√3 – √2 और इसके व्युत्क्रम का समांतर माध्य निम्नलिखित में से क्या है ?
- (a)√3
- (b)√2
- (c)2
- (d)1
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) √3 । पूरा हल एक ही चाल पर टिका है — व्युत्क्रम का हरात्मक परिमेयकरण (rationalisation) । दी गई संख्या है √3 – √2 । उसका व्युत्क्रम है 1/(√3 – √2), और इस रूप में उस पर कोई काम नहीं किया जा सकता, इसलिए अंश और हर दोनों को संयुग्मी (conjugate) √3 + √2 से गुणा कीजिए । हर बनता है (√3 – √2)(√3 + √2), जो a² – b² के प्रारूप में 3 – 2 = 1 है । अतः व्युत्क्रम केवल √3 + √2 रह जाता है । यही इस प्रश्न का पूरा रहस्य है : √3 – √2 और √3 + √2 एक-दूसरे के व्युत्क्रम हैं, क्योंकि उनका गुणनफल ठीक 1 है । अब समांतर माध्य निकालिए — दो संख्याओं का समांतर माध्य उनके योग का आधा होता है । योग है (√3 – √2) + (√3 + √2) = 2√3, क्योंकि √2 वाले दोनों पद आपस में कट जाते हैं । इसका आधा 2√3 ÷ 2 = √3 है, अर्थात् विकल्प (a) । अंकों से भी जाँच लीजिए : √3 लगभग 1·732 और √2 लगभग 1·414 है, इसलिए √3 – √2 लगभग 0·318 और उसका व्युत्क्रम लगभग 3·146 । दोनों का औसत लगभग 1·732 — वही √3 । इस प्रश्न के पीछे एक साफ़ नियम है जिसे याद रख लेना चाहिए : यदि कोई संख्या p – √q के रूप में हो और p² – q = 1 हो, तो उसका व्युत्क्रम p + √q होगा और उस संख्या तथा उसके व्युत्क्रम का समांतर माध्य सदा p होगा । यहाँ p की जगह √3 है और q की जगह 2, और 3 – 2 = 1 है, इसलिए माध्य √3 आया । यही नियम विकल्प (b) और (c) को भी समझा देता है, क्योंकि वे इसी नियम के दूसरे उदाहरणों के उत्तर हैं । अंत में एक असमिका भी उत्तर की जाँच कर देती है : समांतर माध्य कभी गुणोत्तर माध्य से छोटा नहीं होता, और यहाँ गुणोत्तर माध्य 1 है, इसलिए उत्तर 1 से बड़ा ही होना चाहिए । √3 यही शर्त पूरी करता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)√2 — √2 वहाँ मिलता है जहाँ योग के बजाय अंतर ले लिया जाता है । यदि कोई (√3 + √2) में से (√3 – √2) घटाकर दो से भाग दे, तो 2√2 ÷ 2 = √2 आता है — पर वह आधा-अंतर है, समांतर माध्य नहीं ; समांतर माध्य सदा आधा-योग होता है । इस विकल्प का दूसरा, अधिक शिक्षाप्रद पक्ष यह है कि √2 भी इसी परिवार के एक दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है : यदि संख्या √2 – 1 होती, तो उसका व्युत्क्रम √2 + 1 होता (क्योंकि दोनों का गुणनफल 2 – 1 = 1 है) और उनका समांतर माध्य √2 निकलता । अर्थात् यह विकल्प ग़लत गणना का नहीं, ग़लत संख्या का उत्तर है — और परीक्षक ठीक यही चाहता है कि आप संख्या ध्यान से पढ़ें ।
- (c)2 — 2 भी उसी नियम के एक दूसरे उदाहरण का उत्तर है, इस प्रश्न का नहीं । (2 – √3) का व्युत्क्रम (2 + √3) होता है, क्योंकि उनका गुणनफल 4 – 3 = 1 है, और दोनों का समांतर माध्य ठीक 2 आता है । सामान्य रूप में p – √q और उसके व्युत्क्रम का माध्य p होता है, बशर्ते p² – q = 1 हो । यहाँ दी गई संख्या √3 – √2 है, इसलिए p की भूमिका √3 निभा रहा है और उत्तर √3 है, 2 नहीं । एक तेज़ जाँच भी है : यदि माध्य 2 होता तो दोनों संख्याओं का योग 4 होना चाहिए था, जबकि उनका योग 2√3 यानी लगभग 3·46 है । माध्य 2 से कम ही रहेगा ।
- (d)1 — 1 इन दोनों संख्याओं का गुणोत्तर माध्य (geometric mean) है, समांतर माध्य नहीं । किसी भी संख्या और उसके व्युत्क्रम का गुणनफल परिभाषा से 1 होता है, इसलिए उनका गुणोत्तर माध्य — गुणनफल का वर्गमूल — सदा 1 रहेगा, चाहे संख्या कोई भी हो । वही 1 परिमेयकरण के बीच हर के रूप में भी सामने आता है, क्योंकि (√3 – √2)(√3 + √2) = 1, और यहीं अभ्यर्थी उसे उत्तर मान बैठता है । ध्यान रखिए कि समांतर माध्य सदा गुणोत्तर माध्य से बड़ा या बराबर होता है, और बराबर तभी होता है जब दोनों संख्याएँ एक हों । यहाँ वे भिन्न हैं, इसलिए उत्तर 1 से कड़ाई से बड़ा होना ही चाहिए — यह अकेली दलील इस विकल्प को हटा देती है ।
अवधारणा
करणी (surd) वाले प्रश्नों की रीढ़ संयुग्मी और परिमेयकरण है । (√a – √b) का संयुग्मी (√a + √b) होता है, और दोनों का गुणनफल a – b — एक परिमेय संख्या । इसी कारण जब भी हर में करणी हो, संयुग्मी से गुणा करके हर को परिमेय बना लिया जाता है । इस प्रश्न में वही चाल यह भी दिखा देती है कि (√3 – √2) और (√3 + √2) परस्पर व्युत्क्रम हैं, क्योंकि उनका गुणनफल 3 – 2 = 1 है । दूसरी ओर माध्यों का पूरा परिवार याद रखना चाहिए : दो संख्याओं का समांतर माध्य उनके योग का आधा, गुणोत्तर माध्य उनके गुणनफल का वर्गमूल, और हरात्मक माध्य उनके व्युत्क्रमों के समांतर माध्य का व्युत्क्रम होता है । किसी संख्या और उसके व्युत्क्रम के लिए गुणोत्तर माध्य सदा 1 रहता है, और समांतर माध्य सदा 1 से बड़ा या उसके बराबर — यह समांतर-गुणोत्तर असमिका (AM ≥ GM) का सीधा परिणाम है । अंत में वह सामान्य नियम, जो इस प्रश्न को एक पंक्ति में हल कर देता है : p – √q और उसके व्युत्क्रम का समांतर माध्य p होता है, यदि p² – q = 1 हो ।
यह प्रश्न गणना की नहीं, पहचान की परीक्षा है । जो अभ्यर्थी √3 – √2 को देखते ही उसका संयुग्मी पहचान लेता है, वह उत्तर पंद्रह सेकंड में लिख देता है ; जो दशमलव में बदलकर भाग देने बैठता है, वह भी सही उत्तर पा सकता है पर समय गँवाकर । विकल्पों की रचना बताती है कि परीक्षक क्या परख रहा है : √2 और 2 दोनों इसी नियम के दूसरे उदाहरणों के उत्तर हैं, और 1 गुणोत्तर माध्य है । यानी चारों विकल्प एक ही विषय के भीतर से आए हैं, बाहर से नहीं — इसीलिए अनुमान लगाने वाला अभ्यर्थी बच नहीं पाता । पुस्तिका में करणी का चिह्न असली छपा है और उसकी रेखा पूरे राशिमान को ढकती है ; यहाँ उसे पंक्ति में √3 और √2 के रूप में लिखा गया है । दोनों करणियों के बीच का चिह्न भी लंबा डैश है, ऋण का ही अर्थ रखता है ।
मुख्य तथ्य
- (√a – √b) और (√a + √b) संयुग्मी करणी कहलाते हैं ; उनका गुणनफल a – b होता है, जो सदा एक परिमेय संख्या होती है और इसी कारण हर का परिमेयकरण संभव हो पाता है ।
- (√3 – √2)(√3 + √2) = 3 – 2 = 1 है, इसलिए ये दोनों संख्याएँ ठीक-ठीक एक-दूसरे की व्युत्क्रम हैं — यही तथ्य इस प्रश्न की पूरी धुरी है ।
- दो संख्याओं का समांतर माध्य उनके योग का आधा होता है ; यहाँ योग (√3 – √2) + (√3 + √2) = 2√3 है, इसलिए माध्य √3 अर्थात् लगभग 1·732 निकलता है ।
- किसी भी संख्या और उसके व्युत्क्रम का गुणोत्तर माध्य सदा 1 होता है, क्योंकि उनका गुणनफल परिभाषा से 1 है ; समांतर माध्य उससे बड़ा या बराबर ही रहेगा ।
- सामान्य नियम : यदि p² – q = 1 हो, तो (p – √q) और उसके व्युत्क्रम (p + √q) का समांतर माध्य p होता है — इसी नियम से (2 – √3) का उत्तर 2 और (√2 – 1) का उत्तर √2 निकलता है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- समांतर माध्य के स्थान पर आधा-अंतर निकाल लेना । माध्य सदा योग का आधा होता है ; अंतर का आधा यहाँ √2 देता है और वही विकल्प (b) है ।
- परिमेयकरण के हर 3 – 2 = 1 को ही उत्तर मान लेना । वह गणना का एक बीच का पद है, माध्य नहीं ।
- संख्या ग़लत पढ़ लेना । (2 – √3) और (√2 – 1) के उत्तर 2 तथा √2 हैं, और वे दोनों विकल्पों में मौजूद हैं ।
करणी वाले प्रश्न आयोगों में तीन रूपों में लौटते हैं । पहला रूप सीधा परिमेयकरण माँगता है — ‘1/(√5 – √3) का मान क्या है’ — जहाँ संयुग्मी से गुणा करना ही पूरा हल है । दूसरा रूप, जो यहाँ है, संख्या और उसके व्युत्क्रम पर कोई संक्रिया लगाता है : योग, अंतर, वर्गों का योग, या समांतर माध्य । तीसरा रूप x = √a – √b रखकर x + 1/x या x² + 1/x² पूछता है, और वहाँ भी पहला क़दम व्युत्क्रम का परिमेयकरण ही है । तीनों में सफलता की कुंजी एक ही है — संयुग्मी पहचानिए और गुणनफल a – b लिखिए, क्योंकि जब वह गुणनफल 1 निकलता है, आधा प्रश्न वहीं समाप्त हो जाता है । उत्तर की जाँच के लिए दशमलव सन्निकटन (√2 = 1·414, √3 = 1·732, √5 = 2·236) कंठस्थ रखना बहुत काम आता है ।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
(√5 – 2) और उसके व्युत्क्रम का समांतर माध्य निम्नलिखित में से कौन-सा है ? (संयुग्मी से गुणा करके देखिए)
- (a)2
- (b)√5
- (c)4
- (d)2√5
उत्तर(b) √5 — (√5 – 2) का व्युत्क्रम (√5 + 2) है, क्योंकि उनका गुणनफल 5 – 4 = 1 है ; दोनों का योग 2√5 और उसका आधा √5 ।
- practice — not a real PYQ
यदि x = √7 – √6 है, तो x और उसके व्युत्क्रम का योग निम्नलिखित में से किसके बराबर होगा ?
- (a)1
- (b)2√6
- (c)2√7
- (d)√7 – √6
उत्तर(c) 2√7 — x का व्युत्क्रम √7 + √6 है, क्योंकि (√7 – √6)(√7 + √6) = 7 – 6 = 1 ; दोनों को जोड़ने पर √6 वाले पद कट जाते हैं और 2√7 बचता है ।