‘दि लिटॅल बुक ऑफ एन्कॅरिजमेंट’ पुस्तक के लेखक निम्नलिखित में से कौन हैं ?
- (a)दलाई लामा
- (b)ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
- (c)रवि शंकर
- (d)जगदीश वासुदेव
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) दलाई लामा । ‘दि लिटॅल बुक ऑफ एन्कॅरिजमेंट’ — अंग्रेज़ी में The Little Book of Encouragement — परम पावन दलाई लामा की पुस्तक है । इसे रेणुका सिंह ने संकलित और संपादित किया है, यह वाइकिंग छाप के अंतर्गत पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से जनवरी 2021 में प्रकाशित हुई, और यह एक सौ साठ पृष्ठों का सजिल्द संकलन है । पुस्तक की सामग्री उसके शीर्षक से मेल खाती है : यह दलाई लामा के उन कथनों का चयन है जो महामारी से जूझती दुनिया को ढाढ़स देने के उद्देश्य से एक जगह लाए गए । प्रकाशन का समय भी इसी कारण महत्वपूर्ण है और वही इस प्रश्न को हल करने की सबसे तेज़ कुंजी देता है । यह पुस्तक 2021 की है, अर्थात् वर्तमान में सक्रिय किसी लेखक की ही हो सकती है — और यही कसौटी विकल्प (b) को तत्काल बाहर कर देती है, क्योंकि ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को हो चुका था । इस प्रश्न में एक कठिनाई सामग्री की नहीं, पढ़ने की भी है, और उसे पहचान लेना उपयोगी है । हिन्दी स्तंभ में पुस्तक का शीर्षक अनूदित नहीं किया गया, लिप्यंतरित किया गया है — अर्थात् अंग्रेज़ी शब्दों को देवनागरी में लिखा गया है, और वह भी तिरछे टाइप में एकल उद्धरण-चिह्नों के भीतर, ताकि पाठक समझे कि यह किसी कृति का नाम है । लिप्यंतरण में स्वर-चिह्न ॅ का प्रयोग हुआ है, जो हिन्दी में कम दिखता है, इसलिए पहली नज़र में शीर्षक अपरिचित लग सकता है । ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले शीर्षक को मन ही मन अंग्रेज़ी में लौटाइए ; नाम पहचानते ही शेष प्रश्न सामान्य हो जाता है । यही तरीक़ा इस प्रश्नपत्र के उन प्रश्नों में भी काम आता है जहाँ चित्रकला, संस्था या व्यक्ति के नाम देवनागरी में लिप्यंतरित किए गए हैं ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)ए.पी.जे. अब्दुल कलाम — ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की लेखनी से कई प्रसिद्ध पुस्तकें आईं — विंग्स ऑफ फ़ायर, इग्नाइटेड माइंड्स, इंडिया 2020 — और यही परिचय इस विकल्प को आकर्षक बनाता है, क्योंकि प्रेरणा और प्रोत्साहन उनके लेखन का स्थायी विषय रहा है । किंतु यहाँ एक निर्णायक तथ्य है जो विषय-वस्तु से नहीं, तिथि से आता है : उनका निधन 27 जुलाई 2015 को हो गया था, जबकि यह पुस्तक जनवरी 2021 में प्रकाशित हुई । समसामयिकी के प्रश्नों में यह कसौटी बार-बार काम आती है — पहले यह देखिए कि घटना या प्रकाशन किस वर्ष का है, फिर विकल्पों में से उन नामों को हटाइए जो उस समय सक्रिय नहीं थे । इससे चार विकल्पों में से एक-दो प्राय: तुरंत छँट जाते हैं, और शेष पर सोचने के लिए समय बच जाता है ।
- (c)रवि शंकर — यह विकल्प इस प्रश्न का सबसे रोचक विकल्प है, क्योंकि जो नाम छपा है वह अपने आप में दो प्रसिद्ध व्यक्तियों की ओर संकेत करता है — सितारवादक पंडित रवि शंकर, और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर । आयोग ने कोई उपाधि या विशेषण नहीं जोड़ा, इसलिए अभ्यर्थी को स्वयं तय करना पड़ता है कि किसकी बात हो रही है । इससे कोई अंतर नहीं पड़ता, क्योंकि यह पुस्तक इनमें से किसी की नहीं है । पर पढ़ने की दृष्टि से यह एक अच्छा अभ्यास है : जब विकल्प में कोई ऐसा नाम आए जो एक से अधिक व्यक्तियों का हो सकता है, तो घबराइए नहीं — प्रश्न का उत्तर प्राय: उस अस्पष्टता पर नहीं टिकता । उत्तर तक पहुँचने का रास्ता कृति की पहचान से जाता है, नाम की व्याख्या से नहीं ।
- (d)जगदीश वासुदेव — जगदीश वासुदेव वही नाम है जिसे लोग सद्गुरु के रूप में जानते हैं ; उन्होंने 1992 में ईशा फ़ाउंडेशन की स्थापना की थी और उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तकें इनर इंजीनियरिंग तथा कर्मा हैं । इस विकल्प की चाल यह है कि आयोग ने प्रचलित उपाधि के स्थान पर जन्म-नाम छाप दिया है, इसलिए बहुत से अभ्यर्थी इसे पहचान ही नहीं पाते और अनुमान से आगे बढ़ जाते हैं । समसामयिकी में यह सामान्य युक्ति है — व्यक्ति को उस नाम से प्रस्तुत करना जिससे वह समाचारों में नहीं आता । इसका उपाय यह है कि प्रसिद्ध व्यक्तियों के मूल नाम भी याद रखे जाएँ । यहाँ पहचान लेने पर भी उत्तर नहीं बदलता, क्योंकि प्रश्न में जिस पुस्तक का नाम है वह उनकी नहीं है ।
अवधारणा
द लिटिल बुक ऑफ़ एनकरेजमेंट परम पावन दलाई लामा के कथनों का संकलन है, जिसे रेणुका सिंह ने संपादित किया और जो वाइकिंग छाप के अंतर्गत पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से जनवरी 2021 में प्रकाशित हुआ । यह एक सौ साठ पृष्ठों का सजिल्द संस्करण है और उसकी सामग्री उस समय की परिस्थिति से जुड़ी है — महामारी से जूझती दुनिया के लिए ढाढ़स और प्रोत्साहन के शब्द । पुस्तक और लेखक से जुड़े प्रश्न परीक्षा में जिस रूप में आते हैं, उसे समझ लेना उपयोगी है । आयोग प्राय: उन पुस्तकों को चुनता है जो प्रश्नपत्र से एक या दो वर्ष पहले चर्चा में रही हों, और विकल्पों में ऐसे नाम रखता है जो उसी क्षेत्र के हों — यहाँ चारों नाम भारतीय सार्वजनिक जीवन के ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनसे आध्यात्मिक अथवा प्रेरणादायी लेखन जुड़ा है । इसलिए विकल्पों को केवल क्षेत्र के आधार पर नहीं छाँटा जा सकता ; कृति और लेखक का सीधा जोड़ा याद होना चाहिए । दलाई लामा से जुड़े प्रश्नों के लिए यह भी जान लेना उपयोगी है कि वे तिब्बती बौद्ध परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं, 1959 से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं, और उन्हें 1989 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था — ये तीनों तथ्य प्राय: उनके नाम के साथ पूछे जाते हैं ।
समसामयिकी के खंड में पुस्तक और लेखक वाले प्रश्न लगभग हर वर्ष आते हैं, और उनकी तैयारी का तरीक़ा बाक़ी समसामयिकी से भिन्न है । यहाँ न कोई तर्क काम आता है और न अनुमान ; केवल जोड़ी याद रखनी होती है । इसलिए तैयारी करते समय एक सूची बनाइए जिसमें पिछले दो वर्षों की चर्चित पुस्तकें, उनके लेखक और प्रकाशन वर्ष तीनों हों — प्रकाशन वर्ष इसलिए कि वही उन विकल्पों को हटाने में काम आता है जो उस समय जीवित या सक्रिय नहीं थे । इस प्रश्न में वही कसौटी एक विकल्प को तुरंत बाहर कर देती है । एक और बात इस प्रश्नपत्र की भाषा से जुड़ी है । हिन्दी स्तंभ में विदेशी नाम और शीर्षक अनूदित नहीं, लिप्यंतरित किए जाते हैं, इसलिए अभ्यर्थी को पहले देवनागरी अक्षरों से अंग्रेज़ी नाम वापस बनाना पड़ता है । यह अभ्यास इस पेपर के कई प्रश्नों में काम आता है — इसी खंड के अगले प्रश्नों में एक चित्रकला का नाम और चार चित्रकारों के नाम भी इसी तरह देवनागरी में लिप्यंतरित हैं । पढ़ते समय शीर्षक को मन में अंग्रेज़ी में लौटाने की आदत डाल लीजिए ।
मुख्य तथ्य
- ‘द लिटिल बुक ऑफ़ एनकरेजमेंट’ के लेखक परम पावन दलाई लामा हैं ; पुस्तक का संकलन और संपादन रेणुका सिंह ने किया ।
- पुस्तक वाइकिंग छाप के अंतर्गत पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से जनवरी 2021 में प्रकाशित हुई और एक सौ साठ पृष्ठों का सजिल्द संस्करण है ।
- यह दलाई लामा के उन कथनों का चयन है जो महामारी से जूझती दुनिया को ढाढ़स और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एक साथ लाए गए ।
- दलाई लामा तिब्बती बौद्ध परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं, 1959 से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और उन्हें 1989 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला ।
- ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को हुआ था, इसलिए 2021 में प्रकाशित किसी पुस्तक के लेखक वे नहीं हो सकते ।
- विकल्प में छपा रवि शंकर नाम दो प्रसिद्ध व्यक्तियों की ओर संकेत कर सकता है — सितारवादक पंडित रवि शंकर, और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर ।
- जगदीश वासुदेव सद्गुरु का जन्म-नाम है ; उन्होंने 1992 में ईशा फ़ाउंडेशन की स्थापना की और उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें इनर इंजीनियरिंग तथा कर्मा हैं ।
- हिन्दी स्तंभ में पुस्तक का शीर्षक अनूदित नहीं, देवनागरी में लिप्यंतरित किया गया है और तिरछे टाइप में एकल उद्धरण-चिह्नों के भीतर छपा है ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रकाशन वर्ष की उपेक्षा करना । 2021 की पुस्तक का लेखक वही हो सकता है जो उस समय सक्रिय था, और यही कसौटी एक विकल्प तुरंत हटा देती है ।
- विषय से लेखक अनुमान लगाना । प्रोत्साहन और प्रेरणा पर कई लेखक लिखते हैं ; कृति और लेखक की जोड़ी अलग से याद रखनी होती है ।
- प्रचलित उपाधि से पहचानने की आदत । आयोग प्राय: जन्म-नाम छापता है, जैसे यहाँ जगदीश वासुदेव ।
- एक से अधिक व्यक्तियों के साझे नाम पर अटक जाना । उत्तर प्राय: उस अस्पष्टता पर नहीं, कृति की पहचान पर टिकता है ।
- देवनागरी में लिप्यंतरित शीर्षक को अनुवाद समझ लेना । शीर्षक को मन में अंग्रेज़ी में लौटाइए, तभी वह पहचान में आता है ।
पुस्तक और लेखक वाले प्रश्न आयोग के लिए सबसे सस्ते प्रश्न हैं — उन्हें बनाने में न कोई गणना लगती है और न कोई तर्क, और वे यह जाँच लेते हैं कि अभ्यर्थी पिछले एक-दो वर्ष की चर्चा से जुड़ा रहा या नहीं । इसी कारण उनके विकल्प भी एक ही क्षेत्र से चुने जाते हैं, ताकि क्षेत्र के आधार पर छँटाई न हो सके । यहाँ चारों नाम भारतीय सार्वजनिक जीवन के ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनसे प्रेरणादायी अथवा आध्यात्मिक लेखन जुड़ा है, इसलिए अनुमान का कोई आधार नहीं बनता । ऐसे प्रश्नों में दो युक्तियाँ काम आती हैं । पहली, प्रकाशन का वर्ष याद रखिए और उससे उन नामों को हटाइए जो उस समय सक्रिय नहीं थे — इस प्रश्न में यही एक विकल्प को तुरंत बाहर कर देता है । दूसरी, हर चर्चित पुस्तक के साथ उसका संपादक या प्रकाशक भी याद रखिए, क्योंकि आयोग कभी-कभी लेखक के बजाय संपादक या प्रकाशक पूछ लेता है । और इस प्रश्नपत्र की भाषा से जुड़ी तीसरी बात यह है कि शीर्षक देवनागरी में लिप्यंतरित मिलेगा, इसलिए पढ़ते ही उसे अंग्रेज़ी में लौटाइए ।
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