1 और 100 के बीच की संख्याओं में, अंक 3 इस प्रकार कितनी बार आएगा कि वह संख्या जिसमें 3 आता है, 3 से विभाजित नहीं हो ?
- (a)11
- (b)12
- (c)13
- (d)17
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 12 । प्रश्न यह पूछता है कि अंक 3 कितनी बार आएगा — यह नहीं कि ऐसी संख्याएँ कितनी हैं — और शर्त यह है कि जिस संख्या में वह 3 आ रहा है, वह स्वयं 3 से विभाजित न हो । पहले कुल आवृत्ति गिनिए । इकाई के स्थान पर 3 रखने वाली संख्याएँ हैं 3, 13, 23, 33, 43, 53, 63, 73, 83, 93 — दस बार । दहाई के स्थान पर 3 रखने वाली संख्याएँ हैं 30 से 39 तक — फिर दस बार । अतः अंक 3 कुल बीस बार छपता है, और ध्यान रहे कि 33 में वह दो बार गिना जाता है । अब उन संख्याओं को छाँटिए जो 3 से विभाजित हैं । कसौटी सरल है : अंकों का योग 3 से विभाजित हो तो संख्या भी 3 से विभाजित होती है । ऊपर की सूची में ऐसी संख्याएँ हैं 3, 30, 33, 36, 39, 63 और 93 । इनमें अंक 3 की आवृत्ति है 1 + 1 + 2 + 1 + 1 + 1 + 1 = 8 । शेष बचा 20 – 8 = 12, अर्थात् विकल्प (b) । ‘1 और 100 के बीच’ का अर्थ यहाँ 2 से 99 तक है, पर इससे उत्तर पर कोई असर नहीं पड़ता — न 1 में अंक 3 है, न 100 में — इसलिए छोर जोड़िए या छोड़िए, गिनती वही रहती है । एक बात और, जो इसी प्रश्न में छिपी है : यदि कोई ‘आवृत्ति’ के बजाय ‘संख्याएँ’ गिन ले, तो अंक 3 वाली संख्याएँ 19 हैं और उनमें 3 से विभाज्य 7 हैं, यानी 19 – 7 = 12 — उत्तर वही आ जाता है । यह संयोग है, नियम नहीं : 33 दोनों गणनाओं में एक-एक अतिरिक्त इकाई जोड़ता है और वे आपस में कट जाती हैं । किसी दूसरे अंक पर यही सुविधा नहीं मिलेगी, इसलिए आदत यही डालिए कि ‘कितनी बार’ पढ़ते ही आवृत्ति गिनी जाए । समय बचाने का एक साफ़ तरीक़ा यह भी है : पहले 3 वाली उन्नीस संख्याएँ लिखिए, फिर उनमें से 3 के गुणजों पर निशान लगाइए, और अंत में केवल 33 पर एक अतिरिक्त निशान लगाइए क्योंकि वही दो आवृत्तियाँ लेकर चलता है । तीन पंक्तियों की यह सूची किसी भी सूत्र से अधिक भरोसेमंद है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)11 — 11 वहाँ पहुँचाता है जहाँ अभ्यर्थी दो अलग-अलग गणनाओं को आपस में मिला देता है । यदि आप संख्याएँ गिन रहे हैं तो अंक 3 वाली संख्याएँ 19 हैं और उनमें 3 से विभाज्य संख्याएँ 7 हैं — 3, 30, 33, 36, 39, 63, 93 । किन्तु यदि इसी 19 में से आप आवृत्ति वाली छँटनी 8 घटा दें, तो 19 – 8 = 11 मिल जाता है । यह घटाव इसलिए ग़लत है कि 8 में 33 को दो बार गिना गया है, जबकि 19 में उसे एक ही बार गिना गया था । जो घटाया जा रहा है और जिसमें से घटाया जा रहा है, दोनों की इकाई एक होनी चाहिए — या तो दोनों आवृत्ति, या दोनों संख्याएँ । यही इस विकल्प का पूरा जाल है ।
- (c)13 — 13 उस अभ्यर्थी को मिलता है जिसकी कुल गिनती तो ठीक है पर छँटनी में 33 एक बार गिना गया । कुल आवृत्ति 20 सही है ; 3 से विभाज्य संख्याएँ भी सही पहचानी गईं — 3, 30, 33, 36, 39, 63, 93, कुल सात संख्याएँ । पर 20 में से 7 घटाकर 13 कह देना यह भूल जाना है कि 33 अपने साथ दो 3 लेकर आता है, इसलिए उसे हटाने पर दो आवृत्तियाँ जाती हैं, एक नहीं । सही घटाव 8 का है और उत्तर 12 आता है । यह विकल्प इसीलिए रखा गया है — यह ठीक उसी अभ्यर्थी को पकड़ता है जिसने सब कुछ सही किया पर दोहरे अंक वाली संख्या पर एक बार ठोकर खाई ।
- (d)17 — 17 उस स्थिति में निकलता है जब विभाज्यता की छँटनी लगभग छोड़ ही दी जाए । कुल आवृत्ति 20 है ; जो अभ्यर्थी 3 के गुणजों में केवल सबसे स्पष्ट तीन — 3, 30 और 33 — पहचानता है और 36, 39, 63 तथा 93 को देखता ही नहीं, वह 20 में से केवल 3 घटाकर 17 पर पहुँच जाता है । यहाँ दो भूलें एक साथ हैं : गुणजों की सूची अधूरी है, और 33 की दोहरी आवृत्ति फिर भी नहीं गिनी गई । बचाव का तरीक़ा यह है कि 3 से विभाज्यता जाँचते समय हर उम्मीदवार संख्या के अंकों का योग लिख लिया जाए — 36 का योग 9, 63 का 9, 93 का 12, तीनों 3 से विभाज्य ।
अवधारणा
इस प्रश्न में दो अलग-अलग कौशल एक साथ जाँचे जा रहे हैं । पहला है अंक-गणना (digit counting) : किसी परिसर में कोई अंक कितनी बार छपता है, यह जानने के लिए उसे स्थान के अनुसार गिना जाता है — इकाई का स्थान अलग, दहाई का स्थान अलग । 1 से 100 तक किसी भी एक अंक (1 से 9 में से) की कुल आवृत्ति बीस होती है : दस बार इकाई में और दस बार दहाई में । दूसरा कौशल है 3 से विभाज्यता की कसौटी : कोई संख्या 3 से विभाजित होती है यदि और केवल यदि उसके अंकों का योग 3 से विभाजित हो । यह कसौटी 9 के लिए भी उसी रूप में चलती है (अंकों का योग 9 से विभाज्य), और यही कारण है कि परीक्षा में 3 और 9 अक्सर साथ पूछे जाते हैं । तीसरी, और सबसे महत्त्वपूर्ण बात गणितीय नहीं, भाषिक है : ‘कितनी बार आएगा’ आवृत्ति पूछता है, ‘कितनी संख्याएँ हैं’ संख्याएँ पूछता है, और जिस संख्या में एक ही अंक दो बार आता है (यहाँ 33) वह इन दोनों गणनाओं को अलग कर देती है । जब भी परिसर में ऐसी दोहराव वाली संख्या मौजूद हो, पहले तय कीजिए कि गिनना क्या है ।
EPFO की सामान्य योग्यता परीक्षण वाली संख्यात्मक अभियोग्यता प्रायः लंबी गणना नहीं माँगती ; वह यह जाँचती है कि अभ्यर्थी प्रश्न को ठीक-ठीक पढ़ता है या नहीं । यहाँ चारों विकल्प — 11, 12, 13, 17 — एक-दूसरे के इतने पास रखे गए हैं कि अनुमान से काम नहीं चलता, और उनमें से तीन ठीक उन्हीं तीन विशिष्ट भूलों के परिणाम हैं जो इस गिनती में संभव हैं : इकाइयों का मेल न होना (11), 33 को एक बार गिनना (13), और गुणजों की अधूरी सूची (17) । ऐसे प्रश्न में सबसे सुरक्षित तरीक़ा यही है कि दोनों सूचियाँ काग़ज़ पर उतार ली जाएँ — पहले 3 वाली सभी संख्याएँ, फिर उनमें से 3 के गुणज — क्योंकि दो छोटी सूचियाँ लिखने में जितना समय लगता है, उतना ही समय एक ग़लत विकल्प पर दोबारा लौटने में लग जाता है । यह भी ध्यान रखिए कि आवृत्ति और संख्या का उत्तर यहाँ संयोगवश एक ही है ; इसे नियम मान लेना अगली बार महँगा पड़ेगा ।
मुख्य तथ्य
- 1 से 100 तक 1 से 9 तक का कोई भी अंक कुल बीस बार छपता है — दस बार इकाई के स्थान पर और दस बार दहाई के स्थान पर ; अंक 0 इसका अपवाद है ।
- 3 से विभाज्यता की कसौटी : किसी संख्या के अंकों का योग यदि 3 से विभाजित हो, तो वह संख्या भी 3 से विभाजित होती है — 93 का अंक-योग 12 है, इसलिए 93 भी 3 से विभाज्य है ।
- 1 और 100 के बीच अंक 3 रखने वाली संख्याएँ उन्नीस हैं, किन्तु अंक 3 की आवृत्ति बीस है — यह अंतर अकेली संख्या 33 पैदा करती है, जिसमें 3 दो बार आता है ।
- इस परिसर में 3 वाली और 3 से विभाज्य संख्याएँ सात हैं — 3, 30, 33, 36, 39, 63 और 93 — जिनमें अंक 3 की कुल आवृत्ति आठ है ।
- उत्तर 20 – 8 = 12 है ; इसी प्रश्न को ‘कितनी संख्याएँ’ के रूप में पढ़ने पर 19 – 7 = 12 आता है, पर यह संयोग है और हर अंक के लिए सच नहीं होगा ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ‘कितनी बार आएगा’ को ‘कितनी संख्याएँ हैं’ पढ़ लेना । दोनों के उत्तर तभी अलग होंगे जब परिसर में कोई संख्या उसी अंक को दो बार रखती हो — यहाँ 33 ।
- 33 को हटाते समय एक ही आवृत्ति घटाना । वह अपने साथ दो 3 लाता है, इसलिए उसे बाहर करने पर दो आवृत्तियाँ जाती हैं ।
- 3 के गुणजों की सूची अधूरी छोड़ देना । 36, 39, 63 और 93 आँख से नहीं दिखते ; हर बार अंकों का योग लिखकर जाँचिए ।
यह पूरा परिवार तीन रूपों में लौटता है । पहला रूप शुद्ध आवृत्ति का है — ‘1 से 300 तक अंक 1 कितनी बार लिखा जाता है’ — जिसमें केवल स्थान-वार गिनती चाहिए । दूसरा रूप विभाज्यता की शर्त जोड़ देता है, जैसा यहाँ है, और तब उत्तर दो सूचियों के अंतर से निकलता है । तीसरा रूप शर्त को उलट देता है — ‘वे संख्याएँ जिनमें 3 आता है और जो 3 से विभाज्य भी हैं’ — जहाँ अंतर के बजाय छँटी हुई सूची ही उत्तर है । तीनों में विकल्प जान-बूझकर एक-दूसरे से एक या दो की दूरी पर रखे जाते हैं, ताकि अनुमान काम न करे । तैयारी का सबसे कारगर तरीक़ा यह है कि परिसर छोटा हो तो सूची लिख ही ली जाए, और परिसर बड़ा हो (1 से 1000) तो स्थान-वार सूत्र का प्रयोग किया जाए ।
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EPFO_APFC_2016_Q98In writing all the integers from 1 to 300, how many times is the digit 1 used ?
- (a) 160
- (b) 140
- (c) 120
- (d) 110
उत्तर(a) 160
यही अंक-गणना बड़े परिसर पर — 1 से 300 तक अंक 1 कितनी बार लिखा जाता है । वहाँ विभाज्यता की शर्त नहीं है, इसलिए केवल स्थान-वार गिनती चाहिए और उत्तर 160 है ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
1 से 100 तक की सभी संख्याओं को लिखने में अंक 7 कुल कितनी बार लिखा जाएगा ? (दोनों छोर सम्मिलित हैं)
- (a)10
- (b)19
- (c)20
- (d)21
उत्तर(c) 20 — इकाई के स्थान पर 7, 17, 27, 37, 47, 57, 67, 77, 87, 97 में दस बार और दहाई के स्थान पर 70 से 79 तक दस बार ; 77 में वह दोनों स्थानों पर आता है इसलिए दोनों गिनतियों में शामिल है । 100 में कोई 7 नहीं है ।
- practice — not a real PYQ
1 और 100 के बीच ऐसी कितनी संख्याएँ हैं जिनमें अंक 5 आता है, किन्तु जो 5 से विभाजित नहीं होतीं ?
- (a)8
- (b)9
- (c)10
- (d)11
उत्तर(a) 8 — अंक 5 वाली संख्याएँ उन्नीस हैं (5, 15, 25, 35, 45, 50 से 59, 65, 75, 85, 95) ; इनमें 5 से विभाज्य ग्यारह हैं (पाँच पर समाप्त होने वाली दस, और 50) ; शेष आठ बचती हैं — 51, 52, 53, 54, 56, 57, 58, 59 ।