कलादान मल्टी-मॉडल पारगमन परिवहन परियोजना निम्नलिखित में से किस देश को भारत के साथ जोड़ेगी ?
- (a)नेपाल
- (b)म्याँमार
- (c)भूटान
- (d)अफ़ग़ानिस्तान
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) म्याँमार । कलादान बहुद्देशीय पारगमन परिवहन परियोजना भारत और म्याँमार के बीच की परियोजना है, जिस पर दोनों देशों ने ढाँचागत समझौता 2008 में किया था । नाम में जो कलादान है वह म्याँमार से बहने वाली उसी नाम की नदी है, और बहुद्देशीय शब्द इसलिए है कि इस मार्ग में तीन प्रकार के परिवहन जुड़ते हैं — समुद्री, नदी-मार्गीय और सड़क । मार्ग इस प्रकार बनता है । पहला चरण समुद्री है : कोलकाता से जहाज़ म्याँमार के रखाइन प्रदेश में स्थित सित्तवे बंदरगाह तक जाते हैं । दूसरा चरण नदी का है : सित्तवे से कलादान नदी के रास्ते माल पलेटवा तक जाता है । तीसरा चरण सड़क का है : पलेटवा से सड़क मार्ग मिज़ोरम की सीमा तक आता है और वहाँ से भारत के राजमार्गों से जुड़ जाता है । परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत तक पहुँचने का एक वैकल्पिक मार्ग देना है । अभी वहाँ से आने-जाने का सारा भार उस सँकरी पट्टी पर है जिसे सिलीगुड़ी गलियारा कहा जाता है ; उससे दूरी बहुत बढ़ जाती है और किसी भी व्यवधान का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है । समुद्र के रास्ते सित्तवे होते हुए मिज़ोरम तक पहुँचने से यह निर्भरता घटती है । यह परियोजना भारत की उस नीति का भी अंग है जिसके अंतर्गत पूर्व के देशों से संपर्क और आर्थिक संबंध बढ़ाने पर बल दिया जाता है, और उसका वित्तपोषण भारत सरकार करती है । सित्तवे बंदरगाह का विकास पूरा हो चुका है और वहाँ जहाज़ों का आवागमन आरंभ हो चुका है, जबकि आगे के सड़क खंड का काम कठिन भूभाग के कारण अपेक्षाकृत धीमा रहा है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नेपाल — नेपाल भारत का निकट पड़ोसी अवश्य है, पर कलादान परियोजना से उसका कोई संबंध नहीं । नेपाल स्थलरुद्ध देश है और उसकी बड़ी आवश्यकता समुद्र तक पहुँच की है, जो भारत से होकर ही बनती है ; इसी कारण दोनों देशों के बीच पारगमन और व्यापार से जुड़े अलग समझौते हैं और कोलकाता तथा हल्दिया के बंदरगाह उसके लिए महत्वपूर्ण हैं । पर वह व्यवस्था स्थल-मार्ग और बंदरगाह की सुविधा की है, किसी बहुद्देशीय नदी-सड़क परियोजना की नहीं । कलादान नदी म्याँमार में बहती है और परियोजना का पूरा भूगोल उसी देश में है । ऐसे प्रश्नों में परियोजना के नाम में छिपे भौगोलिक संकेत को पकड़िए — यहाँ नदी का नाम स्वयं देश की ओर संकेत करता है ।
- (c)भूटान — भूटान भी स्थलरुद्ध पड़ोसी है और भारत से उसका संपर्क सीधे सड़क मार्ग से बनता है ; पश्चिम बंगाल और असम की ओर से उसकी सीमा लगती है और व्यापार तथा पारगमन की व्यवस्था भी उसी मार्ग से चलती है । दोनों देशों के बीच जल-विद्युत परियोजनाओं का सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा है । पर कलादान परियोजना का उससे कोई संबंध नहीं । यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि सूची में तीन पड़ोसी देश हों और चुनाव केवल पड़ोस के आधार पर न हो सके । संपर्क परियोजनाओं की तैयारी करते समय हर परियोजना के सामने दो देश और उसका मार्ग लिख लीजिए ; प्रश्न लगभग सदा यही जोड़ा पूछते हैं ।
- (d)अफ़ग़ानिस्तान — अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँच के लिए भारत की जो परियोजना चर्चित है वह दूसरी है । वहाँ भूगोल की कठिनाई यह है कि बीच में पाकिस्तान पड़ता है और स्थल-मार्ग से पारगमन उपलब्ध नहीं ; इसलिए भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में भाग लिया, जिससे समुद्र के रास्ते होकर अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँचा जा सके, और अफ़ग़ानिस्तान के भीतर ज़रंज से देलाराम तक की सड़क बनाने में भी सहयोग किया । अर्थात् विचार वही है जो कलादान का है — जहाँ स्थल-मार्ग बाधित हो वहाँ समुद्र और नदी के रास्ते वैकल्पिक संपर्क बनाना — पर परियोजना, देश और मार्ग तीनों अलग हैं । इन दोनों को साथ पढ़ लेना उपयोगी है, क्योंकि परीक्षा प्रायः इन्हीं दोनों को आपस में बदलकर पूछती है ।
अवधारणा
कलादान बहुद्देशीय पारगमन परिवहन परियोजना भारत और म्याँमार के बीच की संपर्क परियोजना है, जिसका ढाँचागत समझौता 2008 में हुआ । उसका मार्ग तीन खंडों में बँटा है — कोलकाता से म्याँमार के सित्तवे बंदरगाह तक समुद्री खंड, सित्तवे से पलेटवा तक कलादान नदी का जलमार्ग, और पलेटवा से मिज़ोरम की सीमा तक सड़क खंड, जहाँ से वह भारत के राजमार्गों से जुड़ता है । इसका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने का वैकल्पिक मार्ग देना है, क्योंकि इस समय वह संपर्क सिलीगुड़ी गलियारे नामक सँकरी पट्टी पर निर्भर है । इसके साथ ही यह परियोजना भारत की उस विदेश नीति का भी अंग है जिसमें पूर्व के देशों से संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने पर बल है । म्याँमार से भारत की सीमा चार राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम — से लगती है, और दोनों देशों के बीच सड़क संपर्क की एक और बड़ी परियोजना भारत, म्याँमार तथा थाईलैंड को जोड़ने वाला त्रिपक्षीय राजमार्ग है । इसका वित्तपोषण भारत सरकार करती है, और कठिन भूभाग तथा क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण इसके कुछ खंडों में विलंब भी हुआ है ।
इस परियोजना को समझने का सबसे सरल ढंग यह है कि उसे भूगोल की एक समस्या का समाधान मानकर देखा जाए । पूर्वोत्तर के आठ राज्य भारत के शेष भाग से एक बहुत सँकरी पट्टी द्वारा जुड़े हैं, जबकि उनकी सीमाएँ कई देशों से लगती हैं । इससे दूरी, लागत और समय तीनों बढ़ जाते हैं । कलादान परियोजना उसी समस्या का उत्तर है : यदि माल समुद्र से सित्तवे तक और वहाँ से नदी तथा सड़क द्वारा मिज़ोरम तक पहुँच जाए तो कोलकाता से पूर्वोत्तर की दूरी बहुत घट जाती है । यही सोच भारत की अन्य संपर्क परियोजनाओं में भी दिखती है, चाहे वह अफ़ग़ानिस्तान के लिए चाबहार का मार्ग हो या ब्रह्मपुत्र पर बने पुल । परीक्षा में ऐसे प्रश्न प्रायः यही पूछते हैं कि कौन-सी परियोजना किन दो देशों या किन दो क्षेत्रों को जोड़ती है, इसलिए हर परियोजना के साथ उसका मार्ग याद रखिए ।
मुख्य तथ्य
- कलादान बहुद्देशीय पारगमन परिवहन परियोजना भारत और म्याँमार के बीच की परियोजना है, जिसका ढाँचागत समझौता 2008 में हुआ ।
- मार्ग के तीन खंड हैं — कोलकाता से सित्तवे तक समुद्री, सित्तवे से पलेटवा तक कलादान नदी का जलमार्ग, और पलेटवा से मिज़ोरम तक सड़क ।
- सित्तवे बंदरगाह म्याँमार के रखाइन प्रदेश में है और कलादान नदी उसी देश से होकर बहती है ।
- परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने का वैकल्पिक मार्ग देना है, जिससे सिलीगुड़ी गलियारे पर निर्भरता घटे ।
- परियोजना का वित्तपोषण भारत सरकार करती है और यह पूर्व के देशों से संपर्क बढ़ाने की नीति का अंग है ।
- म्याँमार से भारत की सीमा चार राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम — से लगती है ।
- भारत, म्याँमार और थाईलैंड को जोड़ने वाला त्रिपक्षीय राजमार्ग इसी क्षेत्र की दूसरी बड़ी सड़क परियोजना है ।
- अफ़ग़ानिस्तान तक वैकल्पिक पहुँच के लिए भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में भाग लिया और वहाँ ज़रंज से देलाराम तक सड़क बनाने में सहयोग किया ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- परियोजना का नाम याद रखना पर उसका मार्ग भूल जाना ; प्रश्न प्रायः यही पूछते हैं कि वह किन दो देशों को जोड़ती है ।
- कलादान और चाबहार को आपस में बदल देना । पहली म्याँमार से जुड़ी है और दूसरी ईरान तथा अफ़ग़ानिस्तान से ।
- स्थलरुद्ध पड़ोसियों को समुद्री परियोजनाओं से जोड़ देना ; नेपाल और भूटान से संपर्क स्थल-मार्ग का है ।
- बहुद्देशीय शब्द का अर्थ न समझना ; उसका आशय यही है कि मार्ग में समुद्र, नदी और सड़क तीनों जुड़ते हैं ।
- परियोजना के नाम में छिपे भौगोलिक संकेत की उपेक्षा करना ; कलादान स्वयं म्याँमार की नदी का नाम है ।
समसामयिकी और भूगोल के मिलन-बिंदु पर बनने वाले प्रश्नों में संपर्क परियोजनाएँ सबसे अधिक आती हैं, और इस प्रश्नपत्र में वे दो बार आई हैं — एक बार ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित पुल के रूप में और एक बार इस परियोजना के रूप में । ऐसे प्रश्नों का उत्तर लगभग सदा एक ही सूचना से निकलता है : परियोजना किन दो स्थानों, राज्यों या देशों को जोड़ती है । इसलिए समाचार पढ़ते समय ब्योरे और लागत में मत उलझिए ; हर परियोजना के सामने केवल उसका मार्ग और उसका उद्देश्य लिख लीजिए । दूसरी बात, परियोजनाओं के नाम प्रायः किसी नदी, बंदरगाह या स्थान पर रखे जाते हैं, और वह नाम स्वयं भूगोल का संकेत होता है ; उसे पहचान लेने पर आधे विकल्प कट जाते हैं । तीसरी बात, एक ही उद्देश्य वाली दो परियोजनाओं को आमने-सामने रखकर पढ़िए — जैसे पूर्वोत्तर के लिए कलादान और पश्चिम की ओर चाबहार — क्योंकि परीक्षक प्रायः इन्हीं को आपस में बदलकर विकल्प बनाता है ।
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- (a) Arunachal Pradesh
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- (b) Ethiopia
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उत्तर(c) Nigeria
अंतरराष्ट्रीय संबंधों का प्रश्न — विश्व व्यापार संगठन की पहली महिला महानिदेशक ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कलादान बहुद्देशीय पारगमन परिवहन परियोजना का समुद्री खंड कोलकाता को म्याँमार के निम्नलिखित में से किस बंदरगाह से जोड़ता है ?
- (a)यांगून
- (b)सित्तवे
- (c)दावेई
- (d)क्याउकप्यू
उत्तर(b) सित्तवे — यह बंदरगाह म्याँमार के रखाइन प्रदेश में है और वहीं से कलादान नदी का जलमार्ग आगे बढ़ता है ।
- practice — not a real PYQ
अफ़ग़ानिस्तान तक वैकल्पिक पहुँच बनाने के लिए भारत ने निम्नलिखित में से किस बंदरगाह के विकास में भाग लिया है ?
- (a)ग्वादर
- (b)बंदर अब्बास
- (c)चाबहार
- (d)दुक़्म
उत्तर(c) चाबहार — ईरान का यह बंदरगाह पाकिस्तान से होकर जाए बिना अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँच का मार्ग देता है ।