हैं । तीसरा रूप दो अन्य आधारों के बीच का होता है, जैसे अष्टाधारी से द्वि-आधारी या षोडशाधारी से दशमलव, और वहाँ समूह बनाने का नियम याद रखना पड़ता है — तीन-तीन अंक अष्टाधारी के लिए, चार-चार षोडशाधारी के लिए । चौथा रूप परिमाण का होता है : किसी दिए गए बिट-संख्या से कितने भिन्न मान बनते हैं, या किसी संख्या को लिखने के लिए कितने बिट चाहिए । चारों रूपों की तैयारी के लिए 2 की घातें 1 से 1024 तक कंठस्थ कर लेना और हर उत्तर पर ऊपरी सीमा की जाँच लगा लेना पर्याप्त है ; इससे आधे विकल्प प्रायः पढ़ते ही हट जाते हैं ।
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- (a) 23149
- (b) 23148
- (c) 23147
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उत्तर(a) 23149
वही रूपांतरण षोडश आधार से — 5A6D का दशमलव मान, जहाँ A और D जैसे अक्षर-अंकों को 10 तथा 13 पढ़ना पड़ता है और स्थानीय मान 16 की घातों में चलते हैं ।
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- (a) 100111011
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- (c) 110111011
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उत्तर(a) 100111011
अष्टाधारी से द्वि-आधारी की ओर वही समूह वाला नियम — 473 के प्रत्येक अंक को तीन बिट में खोलकर लिखा जाता है, ठीक उसी तर्क से जिससे यहाँ 101110 का अष्टाधारी रूप 56 बनता है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
द्वि-आधारी संख्या 110101 का तुल्य दशमलव मान निम्नलिखित में से कौन-सा है ? (दाहिने सिरे से स्थानीय मानों का योग लगाइए)
- (a)43
- (b)53
- (c)55
- (d)61
उत्तर(b) 53 — दाहिने सिरे से स्थानीय मान 1, 2, 4, 8, 16, 32 हैं और 1 चार स्थानों पर है, जिनके मान 32, 16, 4 तथा 1 हैं ; इनका योग 53 होता है ।
- practice — not a real PYQ
दशमलव संख्या 45 का तुल्य द्वि-आधारी रूप निम्नलिखित में से कौन-सा है ? (बार-बार 2 से भाग देकर देखिए)
- (a)101101
- (b)110101
- (c)101011
- (d)101110
उत्तर(a) 101101 — 45 = 32 + 8 + 4 + 1, इसलिए 32, 8, 4 तथा 1 वाले स्थानों पर 1 और शेष पर 0 आएगा ; ध्यान दीजिए कि 101110 का मान 46 है, 45 नहीं ।