जब 74^100 को 9 द्वारा विभाजित किया जाता है, तब निम्नलिखित में से शेष क्या होगा ?
- (a)2
- (b)5
- (c)3
- (d)7
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 7 । बड़ी घातों का शेषफल कभी गुणा करके नहीं निकाला जाता ; पहले आधार को छोटा कीजिए, फिर शेषफलों के चक्र को पकड़िए । पहला क़दम : 74 को 9 से भाग दीजिए । 74 = 8 × 9 + 2, इसलिए 74 का 9 से शेषफल 2 है । यही बात अंकों के योग से भी दिखती है — 7 + 4 = 11, और 1 + 1 = 2 — क्योंकि 9 से शेषफल निकालने की यही कसौटी है । अतः 74 की सौवीं घात का शेषफल वही होगा जो 2 की सौवीं घात का है । दूसरा क़दम : 2 की घातों के शेषफल 9 के साथ एक चक्र बनाते हैं । 2 का शेषफल 2, 4 का 4, 8 का 8, 16 का 7, 32 का 5, 64 का 1 — और इसके बाद चक्र फिर 2 से शुरू हो जाता है । यानी चक्र की लंबाई छह है । तीसरा क़दम : 100 को 6 से भाग दीजिए । 100 = 6 × 16 + 4, शेषफल 4 । इसका अर्थ है कि 2 की सौवीं घात उसी स्थान पर आती है जहाँ 2 की चौथी घात, और 2 की चौथी घात 16 है, जिसका 9 से शेषफल 7 है । इसे सीधे भी लिखा जा सकता है : 2 की सौवीं घात = (2 की छठी घात) की सोलहवीं घात × 2 की चौथी घात, और 2 की छठी घात का शेषफल 1 है, इसलिए पूरा गुणनफल 1 × 16 अर्थात् शेषफल 7 पर सिमट जाता है । उत्तर विकल्प (d) है । छह की यह चक्र-लंबाई आकस्मिक नहीं है : 9 से छोटी और 9 के सहअभाज्य संख्याएँ छह हैं, और ऑयलर की प्रमेय ठीक यही सीमा बाँधती है । ध्यान दीजिए कि इस पुस्तिका में घातांक असली उठे हुए अंक के रूप में छपा है ; यहाँ पंक्ति में उसे ^ चिह्न के साथ लिखा गया है, पर पढ़ना उसे ‘74 की सौवीं घात’ ही है । एक जाँच भी कर लीजिए, क्योंकि इस विधि में सबसे बड़ा ख़तरा स्थिति गिनने में एक स्थान चूक जाना है : 2 की छठी, बारहवीं, अठारहवीं — यानी छह के हर गुणज वाली घात का शेषफल 1 होता है । 96 छह का गुणज है, इसलिए 2 की छियानबेवीं घात का शेषफल 1 है, और उसके बाद चार घातें और चढ़ानी हैं, यानी 1 × 16 = 16, जिसका शेषफल 7 । दोनों रास्ते एक ही उत्तर पर मिलते हैं ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)2 — 2 वह अभ्यर्थी चुनता है जो पहला क़दम पूरा करके रुक जाता है । 74 का 9 से शेषफल सचमुच 2 है, पर प्रश्न 74 का शेषफल नहीं पूछ रहा — वह 74 की सौवीं घात का शेषफल पूछ रहा है । आधार का शेषफल केवल गणना को छोटा करने का साधन है, उत्तर नहीं । इस भूल की पहचान आसान है : यदि आधार का शेषफल ही उत्तर होता, तो घात लिखने का कोई अर्थ ही न रह जाता और प्रश्न में 100 की जगह कोई भी संख्या रखी जा सकती थी । ध्यान रहे, 2 इस चक्र में आता ज़रूर है — वह पहली, सातवीं, तेरहवीं घात पर मिलेगा, यानी उन घातों पर जिन्हें 6 से भाग देने पर 1 बचता है । 100 उनमें नहीं है ।
- (b)5 — 5 चक्र में एक स्थान आगे-पीछे खिसक जाने का परिणाम है । 2 की घातों के शेषफल क्रम से 2, 4, 8, 7, 5, 1 हैं । यहाँ 5 पाँचवें स्थान पर बैठा है, यानी वह उन घातों पर मिलता है जिन्हें 6 से भाग देने पर 5 बचता है — जैसे 5, 11, 17, 95, 101 । पर 100 को 6 से भाग देने पर 4 बचता है, 5 नहीं । इस चूक का सबसे आम कारण यह है कि अभ्यर्थी चक्र को शून्यवीं घात से गिनना शुरू कर देता है, जहाँ शेषफल 1 है, और फिर सारी स्थिति-गिनती एक स्थान खिसक जाती है । बचाव यह है कि चक्र सदैव पहली घात से लिखिए और स्थान की गिनती भी वहीं से कीजिए ।
- (c)3 — 3 इस प्रश्न में कभी आ ही नहीं सकता, और यह बात एक पंक्ति में सिद्ध हो जाती है । 2 की कोई भी घात 3 से विभाजित नहीं होती, इसलिए वह 9 के साथ कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं रखती । जब भाजक 9 हो और भाज्य 3 का गुणज न हो, तो शेषफल भी 3 का गुणज नहीं हो सकता — अर्थात् 3 और 6 शेषफल के रूप में असंभव हैं । यही कारण है कि 2 की घातों का पूरा चक्र 2, 4, 8, 7, 5, 1 इन्हीं छह मानों तक सीमित रहता है, जो सभी 9 के सहअभाज्य हैं । परीक्षा में यह एक तेज़ छँटनी है : उत्तर निकालने से पहले ही ऐसे विकल्प हटाए जा सकते हैं जो भाजक के साथ गुणनखंड साझा करते हैं ।
अवधारणा
मापांक अंकगणित (modular arithmetic) का मूल विचार यह है कि यदि केवल शेषफल जानना है, तो पूरी संख्या ढोने की आवश्यकता नहीं ; आधार को उसके शेषफल से बदल दीजिए और गुणा-घात उसी छोटे मान पर चलाइए । इससे 74 की सौवीं घात जैसा राक्षसी अंक 2 की सौवीं घात बन जाता है । दूसरा विचार चक्रीयता (cyclicity) का है : किसी नियत भाजक के साथ किसी आधार की घातों के शेषफल सदा एक निश्चित लंबाई पर लौट आते हैं । 9 के साथ 2 की घातों का चक्र छह लंबा है — 2, 4, 8, 7, 5, 1 । यह लंबाई ऑयलर की प्रमेय से बँधी है : 9 से छोटी और 9 के सहअभाज्य संख्याओं की गिनती छह है, इसलिए 9 के सहअभाज्य किसी भी आधार की छठी घात का शेषफल 1 होगा ; चक्र इससे छोटा हो सकता है, बड़ा नहीं । तीसरा, और परीक्षा में सबसे उपयोगी सूत्र यह है कि घात को चक्र-लंबाई से भाग देकर उसका शेषफल निकालिए — वही चक्र में स्थान बताता है । 9 के लिए एक अतिरिक्त सुविधा भी है : किसी संख्या का 9 से शेषफल उसके अंकों के योग के 9 से शेषफल के बराबर होता है, इसलिए 74 का शेषफल 7 + 4 = 11 से, और 11 का 1 + 1 = 2 से, तुरंत मिल जाता है ।
शेषफल वाले प्रश्न EPFO, UPSC तथा प्रायः हर आयोग की संख्यात्मक अभियोग्यता में लौटते हैं, और उनका उद्देश्य गणना की गति नहीं बल्कि विधि का ज्ञान जाँचना है । जो अभ्यर्थी 74 की सौवीं घात निकालने बैठ जाएगा वह प्रश्न हार चुका है ; जो तीन क़दम जानता है — आधार घटाओ, चक्र लिखो, घात को चक्र-लंबाई से भाग दो — वह इसे आधे मिनट में हल कर लेता है । विकल्पों की रचना भी इसी को परखती है : 2 पहला क़दम पूरा करने वाले के लिए है, 5 चक्र में एक स्थान चूकने वाले के लिए, और 3 वहाँ रखा गया है जहाँ अभ्यर्थी बिना सोचे कोई छोटा अंक उठा ले । यह भी याद रखिए कि इसी पृष्ठ पर इससे पहले वाला प्रश्न भी 3 से विभाज्यता की कसौटी पर टिका है — अंकों का योग — इसलिए दोनों को एक साथ पढ़ने पर वही एक औज़ार दो बार काम आता है ।
मुख्य तथ्य
- किसी संख्या का 9 से शेषफल उसके अंकों के योग के 9 से शेषफल के बराबर होता है — 74 के अंकों का योग 11 है और 11 का शेषफल 2, इसलिए 74 का भी 2 ।
- 9 के साथ 2 की घातों के शेषफल छह की लंबाई वाला चक्र बनाते हैं : 2, 4, 8, 7, 5, 1 — और उसके बाद वही क्रम दोहराता है ।
- घात को चक्र-लंबाई से भाग देकर मिला शेषफल चक्र में स्थान बताता है ; 100 को 6 से भाग देने पर 4 बचता है, इसलिए चौथा पद यानी 7 उत्तर है ।
- ऑयलर की प्रमेय के अनुसार 9 के सहअभाज्य किसी भी आधार की छठी घात का 9 से शेषफल 1 होता है, क्योंकि 9 से छोटी सहअभाज्य संख्याएँ छह हैं ।
- यदि आधार भाजक के साथ कोई गुणनखंड साझा नहीं करता, तो शेषफल भी वह गुणनखंड नहीं रख सकता — इसीलिए 2 की किसी घात का 9 से शेषफल कभी 3 या 6 नहीं होगा ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आधार का शेषफल निकालकर वहीं रुक जाना । 74 का शेषफल 2 है, पर पूछा गया है 74 की सौवीं घात का शेषफल — आधार घटाना केवल पहला क़दम है ।
- चक्र को शून्यवीं घात से गिनना । यदि पहला पद 1 मान लिया जाए तो सारी स्थिति-गिनती एक स्थान खिसक जाती है और 7 के बजाय 5 हाथ लगता है ।
- चक्र-लंबाई अनुमान से मान लेना । 9 के साथ 2 का चक्र छह लंबा है, चार नहीं ; लंबाई हर बार लिखकर जाँचिए, स्मृति के भरोसे मत छोड़िए ।
शेषफल के प्रश्न तीन मानक ढाँचों में आते हैं । पहला ढाँचा यही है — एक बड़ी घात को एक छोटी संख्या से भाग देने पर शेषफल, जहाँ आधार घटाना और चक्र पकड़ना ही पूरा हल है । दूसरा ढाँचा अप्रत्यक्ष होता है : ‘x को 61 से भाग देने पर 2 बचता है, तो x की सातवीं घात को 61 से भाग देने पर क्या बचेगा’ — यहाँ आधार पहले ही शेषफल के रूप में दे दिया जाता है और केवल घात लगानी है । तीसरा ढाँचा इकाई अंक पूछता है, जो वस्तुतः 10 से शेषफल का ही दूसरा नाम है । तीनों में विधि एक ही है, इसलिए 2, 3, 7 और 8 की घातों के चक्र तथा 7, 9, 11, 13 जैसे छोटे भाजकों का व्यवहार एक बार अभ्यास कर लेना पूरे परिवार को खोल देता है । गणना कभी लंबी नहीं होती ; यदि लंबी लगने लगे तो समझिए कि विधि ग़लत चुनी गई है ।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2017_Q110Suppose, the remainder obtained while dividing x by 61 is 2. What is the remainder obtained while dividing x⁷ by 61?
- (a) 2
- (b) 4
- (c) 5
- (d) 6
उत्तर(d) 6
यही विधि उल्टे सिरे से पूछी गई है — आधार का शेषफल पहले ही दे दिया गया है (x को 61 से भाग देने पर 2 बचता है) और केवल सातवीं घात लगानी है, इसलिए चक्र लिखने तक की आवश्यकता नहीं पड़ती ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
जब 3 की पचासवीं घात को 7 से विभाजित किया जाता है, तब निम्नलिखित में से शेषफल के रूप में क्या प्राप्त होगा ?
- (a)1
- (b)2
- (c)4
- (d)6
उत्तर(b) 2 — 7 के साथ 3 की घातों का चक्र 3, 2, 6, 4, 5, 1 है और उसकी लंबाई छह है ; 50 को 6 से भाग देने पर 2 बचता है, इसलिए चक्र का दूसरा पद यानी 2 उत्तर है ।
- practice — not a real PYQ
17 की तेईसवीं घात को 16 से विभाजित करने पर निम्नलिखित में से कौन-सा शेषफल प्राप्त होगा ?
- (a)0
- (b)1
- (c)7
- (d)15
उत्तर(b) 1 — 17 को 16 से भाग देने पर 1 बचता है, इसलिए आधार को 1 से बदला जा सकता है, और 1 की कोई भी घात 1 ही रहती है ; यहाँ चक्र लिखने तक की आवश्यकता नहीं पड़ती ।