भारत सरकार ने प्रति वर्ष किस दिन को “पराक्रम दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की है ?
- (a)23 जनवरी
- (b)14 अप्रैल
- (c)28 मई
- (d)25 दिसंबर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) 23 जनवरी । भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती, अर्थात् 23 जनवरी, को प्रति वर्ष पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की । घोषणा 19 जनवरी 2021 को हुई और उस नाम से पहला आयोजन 23 जनवरी 2021 को हुआ, जो नेताजी की एक सौ चौबीसवीं जयंती थी । सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था, इसलिए तिथि उनके जन्मदिन से आई है, किसी घटना से नहीं — और यही इस प्रश्न को हल करने का सबसे सीधा रास्ता है । जिस अभ्यर्थी को नेताजी की जन्मतिथि याद है, उसे पराक्रम दिवस अलग से याद रखने की आवश्यकता नहीं । नाम पर भी ध्यान देने योग्य है, क्योंकि उसके पीछे एक छोटा-सा विवाद था । नेताजी के परिवार और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की ओर से इस दिन को देशप्रेम दिवस कहने का सुझाव आया था, और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने देशनायक दिवस नाम प्रस्तावित किया था ; सरकार ने पराक्रम दिवस चुना । यह भी जान लीजिए कि 23 जनवरी पहले से ही कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश रहा है — पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, असम और ओडिशा में — इसलिए घोषणा ने अवकाश नहीं बनाया, उस दिन को एक राष्ट्रीय नाम और एक राष्ट्रीय आयोजन दिया । छपाई की एक बात भी ध्यान देने योग्य है : पुस्तिका में पराक्रम दिवस युग्म उद्धरण-चिह्नों के भीतर छपा है, जो संकेत करता है कि यह किसी दिन को दिया गया औपचारिक नाम है, कोई सामान्य वर्णन नहीं । ऐसे चिह्न प्रश्न पढ़ते समय उपयोगी होते हैं, क्योंकि वे बता देते हैं कि उत्तर किसी घोषित नामकरण से जुड़ा है । अंत में यह भी जोड़ लीजिए कि इस दिवस को किस पृष्ठभूमि के साथ पढ़ा जाना चाहिए । सुभाष चंद्र बोस 1938 के हरिपुरा और 1939 के त्रिपुरी अधिवेशनों में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, 1939 में उन्होंने अखिल भारतीय फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की, और 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आज़ाद हिंद की अस्थायी सरकार की घोषणा की । इन तथ्यों को दिवस के साथ जोड़कर याद कीजिए, क्योंकि आयोग समसामयिकी में तिथि पूछता है और इतिहास के खंड में यही जीवन-वृत्त ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)14 अप्रैल — 14 अप्रैल डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है — उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था — और वह दिन देश भर में आंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है । यह विकल्प इसलिए आकर्षक है कि वह भी एक राष्ट्रीय व्यक्तित्व की जयंती है और उसका अपना घोषित नाम भी है, इसलिए अभ्यर्थी को लगता है कि किसी को कोई विशेष नाम दिया गया होगा तो शायद यही हो । यहाँ भेद करने का तरीक़ा वही है जो पूरे इस उपखंड में काम आता है : महत्वपूर्ण दिवसों को उनके व्यक्ति के साथ जोड़कर याद कीजिए, न कि केवल तिथि के साथ । जिस दिन का नाम किसी व्यक्ति की जयंती से बना है, वहाँ पहले उस व्यक्ति की जन्मतिथि याद कीजिए ; तिथि अपने आप निकल आती है और कोई दूसरा दिवस उसकी जगह नहीं ले पाता ।
- (c)28 मई — 28 मई विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है ; उनका जन्म 28 मई 1883 को हुआ था । यह विकल्प उसी तर्क पर बनाया गया है जिस पर पिछला — एक और राष्ट्रीय व्यक्तित्व की जयंती, जिससे भ्रम बना रहे । ध्यान रखिए कि सरकार द्वारा घोषित नामों वाले दिवसों की सूची छोटी है और उसे एक बार बनाकर याद कर लेना पर्याप्त होता है । इस उपखंड की तैयारी में सबसे उपयोगी बात यह है कि प्रत्येक ऐसे दिवस के साथ तीन बातें लिखी जाएँ — तिथि, जिस व्यक्ति या घटना से वह जुड़ा है, और घोषणा का वर्ष । तीनों साथ याद रहने पर विकल्पों में रखी गई दूसरी जयंतियाँ भ्रम नहीं पैदा कर पातीं, क्योंकि उनका अपना कोई नाम इस प्रश्न से नहीं जुड़ता ।
- (d)25 दिसंबर — 25 दिसंबर वह तिथि है जिसे भारत सरकार 2014 से सुशासन दिवस के रूप में मनाती है ; वह अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है, जिनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था । इसी तिथि को महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती भी पड़ती है, जिनका जन्म 25 दिसंबर 1861 को हुआ था । यही इस विकल्प को चारों में सबसे कठिन बनाता है, क्योंकि यह उन गिनी-चुनी तिथियों में है जिसे सरकार ने सचमुच एक विशेष नाम दिया है — बस नाम दूसरा है । इसलिए यहाँ अभ्यर्थी को केवल यह याद नहीं रखना कि किस तिथि को कोई नाम मिला है, बल्कि यह भी कि कौन-सा नाम किस तिथि को मिला है । दो घोषित दिवसों के बीच अदला-बदली इस प्रकार के प्रश्नों की सबसे आम चूक है ।
अवधारणा
पराक्रम दिवस नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को दिया गया औपचारिक नाम है । घोषणा भारत सरकार ने 19 जनवरी 2021 को की और उस नाम से पहला आयोजन 23 जनवरी 2021 को हुआ, जो उनकी एक सौ चौबीसवीं जयंती थी । सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ । वे 1938 के हरिपुरा और 1939 के त्रिपुरी अधिवेशनों में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, 1939 में उन्होंने अखिल भारतीय फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की, और द्वितीय विश्वयुद्ध के वर्षों में आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व करते हुए 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आज़ाद हिंद की अस्थायी सरकार की घोषणा की । नाम को लेकर उस समय कुछ अन्य सुझाव भी आए थे — नेताजी के परिवार तथा फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की ओर से देशप्रेम दिवस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की ओर से देशनायक दिवस — किंतु सरकार ने पराक्रम दिवस नाम चुना । यह भी ध्यान रखिए कि 23 जनवरी पहले से ही पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, असम और ओडिशा में सार्वजनिक अवकाश रहा है, इसलिए 2021 की घोषणा ने अवकाश नहीं बनाया ; उसने उस दिन को एक राष्ट्रीय नाम और एक राष्ट्रीय आयोजन दिया, जिसका उद्देश्य नेताजी के जीवन से युवाओं को प्रेरणा देना बताया गया ।
सरकार द्वारा घोषित दिवस समसामयिकी के सबसे भरोसेमंद प्रश्न-स्रोतों में हैं, क्योंकि उनकी तिथि, नाम और घोषणा का वर्ष तीनों निश्चित होते हैं और उन पर कोई मतभेद नहीं होता । इसी कारण आयोग उन्हें बार-बार उठाता है । उनकी तैयारी का सबसे कारगर तरीक़ा एक तालिका बनाना है जिसमें तीन स्तंभ हों — तिथि, दिवस का नाम, और वह व्यक्ति या घटना जिससे वह जुड़ा है । ऐसी तालिका बन जाने पर इस प्रकार के प्रश्न कुछ सेकंड में हल हो जाते हैं, क्योंकि विकल्पों में रखी गई शेष तिथियाँ प्राय: दूसरी जयंतियाँ होती हैं और वे तालिका में अपने-अपने स्थान पर पहले से बैठी होती हैं । इस प्रश्न में यही हुआ है : चारों तिथियाँ किसी न किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की जयंती हैं, और उनमें से दो को सरकार ने विशेष नाम भी दिया है । दूसरी उपयोगी आदत यह है कि जो दिवस किसी व्यक्ति की जयंती से बना है, उसे व्यक्ति की जन्मतिथि के रूप में याद कीजिए, दिवस की तिथि के रूप में नहीं — तब एक ही तथ्य दो प्रश्नों के काम आता है ।
मुख्य तथ्य
- पराक्रम दिवस की घोषणा 19 जनवरी 2021 को हुई और उस नाम से पहला आयोजन 23 जनवरी 2021 को, जो नेताजी की एक सौ चौबीसवीं जयंती थी ।
- भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को प्रति वर्ष पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि उनके जीवन से युवा प्रेरणा लें ।
- सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था ; पराक्रम दिवस की तिथि उनकी जन्मतिथि से ही आई है, किसी घटना से नहीं ।
- नाम के लिए अन्य सुझाव भी आए थे — नेताजी के परिवार तथा फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की ओर से देशप्रेम दिवस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की ओर से देशनायक दिवस ।
- 14 अप्रैल डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है — जन्म 14 अप्रैल 1891 — और 28 मई विनायक दामोदर सावरकर की, जिनका जन्म 28 मई 1883 को हुआ था ।
- सुभाष चंद्र बोस 1938 के हरिपुरा और 1939 के त्रिपुरी अधिवेशनों में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे, और बाद में उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया ।
- उन्होंने 1939 में अखिल भारतीय फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की और 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आज़ाद हिंद की अस्थायी सरकार की घोषणा की ।
- 25 दिसंबर को भारत सरकार 2014 से सुशासन दिवस के रूप में मनाती है ; वह अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है, और उसी दिन मदन मोहन मालवीय की भी ।
- 23 जनवरी पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा, असम और ओडिशा में पहले से ही सार्वजनिक अवकाश रहा है ; 2021 की घोषणा ने अवकाश नहीं, राष्ट्रीय नाम दिया ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दिवस को तिथि के रूप में याद करना । जो दिवस किसी जयंती से बना है, उसे व्यक्ति की जन्मतिथि के रूप में याद कीजिए ; तब वह भूलता नहीं ।
- दो घोषित दिवसों के नाम आपस में बदल देना । 23 जनवरी पराक्रम दिवस है और 25 दिसंबर सुशासन दिवस — दोनों सरकार द्वारा दिए गए नाम हैं ।
- यह मान लेना कि घोषणा ने उस दिन अवकाश बनाया । 23 जनवरी कई राज्यों में पहले से अवकाश था ; घोषणा ने नाम और आयोजन दिया ।
- प्रस्तावित नामों को घोषित नाम समझ लेना । देशप्रेम दिवस और देशनायक दिवस सुझाव थे, सरकार का चुना हुआ नाम पराक्रम दिवस है ।
- घोषणा की तिथि और पहले आयोजन की तिथि गड्डमड्ड कर देना । घोषणा 19 जनवरी 2021 को हुई, आयोजन 23 जनवरी 2021 को ।
महत्वपूर्ण दिवसों वाले प्रश्न इस प्रश्नपत्र के समसामयिकी खंड में लगातार आते हैं, और उनका ढाँचा लगभग तय है — स्टेम में दिवस का नाम और विकल्पों में चार तिथियाँ, जो प्राय: किसी न किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की जयंती होती हैं । इसलिए विकल्पों को देखकर छाँटने का कोई तरीक़ा नहीं बनता ; उत्तर सीधे स्मृति से आता है । स्मृति को सुरक्षित बनाने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि दिवस को उसकी जड़ से जोड़कर याद किया जाए । पराक्रम दिवस की जड़ नेताजी की जन्मतिथि है, सुशासन दिवस की जड़ अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि है, और यही जड़ें विकल्पों में शेष तिथियों को भी अपने-अपने खाने में बैठा देती हैं । दूसरी बात इस प्रश्न की छपाई से जुड़ी है : पुस्तिका ने दिवस के नाम को युग्म उद्धरण-चिह्नों में रखा है, जो संकेत देता है कि यह कोई औपचारिक नामकरण है । प्रश्नपत्र में ऐसे चिह्न व्यर्थ नहीं होते — वे बताते हैं कि उत्तर किसी घोषित नाम, कृति या पदनाम से जुड़ा है, और यही पढ़ने की दिशा तय कर देता है ।
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अभ्यास
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